फूल लताओं को समेट कर रखता मेरा गांव ,
नल कूप को सहेज कर रखता मेरा गांव ,
रिस्ते को मदमस्त खुशहाल रखता मेरा गांव ,
मिट्टी की खुशबू को सहेज कर रखता मेरा गांव ,
महेश गुप्ता जौनपुरी
फूल लताओं को समेट कर रखता मेरा गांव ,
नल कूप को सहेज कर रखता मेरा गांव ,
रिस्ते को मदमस्त खुशहाल रखता मेरा गांव ,
मिट्टी की खुशबू को सहेज कर रखता मेरा गांव ,
महेश गुप्ता जौनपुरी
उठो खड़े हो जाओ वीर तुम,
लड़ लड़ कर अपना अधिकार लो,
दुम दबाकर डर के मारे,
ज़िन्दगी भर लागान मत दो,
महेश गुप्ता जौनपुरी
सारथी
ना जीत में ना हार में
हैं मजा बस प्यार में
कदम कदम बढाये चलो
राह से ना तुम हटो
हे बलशाली हे दयावान
सत्य वचन पर डटे रहो
कलयुग कि धारा को
अन्ततः खदेड़ दो
भाव बुध्दि के समर्थ से
वीर तुम लडे चलो
महेश गुप्ता जौनपुरी

सख्सियत को अपने टटोल रहें अंग्रेजी में
हिंदी का गुणगान करते
छिप कर बैठे है ए बी सी डी में
अपने मासूम परिंदों को
हिंदी का ज्ञान दो
सर्वश्रेष्ठ भाषा का वाणी पर मृदु भाष दो
हाय हैलो का नकेल कसकर
चरण स्पर्श का संस्कार दो
जूझ रही है हिन्दी
दबकर अंग्रेजी के गलीयारें में
एक्का दुक्का संभाल रखे है
कमान हिन्दी की पहचान का
गीता रामायण महाभारत ग्रंथ सभी
है विलुप्त के कागार पर
अंग्रेजी शिक्षा से बढ़ रहा है
हिंसा दुराचार का भावना
साहित्य जगत ही बचा है
हिंदी के पखवाड़े में
गायन करता वन्दन करता
शीश झुका कर अभिनन्दन करता
हिन्दी भाषा है मूल आधार हमारा
हिन्दुस्तान का हिन्दी से ही है पहचान
महेश गुप्ता जौनपुरी
अनजाने से संसार में खुशीयों को लो बटोर
अपने पराये में ब्यर्थ ना करो रिस्ते का डोर
समय बहुत मुल्यवान है करते रहो तुम प्रेम
सहज ही उत्पत्ति होगी भाई बंधू का प्रेम
महेश गुप्ता जौनपुरी
चन्द्रयान
गिरते सम्भलते उठते रहेंगे
चांद की गली में पहुंच कर रहेंगे
सम्पर्क टूटने से रिस्ते खत्म नहीं होते
कामयाबी की सीढ़ी चढ़ कर रहेंगे
हौसले में अभी जान है बाकी
दिपक बुझने से रोशनी मर नहीं जाती
प्रयास प्रयोग करते रहेंगे
सफलता की पर पहुंच कर रहेंगे
असफलता ही तो हैं सफलता की सीढ़ी
एक ना एक दिन सफल होंगे
चांद की सुन्दरता का राज
एक दिन हम पढ़ कर रहेंगे
कोशिश रहेगी चन्द्रयान 3 में
लक्ष्य को हम भेद कर रहेंगे
सब्र करना धीरज रखना
एक इतिहास हम रच कर रहेंगे
महेश गुप्ता जौनपुरी
मासूम
छोटे से नन्हे हाथो में घडा आ गया,
ये बचपन समझदारी में बदल गया ।
हाथो में खिलौनो के जगह,
कन्धो पर जिम्मेदारी आ गया ।
छोटे से नन्हे हाथो में घडा आ गया,
मासूम को देखकर दिल भर गया ।
महंगाई बेवसी से गस्त खाकर,
बचपन ना जाने कहा खो गया ।
छोटे से नन्हे हाथो में घडा आ गया,
बचपन की शरारत ना जाने कहा खो गया।
होठो पर मुस्कान देखा,
दिल मेरा रूदन सा हो गया ।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल- 9918845864
मैं कतरा कतरा बिखर जाऊं मुझे गम नहीं
मैं देश के लिए कुर्बान हो जाऊं मुझे गम नहीं
मेरी ख्वाहिश है बस इतनी मेरा साथ देना दोस्तो
मैं मर कर भी देश के लिए काम आऊ यही तमन्ना है
महेश गुप्ता जौनपुरी
एक एक खजाने को लुटा कर
मां आज आबाद बैठी
बेटे के राज में
मां आज उदास बैठी है
ये कैसा है बड़प्पन
कैसा है प्यार
झोली में अब ना रहा प्यार
बेटा तो हो गया पत्नी का गुलाम
