अंधेरा

चारो तरफ अंधेरा ही अंधेरा है
लगता है वहाँ किसी का बसेरा है
फिर वही पुरानी दस्तक
आखिर वहाँ कौन खड़ा है
यह राज कहीं राज न रह जाए
ए शख्स आखिर तू कौन है

Comments

7 responses to “अंधेरा”

  1. वाह, अति सुंदर

    1. Praduman Amit

      अवलोकन के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।

  2. सुन्दर पंक्तियाँ

    1. Praduman Amit

      स्वागत है।

  3. Amita

    सुंदर पंक्तियां

    1. Praduman Amit

      धश्य

      धश

      धन्यवाद।

  4. बहुत सुन्दर 

Leave a Reply

New Report

Close