15 Comments

  1. अपना एक स्थान बनाना है,
    और फिर इस रंगमंच से
    चले जाना है,
    यही है जीवन..
    और जीवन का रंगमंच…
    ——- बहुत सुन्दर, जीवन दर्शन से जुड़ी और सच्ची बात कहती बहुत सुंदर कविता। लेखनी को सैल्यूट।

  2. अपनी किरदार निभाने ही पड़ेंगे
    जो लिखा हैं वो होना ही हैं
    सब मौन ना हो सकते जहां में
    कुछ कोलाहल भी जरूरी है
    ++++++++++++++++++++
    बुरा नहीं हैं कोई जहां में
    सब हरि- खिलौना हैं
    सबका अपना अपना पाठ हैं
    सबको वहीं निभाना हैं

Leave a Reply