महेश गुप्ता जौनपुरी
लुटा मैं आज खजाना आबाद बैठी हूं
तेरे रहमों करम से मैं बर्बाद बैठी हूं
जरा सी इज्जत बची हो तो लगा लेना गले से
नहीं तो मैं जिल्लत कि ज़िन्दगी अपना बैठी हूं
महेश गुप्ता जौनपुरी
बचपन लड़कपन की याद अभी वही हैं
रिस्ते में दोस्ती की मिठास अभी वही हैं
चन्द पल की ही तो दुरी हुयी हैं ऐ दोस्त
मिलेगें फिर उसी गली में महफिल जमाने
महेश गुप्ता जौनपुरी
वतन की मिट्टी पर हमने पैगाम लिख दिया,
अपने वीर जवानो की पहचान लिख दिया,
जो धर्म पर बँट गये वो गद्दार निकल गये,
जो देश के लिए कुर्बान हुए जवान निकल गये,
महेश गुप्ता जौनपुरी
नेता जी का दिल हैं झोला
पहन घुमें हैं कुर्ता पायजामा
गली मोहल्ले में जब जाते
विकाश कि लम्बी लिस्ट बनाते
भैया बाबू को फुसलाते
हाथ जोड़कर चुना लगाते
वोट मिले तो बाते सुनते
सत्ता मिले तो गायब दिखते
महेश गुप्ता जौनपुरी
मैं साफ सुथरा कोरा पन्ना,
तुम कलम स्याही बन जाना,
बनकर मेरी प्रेम दिवानी,
तुम शब्द प्रहार से लड़ जाना,
महेश गुप्ता जौनपुरी
शाशन कुशाशन लंगड़ा हुआ
कानुन किया बन्द आँख
चोरी करो बेईमानी करो
चाहे लड़कर तोड़ो कपार
अपनी किस्मत पर रोवो
चाहे रोवो जाति आरक्षण पर
खुनी होली कितना भी खेलो
अंधी बहरी हुयी हैं सरकार
महेश गुप्ता जौनपुरी
नारी शक्ती कि पहचान हो हिमा
देश कि गौरव अभिमान हो हिमा
बेटी नहीं तुम भाग्य कि लकिर हो हिमा
साहस धैर्य सुर्य कि प्रकाश हो हिमा
ये सिध्द किया हैं तुमने हिमा
बेटी बेबस लाचार नहीं हैं हिमा
महेश गुप्ता जौनपुरी
कुल्हड़ कि चुस्की कुछ याद दिलाती हैं,
दोस्त कि दोस्ती साथ निभाती हैं,
महक मिट्टी कि वतन पर प्यार लुटाती हैं,
चाय कि चुस्की बचपन जवानी कि कहानी सुनाती हैं,
महेश गुप्ता जौनपुरी
गुरू वन्दन
गुरू वन्दन चरणों में करता हूं
शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं
मैं हूं बड़ा अभागा संसार में
ज्ञान कि ज्योति जलाये रखना
जीवन के अंधियारो में
प्रकाश का दीप जलाये रखना
गुरू वन्दन चरणों में करता हूं
शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं
मैं हूं एक छोटा सा तिनका
अपने शरण में रखना मुझको
ज्ञान कि सागर से मुझको
आशीष समर्पित करते रहना
गुरू वन्दन चरणों में करता हूं
शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं
नई राह नई दिशा दिखला कर
हमको नेक काबिल इंसान बना देना
अंधेरे में एक दीप जलाकर
जीवन पथ पर चलना सीखा देना
गुरू वन्दन चरणों में करता हूं
शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं
मेरे पथ को रोशन करना
जीवन को सफल बना देना
धैर्य सौर्य ज्ञान का पाठ पढ़ा कर
हमको भव से पार लगा देना
गुरू वन्दन चरणों में करता हूं
शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं
जीवन के पथ पर सदैव हमें
हे गुरुदेव अग्रसर रखना
जीवन के अंधियारे में ज्योति जलाते रहना
अज्ञानता को दुर करके मेरे ज्ञान का दीप जलाना
महेश गुप्ता जौनपुरी
तेरी मासुमियत का मैं हूं दिवाना
तेरे प्यार में फिरता हूं आवारा
ना समझ मुझे जाहिल निकम्मा सनम
तेरे ही प्यार से मुझे गीले हैं सितम
महेश गुप्ता जौनपुरी
आसमां कि बुलंदी पर पैगाम भेजा है
अपने दोस्त को मैंने सलाम भेजा है
ख़त को मेरे यार को ही पकड़ना
ख़त में मैं दर्द जुदाई एहसास भेजा है
महेश गुप्ता जौनपुरी
