महेश गुप्ता जौनपुरी's Posts

आप भले जग भला

आप भले तो जग भला का, आलाप रटते सुबह और शाम। बड़ी बड़ी करके बातें ज्ञानचंद, बैठ कर ठेके पर पीते जाम।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

बहते पानी

बहते पानी में हाथ मलने वाले बहुत हैं, सेखी बघार कर इठलाने वाले बहुत हैं। टांग बझाकर खिंचना फितरत है इनका, बच कर रहना संसार में दोमुंहे सांप बहुत हैं।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी »

घर जले

इंसान में टसन की अग्नि बहुत है, बढ़ते कदम को रोकने की जहोजहत बहुत हैं। किसी का घर जले तो तापने वाले बहुत हैं, सुखी परिवार को देख कर जलने वाले बहुत हैं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

जिंदगी मेरा

मत जलाओ अपनी जिंदगी ये दोस्त, प्यार मोहब्बत में पड़कर मेरे दोस्त। अपने हुनर को परख कुछ पेड़ रोप दो, छांव फल देकर शीतल तुम्हें करेगा दोस्त।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

कर्ण

महादानी कर्ण ने दान किया कवच और‌ कुण्डल, बाधाओं से लड़कर हार कभी ना माने। सूर्य का उपासना करके अटल रहे वचन पर, दिव्य शक्ति देकर इन्द्र को महादानी कर्ण कहलाये।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

नौ कि लकड़ी

नौ की लकड़ी नब्बे खर्च हुआ इस लाकडाउन में, कोरोना के प्रहार से फिसल गये महामारी में। पेट के लिए भाग दौड़ लगाते जान पर बाजी लगा, टेट को भरकर रखने वाले कंगाल हुए महामारी में।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

संस्कार

संस्कार बदलते दौर के साथ बदल गया संस्कार पैसे की होड़ में बिक कर रह गया संस्कार पैर छूने की परम्परा है विलुप्त के कगार हाथ जोड़ अभिवादन का चला है संस्कार मां बाप के संस्कार का फिल्म धज्जियां उड़ा रहा दमन करके संस्कार का समाज से मिटा रहा सोशल मीडिया के प्रचार से संस्कार दम तोड़ रहा शमन करके संस्कार का हमें जिंदगी से बरगला रहा बचपन जवानी बुढ़ापे का मिट रहा है अब संस्कार दादा दादी का लाज लिहाज मिटाकर... »

किरादार

अपने अपने किरदार निभाकर, मार भगाओ कोरोना को । सांस लेंगे कोरोना को भगाकर, ये ठान लिया है अब हमने ।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

सफर मेरा

चलते चलते सफर पर, हमसफर को ढूंढ लिया। तेरा साथ पाकर मैंने, जग को मैंने जीत लिया।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

ललकार

अभी अभी तो ललकारा है, युध्द अभी भी बाकी है । सम्भल जा तू अत्याचारी, अभी तेरा अंत बाकी है।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

द्रोपदी

भरी सभा में कुलेल ना करता, द्रोपदी को बीच सभा में तो । युध्द का प्रचंड नौबत ना आता, दुर्योधन नारी को अगर देवी समझता।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

सफर

चलते चलते राहों में मिला मुझे हमसफर, सुख दुःख को बांटकर किया सांझा दर्द को। मिला मुझे अनोखा तोहफा हमसफर, भूल गये हम सारे मुसीबतों के मर्ज को।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

उडान

मेरे उड़ान को पंख लगा दो, मेरे सपनों को उजागर कर दो। दिल से दिल का रिश्ता जोड़कर, मुझे अपना हमसफर बना दो ।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

मेरा राह

मेरे राहों के हमसफर हो तुम, दोस्त कम हमसफर ज्यादा हो तुम। संग संग जो तुम मेरे रहते बनकर दीप, परछाई में साथ निभाते हमसफर हो तुम ।। ✍🏻 महेश गुप्ता जौनपुरी »

रिश्ता

रिश्ते का बागडोर संभाल, हमसफर को चुन लिया। तुम्हें देख हो गया कंगाल, अब लो मेरे हमसफ़र संभाल।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

