कर ले राम भजन रे भाई। राम भजन की महती महिमा वेदों ने है गाई । तड़े अजामिल गणिका तड़ गई तड़ा सदनकसाई।। ध्रुव प्रह्लाद विभीषण सबरी सतानंद की माई। राम राम कह जरठ जटायु […]

हे घनश्याम गोपाल मुरारी। मेरी सुधि लो गिरिवरधारी।। दीनबंधु करुणा के सागर। भगतबच्छल प्रभु आरतहर।। जगतपति जगतारनहारी, मेरी सुधि लो गिरिवरधारी।। तेरी कृपा बरस रही निश-दिन। बाहर-भीतर किनमिन किनमिन।। दो बूंद का चातक ‘विनयबिहारी’, मेरी […]

शेषांश,,,,,,,,, दो रुपये का ब्लेड भला दाढ़ी काटे फिर उग आये। मुट्ठी एक चना से भूखा अपनी भूख मिटा पाए।। लो मैडमजी आ गए हम महिला काॅलेज के द्वारे। दस के बदले बीस रुपये देने […]

बढ़ी हुई दाढ़ी थी उसकी फटा पुराना कपड़ा था। सुन्दर सुखद सुशील सलौना रिक्शावाला तगड़ा था।। कह के बैठ गई रिक्शा में महिला काॅलेज चलो भाई। खींच खींच के चलने लगा वह ओवरब्रिज की चढ़ाई।। […]

जालिम हमें हमारी दिल की गुमान दे दो। रखो जमीन अपनी कुछ आसमान दे दो।। जज़्बात की ये कैंची मेरे पंख पे चलाके। पंगु बना न देना जालिम करीब आके।। मत छीन जिन्दगानी ना मौत […]

रावण का पुतला जला जला अम्बर को काला कर डला। अहंकार का पुतला जला न पाया खुद को रावण कर डाला।। सत्य धर्म के ख़ातिर वन-वन भटके नारायण। जिनकी दिनचर्या कथा रुप में लिखा गया […]

निज आंगन में बैठा- बैठा देख रहा था चन्द्र वदन को। धवल सुशीतल चन्द्रकिरण ने नहलाया बसुधा के तन को।। सुधा सुधाकर बरसाए पर निज मस्तक न धो पाए। दाग चढ़ा कैसा माथे पर अंखिया […]