– अगर होते मेरे पास पंख
खुशीयो को संसार में लुटाता,
तितली बन फूलो पर मडराता ।
फुदक -फुदक कर गीत सुनाता,
अगर होते मेरे पास पंख ।
पतंग देख आहे हूॅ भरता,
पंक्षी को देख चहकने लगता।
मैं भी उडने की चेष्टा रखता,
अगर होते मेरे पास पंख ।
हर शाम को मैं तारे गिनता,
उजाले मे मैं कू – कू करता।
चारो ओर सुगन्ध बिखेरता,
अगर होते मेरे पास पंख ।
चाँद को छुने की हिम्मत रखता,
अंधियारे को दूर भगाता।
चाँद को मैं पृथ्वी पर लाता, अगर होते मेरे पास पंख ।
बाँध मैं रखता चाँद को,
मोह – माया की गलीयो मे ।
उजाला सा हमेशा रहता,
अगर होते मेरे पास पंख ।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
✍✍✍✍✍✍✍✍✍
लघुकथा-मित्र प्रेम
दुनिया में अगर कोई उदाहरण है तो मित्र प्रेम उदाहरण सबसे मर्मस्पर्शी है ।बात उन दिनो की है जब कुलदीप और प्रवीण साथ -साथ ग्रेजुएशन की डिग्री ले रहे थे ।तो देखते बनता था उन दोनो की मित्रता साथ – साथ कालेज आना साथ -साथ बैठना,खेलना,पढाई करना इन दोनो की मित्रता का पुरे कालेज मे चर्चा होती थी ।
धीरे – धीरे समय बीतता गया और एक दिन वह दिन आ ही गया ।जब दोनो ने ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर लिया और अब ऐसा क्षण आ गया था ।
जब एक मित्र दुसरे मित्र से जुदा होने वाले थे उस रात उन दोनो ने पुरी रात बाते किये ।और सुबह कि लालिमा के साथ दोनो बिछडने वाले थे। आज दोनो के बीच ऐसा लग रहा था कि शायद अभी वे दोनो कभी मिलने वाले नही है ।
दोनो मित्र ने अपना-अपना समान पैक कर बाहर रोड पर आते है और उनके साथ कुछ सहपाठी भी आते है उनकी आखिरी विदाई के लिए दोनो मित्र गले मिलते है ।और एक दुसरे को बाय बोलकर रूहासी आॅखो से अपने -अपने घर का राह चुनते है।इस मित्र प्रेम की मर्मस्पर्शी प्यार देखकर अन्य मित्र कि भी आॅखे रूहासी हो जाता है। दोनो को बाय बोलकर वर्ष मे एक बार सभी साथ मिलने का वादा कर एक दुसरे से जुदा हो जाते है ।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
✍✍✍✍✍✍✍✍✍
कविता – मानव तू क्यो बदल गया
समाज वही प्यार वही,
सोच समझ की भावना ।
अत्याचारी हो गये हम सब,
मानव तू क्यो बदल गया ।
रंग वही हैं अपने देश की,
अभिनेता नेता हो गये।
धोखाधडी की राहो मे,
मानव तू क्यो बदल गया ।
जुर्म हो रहा खुली आसमान तले,
भष्टाचारी के आह से।
आॅखे खोले देख रहे हैं,
मानव तू क्यो बदल गया ।
हर शाम प्याले का जाम,
सुबह जुवारियो का संसार ।
हर पल हैं मुसीबत का कहर,
मानव तू क्यो बदल गया ।
शहर बन गया बेवसी का,
नशेडियो के हवस से।
जीना भी मुश्किल हो गया,
मानव तू क्यो बदल गया ।
अत्याचार देख समाज के,
ऊब गया हूॅ देख कर ।
रो रहा हूॅ बेवस होकर,
मानव तू क्यो बदल गया ।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
✍✍✍✍✍✍✍✍✍
नापाक पाकिस्तानी
शेर गरजना फैल रही है चारो ओर दिशाओ में,
नापाक पाकिस्तान ले लेगें अपनी साये में ।
अब ना हम सुनेगें एक तेरे काली करतुतो को,
अब तो वर्षा होगी मेरे वीर जवानो की गोली का ।
अब तो हम दिखाएगें तुम्हारी असली औकात क्या है,
पाकिस्तान छिन कर दिखाएगें पहचान क्या है ।
धधक उठी है ज्वाला अब बुझने हम ना देगें,
पाकिस्तान को मिटाकर सरहद पर तिरंगा फहरा देगें।
ओवैसी जिहादीयो को जिन्दा हम जला देगें,
