कुछ ऐसे ही हाल होने वाला हैं मानव तेरा , सांस थमेगा जब तेरा याद आयेगा मेरा , सिसक सिसक दम हैं मैंने तोड़ा , तेरी भी बारी आयेगी होने दे सवेरा , महेश गुप्ता […]

मेरे बापू चरखा के बल पर जिसने देश भक्ति को जगाया था गजब का हुंकार था बापू के जज़्बातों में सत्य अहिंसा की लाठी से जिसने धुल चटाया था खदेड़ गोरों के सैनिक को देश […]

शीर्षक – भारत माँ का बेटा माँ मुझे भी मँगा दे बन्दूक मैं भी सीमा पर लडने जाऊँगा मैं बच्चा अब नहीं रहा मैं भारत का लाज बचाऊँगा चीन पाकिस्तान को खदेड़ दुश्मन का चीता […]

शीर्षक – बदलाव झूठ के आगे सच दबता जा रहा हैं साहेब अमीर के आगे गरिब रौदा जा रहा साहेब झूठ फलता फुलता आगे बढता जा रहा साहेब सच को झोड झूठ का साथ दे […]

( पैसा बोलता हैं.. ) जेब ढीली बाजार में ऑख टके सामान को जी मचले बीच बाजार में बेवस लाचार सम्भाले पैसे हाथ पाव किये भागे पैसा मुहँ बन्द कर दे बाजार में पैसा बोलता […]

घनघोर अन्धेरा छा रहा हैं इंसान का ईमान डगमगा रहा हैं किसका अब कौन सुन रहा हैं भगवान भी जाग कर सो रहा हैं सच्चाई पर कोहरा छा रहा हैं झुठ पर बादल मड़रा रहा […]

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 ( कंजुस ) भगवान की कृपा हैं सब कुछ हैं धन हैं दौलत हैं घर हैं परिवार एक रुपया जेब से नहीं निकलती कंजुसी से हैं बहुत बेचारे लाचार खाने को हैं बहुत कुछ […]

जातिवाद लड़ते रहो तुम जातिवाद में कलम सर हो जायेगा ऑख उठाकर देख ना पाओगे काम कोई और कर जायेगा जातिवाद हैं दुश्मन हिन्दू का जातिवाद ही हिन्दू को निगल जायेगा जाति धर्म का लड़ायी […]

( तिरंगा ) मैं हूँ भारत माँ का लाल तिरंगा अंबर में फहराऊँगा सिने में भर कर देश भक्ति राष्ट्रगीत मैं गाऊँगा लाल किले के शीर्ष पर झण्डा मैं लगाऊँगा भारत माँ की जयकारा लगाकर […]

बेटी खौल उठा खुन मेरा देख कर इस मंजर को थैले में कही कचरे में कही मरी पड़ी हैं नन्ही बेटी वो खुदगर्ज को मैं कैसे समझाऊ जो ढुढ़ते हैं यौवन में बेटी लगता हैं […]

आईना सच को देखो झुठ परेशान बहुत हैं ऑखो को देखो ऑसू में दर्द बहुत हैं प्यार में देखो लोग छल कपटी बहुत हैं चेहरा जितना मासुम रंग उसके बहुत हैं जिन्दगी भले ही छोटी […]

( माँ ) सुबह उठते ही जब सूरज की किरणें दिखाई देती हैं चिड़िया चहचहा कर गीत सुनाने लगती हैं माँ का मेरे प्रेम समर्पण होता हैं ऊठ जा लल्ला सुबह हुयी माथे को जब […]

( पिता ) हे पितृ बन्धु सखा हमारे जीवन काया के आधार हमारे सर पर छाया के दाता हमारे बारम्बार नमन करता हूँ प्यार अनोखा देकर हमको लाड़ प्यार दिया जीवन में हमको सखा हमारे […]

जल जल की महिमा बड़ी निराली खेतो में करती हरियाली जीवो को जीवन दान देती जग को जल से संवार देती आने वाला हैं भयंकर आकाल जल का मिट रहा हैं संसार जल के सारे […]

हमारे नेता…. हम भी बहुत मजबूर हैं साहब लात मार घुसा सह रहे हैं साहब गाली सुबह शाम खा रहे हैं साहब क्योंकि हमारे नेता चोर हैं साहब शौक नहीं हैं गॉव को छोड़ना रोजगार […]

अब कि बार दिवाली में…. देश का पैसा देश में रखना खर्चा मत करना चाइना की लाईट पर तन मन को प्रशन्नचित रखना कदम से कदम मिलाकर चलना मिट्टी के दीपक जलाना अब कि बार […]

