नजरें टिकी हैं तुम पर
कोशिश है भाव पढ़ लूँ
पाने को पार मन का
पत्थर की नाव गढ़ लूँ।
उतरे या डूब जाये
कोशिश कभी न छोडूँ
तुम छोड़ना भी चाहो
मन से कभी न छोड़ूँ।
ऐसे ही सब समझ लूँ
कहना जो चाहते हो,
वह भी मैं भांप लूँ जो
कहना न चाहते हो।
कोशिश है भाव पढ़ लूँ
Comments
5 responses to “कोशिश है भाव पढ़ लूँ”
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सुंदर
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अतिसुंदर रचना
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क्या बात है।
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बहुत सुंदर भाव 🙏🙏
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कवि की सुन्दर भावनाओं को व्यक्त करती हुई अति सुन्दर रचना, उम्दा लेखन
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