Author: महेश गुप्ता जौनपुरी

  • डर

    दौड़ खेल कर तो हम भी बड़े हो गये,
    जिम्मेदारीयां संग शहर में दौड़ गये।
    पेट की भूख शहर की याद दिला दी,
    इसलिए अपने वतन मिट्टी को वेबस होकर छोड़ गये।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मैं कौन

    बता दो दहाड़ कर डर नहीं लगता,
    शेर पिंजरे से अब जख्म नहीं देता।
    शायद भूल गये हो तुम मैं कौन हूं,
    वरना बातें बनाकर कर नहीं घुड़कते मुझे है पता‌।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • बुलंदि

    बुलंदियों से पुछ लिया कौन हो तुम,
    शेर के भेष में कोई और हो तुम।
    मुझे भी जान लो ये मित्र कौन हूं मैं,
    अपने लिबाज़ को उठा देखो मेरे मित्र हो तुम।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • लाकडाउन

    इस लाकडाउन में मैं तुम और चाय है साथी,
    कोरोना जैसी वैश्विक महामारी है सब पर भारी।
    करो जतन सब मिलकर कोरोना के प्रकोप का
    कुछ आदमखोर इंसानों से ये दुनिया आज हारी।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मजदूर हूं साहब

    मैं मजदूर हूं साहब यह सौभाग्य है मेरा,
    देश के लिए करना मजदूरी काम है मेरा।
    करते करते मजदूरी देश को समृध्द बनाऊंगा,
    आन बान शान का लाज रखना काम है मेरा।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • ख्वाब

    अभी तो तुमसे मिले थे हम,
    अभी तुम मुझे छोड़ चले गये।
    दिखलाकर मुझे सुनहरे ख्वाब,
    आंखों से दूर कहां तुम चले गये।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • राष्ट्र निर्माता

    मजदूर ही राष्ट्र का निर्माता,
    इनको हम क्यों भूल गये ।
    चन्द रूपये पाकर हम,
    इनको हम क्यो अलग किये।।

  • मेरे दोस्त मजदूर

    हमें गर्व है तुम पर,
    मेरे मित्र मजदूर ।
    किस्मत को मत कोसों,
    हम है बहुत मजबूर।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • लाल

    बहुत आहत हुआ हूं देख तुम्हरा हाल,
    एक मशाल जलाऊंगा बनकर मैं मिशाल।
    मजदूर नहीं मजबूर होगा करूंगा मैं प्रयास,
    मुझ पर भरोसा रखना मैं हूं देश का लाल।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • बड़ा इंसान

    चादर बांट हौसले मुझे नहीं तोड़ना,
    मजदूर भाई मुझे तुम्हारा राह नहीं मोड़ना।
    तुम्हारे हक का हम दे सकें मेहनताना,
    बड़े बनकर तुम्हारा हक मुझे नहीं है छिनना।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मजबूरी

    कभी झांक कर देखना मजदूर के घर,
    मजदूर कितना मजबूर हो गया है ।
    टूट के बिखर कर कितना दुखी हो गया,
    पेट के भूख ने ही ऐंसा हाल बना दिया है।।

    ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मजदूर का किस्मत

    इस संसार में ना जाने कितने चेहरे है,
    जिम्मेदारीयों पर बहुत सारे पहरे है।
    मजदूर परेशान क्यो है जान तो लिजिए,
    उसके किस्मत पर ना जाने कितने लहरें है।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • वेदना

    अन्तर्मन की वेदना पढ़ ना सके कोय,
    मजदूर की मजदूरी दे ना सके कोय।
    खून पसीने कौन बहता बैठ कर खाते लोग,
    मजदूर की मेहनत को समझ ना सके कोय।।

  • शान

    शान से जीना शान से मरना
    मजदूर की यही निशानी है।
    एक एक कतरे का हिसाब दे
    मौज में रहना ईमानदारी है।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मजदूर का दर्द