…..माँ…. रिश्ता बड़ा अनोखा हैं माँ का त्याग हैं बलिदान हैं खुशियों की छलक हैं माँ प्रेम हैं तपस्या हैं बच्चे की भाग्य विधाता माँ जगत में महान हैं माँ नाम बड़ा अनमोल हैं आंचल […]

( मेरे प्यारे दोस्तो ) दोस्तो मेरे दिल को आबाद मत करना जीने को मिली सॉसे बर्बाद मत करना ना खेलना तुम मेरे भावनाओ से मित्रो हर मोड पर साथ देना हंस हस कर मित्रों […]

( महंगाई का प्रकोप ) दाल का दाना सोना होगा , चावल हिरा जैसा महंगा । आटा होगा कोकिन हिरोइन , मसाला रोब दिखायेगा । फल को चखेंगे सपनो में लोग , जब वृक्ष सुखा […]

( पगली लडकी ) नयनो को अपने चुरा रही थी जब वह मेरे सामने आयी भोली प्यारी चेहरे पर घबडाहट कि थी परछाई हा हेलो जब बोला मैंने नयनो से नयन मिला ना पायी हाल […]

( पगली लड़की / 2 ) नटखट चंचल नजरो से बाते वह मुझसे करती हैं बात बात में वह मुझसे मेरे सपनो को चुराती हैं ऑखे बन्द करता हूँ तो पगली लड़की सामने आ जाती […]

( पगली लड़की /03 ) ना जाने क्यों इतनी अधुरी सी लगती हैं जीवन गुनगुनाता मचलते मस्ती में चले जा रहा था आगे से मेरे आ रही थी एक पगली सयानी लड़की नयनो से मेरे […]

( पगली लड़की /04 ) मेरी जान तुम यू ही रूठा ना करो मुझसे बादल बनकर मुझ पर यू बरसा ना करो तुम्हारी लबो की हँसी मे बसी जिन्दगी तुम यू ही मुझे तडपाया ना […]

( पगली लड़की / 05 ) समझ ना पाया मैं उसके जज्बातो कि हवाओ को तकरार भी मैंने खूब किया उस पगली को रुलाने के लिए दर्द भर कर सिने में अपने जहाँ को लुटाता […]

( पगली लड़की /06 ) कण कण में मुस्कान बिखेरती जीवन को न्योछावर करती जिद पर अपने करे सवारी घर में सबका मन बहलाती बातो से अपने रस को घोलती घर आँगन को महकाती हैं […]

( पगली लड़की / 07 ) मृदुल चंचल उमंग लिए मन को सुशोभित करती हैं त्याग तपस्या आत्मबल से मुस्कान की किरण बिखेरती हैं थोडी सी पगली बनकर दिल को मेरे खुश रखती हैं समझ […]

( पगली लड़की / 08 ) ना जाने आज क्यो मेरी याद नही आ रही उसको शायद पगली लड़की किसी की यादो की माला गुथ रही हैं बैठ के दिल मेरा भी ना जाने क्यो […]

( पगली लड़की / 09 ) गीत गुनगुनाकर मेरे सपनो में मुझसे मिलने आती हो हँसकर प्यारी नयनो से वार मुझ पर करती हो मेरे दिल के दर्द को कैसे तुम पढ लेती हो मेरे […]

( पगली लड़की / 10 ) दिल में मेरे ना जाने क्यो कुछ सवाल गोते लगाते हैं पगली लड़की को जब देखु दिल मेरा धडकने लगता हैं उसकी मासुमियत निगाहो को मैं पढने की कोशिश […]

तुम पढ़ी लिखी इंग्लिश मिडियम मैं पढ़ा लिखा शुध्द हिन्दी में मैं खाता हूँ गेहूँ चावल प्रिये तुम खाती पिज्जा बर्गर हो मेरा तुम्हारा मेल हैं क्या छुप छुप कर मिलना खेल हैं क्या तुम […]

कुल्हड़ कि चुस्की कुछ याद दिलाती हैं, दोस्तों कि दोस्ती साथ निभाती हैं, महक मिट्टी कि वतन पर प्यार लुटाती हैं, चाय कि चुस्की बचपन जवानी कि कहानी सुनाती हैं,

महेश गुप्ता जौनपुरी: बूंद बूंद का प्यार बरसों जुदाई के बाद ये घड़ी आयी हैं पिया मिलन की रूत आयी हैं मोहब्बत कि फिजा संग बरखा लायी हैं चल भीग जाते हैं इस सुहाने मौसम […]

