महेश गुप्ता जौनपुरी, Author at Saavan - Page 2 of 12's Posts

मुक्तक

मैं साफ सुथरा कोरा पन्ना, तुम कलम स्याही बन जाना, बनकर मेरी प्रेम दिवानी, तुम शब्द प्रहार से लड़ जाना, महेश गुप्ता जौनपुरी »

मुक्तक

शाशन कुशाशन लंगड़ा हुआ कानुन किया बन्द आँख चोरी करो बेईमानी करो चाहे लड़कर तोड़ो कपार अपनी किस्मत पर रोवो चाहे रोवो जाति आरक्षण पर खुनी होली कितना भी खेलो अंधी बहरी हुयी हैं सरकार महेश गुप्ता जौनपुरी »

मुक्तक

नारी शक्ती कि पहचान हो हिमा देश कि गौरव अभिमान हो हिमा बेटी नहीं तुम भाग्य कि लकिर हो हिमा साहस धैर्य सुर्य कि प्रकाश हो हिमा ये सिध्द किया हैं तुमने हिमा बेटी बेबस लाचार नहीं हैं हिमा महेश गुप्ता जौनपुरी »

मुक्तक

कुल्हड़ कि चुस्की कुछ याद दिलाती हैं, दोस्त कि दोस्ती साथ निभाती हैं, महक मिट्टी कि वतन पर प्यार लुटाती हैं, चाय कि चुस्की बचपन जवानी कि कहानी सुनाती हैं, महेश गुप्ता जौनपुरी »

गुरू

गुरू वन्दन गुरू वन्दन चरणों में करता हूं शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं मैं हूं बड़ा अभागा संसार में ज्ञान कि ज्योति जलाये रखना जीवन के अंधियारो में प्रकाश का दीप जलाये रखना गुरू वन्दन चरणों में करता हूं शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं मैं हूं एक छोटा सा तिनका अपने शरण में रखना मुझको ज्ञान कि सागर से मुझको आशीष समर्पित करते रहना गुरू वन्दन चरणों में करता हूं शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं नई राह नई दि... »

मुक्तक

तेरी मासुमियत का मैं हूं दिवाना तेरे प्यार में फिरता हूं आवारा ना समझ मुझे जाहिल निकम्मा सनम तेरे ही प्यार से मुझे गीले हैं सितम ‌‌‌‌ महेश गुप्ता जौनपुरी »

आसमां

आसमां कि बुलंदी पर पैगाम भेजा है अपने दोस्त को मैंने सलाम भेजा है ख़त को मेरे यार को ही पकड़ना ख़त में मैं दर्द जुदाई एहसास भेजा है महेश गुप्ता जौनपुरी »

अगर होते मेरे पास पंख

– अगर होते मेरे पास पंख खुशीयो को संसार में लुटाता, तितली बन फूलो पर मडराता । फुदक -फुदक कर गीत सुनाता, अगर होते मेरे पास पंख । पतंग देख आहे हूॅ भरता, पंक्षी को देख चहकने लगता। मैं भी उडने की चेष्टा रखता, अगर होते मेरे पास पंख । हर शाम को मैं तारे गिनता, उजाले मे मैं कू – कू करता। चारो ओर सुगन्ध बिखेरता, अगर होते मेरे पास पंख । चाँद को छुने की हिम्मत रखता, अंधियारे को दूर भगाता। चाँद क... »

मित्र प्रेम

लघुकथा-मित्र प्रेम दुनिया में अगर कोई उदाहरण है तो मित्र प्रेम उदाहरण सबसे मर्मस्पर्शी है ।बात उन दिनो की है जब कुलदीप और प्रवीण साथ -साथ ग्रेजुएशन की डिग्री ले रहे थे ।तो देखते बनता था उन दोनो की मित्रता साथ – साथ कालेज आना साथ -साथ बैठना,खेलना,पढाई करना इन दोनो की मित्रता का पुरे कालेज मे चर्चा होती थी । धीरे – धीरे समय बीतता गया और एक दिन वह दिन आ ही गया ।जब दोनो ने ग्रेजुएशन की डिग... »

मानव क्यो तू बदल गया

कविता – मानव तू क्यो बदल गया समाज वही प्यार वही, सोच समझ की भावना । अत्याचारी हो गये हम सब, मानव तू क्यो बदल गया । रंग वही हैं अपने देश की, अभिनेता नेता हो गये। धोखाधडी की राहो मे, मानव तू क्यो बदल गया । जुर्म हो रहा खुली आसमान तले, भष्टाचारी के आह से। आॅखे खोले देख रहे हैं, मानव तू क्यो बदल गया । हर शाम प्याले का जाम, सुबह जुवारियो का संसार । हर पल हैं मुसीबत का कहर, मानव तू क्यो बदल गया । ... »

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