मरते दम

हाथ को पकड़ा है हमसफर का, तो साथ निभाऊंगा मरते दम तक हमसफर का। तुम साथ छोड़ने की बात ना करो हमसर, हम दिल से साथ निभाते हैं हमसफर का।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

हमसफर

हमसफर तो मैंने लिया है चुन, साथ निभाते रहना मेरे साथी तुम। रिश्तों में कोई खटास पनपे तो सुन, हक से निपटारा करना मेरे हमसफर तुम।। ✍🏻 महेश गुप्ता जौनपुरी »

सफर

सफर में चलने के लिए हमसफर चाहिए, दिल से दिल का रिश्ता जोड़े दिलवर चाहिए, अपनों को अपनों से जो जोड़कर रखें, सुख दुःख में साथ निभाये ऐंसा दोस्त चाहिए।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

ठोकर मार

फूल खिले हैं तब जब हमसफर मिलें, रिश्तें जुड़े हैं तब जब प्यार मिलें। ठोकर मार गिराने वाले हैं बहुत, दोस्त समझ साथ निभाने के लिए मिलें।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

युध्द

युध्द को कब तक टाला जायें, भाले को कब तक संभाला जायें। रिश्तों को कब तक पाला जायें, युध्द लड़कर अब विराम लगाया जायें।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

पथिक

पथिक ही सही हमसफर तो बनोगें, मेरे जीवन के दोस्त तो बनोगें। राह दिखाकर मेरे संग तो चलोगें, मुझे अपना समझ गले तो लगा लोगें।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

त्रिशुलधारी

त्रिशुलधारी भोले भण्डारी काशी के अविनाशी, डम डम डमरू बाजे मदमस्त नाचे काशीवासी। गले में सर्प का माला धारण किये भोले भण्डारी, झूम झूम कर गा रहें है पृथ्वी लोक के वासी ।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

फैशन

कहां थे और कहां हम पहूंच गये, माडर्न के चक्कर में सब कुछ भूल गये। पीढ़ियों का अन्तर ना हम समझ सकें, फैशन के दौर में बहुत कुछ खो गये ।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

झूठ

झुठा मैं नहीं कुछ लोग हो गये है, अहम में सब आगे बढ़ गये है । कौन अब किसे समझाये भला, सब अब समझदार हो गये है ।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

बदलता दौर

बहुत कुछ बदल दिया बदलते दौर ने, रिश्तें की मिठास और अपनों का प्यार ने। पीढ़ी दर पीढ़ी चली एक नई सोच लेकर संग, आज की सोच को बदल दिया आपने।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

महाकाल

सदैव हाथ रखते अपना भोले भण्डारी, करूणा निधान है मेरे भोले बाबा भण्डारी। काशी के है रखवाले भक्तो के है प्यारे, हर हर महादेव नाम गुंजे काशी में भोले भण्डारी।। »

परिवर्तन

परिवर्तन ही संसार का नियम है, समझो मेरे मित्र यार । बूढ़ा बाप अब भी प्यारा है, बदल जाये भले ही दौर।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

दुःख

सबके दुःख को पल में हरते, मेरे भोले बाबा भण्डारी। नीलकंठ मनोकामना पुरा करते, बड़े दयालु मेरे बाबा है भण्डारी।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

सत्य

सत्य के राह चलते रहना, कभी ना होना दूर। मुसीबत को भांपते रहना, झूठ का दामन देना छोड़।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

तौर तरीके

तौर तरीके दुनिया दारी, नारी है सब पर भारी। नारी से ही चलता संसार, नारी समर्पण है कल्याणकारी।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

काल

ये काल की गति मेरा बचपन लौटा दें, गांव की पगडंडी खोया कल लौटा दें। बहुत याद आते है वे गुजरे हुए पल ये मेरी जिंदगी तुम मेरा अतीत लौटा दो।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

कोरोना का प्रकोप

कोरोना के प्रकोप से बिलख रहें है लोग, ऐंस की जिंदगी खत्म हुआ समझो सब लोग। भूख आज कल भटक रहा सड़कों के किनारे, क्या थे क्या हो गये इस महामारी में हम लोग।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

