क्या बयॉ करे…… क्या बयॉ करे अपने लफ्जो से हंसकर दर्द छुपाता हूँ दिल के गहरे घाव को अपने किस्मत को मैं कोसता हूँ सुबह शाम दर्द को झेलता हूँ क्या बयॉ करे अपने लफ्जो […]

😰😰😰😰😰😰😰😰😰😰 मन की सोच से…… आईने को जब देखता हूँ खुद को घुटता पाता हूँ लगता हैं नहीं दे पायेगे खुशी इस जमाने में खुद को जीतना छिपाना चाहता हूँ बेवसी मुझ पर हँसती हैं […]

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 सिर्फ तुम्हारे लिए….. तुम ख्वाब हो अरदास हो मेरे दिल की धड़कन हो तुम प्यार हो पहचान हो मेरे जीने की वजह हो तुम जीवन हो हकिकत हो मेरे सपनो की मुस्कान हो तुम […]

रक्षा करना बहना का सूत के बन्धन का प्यार के रिस्तो का भाई बहन के दुलार का बचपन की ठिठोली का टूटने ना देना रिस्ते की बुनियाद को रक्षा करना बहना का दरिन्दो की आड़ […]

किसान की वेदना खुले आसमान के तले रोटी का निवाला लिए ऑखो में बेरुखी नाप रहे धरती की छाती ना सोने के लिए हैं शीश महल ना रहने को हैं राजमहल किसान के लिए हैं […]

जीवन की परछाई जीवन मरण कहानी हैं सुन्दर छवि अलौकिक क्या लेकर तुम आये थे क्या लेकर तुम जाओगे रिश्ते को निभाते रहना जीवन की कमाई हैं धन दौलत सब रह जायेगा घमण्ड क्यो हैं […]

राजनीति राजनीति के गलीयारे में ऊच नीच सभी बह जाते हैं जिसको दुध पिलाकर पाला सपोले बनकर डस जाते हैं राजनिति की परछाई में पड़कर देश को खोखला कर जाते हैं शौहरत नाम के लिए […]

नारी की गाथा जीवन में रंग को भरने वाली प्यारी भोली नारी हो तु घर ऑगन को सँवारने वाली तुम फूलो कि क्यारी हो माँ बहन बेटी बनकर तुम घर को अलंकित करती हो मुझसे […]

नया साल का पहरा खेत खलिहान के सरहद पर रंग बिरंगे फूलो का बसेरा होगा ठंड बसन्त के हवाओ से नया साल का उजाला होगा मदमस्त महकती फिजा होगी घर अॉगन में रौनक चॉदनी धरा […]

वृक्ष दिन प्रतिदिन कटते जा रहे हैं वन्य पेड़ झाड़ियॉ प्रदुषण की ललकार ने पैरो में डाल दी रोगो की बेड़िया घुटते जा रहे हैं इंसान अपने कर्म की अठखेलियो से पेड़ को काटकर….. उजाड़ […]

नेता जी का सत्ता मैं इंसान हूँ इंसान ही रहने दो मुझे जनजाति में ना बाटो नेता जी कभी हिन्दू तो कभी मुश्किल का बाटाधार करके वोट ना माँगो नेता जी नफरत का जहर जहन […]

हौशला…. अपने हौशले की उड़ान से उड़ना चाहता हूँ समुन्दर के लहरो का तूफान देखना चाहता हूँ ये हवा तेरे गर्दिश का मैं दिदार करना चाहता हूँ पत्थर दिल लेकर पत्थर से टकराना चाहता हूँ […]

माँ कि ममता टुटे छप्पर के द्वार पर महलो के किनार पर जाते हुए फुटपाथ पर ममता दिखती रहती हैं | बोलते हुए इंसान में बेजुबान के ललकार में पछीं के आवाज में ममता दिखती […]

( माँ ) माँ ओ मेरी प्यारी माँ जग से सुन्दर मेरी माँ गले मुझे लगाती तन मन को शीतल कर देती प्यार बहुत लुटाती माँ जग से सुन्दर है तू मेरी माँ मेरे जीवन […]

गीत – प्रभु से वन्दन हमें प्रेम बहुत हैं रघुवर तुमसे अपने चरण में बुला लेना थोड़ा सा दया हम पर करना मुझको भव से पार लगा देना मैं दीन दुःखी आभागा हूँ किस्मत का […]

रंग बिरंगे सपने नव गीत नव सृजन को मैं गुनगुनाना चाहता हूँ आसमान की ऊँचाई को मैं नापना चाहता हूँ हौसले की उड़ान से सब कुछ बदलना चाहता हूँ रंग बिरंगे सपनो को मैं अपना […]

फौलादी मन किसी शाख कि मोहताज नहीं हूँ साहब जमींर जिन्दा हैं मेहनत करके खाता हूँ बैसाखी का नंगा नाच करके क्या हैं फायदा मुझे अपने ऊपर हैं चट्टानो सा भरोसा मेरी खुद्दारी का हाल […]