    कविदीप लिखों एक ऐंसा संदेश,
    जो मजदूरों का हक करें अदा ।
    खून पसीने का सही मुल्य मिले,
    आपके लेखनी को पढ़ मजदूर हो फिदा।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मजदूर बेचारा

    मजदूर है जीता शान से,
    देख खुशी तिलमिलाए अमीर।
    मजदूरी करके चैन से सोता खाट पर,
    मखमल का बिस्तर आराम ना दें शरीर को।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मजदूर

    कहानी बड़ी सुहानी है,
    मजदूर की बड़ी मेहरबानी है।
    सिना ठोंक डटे है रहता,
    यही तो मजदूर का ईमानदारी है।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • अमीर

    महल के बिस्तर चुभते रहते,
    धन दौलत में अमीर जीते मरते।
    मजदूर के जैसे खुदकिस्मत कहा,
    चैन से कभी कहां सोते रहते।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • हास्य ब्यंग

    हे भगवान ये लाकडाउन हटा दो,
    नहीं तो ये कोरोना मिटा दो ।
    तंग आ गया हूं फोन उठाकर झूठ सुनते -2,
    ये कमीने दोस्तों का मोबाइल ब्लास्ट करा दो।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • दिल

    खुलीआंखों से हमने भी ख्वाब देखें,
    तेरे चेहरे पर हमने भी जज्बात देखें ।
    सुना था आंधी कुहासे को उड़ा ले जाता है,
    दो टूटे हुए दिल को कांटेदार गुलाब मिला देता है।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • कलंक

    रोज मर्रा की जिंदगी में,
    बहुत कुछ सीखा हैं हमने।
    दुनिया में ना जाने कितने हैं रंक,
    जीवन पर लगा यह कैसा अभिशप्त का कलंक।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • तोज्ञफा

    प्यार का तोहफा खरीदने में वक्त तो लगता है,
    सच्चे प्यार को बंया करने में वक्त तो लगता है,
    दिल से दिल का तार जोड़ने में वक्त तो लगता है,
    प्यार को इजहार करने में वक्त तो लगता है,

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • आतंकवाद

    आतंकवाद के जड़ों में पानी डालो करके गर्म,
    हिन्दू मुस्लिम कहकर बरगलाने वालों को दो सजा।
    मजहबी बनकर जो फैलाते है आतंक दो सजा,
    फांसी के फंदे पर लटका कर आंख नोंचकर दो सजा।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • चीन का चाल

    कोरोना के डर से सारी दुनिया कांप गयी,
    चीन के दोगलेपन चाल को दुनिया भांप गयी।
    एक एक भयानक शहर को कोरोना निगल रहा,
    कोरोना के आतंक से देश दुनिया सहम रहा।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • दरिंदा

    बदल सको तो बदल दो कानून व्यवस्था को,
    फांसी पर लटका कर मारो बहसी दरिंदों को।
    कब तक आस लगाकर हौसला बढाओंगे दरिंदों का,
    उदय से पूर्व मिटा दो मिलकर खेल बहसी दरिंदों का।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • रोडा

    जिसने हमको छेड़ा हमने कभी उनको छोड़ा नहीं,
    बातों बातों में धूल चटाया कान कभी मरोड़ा नहीं।
    दख़ल दिये जो मेरी जिंदगी में समझा उनको रोड़ा नहीं,
    तोड़ कर दुश्मन के बदन की हड्डी को हमने जोड़ा नहीं।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • जलील

    काम गिनाए गिनाने दो,
    काम को बस परख लो।
    हाथ जोड़े जोड़ लेने दो,
    जलील करना बस सीख लो।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • भगत सिंह

    जाग उठा था आशा आजादी के परवानों का,
    वीर बहादुर भगत सिंह जब अंग्रेजों को ललकारा था।
    कतरे कतरे खून के बूंद का यही नारा था,
    हिन्द की धरती हिन्दुस्तान भाईयों को बहुत प्यारा था ‌‌।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • महामारी