तिरंगा भारत देश की शान हैं तिरंगा देश प्रेमियों की जान हैं तिरंगा मातृ भूमि का अभिमान हैं तिरंगा आजादी के तराने का नाम हैं तिरंगा नव विहंगम संसार हैं तिरंगा भारत देश का पहचान […]

सावन बारिश कि फुहार ने रंग दिया सारा संसार कौन सुना किसने सुना पपीहा करे पुकार सुन के गर्जना मेघों की नृत्य लुभाता मोरनी को सावन ये मनभावन हैं प्रेम लताएं प्रफुल्लित है सावन के […]

वृद्धा आश्रम बुढ़ि आंखें ना जाने कब से देख रही हैं मुझको एक टक लगाये निहार रही बरसों से मुझको कैसे कर लु मैं किनारा इनका कौन है सहारा यह छोटा सा वृद्धाश्रम है सभी […]

युग धारा एक युग बीत चला है देखो एक ऊर्जा शक्ति निकल रही चीर भानू के किरणों को चांदनी रोशनी फैला रही है बरखा भी इठला रहा है नभ अम्बर की छाया में मुदित हुआ […]

मेरे बापू चरखा के बल पर जिसने देश भक्ति को जगाया था गजब का हुंकार था बापू के जज़्बातों में सत्य अहिंसा की लाठी से जिसने धुल चटाया था खदेड़ गोरों के सैनिक को देश […]

सच में सब कुछ बदल गया इंसान का जुबान बदल गया राजाओ की कहानी बदल गया अल्हड़ मदमस्त जवानी बदल गया यारो की यारी बदल गया फितरत होश जिन्दगी बदल गया सच में बहुत कुछ […]

प्रकृति धरोहर वृक्ष धरा कि हैं आभूषण मनमोहक छवि बिखरती चन्द्र रवि के किरणो से जीवन हर्षित करती है कोयल की मृदुगान प्यारी जग को रोशन करती ओश की सुनहरी बूँद चमचम सी करती हैं […]

संवाद – वायु मानव चन्द वायु की लड़ियों ने आकर मुझको घेर लिया सिसक सिसक कर कहने लगी पेड़ो क्यों काट रहे हो मैं दंग अचम्भा देखता रहा पूछ बैठा सवाल ये वायु तेरा क्या […]

नवजीवन का राग/03 ज्ञान का प्रकाश तुम धैर्य रख जलाये चलो अग्यानता को दुर कर साक्षरता बढाये चलो दिन क्या रात क्या खुशी के गीत गाये चलो अंधकार से प्रकाश में जीत का जश्न मनाये […]

नन्हा सा परिन्दा एक नन्हा सा परिन्दा खोज रहा हैं आसमान… अपने हौसले से उड़ान भर देखना चाहता हैं आसमान… छोटे छोटे ऑखो से देखना चाहता हैं प्रकृति की खूबसूरती को महसूस करना चाहता हैं […]

तुम पढ़ी लिखी इंग्लिश मिडियम मैं पढ़ा लिखा शुध्द हिन्दी में मैं खाता हूँ गेहूँ चावल प्रिये तुम खाती पिज्जा बर्गर हो मेरा तुम्हारा मेल हैं क्या छुप छुप कर मिलना खेल हैं क्या तुम […]

सुबह की लालिमा सुबह सुबह सूर्य की लालिमा मुझसे कुछ कहती हैं भोर हुआ जग जा प्यारे चिड़िया ची – ची करती हैं नदियाँ झरना जंगल के बुटे सबसे अनोखे से लगते हैं ओंस की […]

मैं भारती हूँ मैं भारत देश का वासी हूँ वन्दन सबसे करता हूँ देश हित के लिए शीश अर्पित करता हूँ हिन्दू हूँ हिन्दी हैं पहचान राष्ट्र का सेवा करता हूँ धर्म कर्म की बात […]

किसान हाँ मैं ही हूँ किसान साहब जो खोतो में काम करता हैं बैल को भाई मानता खेत को धरती माता हल को पालन हार मानता जीवन को खेत में निकाल देता शहर से कोशो […]

( लघुकथा ) एक गरीब महिला अपने परिवार के साथ एक टुटी झोपड़ी में रहती थी उसके परिवार में एक बेटी और एक बेटा था | उसकी माँ पास के गॉव में जाकर झाडू पोछा […]

मेरे कलम से……. बदलने चले थे हम संसार दो कदम में हो गये बेकार नसीहत से बदल देते बुरे को अच्छा बना देते ख्वाब हर पल देखते थे सुनहरे संसार को बदलने को बदल ना […]