फूल लताओं को समेट कर रखता मेरा गांव , नल कूप को सहेज कर रखता मेरा गांव , रिस्ते को मदमस्त खुशहाल रखता मेरा गांव , मिट्टी की खुशबू को सहेज कर रखता मेरा गांव […]
फूल लताओं को समेट कर रखता मेरा गांव , नल कूप को सहेज कर रखता मेरा गांव , रिस्ते को मदमस्त खुशहाल रखता मेरा गांव , मिट्टी की खुशबू को सहेज कर रखता मेरा गांव […]
उठो खड़े हो जाओ वीर तुम, लड़ लड़ कर अपना अधिकार लो, दुम दबाकर डर के मारे, ज़िन्दगी भर लागान मत दो, महेश गुप्ता जौनपुरी
सारथी ना जीत में ना हार में हैं मजा बस प्यार में कदम कदम बढाये चलो राह से ना तुम हटो हे बलशाली हे दयावान सत्य वचन पर डटे रहो कलयुग कि धारा को अन्ततः […]
सख्सियत को अपने टटोल रहें अंग्रेजी में हिंदी का गुणगान करते छिप कर बैठे है ए बी सी डी में अपने मासूम परिंदों को हिंदी का ज्ञान दो सर्वश्रेष्ठ भाषा का वाणी पर मृदु भाष […]
अनजाने से संसार में खुशीयों को लो बटोर अपने पराये में ब्यर्थ ना करो रिस्ते का डोर समय बहुत मुल्यवान है करते रहो तुम प्रेम सहज ही उत्पत्ति होगी भाई बंधू का प्रेम महेश गुप्ता […]
चन्द्रयान गिरते सम्भलते उठते रहेंगे चांद की गली में पहुंच कर रहेंगे सम्पर्क टूटने से रिस्ते खत्म नहीं होते कामयाबी की सीढ़ी चढ़ कर रहेंगे हौसले में अभी जान है बाकी दिपक बुझने से रोशनी […]
मासूम छोटे से नन्हे हाथो में घडा आ गया, ये बचपन समझदारी में बदल गया । हाथो में खिलौनो के जगह, कन्धो पर जिम्मेदारी आ गया । छोटे से नन्हे हाथो में घडा आ गया, […]
मैं कतरा कतरा बिखर जाऊं मुझे गम नहीं मैं देश के लिए कुर्बान हो जाऊं मुझे गम नहीं मेरी ख्वाहिश है बस इतनी मेरा साथ देना दोस्तो मैं मर कर भी देश के लिए काम […]
एक एक खजाने को लुटा कर मां आज आबाद बैठी बेटे के राज में मां आज उदास बैठी है ये कैसा है बड़प्पन कैसा है प्यार झोली में अब ना रहा प्यार बेटा तो हो […]
लुटा मैं आज खजाना आबाद बैठी हूं तेरे रहमों करम से मैं बर्बाद बैठी हूं जरा सी इज्जत बची हो तो लगा लेना गले से नहीं तो मैं जिल्लत कि ज़िन्दगी अपना बैठी हूं महेश […]
बचपन लड़कपन की याद अभी वही हैं रिस्ते में दोस्ती की मिठास अभी वही हैं चन्द पल की ही तो दुरी हुयी हैं ऐ दोस्त मिलेगें फिर उसी गली में महफिल जमाने महेश गुप्ता जौनपुरी
वतन की मिट्टी पर हमने पैगाम लिख दिया, अपने वीर जवानो की पहचान लिख दिया, जो धर्म पर बँट गये वो गद्दार निकल गये, जो देश के लिए कुर्बान हुए जवान निकल गये, महेश गुप्ता […]
नेता जी का दिल हैं झोला पहन घुमें हैं कुर्ता पायजामा गली मोहल्ले में जब जाते विकाश कि लम्बी लिस्ट बनाते भैया बाबू को फुसलाते हाथ जोड़कर चुना लगाते वोट मिले तो बाते सुनते सत्ता […]
मैं साफ सुथरा कोरा पन्ना, तुम कलम स्याही बन जाना, बनकर मेरी प्रेम दिवानी, तुम शब्द प्रहार से लड़ जाना, महेश गुप्ता जौनपुरी
शाशन कुशाशन लंगड़ा हुआ कानुन किया बन्द आँख चोरी करो बेईमानी करो चाहे लड़कर तोड़ो कपार अपनी किस्मत पर रोवो चाहे रोवो जाति आरक्षण पर खुनी होली कितना भी खेलो अंधी बहरी हुयी हैं सरकार […]
नारी शक्ती कि पहचान हो हिमा देश कि गौरव अभिमान हो हिमा बेटी नहीं तुम भाग्य कि लकिर हो हिमा साहस धैर्य सुर्य कि प्रकाश हो हिमा ये सिध्द किया हैं तुमने हिमा बेटी बेबस […]