    देख महेश जग की काया,
    सकल विश्व जग की माया।
    हुआ अचेत देख महामारी,
    कोरोना प्रकोप सब पर भारी।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • महामारी कोरोना

    खाने को अब अन्न नहीं,
    मरते बिलखते लोग ।
    कोरोना के संकट में पड़कर,
    जान गंवाये सब लोग।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • कोरोना

    जान हमारा हर लिजिए प्रभू,
    नहीं बचा अब जीने का राह।
    कोरोना के भारी संकट से,
    आंख के आंसू सुख गये प्रभू।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मेरी जिंदगी

    जिंदगी

    ये मेरी जिंदगी मुझे क्या से क्या बना दिया।
    इस लाकडाउन में जीना मरना सिखा दिया।।

    उम्र में पहली बार सुकून के पल दे दिया ।
    परिवार के संग हंसने खेलने का वक्त दे दिया।।

    मुसीबत को अपना ढाल बनाकर कर जीना सीखों ।
    गरिबों को रोटी का निवाला ये हमदर्द तुम देना सीखों।।

    ये बला कट जायेगा धीरे धीरे सम्भलना सीखों ।
    करके शुक्रिया वीर योद्धा का तुम लड़ना सीखों।।

    कैसे शुक्रगुजार करूं मैं तेरा ये खुबसूरत जिंदगी।
    कैद पशु पक्षी के जीवन को दे दिया नया जिंदगी।।

    प्रकृति के झोंके से खिल रहा मदमस्त ये जिंदगी ।
    फिज़ा में बिखेर कर खुशबू दे दिया इंसा को जिंदगी।।

    एक एक बात समझ में आया अब मुझको।
    वक्त की मार ने सबक सिखाया है सबको ।।

    अमीरी गरिबी की फर्क नहीं अब शायद तुझको ।
    वक्त के काल को समझ कर नमन करो तुम सबको।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • लिख कवि लिख

    लिख कवि

    लिख कवि लिख
    भावनाओं में बहकर लिख
    खुशीयों में फूदक कर लिख
    दर्द आह महसूस कर लिख
    तन्हाई को साथी बनाकर लिख

    लिख कवि लिख
    अफसर का रौब लिख
    नेता की बेईमानी लिख
    भ्रष्टाचार की परछाई लिख
    दुनिया के चापलूसी को लिख

    लिख कवि लिख
    गरिबों का भूख लिख
    नंगे पांव का छाला लिख
    बेरोजगारों का ताना-बाना लिख
    दिन दुखियों के मन का पीड़ा लिख

    लिख कवि लिख
    अमीरों का निकला पेट लिख
    छल कपट का राजनिति लिख
    मजदूरों का खून पसीना लिख
    अमीरों के धन दौलत की बेचैनी लिख

    लिख कवि लिख
    माथे पर का लकिर लिख
    किस्मत का तकदीर लिख
    होशियार का चालाकी लिख
    मजबूर का वेवसी परछाई लिख

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मंहगाई क दास्तांन

    महंगाई का दास्तान

    लिहली थैला पांच सौवा नोट
    खरीदे निकली सब्जि और तेल
    सब्जि में हि खत्म भईल
    पांच सौवा बड़का नोट
    कक्का के सुरती रही ग
    बुढवा बाबू के तम्बाकू
    टहल टहल बजारे हम
    बेसवे लागे रहर के दाल
    दाल के भाव सुनते
    चढ़े लागल पारा हमार
    रख्खा रख्खा भईया रख्खा
    अबे हम आवत बानी
    पांच सौवां के जरूरत पड़ ग
    घर के चक्कर लगा के अईनी
    सुनाई सुनाई खाली कइनी
    झोला के हमनी सामान
    पांच सौवां के दुगो नोट
    टेट में लिहनी दबाय
    खाली झोरा साईकल में
    लिहली हम दबाय
    घूम घूम समान खरिदनी
    घर के कामे काज के
    महंगाई क दस्तान देख
    हो गईनी परेशान हम
    बाजार से साईकिल लेई के
    भईनी भईया हम फरहार

