खुशियों का त्यौहार है होली प्यार से मनाऐंगे। दोस्त तो आखिर दोस्त है दुश्मन को भी गले लगाऐंगे।।
खुशियों का त्यौहार है होली प्यार से मनाऐंगे। दोस्त तो आखिर दोस्त है दुश्मन को भी गले लगाऐंगे।।
रंग बरसे गगन से देख मेरे यार। आओ मिलकर मनाऐं होली का त्यौहार।।
होली में होगी ना अबकी हुरदंग। ना पानी ना कीचड़ ना दारु ना भंग खुशियाँ हीं खुशियाँ प्यार का रंग ।।
गम के आँसू सदा हीं बरसता रहा। मेरा जीवन खुशी को तरसता रहा।। मैंने मांगा था कोई ना सोने का घर प्यार की झोपड़ी को तरसता रहा। ना तुम्हारा रहा ना हमारा रहा गेन्द-सा दिल […]
“सारे जहाँ से अच्छा “जो कह दे वो इकबाल कहाँ से लाऊँ? “हिन्दोस्तां हमारा ” कह दे वो इकबाल कहाँ से लाऊँ? अपने देश को अपना कहो तो आखिर क्या घट जाएगा? ध्वजा तिरंगा के […]
सजनी है गौर और सजना क्यों काला? आओ हम खेलें खेल रंग रंग वाला। लाल से रंग दो हरे से रंग दो। नीला और पीला गुलाबी से रंग दो। रंग डालो अज बेनीआहपीनाला। आओ हम […]
सुमधुर ध्वनि मुखरित है होली के राग का। लो आ गया भैया महीना रंग बिरंगी फाग का।। धरती भी रंगीन है अम्बर भी रंगीन है। नवल कुसुम संग पत्र नवल है सुरभित जगत नवीन है।। […]
उलझन भड़ी ज़िन्दगी को सरल लिख रहा हूँ। तुम्हारे प्यार को ज़ुबान -ए-गजल लिख रहा हूँ।। एक गुनगुनाहट भड़ी आवाज़ देकर ऐ प्रीतम तेरी वफाओं के दास्तान -ए-फजल लिख रहा हूँ।।
मुझको भजन की लगन लगादे मुरारी। नाम गाऊँ मैं हर पल तुम्हारी।।
मैं करूँ मैं करूँ प्रभु तेरा भजन। भर दे भर दे प्रभु मुझमें इतनी लगन।।
एक दीप तो जला ‘विनयचंद ‘ मजार- ए-शहीद पे। देश गुनुनाएगा तेरे लिए नगमा हमीद के।।
गुल -ए-गुलाब कहता है इतना हमसे ओ प्रीतम मजार -ए-शहीद पर चढ़ा देना। खुशबूओं से,सराबोर कर दूँगा तुझको जरा मेरा भी मान बढ़ा देना।।
किसी की माशूक किसी की मंगेतर। किसी की नवोढ़ा किसी के प्रियवर।। मन का तार जोड़ के बैठी प्रिये तुम कब आओगे? वेलेंटाइन आ गया प्रिये तुम कब आओगे? भारत माँ के वीर सिपाही हमको […]
कुछ जख्म दिखाए जा नहीं सकते। घायल किया जिसको तुमने दिल चीर दिखाए जा नहीं सकते।।
इश्क़ यदि मासूम है तो बगावत क्यों होती है। ः मतलबपरस्त है तो इनायत क्यों होती है।।
मेरी मासूमियत को हथियार मत बनाना। दिल में दगा रखकर प्यार मत बनाना।। मैं तो खाके धोखा खामोश रह जाउँगा खुद को बेबफाओं का सरदार मत बनाना।।
झर झर नीर झरे नैनन से बीच हथेली रख मुखरे को। बिलख बिहारी विनती करते वो कैसे सहेगी इस दुखरे को।। देर भयो ग्वारन संग खेलत भूखा प्यासा लाल तुम्हारो। फिर भी मैया मारन चाहे […]
कान्हा तूने माटी खाई डाँट के बोली मैया। ना ना कह शीश हिलाया नटखट बाल कन्हैया।। छड़ी दिखाकर मैया बोली मूंह तो खोलो कान्हा। मुख में सारा विश्व दिखाया कन्हा मुख में कान्हा।। मायापति की […]
मनमौजी बनकर चलना ये कैसी आजादी है। बिन मर्यादा के जीना जीवन की बर्बादी है।। अनुशासन न कोई बंधन है न तुम पर कोई थोप रहा। एक सफलता की कुंजी है सुख सम्पदा सौंप रहा।। […]
किसी ने पत्ता कहा पीपल का किसी ने पान पत्र समरूप कहा। किसी ने मुट्ठी जैसा दिल माना तो कर लो दुनिया मुट्ठी में।
यूँ तो मूँह बांधकर घुमा करती हूँ डगर-डगर। पर सिर पे आँचल रखने से जी घबराता क्योंकर।।
सम्मुख अग्नि सेवन कर पीठ सेव तू धूप। रीढ़ सुदृढ़ रहे सदा कबहु घटे नहि रूप।।
जस्न- ए- ज़िन्दगी एक शौक होता है। मौत के बाद तो सब बेख़ौफ होता है।।
रितुराज वसंत के आवन पे बसुधा ने कण कण सजा लिया है । शबनम की बारिश से धरणीधर और तृण तरुवर सब नहा लिया है।। पत्र पुराने त्याग दिए बृक्ष सब नव किसलय तन चढ़ा […]
उत्तम चिड़चिड़ी मध्यम भाँटि। सब सॅ सुन्दर दोमट माँटि।।
जतऽ गाछ नञ बृक्ष। ओतऽ अंडी महाबृक्ष।।