कुल्हड़ कि चुस्की कुछ याद दिलाती हैं, दोस्त कि दोस्ती साथ निभाती हैं, महक मिट्टी कि वतन पर प्यार लुटाती हैं, चाय कि चुस्की बचपन जवानी कि कहानी सुनाती हैं, महेश गुप्ता जौनपुरी
गुरू वन्दन गुरू वन्दन चरणों में करता हूं शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं मैं हूं बड़ा अभागा संसार में ज्ञान कि ज्योति जलाये रखना जीवन के अंधियारो में प्रकाश का दीप जलाये रखना गुरू […]
तेरी मासुमियत का मैं हूं दिवाना तेरे प्यार में फिरता हूं आवारा ना समझ मुझे जाहिल निकम्मा सनम तेरे ही प्यार से मुझे गीले हैं सितम महेश गुप्ता जौनपुरी
आसमां कि बुलंदी पर पैगाम भेजा है अपने दोस्त को मैंने सलाम भेजा है ख़त को मेरे यार को ही पकड़ना ख़त में मैं दर्द जुदाई एहसास भेजा है महेश गुप्ता जौनपुरी
– अगर होते मेरे पास पंख खुशीयो को संसार में लुटाता, तितली बन फूलो पर मडराता । फुदक -फुदक कर गीत सुनाता, अगर होते मेरे पास पंख । पतंग देख आहे हूॅ भरता, पंक्षी को […]
लघुकथा-मित्र प्रेम दुनिया में अगर कोई उदाहरण है तो मित्र प्रेम उदाहरण सबसे मर्मस्पर्शी है ।बात उन दिनो की है जब कुलदीप और प्रवीण साथ -साथ ग्रेजुएशन की डिग्री ले रहे थे ।तो देखते बनता […]
कविता – मानव तू क्यो बदल गया समाज वही प्यार वही, सोच समझ की भावना । अत्याचारी हो गये हम सब, मानव तू क्यो बदल गया । रंग वही हैं अपने देश की, अभिनेता नेता […]
नापाक पाकिस्तानी शेर गरजना फैल रही है चारो ओर दिशाओ में, नापाक पाकिस्तान ले लेगें अपनी साये में । अब ना हम सुनेगें एक तेरे काली करतुतो को, अब तो वर्षा होगी मेरे वीर जवानो […]
जीवन की कडवी पुडिया जीवन की कडवी पुडिया सुबह शाम हथेली पर रूखे – रूखे मन से कडवी पुडिया खुलती है । कभी दुध के साथ कभी पानी के साथ इसको निगलना पडता है जिन्दगी […]
माँ माँ ओ मेरी प्यारी माँ जग से सुन्दर मेरी माँ गले मुझे लगाती तन मन को शीतल कर देती प्यार बहुत लुटाती माँ जग से सुन्दर है तू मेरी माँ मेरे जीवन की आशा […]
रक्षक रक्षक ही भक्षक हो गये है अपने ही भारत देश में भ्रष्टाचार फैलाते है काली चादर ओढ कर इमानदारी का परिचय देकर रक्षक ही धोखा देते है अपने को सच्चा बतलाकर औरो को लुटते […]
गुरु वन्दन हम सब गुरु के गोद में छात्र है गुरु के ज्ञान में आओ हम सब गुरु वन्दन करे चरण स्पर्श अभिनन्दन करे। गुरु का हमपे उपकार है हम सब उनका सम्मान करे जंगल […]
सरहद मानवता के बीच मे , खीच गयी देखो सरहदे। भूल रहे है सब अपनो को , मोह – माया झोड गलीयो को ।। खिंचकर सरहदे वे , अब देखो कितना मुस्कुराएॅ । निशाना साध […]
संसार कलह बडी हैं बेदरंग दुनिया में सलोने सपनो ने मुझे हॅसना सिखाया धुल भरी अॅखियो ने रास्ता दिखाया बेदर्द मचलती धुपो ने मुझे लडना सिखाया चुभती पैर में काटे सच्चाई बतलाया अधियारे संसार ने […]
इज्जत इज्जत के बचावे खातिर मालिक घर को तोडे या जोडे। मालिक अपनी सुझ बुझ से घर वाले को सडक पर कर सकता है । मैं मालिक हूॅ अपने घर का मेरे लिए कोई कानुन […]
******** ठंड******** ठंडी का मौसम था और चीनू की बीमार माॅ मुंबई जाने वाली थी दवा कराने के लिए चीनू बडे सुबह ही उठ कर घर का सारा काम निपटा कर नहा कर पतले कपडे […]
बचपन खिलखिलाते चेहरो पर उषा की मुस्कान लिए रवि की तरंग किरणो से अधरो से किलकारी भरे। कूदक – फूदक कर सपनो में रंग भरे तोड – फोड समानो को बचपन को बिखेर चले। पल […]