    महेश गुप्ता जौनपुरी
    गनापुर जौनपुर उत्तर प्रदेश
    मोबाइल – 9918845864

  • वफादारी

    वफादारी

    देश हित में कुछ काम करो
    भारत मां को जंजालों से आजाद करो
    अपने विचारों से योगदान करो
    करके श्रम देश में सहयोग करो
    जाति धर्म को भूलकर इंसान बनो
    अपने देश के लिए तुम वफादार बनो

    चोर उचक्कों का भंडाफोड़ करो
    देश के लिए कुछ नेक काम करो
    बहाकर खून पसीना देश का नाम करो
    देश के शान के लिए जान अपना कुर्बान करो
    इंसानियत भाई चारा का बस बात करो
    दुश्मन बन पीठ पीछे ना घात करो
    गरीब निर्धन का सहयोग करो
    लूट खसोट करने वालों का इलाज करो
    ढोंग स्वांग को छोड़कर ईमानदार बनो
    अपने देश के लिए तुम वफादार बनो

    अपने जन्मभूमि को नमस्कार करो
    देश के चुनौति को स्वीकार करो
    वतन की मिट्टी का सम्मान करो
    देश के जवानों पर अभिमान करो
    अपनी मिट्टी को चूमकर देशभक्त बनो
    अपने देश के लिए तुम वफादार बनो

    महेश गुप्ता जौनपुरी
    पता – जौनपुर उत्तर प्रदेश
    मोबाइल – 9918845864

  • संस्कार

    संस्कार

    बदलते दौर के साथ बदल गया संस्कार
    पैसे की होड़ में बिक कर रह गया संस्कार
    पैर छूने की परम्परा है विलुप्त के कगार
    हाथ जोड़ अभिवादन का चला है संस्कार

    मां बाप के संस्कार का फिल्म धज्जियां उड़ा रहा
    दमन करके संस्कार का समाज से मिटा रहा
    सोशल मीडिया के प्रचार से संस्कार दम तोड़ रहा
    शमन करके संस्कार का हमें जिंदगी से बरगला रहा

    बचपन जवानी बुढ़ापे का मिट रहा है अब संस्कार
    दादा दादी का लाज लिहाज मिटाकर कर रहा प्रहार
    संस्कार शब्द रह गया है अब शब्दकोष के भण्डार
    बदलते युग के संविधान में स्वीकार लिया हमने हार

    जिससे मिला हमें संस्कार आंखें उन्हें तरेर रहा
    गांव के संस्कार भूलाकर शहर हमें बिगाड़ रहा
    संस्कार का गला घोंटकर अश्लीलता सीखा रहा
    किसे हम दोषी माने अब संस्कार हमें दुत्कार रहा