जय श्री राम के नारे से तुमको हम मिटा देगें ।
बस हो गया बहुत तेरा पाखण्डी चाल,
अब तो होगी खुल कर जंग हमारी और तुम्हारी।
चुन- चुन कर बदला लेगें अपने वीर शहीदो की,
खुन की आॅसू रूलायेगें नापाक पाकिस्तानी को।
बहुत सहे हम तेरे जुल्मी अत्याचारो को,
अब तो मिटा देगें पाकिस्तान की सरहद को।
महेशगुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
जीवन की कडवी पुडिया
जीवन की कडवी पुडिया
सुबह शाम हथेली पर
रूखे – रूखे मन से
कडवी पुडिया खुलती है ।
कभी दुध के साथ कभी पानी के साथ
इसको निगलना पडता है
जिन्दगी की इस पुडिया को
सुबह शाम लेना पडता है ।
दुख दर्द की इस कहानी को
पुडिया मे छिपानी पडती है
सेहत के खजाने के लिए
कडवी पुडिया लेनी पडती है ।
भूल ना हो जाए खाने में
नही तो स्वास्थ्य बिगड जायेगा
जिन्दगी की कडवी पुडिया
कही हमसे दूर ना हो जाए।
तिखी सी कडवी लगती है
जिन्दगी की कडवी पुडिया
स्वस्थ रहो स्वच्छ रखो इस समाज को
जीवन की कडवी पुडिया से मुक्त हो जाओगे।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
✍✍✍✍✍✍✍✍✍
माँ
माँ ओ मेरी प्यारी माँ
जग से सुन्दर
मेरी माँ
गले मुझे लगाती
तन मन को
शीतल कर देती
प्यार बहुत
लुटाती माँ
जग से सुन्दर
है तू मेरी माँ
मेरे जीवन की
आशा है तू
सब कुछ न्योछावर
करती है
अपने को दुखी रखकर
मेरा पालन करती है
माँ ओ मेरी प्यारी माँ
जग से सुन्दर
मेरी माँ
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
✍✍✍✍✍✍✍✍✍
रक्षक
रक्षक ही भक्षक हो गये है
अपने ही भारत देश में
भ्रष्टाचार फैलाते है
काली चादर ओढ कर
इमानदारी का परिचय देकर
रक्षक ही धोखा देते है
अपने को सच्चा बतलाकर
औरो को लुटते फिरते है
संसार में ये रक्षक बनकर
बेखौफ होकर टहलते है
ईमानदारी का ढोंग रचकर
चौराहे पर घुमते है
दुखी दरिन्दो को उलझन में डालकर
खुद को मशीहा समझते है
देश के ईमानदार को
अपने फन्दे में फासते है
दया धर्म का पाठ पढाकर
भगवान बने फिरते है
अपने ही देश को ये
दीमक बनके चाटते है
खुशी भरी संसार में
अपना आंतक फैलाते है
मिलकर करे विरोध सभी
रक्षक ना बन जाये भक्षक
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
✍✍✍✍✍✍✍✍✍
गुरु वन्दन
हम सब गुरु के गोद में
छात्र है गुरु के ज्ञान में
आओ हम सब गुरु वन्दन करे
चरण स्पर्श अभिनन्दन करे।
गुरु का हमपे उपकार है
हम सब उनका सम्मान करे
जंगल में कुटी तले
ज्ञान पाये हम सभी।
ज्ञान से गुरू का मान करे
गुरु से हम सब स्नेह करे
अन्धकार मिटाकर प्रकाश दिये
समाज में अधिकार दिये ।
गुरु से हम सब ज्ञान पाये
लेकिन सोचा नही क्या पाये
स्वार्थी हम सब हो गये
कभी ना हम सब गुरु से मिलने गये।
हम सब गुरु से पराये हुए
शिक्षा की ज्योति पाकर
एक अच्छे गुरु के चरणो को
महेश बारम्बार प्रणाम करे।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
✍✍✍✍✍✍✍✍✍
सरहद
मानवता के बीच मे ,
खीच गयी देखो सरहदे।
भूल रहे है सब अपनो को ,
मोह – माया झोड गलीयो को ।।
खिंचकर सरहदे वे ,
अब देखो कितना मुस्कुराएॅ ।
निशाना साध रहे है आज,
इंसानियत भी खतरे मे है आज ।।
हिन्दू -हिन्दू मुस्लिम -मुस्लिम ,
ये कैसी सत्तारूढवादी ।
कभी जो मिलकर रहते थे,
आज वही खिंच रहे सरहदे ।।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
