यादों की मरहम भी क्या मरहम है।
बेरहम भी मरहम पर जीने लगे है।।
काश.. यह मरहम मर्ज़ नहीं होते।
हम और आप आज कैसे जी पाते।।
मरहम
Comments
5 responses to “मरहम”
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वाह वाह
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धन्यवाद पंडित जी। आपकी समीक्षा ही मेरे लिए अनमोल तोहफ़ा है
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Nice
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अति सुन्दर भाव पूर्ण रचना
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भावपूर्ण अभिव्यक्ति
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