आया है मधुमास धरा पे रंग -बिरंगी खुशियाँ लेकर। वृक्षों ने परिधान बदलकर नवल पत्र दल बगिया लेकर।। पर्वत खेत बाग सब कुसुमित धरा गगन अज रंगिया केसर। “विनयचंद “इस रितुराज का कर स्वागत दिल […]
मधुमास सुहाना आया है धरती के आँगन में। रक्तिम कुसुम सजाया है प्रकृति के माँगन में।। दुल्हन -सी है सज गई धरती अम्बर मौर सजाया। भ्रमर तितलियाँ बने बराती पर्वत ढोल बजाया।। संग मयूरी लेकर […]
सचमुच ये रितुराज है। तेरे स्वागत में प्रकृति ने वसुधा के कण कण को सजाया। बाग – बगीचा बहती सरिता खुशबू से तरुवर नहलाया।। कोमल किसलय कोमल कुसुम मदमस्त कामराज है। सचमुच ये रितुराज है।।
आया वसंत आया वसंत । बोल रहा है आज दिगन्त।। पतझर ने कहा तरुवर से बनकर किसलय आया वसंत। पत्तों ने कहा फूलों से खुशबू बनकर आया वसंत।। आया वसंत आया वसंत। बोल रहा है […]
खेतों में है फूली सरसों धनिया महके गम गम। बाग बगीचे सजे हुए हैं रंगीले पुष्पों से हरदम।। धरती को रंग डाला कुदरत ने रंगों से। हमने भी अंबर को रंगा रंग विरंगे पतंगों से।। […]
कुदरत ने रंग डाला देखो आज दिगन्त। धरती अंबर में आया मथुर रितु वसन्त।।
क्योंकर छिलका खाए कृष्णा? इतिहास हमारा क्या कहता है ? क्या मतलब है इसका कहना? एक प्रश्न मन पूछ रहा है क्योंकर छिलका खाए कृष्णा? कदलीवन नारायण को प्यारा कदली से नित होती पूजा। तभी […]
पिता बचन को मान रामजी गए वास को वन में। राम उपासक बनके भरतजी सन्यासी हो रह जीवन में।।
यूँ तो किसी के गिरेवान में मत झाँकना । झाँककर भी किसी को कम नहीं आँकना। गिरिवर उठाने वाले से बचाकर माखन क्योंकर छीका नित -नित ऊँचा टाँगना।।
माँ ! मुझे फौज में भेज दे। ना बेटा ! अपने मन को जरा परहेज़ दे।। बन जा बेटा आॅफिसर तू राज करोगे जनताओं पर। पब्लिक से नेताओं को भी नाज रहेगा सेवाओं पर।। साहेब […]
नब्ज टटोलकर देख ले निर्मोही तुम्हारे हीं प्यार में बीमार हूँ। ये दिल दे चुकी कब के तुझको सिर्फ एक दीदार को बेकरार हूँ।।
तुम्हें देख दिल मेरा चहकता है जो दुनिया देखूं तो बहकता है। तुम से है मेरी दुनिया प्रियतम तेरे दिल में मेरा दिल धड़कता है।।
ऐ फूल मेरे बाग के खुद को लपेट ले। आ रही है तितलियाँ खुशबू समेट ले।।
वक्त भी एक शिक्षक है जो देता सच्ची शिक्षा। वक्त का सम्मान किया जो नहीं मांगेगा कभी भिक्षा।।
प्यारे कभी बेवफा नहीं होते। अपने कभी खपा नहीं होते। ऐ वक्त हमसे खपा मत होना क्योंकि हम तुमसे दफा नहीं होते।।
कौन है शोषित कौन है शोषक कैसे फर्क करोगे? स्वर्ग द्वार भारत को कैसे नर्क कहोगे? बस में सफर करते हुए यही बात मैं सोच रहा था। भरे सीट थे सारे उसके फिर भी सवारी […]
चंदन ! तुम सर्प लपेटे रहते हो। तुम शीतल हो तुम निर्मल हो, खुशबू तेरे भीतर है। वैर नहीं है तुम्हें किसी से हृदय बड़ा पवितर है।। मलयाचल पर बने तपस्वी दूर अकेले रहते हो। […]
नब्ज देख के बतला दो मुझे कौन-सा रोग है। दिल में तुझे बसाकर भी आखिर क्यों वियोग है।।
कोना पठाएब सनेश। पिया मोर नञ जाऊ विदेश।। चिट्ठी लिखब कोना छी हम असमर्थ। फोनक खंभा ठार बनल छै बेअर्थ।। मोबाइलक नेटवर्क रहय अछि नञ लेश। पिया मोर नञ जाऊ विदेश।। कौवा कबूतर केॅ डाकिया […]
पानी और दूध की दोस्ती है अनमोल। “विनयचंद “ये साथ हो बिके एक हीं मोल।।
पानी और दूध का एक नहीं रंग रूप। आकर दोनों साथ में बन जाये समरूप।।
काट दो कुल्हाड़ी से फिर भी खुशबू हीं दूँगा। मैं तो मलयाचल का चंदन हूँ कुछ भी दाम नहीं लूँगा।।
दिल से स्वागत करो सभी साल ट्वेंटी ट्वेंटी का। बीत गए वो दिन बन्धुओं किसी के फोर ट्वेंटी का।।
दिल में खुशी हो और होंठों पर हँसी हो जीवन बीते आपका सदा सर्वदा हर्ष में। मंगल हीं मंगल हो और सुखकारी बीते हर दिन हर पल हर मास इस नव बर्ष में।।
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