संसार
कलह बडी हैं
बेदरंग दुनिया में
सलोने सपनो ने
मुझे हॅसना सिखाया
धुल भरी अॅखियो ने
रास्ता दिखाया
बेदर्द मचलती धुपो ने
मुझे लडना सिखाया
चुभती पैर में काटे
सच्चाई बतलाया
अधियारे संसार ने
प्रकाश जलाया
छल कपट की दुनिया ने
जीवन को रूलाया।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
✍✍✍✍✍✍✍✍✍
इज्जत
इज्जत के बचावे खातिर
मालिक घर को तोडे या जोडे।
मालिक अपनी सुझ बुझ से
घर वाले को सडक पर कर सकता है ।
मैं मालिक हूॅ अपने घर का
मेरे लिए कोई कानुन नही।
मेहमान का इज्जत करने के लिए
मालिक कर्म धर्म से जुटता है।
सही गलत का पहचान करके
घर की इज्जत को समेटता है।
भष्टाचार मंहगाई की चादर को
ओढकर घर का मालिक बीताता है।
मेहनत मजदूरी करके मालिक
घर के इज्जत को परदे तले रखता है ।
मेरे दिल को ना तोडो परिवार वालो
क्योंकि मेरा भी कुछ इज्जत है समाज में।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
✍✍✍✍✍✍✍✍✍
******** ठंड********
ठंडी का मौसम था और चीनू की बीमार माॅ मुंबई जाने वाली थी दवा कराने के लिए चीनू बडे सुबह ही उठ कर घर का सारा काम निपटा कर नहा कर पतले कपडे डाल लेता है ।धुप अच्छी निकली रहती है वह पतले कपडे पहने ही अपने माँ को बस स्टेशन छोडने के लिए जौनपुर बस डिपो गया ।
वहा चीनू अपने माँ का हाल देखकर अपने माँ को वाराणसी स्टेशन से ट्रेन पकडाने का निर्णय कर निकल जाता है। और वहा पहुंच कर अपने माँ को ट्रेन पर बैठाकर वापस जौनपुर के लिए रवाना होता है तो शाम हो जाता है । और ठंडी भी बढ गया था चीनू बस मे पीछे की तरफ जाकर एक सीट पर बैठ जाता है सिकुड कर इसी आश मे शायद पीछे ठंडी कम लगे लेकिन ठंड बढ जाने के कारण चीनू की हालत पतली हो गई थी ।बस वाराणसी से जौनपुर के लिए रवाना होता है ठंडी हवाओ को चीरती हुई आगे बढती है बस और ठंडी हवा बस मे आने लगती है और चीनू ठंड से कापने लगता है।
तभी बगल वाली सीट पर एक दम्पति आते है और चीनू को उस हाल मे देखकर पुछ ही लेते है कहा तक जाना है चीनू कापते हुए बोलता है चाचा जौनपुर जाना है तभी उनकी पत्नी चीनू के पास वाली सीट पर बैठ कर चीनू को अपने कम्बल से ढक लेती है और बाते करती हुई रास्ते भर आती है ।चीनू को भी काफी आराम महसूस होता है और वह उस औरत से ऐसे चिपका था जैसी वह अपने माँ से चिपका हो ।चीनू को समझ मे नही आ रहा था कि वह उनका कैसे सुक्रिया अदा करे ।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
✍✍✍✍✍✍✍✍✍
बचपन
खिलखिलाते चेहरो पर
उषा की मुस्कान लिए
रवि की तरंग किरणो से
अधरो से किलकारी भरे।
कूदक – फूदक कर
सपनो में रंग भरे
तोड – फोड समानो को
बचपन को बिखेर चले।
पल में हॅसना पल में रोना
जीवन को सॅवार चले
जीवन की नैया को
शरारत में पाल चले ।
खुली किताब बचपन की
लोगो को पढा दिए
बचपन की यादो में खो कर
आओ लौट चले लडकपन मे।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
पनाह
मेरी अभिलाषा को समझो माँ
स्वर्ग सी पृथ्वी पर दे दो पनाह
बडी सुकून मिलती है माँ तुझसे
क्यो मारना चाहती हो मुझ अभागन को।
अभी तो हूॅ मैं तेरे गर्भ में माँ
मुझको क्यो डराती हैं
बस मैं इतना चाहती हूॅ
पनाह दे दो मुझ अभागन को।
बेटा-बेटी का प्रश्न हो क्यो रखती
हर पल तुम्हारी मान करूगी
समाज मे रहकर सम्मान दिलाऊगी