    महेश गुप्ता जौनपुरी
    जौनपुर उत्तर प्रदेश
    मोबाइल – 9918845864

  • टिड्डी पर फिसड्डी हुआ पाक

    टिड्डियों पर फिसड्डी हुआ पाक करता है जंग की बात

    पाकिस्तान में इन दिनों टिड्डियों के आंतक से खड़ी फसलें चौपट हो रहीं हैं टिड्डियों का आंतक इस कदर बढ़ गया है कि जिस तरफ टिड्डियां रूख कर रहीं हैं फसल पेड़ पौधे के पत्तियों को चौपट करती जा रही हैं। एक साथ में कम से कम अस्सी लाख से एक करोड़ टिड्डियों का दल समुह बनाकर चल रहीं हैं जिस फसल पर निगाहें पड़ रहीं है उसे घण्टों में साफ करके दुसरे फसलों पर अपनी निगाहें दौड़ा रहीं हैं। टिड्डियों के आंतक का इलाज तो कर नहीं पा रहा है पाकिस्तान और बातें ऐंसा करेगा कि जैसे पाक के रहमो-करम पर ही हिन्दुस्तान पल रहा है। अब तो आलम ऐंसा हो गया है कि टिड्डियों का दल अब हिन्दुस्तान में भी पलायन कर रहीं है ये भी एक पाक का घिनौना चाल ही हो सकता है। टिड्डियों का आंतक हिन्दुस्तान के कई राज्यों में पहुंच गया भारत सरकार टिड्डियों के लिए मुस्तैद है टिड्डियों के आंतक को हम जड़ से खत्म करके ही सांस लेंगे। इमरान खान की सरकार टिड्डियों के आंतक का इलाज कर नहीं पा रही हैं ऐंसा लगता है पाकिस्तान कोरोना के कहर से पहले टिड्डियों के कहर से पहले मात खा जायेगा। इस समय पाकिस्तान का ऐंसा हाल हो गया है कि वहां के किसान खेतों में थाली और डब्बा बजाते फिर रहें हैं। उन्हें डर है कहीं टिड्डियों का दल उनके फसलों को चौपट ना कर जायें। पाकिस्तान में ऐंसा मंजर छाया है कि कोरोना के कारण पाकिस्तान के जनता को भरपेट भोजन भी नसीब नहीं हो रहा है पाकिस्तानी जनता जहां भूखे मर रहीं हैं वहीं इमरान सरकार और बाजवा हिन्दुस्तान से लड़ने का शौक़ पाले बैठे हैं। पाकिस्तान के जनता का यह आरोप हैं कि सरकार जनता के दुख दर्द को जानते हुए भी अंजान हैं अपनी सेंकी बघारने के चक्कर में हिंदुस्तान को गिदड़ भभकियां और आंतकी हमले करवाने से आये दिन बाज नहीं आ रहा हैं। जबकि सच्चाई पाकिस्तान के हर नागरिक को मालूम हैं अगर हिन्दुस्तान से पाकिस्तान जंग लड़ने का भी कोशिश करेगा तो पाकिस्तान का नामोनिशान मिट जायेगा। जहां इमरान खान शांति का पैगाम देने की कोशिश करते रहते हैं वहीं आंतकवाद का भी घिनौना खेल पीठ पीछे खेलते हुए मियां मिट्ठू बनने की कोशिश में भी लगे रहते हैं। अपने घिनौने चाल से पाकिस्तान विश्व में अपना पहचान बना रहा है इन्हीं करतूतों के वजह से पाकिस्तान समृद्धि के पथ से भटक गया है। जहां हर देश अपने देश को सम्पन्न करने के लिए नये नये उपकरणों एवं नये नये शोध में लगा है वहीं इमरान खान टट्टू पालन करके पाकिस्तान का अर्थब्यवस्था मजबूत करने में लगा हैं।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • सोनू सूद

    बड़े बड़े भामाशाह और उद्योगपति का
    संस्कार को मार दिया कोरोना ने मति
    सोनू सूद नमन है आपके प्रेरणा को
    मजदूर के हातालो को बखूबी समझा

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • आरक्षण

    आरक्षण वाली चाय की दुकान

    मैंने मन ही मन एक प्लान बनाया
    आरक्षण वाला चाय का दुकान खुलवाया
    दुकान के अंदर तीन सिट बनवाया
    अलग अलग कैटगरी को अलग बैठवाया
    जनरल ओबीसी एससी एसटी का छाया
    पड़े ना एक दुसरे पर काया का माया
    चाय के मुल्य कैटगरी पर निर्धारित करवाया
    आरक्षण के आधार पर चाय पिलवाया
    जनरल कैटेगरी को सौ रुपए का लिस्ट चस्पवाया
    आरक्षण के बल पर कहर गजब का मैंने ढाया
    ओबीसी कैटगरी को साठ रुपए का चाय पिलाया
    आरक्षण में उसको पानी भी मुफ्त पिलाया
    एससी एसटी कैटगरी को दस रूपए का चाय दिया
    साथ में मस्का ब्रेड पांव और नमकिन भी मुफ्त दिया
    सारा माजरा देख जनरल और ओबीसी झड़प पड़े
    चाय वाले का सारा काला करतूत देख बरस पड़े
    बोले भाया ये कैसा अंधेर नगरी बसा रखा है
    खून पसीने की कमाई मुझसे क्यो वसूल कर रहा है
    एससी एसटी का सेवा तुम खूब कर रहा है
    आरक्षण के पाठशाला में मुफ्त में नाश्ता करा रहा है
    गुर्रा कर दुकानदार जोर जोर से चिल्लाया
    सरकार का हि है यह आरक्षण का साया
    बड़े जल्दी उठ गये पीकर चाय का प्याला
    मुझसे पहले सरकार से पुछो आरक्षण क्यों लाया
    सरकार अगर बन्द‌ करेंगी आरक्षण की दुकान
    आना तुम्हें भी खिलाऊंगा पिलाऊंगा चाय और पकवान

