महेश गुप्ता जौनपुरी, Author at Saavan - Page 3 of 14's Posts

सारथी

सारथी ना जीत में ना हार में हैं मजा बस प्यार में कदम कदम बढाये चलो राह से ना तुम हटो हे बलशाली हे दयावान सत्य वचन पर‌ डटे रहो कलयुग कि धारा को अन्ततः खदेड़ दो भाव बुध्दि के समर्थ से वीर तुम लडे चलो महेश गुप्ता जौनपुरी »

मेरा अभिमान हिन्दी

मेरा अभिमान हिन्दी

सख्सियत को अपने टटोल रहें अंग्रेजी में हिंदी का गुणगान करते छिप कर बैठे है ए बी सी डी में अपने मासूम परिंदों को हिंदी का ज्ञान दो सर्वश्रेष्ठ भाषा का वाणी पर मृदु भाष दो हाय हैलो का नकेल कसकर चरण स्पर्श का संस्कार दो जूझ रही है हिन्दी दबकर अंग्रेजी के गलीयारें में एक्का दुक्का संभाल रखे है कमान हिन्दी की पहचान का गीता रामायण महाभारत ग्रंथ सभी है विलुप्त के कागार पर अंग्रेजी शिक्षा से बढ़ रहा है हि... »

मुक्तक

अनजाने से संसार में खुशीयों को लो बटोर अपने पराये में ब्यर्थ ना करो रिस्ते का डोर समय बहुत मुल्यवान है करते रहो तुम प्रेम सहज ही उत्पत्ति होगी भाई बंधू का प्रेम महेश गुप्ता जौनपुरी »

चन्द्रयान

चन्द्रयान गिरते सम्भलते उठते रहेंगे चांद की गली में पहुंच कर रहेंगे सम्पर्क टूटने से रिस्ते खत्म नहीं होते कामयाबी की सीढ़ी चढ़ कर रहेंगे हौसले में अभी जान है बाकी दिपक बुझने से रोशनी मर नहीं जाती प्रयास प्रयोग करते रहेंगे सफलता की पर पहुंच कर रहेंगे असफलता ही तो हैं सफलता की सीढ़ी एक ना एक दिन सफल होंगे चांद की सुन्दरता का राज एक दिन हम पढ़ कर रहेंगे कोशिश रहेगी चन्द्रयान 3 में लक्ष्य को हम भेद क... »

मासुम

मासूम छोटे से नन्हे हाथो में घडा आ गया, ये बचपन समझदारी में बदल गया । हाथो में खिलौनो के जगह, कन्धो पर जिम्मेदारी आ गया । छोटे से नन्हे हाथो में घडा आ गया, मासूम को देखकर दिल भर गया । महंगाई बेवसी से गस्त खाकर, बचपन ना जाने कहा खो गया । छोटे से नन्हे हाथो में घडा आ गया, बचपन की शरारत ना जाने कहा खो गया। होठो पर मुस्कान देखा, दिल मेरा रूदन सा हो गया । महेश गुप्ता जौनपुरी मोबाइल- 9918845864 »

मुक्तक

मैं कतरा कतरा बिखर जाऊं मुझे गम नहीं मैं देश के लिए कुर्बान हो जाऊं मुझे गम नहीं मेरी ख्वाहिश है बस इतनी मेरा साथ देना दोस्तो मैं मर कर भी देश के लिए काम आऊ यही तमन्ना है महेश गुप्ता जौनपुरी »

मां

एक एक खजाने को लुटा कर मां आज आबाद बैठी बेटे के राज में मां आज उदास बैठी है ये कैसा है बड़प्पन कैसा है प्यार झोली में अब ना रहा प्यार बेटा तो हो गया पत्नी का गुलाम महेश गुप्ता जौनपुरी »

मुक्तक

लुटा मैं आज खजाना आबाद बैठी हूं तेरे रहमों करम से मैं बर्बाद बैठी हूं जरा सी इज्जत बची हो तो लगा लेना गले से नहीं तो मैं जिल्लत कि ज़िन्दगी अपना बैठी हूं महेश गुप्ता जौनपुरी »

मुक्तक

बचपन लड़कपन की याद अभी वही हैं रिस्ते में दोस्ती की मिठास अभी वही हैं चन्द पल की ही तो दुरी हुयी हैं ऐ दोस्त मिलेगें फिर उसी गली में महफिल जमाने महेश गुप्ता जौनपुरी »

मुक्तक

वतन की मिट्टी पर हमने पैगाम लिख दिया, अपने वीर जवानो की पहचान लिख दिया, जो धर्म पर बँट गये वो गद्दार निकल गये, जो देश के लिए कुर्बान हुए जवान निकल गये, महेश गुप्ता जौनपुरी »

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