बेटे की तरह मैं पहचान दिलाऊगी।
मेरी यह अभिलाषा सुन लो
मुझको भी अपना लो माँ
मैं हूॅ छोटी सी तितली
संसार में मुझे आने तो दो।
बसन्त की बहार लेकर आऊँगी
संसार को खुबसूरत बनाऊंगी
अच्छे बुरे की पहचान कर
माँ तुझको महान बनाऊंगी।
सत्य अंहिसा की लडाई से
देश को अपने बचाऊंगी
शंमा की तरह जलकर मैं
समाज को रोशन कर जाऊंगी ।
मैं हूॅ तेरी नन्ही गुडिया
ना मारो माँ मुझे गर्भ में
यही है मेरी माँ अभिलाषा
क्यो नही सुनती मेरी भाषा।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
✍✍✍✍✍✍✍✍✍
लडिया देखो महलो पर
गजब की सुन्दरता ढाई
मिट्टी के दीपक से
चन्द्र घटा भी शरमाई,
नही मरेगा इस दिवाली
कोई गरिब इंसान
नव नवल प्रात कि दीपक
उजाला बनकर छायी,
जग मे छाया अंधेरा सा
नव दिप समर्पण करता हूॅ
मिट्टी के दीपक मे
आज उजाला भरता हूॅ,
जग मे उजाला फैल रही
घर आंगन सुशोभित करती
मिट्टी के दीपक से
चन्द्र किरण नमन करती।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
आओ मिलकर खुशिया बाटे,
दीप जलाकर नाचे गाये।
गले मिलकर खुशिया बाटे,
रंगोली के रंगो में रंग जाये।
नमन उन्हे भी करते है,
जो शहीद हुए देश के लिए।
दीप जलाकर आज उन्हे,
हम भी याद करते है ।
रंगो मे जो रंग गये,
वीर शहीद कहलाये थे।
मातृभूमि की रक्षा के लिए,
अपना सर झुकाए थे।
एक दीप प्रज्वलित कर,
गाथा हम भी रचते है ।
दीप जलाकर दीपक से,
शहीदो को नमन करते है।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
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चिडिया
रंग – बिरंगे रंगो में
कूदक फूदक कर उडती
मीठे मधुर स्वरो से
घर आंगन को महकाती ।
चुग – चुग दाने खाना
बच्चो जैसे इठलाना
चुनमुन प्यारी चिडिया तुम
रंग बहुत बदलती हो ।
निज प्रात उषा काल में
सन्देश नया छोडती
प्यारे से संसार में
भागदौड बहुत करती हो।
नटखट प्यारी चिडिया तुम
राग नया झेडती हो
चू – चू कू – कू करके
मन सभी की मोह लेती हो।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
बेवफा प्यार )
मत कर पगले प्यार तू
बहुत ही पछतायेगा
दिल में लेकर कसक
तडपता ही रह जायेगा ।
बिछडती मंजिल अपनी
दर्द गहरा दे जायेगा
पल – पल घुटेगा तू
जुदाई ना सह पायेगा ।
ना ऊपर ऑसमा ना नीचे जमीं
अकेला फूटकर रोता रह जायेगा
ऑखो में ऑसु दिल में दर्द
ख्वाबो को टूटता देखता रह जायेगा।
तडप तेरा कोई ना समझे
वेवफा तो वेवफाई करती रहेंगी
खुद्दारो की गलीयों में
दिल लगाकर घुमती रहेंगी।
रहम कर दो अब
मुझ इंसान को
पत्थर दिल भी अब
पिघल जायेगा ।
सम्भल जा अब तू
कितना ऑसू बहता रहेगा
मत कर पगले प्यार तू
बहुत बहुत ही पछतायेगा।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
बाबूल
छोड चली मैं बाबूल को
अनजान डगर सा लगता है
नयन भरे हैं नीर मेरे
सब अपने पराये लगते हैं ।
अधिकार खत्म कर जा रही
ससुराल का दामन पकडने
इतनी रूहासी हो गयी हूॅ
मन बेचैन सा बहुत लगता हैं ।
खत्म हुयी सब लडकपन
घर बसाने जा रही हूॅ
अपने बगिया को भूलकर
चिडिया बनने जा रही हूॅ ।
माँ बाबा को भूलकर
दूर उनसे मैं जा रही हूॅ
नयनन में ऑसू भरकर
रिवाज मैं निभा रही हूॅ ।।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
आत्मकथा
