चारो तरफ अंधेरा ही अंधेरा है
लगता है वहाँ किसी का बसेरा है
फिर वही पुरानी दस्तक
आखिर वहाँ कौन खड़ा है
यह राज कहीं राज न रह जाए
ए शख्स आखिर तू कौन है
अंधेरा

Comments
7 responses to “अंधेरा”
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वाह, अति सुंदर
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अवलोकन के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।
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सुन्दर पंक्तियाँ
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स्वागत है।
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सुंदर पंक्तियां
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धश्य
व
धश
नधन्यवाद।
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बहुत सुन्दर
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