पनाह मेरी अभिलाषा को समझो माँ स्वर्ग सी पृथ्वी पर दे दो पनाह बडी सुकून मिलती है माँ तुझसे क्यो मारना चाहती हो मुझ अभागन को। अभी तो हूॅ मैं तेरे गर्भ में माँ मुझको […]
लडिया देखो महलो पर गजब की सुन्दरता ढाई मिट्टी के दीपक से चन्द्र घटा भी शरमाई, नही मरेगा इस दिवाली कोई गरिब इंसान नव नवल प्रात कि दीपक उजाला बनकर छायी, जग मे छाया अंधेरा […]
आओ मिलकर खुशिया बाटे, दीप जलाकर नाचे गाये। गले मिलकर खुशिया बाटे, रंगोली के रंगो में रंग जाये। नमन उन्हे भी करते है, जो शहीद हुए देश के लिए। दीप जलाकर आज उन्हे, हम भी […]
चिडिया रंग – बिरंगे रंगो में कूदक फूदक कर उडती मीठे मधुर स्वरो से घर आंगन को महकाती । चुग – चुग दाने खाना बच्चो जैसे इठलाना चुनमुन प्यारी चिडिया तुम रंग बहुत बदलती हो […]
बेवफा प्यार ) मत कर पगले प्यार तू बहुत ही पछतायेगा दिल में लेकर कसक तडपता ही रह जायेगा । बिछडती मंजिल अपनी दर्द गहरा दे जायेगा पल – पल घुटेगा तू जुदाई ना सह […]
बाबूल छोड चली मैं बाबूल को अनजान डगर सा लगता है नयन भरे हैं नीर मेरे सब अपने पराये लगते हैं । अधिकार खत्म कर जा रही ससुराल का दामन पकडने इतनी रूहासी हो गयी […]
आत्मकथा दोस्तो मैं बहुत गरिब परिवार से रह चुका हूॅ बात उस समय की है जब मै क्लास सेकेंड में पढता था ।उस समय मुझे बडी ही मुश्किल से किताब और कलम के पैसे मिलते […]
उम्मीद ना जाने क्यो लोग मेरे उम्मीदो को कुचलते रहते हैं मिठी-मिठी बाते करके दिल को छलते रहते हैं खौफ जमाते अपने पन का बातो बतो में रौदा करते हैं दर्द भरी जज्बातो को हॅस […]
मन कि बात जब मन कभी द्रवित होता ऑसू पलको पर होता रंग उडा उडा सा रहता मन मेरा खोया रहता अधरो कि मुस्कान ना जाने कहा खो जाती बातो कि घुटन में मन मेरा […]
भारत देश हम हैं भारत देश के प्रेमी लहरो से हम खेलेंगे बुरी नजर उठाने वाले टुकडे टुकडे तुमको कर देगें । हम हैं भारत देश के प्रेमी गद्दारो को अब ना छोडेंगे चापलूसी बनावटी […]
नारी मन कि उषा किरणो से वो मृद भाष कहॉ से लायी हो घर आंगन को महकाने का तुम ऐसा वरदान कहॉ से पायी हो माँ बहन बेटी बनकर तुम पीड़ा को छिपाने का पहचान […]
( गौरेया ) कूदक – फूदक कर रंग बनाती दाना को चुग कर खाती हो कभी घर में कभी आंगन में तुम मेरे आ जाती हो | गौरेया रानी तुम हो बडी सयानी हम सब […]
संवाद – वायु मानव / 02 चन्द वायु की लड़ियों ने आकर मुझको घेर लिया सिसक सिसक कर कहने लगी पेड़ो क्यों काट रहे हो मैं दंग अचम्भा देखता रहा पूछ बैठा सवाल ये वायु […]
प्रकृतिसौंदर्य प्रकृति हवाओ के संग झुम रहे हम सब बगिया की रंग बिरंगी यादे कू कू गाती कोयल प्यारी । झर – झर गिरती पानी कि बुदे मदमस्त झुमती पेडो कि डाली सर-सर-सर फर-फर-फर गा […]
) पर्यावरण का हो रहा हरण वृक्षो की शामत हैं आयी लगे हैं धुन में वृक्ष काटने प्रकृति भी देखो हैं कुम्हलाई कटते रहे वृक्ष तो आक्सीजन कहा से लाओगे नन्हें मुन्हें मेहमान आयेंगे तो […]
प्रकृति धरोहर वृक्ष धरा कि हैं आभूषण मनमोहक छवि बिखरती चन्द्र रवि के किरणो से जीवन हर्षित करती है कोयल की मृदुगान प्यारी जग को रोशन करती ओश की सुनहरी बूँद चमचम सी करती हैं […]
संवाद – वायु मानव चन्द वायु की लड़ियों ने आकर मुझको घेर लिया सिसक सिसक कर कहने लगी पेड़ो क्यों काट रहे हो मैं दंग अचम्भा देखता रहा पूछ बैठा सवाल ये वायु तेरा क्या […]
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