दोस्तो मैं बहुत गरिब परिवार से रह चुका हूॅ बात उस समय की है जब मै क्लास सेकेंड में पढता था ।उस समय मुझे बडी ही मुश्किल से किताब और कलम के पैसे मिलते थे ।उस समय घर पर मैं कलम खरिदने के लिए पैसे मांगे तो मुझे नही मिला मेरी माँ बोली बेटा एक दो दिन चलाओ इसके बाद दिला दुगी ।
मैं दुसरे दिन स्कूल चला गया और बिना होम वर्क किये स्कूल में मेरा पीटाई हुआ ।और मैं घर आकर बोला मैं कल स्कूल नही जाऊंगा ।
मेरे बगल मे एक अंकल रहते थे जो स्मोकिंग करते थे उन्होने मुझे बुलाया और कहा बेटा मेरे लिए बाजार से सिगरेट लेकर आ जाओ । मैंने पैसा लेकर जैसे ही आगे बढा वो मुझे रोक कर बोले बेटा एक रूपये का तुम कुछ खा लेना ।मैं बोला ठिक है अंकल मैं बाजार जाकर उनके लिए सिगरेट लिया और एक रूपये का अपने लिए कलम खरिदा और मैं बहुत ही गर्वित होकर कलम लेकर वापस आ गया ।और अंकल को सिगरेट और पैसे वापस किया ।अंकल ने पुछा बेटा कुछ खाया मैं बोला हा अंकल खाया उस दिन को मैं आज तक नही भूल पाया ।मेरे आज तक समझ में नही आता कि मैं उस दिन झुठ बोलकर सही किया कि गलत ।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
उम्मीद
ना जाने क्यो लोग
मेरे उम्मीदो को
कुचलते रहते हैं
मिठी-मिठी बाते करके
दिल को
छलते रहते हैं
खौफ जमाते अपने पन का
बातो बतो में
रौदा करते हैं
दर्द भरी जज्बातो को
हॅस कर
उडाया करते हैं
भरोसा का वास्ता देकर
मजाक बनाया
करते हैं
खुशियो कि आशियाने में
चिंगारी भडकाया
करते हैं
मेरे जिन्दगी कि वसुलो को
ना जाने क्यो
नहीं समझते हैं
बात-बात पर माफी
माॅगकर जलील
हमें करते हैं
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
मन कि बात
जब मन कभी द्रवित होता
ऑसू पलको पर होता
रंग उडा उडा सा रहता
मन मेरा खोया रहता
अधरो कि मुस्कान
ना जाने कहा खो जाती
बातो कि घुटन में
मन मेरा रोता रहता
ना रंग समझ में आता
ना राग समझ में आता
बस मन मेरा ये
करूणा में डुबा रहता
ना दिल की कोई बात समझे
ना मेरा कोई जज्बात समझे
ना जाने किस मिट्टी का बना
बस लोग खेलने आते मुझसे
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
भारत देश
हम हैं भारत देश के प्रेमी
लहरो से हम खेलेंगे
बुरी नजर उठाने वाले
टुकडे टुकडे तुमको कर देगें ।
हम हैं भारत देश के प्रेमी
गद्दारो को अब ना छोडेंगे
चापलूसी बनावटी अफवाहो में
अब हम नहीं तेरे आयेंगे ।
हम हैं भारत देश के प्रेमी
सच्चे प्रहरी बनकर दिखलायेंगे
भारत माता को फिर से हम
सोने की चिडिय़ा बनायेंगे ।
हम हैं भारत देश के प्रेमी
कण-कण का ऋण चुकायेंगे
जय हिंद जय भारत माता की नारा
सदियो तक हम – सब गायेंगे ।
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
नारी
मन कि उषा किरणो से
वो मृद भाष
कहॉ से लायी हो
घर आंगन को महकाने का
तुम ऐसा वरदान
कहॉ से पायी हो
माँ बहन बेटी बनकर तुम
पीड़ा को छिपाने का
पहचान कहा से पायी हो
हे जननी तुम जग में
जग को रोशन
करने आयी हो
छवि तुम्हारी बलशाली हैं
अंर्तमन साहस
कहॉ से लायी हो
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
( गौरेया )
कूदक – फूदक कर रंग बनाती
दाना को चुग कर खाती हो
कभी घर में कभी आंगन में
तुम मेरे आ जाती हो |
गौरेया रानी तुम हो बडी सयानी
हम सब को मोहित करती हो
भाप मुसीबत को तुम
झटपट फुर्र से उड़ जाती हो |
रंग – रंगीले स्वभाव तुम्हारे