भूख

भूख आज कल दम तोड़ रहा, पेट का भूख लोगों को मरोड़ रहा। फिर भी बाज ना आ रहे हैं, देखो लोग घर बार झोड़ रहे हैं।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

खुशियां

मान गया जीवन एक मोमबत्ती है, आशा विश्वास का दीपक जलाती है, खुद के बदन को पिघलाकर वह खुशियां घर घर बांटती फिरती है ।। »

समर्पण

नारी त्याग है बलिदान है, नारी समर्पण की परिभाषा है, नारी मां बहन बेटी और माता हैं, नारी जग में भाग्य विधाता हैं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

नारी

अपने शब्दों में बयां करो नारी का गुणगान, नारी के दुःख दर्द को समझो ना महान। नारी को इज्जत दो करो तुम सम्मान, नारी हित में मोर्चा कर बांटो जग में ज्ञान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

विचार

सोच विचार से निकलेगा, आज कल का परिणाम। चिंता फिक्र से ही उपजेगा, आज कल का इतिहास।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

दिन

दिन प्रतिदिन हम यहीं है करते, नारी को देते उच्च स्थान । घर की लक्ष्मी मानते, करते सुबह शाम गुणगान।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी »

कोरोना योध्दा

कोरोना जैसी महामारी में, कर लो पुण्य प्रताप । बांट कर खाने का पैकेट, कवि जी बन जाओ तुम भी महान।। »

पुण्य

पुण्य का हिसाब देकर नहीं बनना पाप का हकदार, अवगत इतना बस कराता चाहता। सैकड़ों लोगों का किया भूख से निदान, तुम भी आगे बढ़कर करो कुछ पुण्य प्रताप।। महेश गुप्ता जौनपुरी »

सच

सच को आईना ना दिखाईए, झूठ को दो खदेड़ भगाय। मित्र बन्धू को दो तुम जगाए, कुछ दान पुण्य करके बन जाये सहाय।। महेश गुप्ता जौनपुरी »

भीड़

भीड़भाड़ में उलझ कर, मैं अपना अस्तित्व खो दिया हूं। शहर में आकर मैं भूल गया हूं, मेरे यार मेरे दोस्त बता दो मैं कौन हूं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

रोश

मेरे गांव की मिट्टी में रोश बहुत है, लोगों में भाई चारे का प्यार बहुत है। सोंधी महक मिट्टी की याद आती है, मेरे गांव के युवाओं में जोश बहुत है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

माली

मत मांग मुझे मैं अब हो गया हूं खाली, पहले जैसे नहीं रह गये मेरे गालों पर लाली। थक हार बेचैन सा हो गया हूं मैं दोस्त, अब मैं घास छीलने वाला लगने लगा हूं माली।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

न्योछावर

सब कुछ न्योछावर कर दिया, अब तो बख्स दे मुझे । रहम करके मेरे ऊपर दोस्त, अब मत मांग मुझे ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

मेरा गांव

मेरे गांव का मिट्टी मुझे बुला रहा है, मेरे गांव का झप्पर मुझे याद आ रहा है। मेरे मां के हाथों का ब्यंजन और लोरी, मेरा गांव इशारों इशारों में मुझे बुला रहा है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

स्ततीत्व

बचा लो अब अपना अस्तित्व, गांव शहर में बदल रहा है, याद कर लो गांव की सोंधी मिट्टी, अब शहर गांव को निगल रहा है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

जीवन की नैया

मिट्टी खजानों का अनमोल घर है, जीवन प्रदान कर रहा शहर को है। खनिज पदार्थ खाद्य पदार्थ का खजाना, मिट्टी पर ही अमीर गरीब का नजर है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

ठोकर

उलझ लेने दो मुझे मुझ में ही, पता तो चले मैं कौन हूं । अपनों से खा खा कर ठोकरें, अपने आपको मैं भूल गया हूं।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी »

मिट्टी की खुशबू

खूशबू मिट्टी की तो एक है, तड़प दिल का मित्र अनेक है। सबको याद सताता है गांव, मिट्टी के संग जुड़े प्यारे खरवास है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी »

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