    महेश गुप्ता जौनपुरी
    मोबाइल – 9918845864

  • वृक्षारोपण करो

    वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ आंदोलन को चलाना‌ है,
    वृक्षारोपण से धरा को हरा भरा बनाना है ।
    मिलकर आओ सभी धरा के प्रकृति प्रेमियों,
    वृक्ष कटने से हम सभी प्रहरी को बचाना है।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • नयन

    नयन की भाषा सब कह जाते,
    वाणी भले ही बात छिपाते ।
    प्रेम उपज को कोई बांध ना पाये,
    टूटते रिश्ते भी दर्द में प्यार पाते।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • वियोग

    वियोग स्वीकार करके हार ना मानो,
    प्यार में अपने आप को मार ना डालो।
    हे प्रियतमा मेरे बातों को तुम समझो,
    खुद को तड़पा कर अब जान ना लो।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • ज्ञानी

    ज्ञानी को ज्ञानी बनने दो,
    व्याधान वालों से सावधान रहों।
    बहुत मिलेंगे ज्ञानी राहों में,
    अपनी सुर में सबको बहने दो।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • नयन

    नयन पर ही करते विश्वास सभी,
    जीवन के सारे घटनाओं पर ।
    लड़कर हमें अब जीतना होगा,
    संसार के सारे समस्याओं पर।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • ज्ञान की धारा

    मोह माया के चक्कर में पड़कर,
    ना करो ज्ञान की धारा को चौपट ।
    सिखों और सिखाओ समाज को,
    ना करो अपने ज्ञान से तुम कपट।।

    ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

  • सबक

    अकेले रहकर पशु पंक्षी बनकर नहीं जीना,
    इंसान बनकर इंसानियत से है राह दिखाना।
    मान गये तो गले लगाकर समाज का करेंगे उध्दार,
    नहीं तो मुंह तोड ज़बाब देकर है सबक सिखाना।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • करनी कथनी

    इंसानी चाह मर रहा लोगों में दुरियां हो रहा,
    बेपरवाही के रवानी में चाहत खत्म हो रहा।
    जिनको कुछ नहीं चाहिए वे भी तांक लगाये बैठे,
    करनी कथनी के चक्कर में जलता दिया बुझा रहा।।

    ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

  • रवानी

    इंसानी चाह मर रहा लोगों में दुरियां हो रहा,
    बेपरवाही के रवानी में चाहत खत्म हो रहा।
    जिनको कुछ नहीं चाहिए वे भी तांक लगाये बैठे,
    करनी कथनी के चक्कर में जलता दिया बुझा रहा।।

    ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

  • राज की बात

    राज की बात बताऊं मैं एक,
    शेर के खाल में बैठा भेडीयां।
    दो शक्ल लिए घुम रहा है,
    बनकर देखो कोई बहुरूपिया।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • नर नारी

    नर नारी के वेष में आया कोई छलिया,
    तन मन को करके वश में ठगा मुझे ठगिया।
    अन्तर्मन के लिलाओ से बनाया भेष अद्भुत,
    मग्न होकर अपने अधर्म के बल से नाचे भेड़िया।।

    🙏महेश गुप्ता जौनपुरी

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