मन को बेचैन सी करती हैं
घर आंगन की श्रृंगार हो तुम
मेरे आशियाने कि पहरेदार |
लालिमा की मुस्कान लिए
चू – चू करती आती हो
चुग – चुग दाने को चाव से खाती हो
गौरेया रानी तुम काम बडे कर जाती हो |
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
संवाद – वायु मानव / 02
चन्द वायु की लड़ियों ने
आकर मुझको घेर लिया
सिसक सिसक कर कहने लगी
पेड़ो क्यों काट रहे हो
मैं दंग अचम्भा देखता रहा
पूछ बैठा सवाल
ये वायु तेरा क्या जाता हैं
मैं काट रहा हूँ पेड़ तो
स्थिर हो गयी वायुमान
त्राही त्राही मच गया
सॉस लेना भी मुश्किल हो गया
वायु कि जरुरत पड़ने लगी
खिलखिलाकर वायु ने बोला
मेरा कुछ नहीं जाता हैं
हे मानव प्यारे सोच विचार लो
तुम अपनी जीवन कि बगिया को
पेड़ लगाओ प्रेम करो
वायु को वरदान मिले
मानव हो मानवता दिखाओ
जीवो को जीवनदान दो
महेश गुप्ता जौनपुरी
प्रकृतिसौंदर्य
प्रकृति हवाओ के संग
झुम रहे हम सब
बगिया की रंग बिरंगी यादे
कू कू गाती कोयल प्यारी ।
झर – झर गिरती पानी कि बुदे
मदमस्त झुमती पेडो कि डाली
सर-सर-सर फर-फर-फर
गा रही हैं बसन्ती हवाये ।
पेडो कि डलिया में अब
रंगो – बिररंग-खिल आये फूल
भौरे भी गूँज रहे हैं
सुन्दरता भी गजब कि छाई ।
चंचल किरणे छेड रही
प्यारे फूल कलियो को
चन्द्र घटा भी शरमाई
देख प्रकृति सौंदर्य को ।
महेश गुप्ता जौनपुरी
गनापुर अजोशी जौनपुर
उत्तर प्रदेश – 222161
)
पर्यावरण का हो रहा हरण
वृक्षो की शामत हैं आयी
लगे हैं धुन में वृक्ष काटने
प्रकृति भी देखो हैं कुम्हलाई
कटते रहे वृक्ष तो
आक्सीजन कहा से लाओगे
नन्हें मुन्हें मेहमान आयेंगे तो
क्या उनको तुम बतलाओंगे
चिडिया की चहक भी ना जाने
कौन से जादुगर ने चुराई
रुखा सुखा अब लगे धरा
अब तो कुछ शर्म करो मानव भाई
वृक्ष धरा की हैं आभुषण
लगा वृच कर दो हरा भरा जहा
क्या दिखाओगे अपने छोटे मुन्ने को
जब कर रहे हो प्रकृति का हरण
कुछ सुन्दर काम करो मानव
प्रकृति भी मुस्कान भरे
डलिया पर खिले लताये
धरा का मान सम्मान बढे
शुध्द स्वछंद बयार बहे
कोयल की गीतो में मिठास भरे
चलो एक कदम बढाये हम
लगा वृक्ष को जागरुक बनाये
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाईल – 9918845864
प्रकृति धरोहर
वृक्ष धरा कि हैं आभूषण
मनमोहक छवि बिखरती
चन्द्र रवि के किरणो से
जीवन हर्षित करती है
कोयल की मृदुगान प्यारी
जग को रोशन करती
ओश की सुनहरी बूँद
चमचम सी करती हैं
हरियाली खेतो की
सुन्दर छवि निहारती
मदमस्त मयूरा नाचे
वर्षा के संग बादल बरसे
हरियाली के ऑगन में
चिड़िया करे बसेरा
छम छम की झंकार लिए
आता हैं वसन्त का मेला
महेश गुप्ता महेश गुप्ता जौनपुरी
संवाद – वायु मानव
चन्द वायु की लड़ियों ने
आकर मुझको घेर लिया
सिसक सिसक कर कहने लगी
पेड़ो क्यों काट रहे हो
मैं दंग अचम्भा देखता रहा
पूछ बैठा सवाल
ये वायु तेरा क्या जाता हैं
मैं काट रहा हूँ पेड़ तो
स्थिर हो गयी वायुमान
त्राही त्राही मच गया
सॉस लेना भी मुश्किल हो गया
वायु कि जरुरत पड़ने लगी
खिलखिलाकर वायु ने बोला
मेरा कुछ नहीं जाता हैं
हे मानव प्यारे सोच विचार लो
तुम अपनी जीवन कि बगिया को
पेड़ लगाओ प्रेम करो
वायु को वरदान मिले
मानव हो मानवता दिखाओ
जीवो को जीवनदान दो
महेश गुप्ता जौनपुरी
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