जंग- ए-आजादी के हमसफर अब काहे को मतभेद है। कूपहि भंग पड़ी है भैया यही भाव कचोट रहा यही दिल की खेद है।।
जंग- ए-आजादी के हमसफर अब काहे को मतभेद है। कूपहि भंग पड़ी है भैया यही भाव कचोट रहा यही दिल की खेद है।।
दो मित्रों का जोड़ा भैया अमर इतिहास बनाया था। एक थे ब्राह्मण एक मुस्लिम थे रिश्ता खास बनाया था।। जंग- ए-आजादी में कूद गए थे राम -लखन की जोड़ी बनकर। “सरफरोशी की तमन्ना “गाए फिरते […]
‘ज’कार जन्मविच्छेद करे ‘प’कार करे पाप का नाश। नाम जपो रे राम जपो सब सुलभ सदा साकेत निवास।।
घर से तू बाहर न निकलो जनाब हर गली में कोरोना का पहरा है। हाथ धोओ रे साबुन से बारम्बार हर गली में कोरोना का पहरा है।। नाक मूँह पर लगाओ हमेशा नकाब हर गली […]
लहर उठी वैराग्य की , अरु हरिदर्शन की भूख। धन सम्पति सब लुटा दिए कुटिया तक दी फूक।।
नेता से अभिनेता अच्छा ये मेरा मन भी कहता है। कभी हँसाए कभी रुलाए कभी उपदेशक बन कहता है। नेता से अभिनेता अच्छा है ये मेरा मन भी कहता है।। कभी दिलाए गुस्सा और कभी […]
दुनिया रुपी रंगमंच पे नाटक निश-दिन होता है। कभी प्यार है, कभी पछाड़ है। नाचे गाए कोई कोई हँसता रोता है।। नाटक के इस पृष्टभूमि पर सकल जीव अभिनेता है। कोई बना किसान यहाँ पर […]
घर के भीतर बैठे हैं हम डरकर नहीं कोरोना से। रहे स्वस्थ समाज हमारा बचकर आज कोरोना से।। पीठ नहीं हम दिखा रहे हैं लड़कर जीतेंगे कोरोना से। ‘विनयचंद ‘रहे देश हमारा सुखी सुरक्षित नित […]
धवल चन्द्र सम उसका चेहरा । कनक कपोल पे एक तील का पहरा। अरुण अधर अनार कली सम।। भृकुटी कमान नजर शर शोभित । कुहू कुम्भ लट घुर्मित केशपाश से शोभित। भधुर बोल बड़ मधुर […]
दशरथ के घर जन्मे राम पर आनन्द अवध में छाया है। केवल कौशल्या कैकेयी नाहीं हर घर हर नर मंगल गाया है ।। हुआ विवाह राम का जब से घर-घर मधुर सुमंगल छाया है। वनवासी […]
प्रभु का नाम जप ले प्राणी। तेरी दो दिन की जिन्दगानी।। एक दिन बीता खाते-पीते। रात भी बीती सोते-सोते।। नया सबेरा पाकर भैया क्यों करता रे आनाकानी।। तेरी़़़़ दिन दुपहरिया साँझ बीतते ना देर लगेगी […]
मधुमास बिगत माधव बड़ आयल। नवल हास परिहास जग छायल।। फूल खिलल बगिया में देखू आमक गाछी टिकुला सॅ छायल। कटहर कोचरल जामुन मजरल गन्ध सुगन्ध चहुदिश छायल।। “पिया -पिया “जौं पपिहा बाजय झणिक उठल […]
कोई पी के जहर भी अमर हो गया। किसी का जीवन भी यारों जहर हो गया।। मौत आई थी जिसकी़ वो मर न सका। मौत की सब गलियाँ और शहर हो गया।।
फिक्र कहाँ उस रस्सी को जान किसी के जाने को। गले लगाया जिसने उसको मरने को छोड़ दिया दीवाने को।।
एक कांच का टुकड़ा दर्पण बनकर सबका रूप दिखता है। बना कांच एक चूड़ियाँ जग में बनिताओं का दिल हर्षाता है।। ये कांच कांच है ‘विनयचंद ‘सुन कांच पे आंच न आवे । साहित्य जगत […]
नजर तुम्हारी देख रही है मुझको चिलमन के पार से। एक दीदार तो दे दो जानम मैं भी तो देखूँ तुझको प्यार से।।
क्रोध न करना कभी उन पर जो सत्य दिखाने वाले हैं। नाजुक कांच है दर्पण में जो शक्ल दिखाने वाले हैं ।।
हटा दो चिलमन बीच से नजरे दीदार माँगती है। नफरत न करना मुझ से ये रूह प्यार माँगती है।।
खुद से रुबरू होने के लिए दर्पण की जरुरत होती है। खुदा से रुबरू होने के लिए समर्पण की जरुरत होती है।।
मैं तुझे ढूँढता रहा भटककर अग जग में। तुम हो कि भटक रहे हो मेरे रग रग में।।
एक फूल खिला है प्यार का देखो आज काँटों के बीच। मुश्किल लगता है पाना देख रहा हूँ अँखियाँ मीच।। घूर घूर के देख रही है आखिर क्यों दुनिया सारी। ‘विनयचंद ‘परवाह करे क्यों जो […]
कहर कोरोना का छाया है देखो आज संसार में। त्राहि त्राहि कर रही है दुनिया आओ प्रभु अवतार में।। रक्तबीज का रक्त धरा पर टपक दैत्य बन उत्पात किया। कतरा कतरा पीकर काली दुष्ट दैत्य […]
कुछ दिन रहेंगे घर में आइशोलेट। नहीं करेंगे बाहरी दुनिया से हम भेंट।। मुख पर मास्क हाथ दस्ताना। फिर भी नहीं कोई हाथ मिलाना। धोओ हाथ करो सेनेटाईजर। हल्दी तुलसी सेवो अक्सर।। सूझबूझ और धैर्य […]
घऽरे में रहबय कतेक दिन पिया ई कोरोना कें डऽर सॅ। बाल बच्चा सुरक्षित रहथि सदा तेॅ न निकसब घऽर सॅ।। भुक्खल नेना भुक्खल हमसब जीबय कतेक दिन। अमृत समान दूध पानि सॅ काटब कुछेक […]
हाय कोरोना हम खबरदार हो गए। लो अपने हीं घर में तड़ीपार हो गए।।
घर के बाहर मत जाना कोरोना मिल जाएगा। घर के भीतर बन्द रहो जीवन सोना मिल जाएगा।।
बाहर जाकर कोरोना का सौगात नहीं तुम लाना। बेशक आधा पेट हीं खाकर घर में तुम सो जाना।। खाना आधा पेट से प्राण चले नहीं जाऐंगे तेरे। अपना और अपने की जान सुरक्षित रहेंगे तेरे।।
निज गृह भीतर बन्द रहो मन जीवन के आगोश में। कहर कोरोना का छाया है वरना रहोगे अफसोस में।।
जल हीं जीवन है जल को ना बर्बाद करो। जीवन का आधार है जल को ना बर्बाद करो।। जल बिन मछली तड़पेगी धान पान सब कहाँ रहेंगे। नदी तालाब और कुआँ बिन स्नान ध्यान फिर […]
चमक उठा जब चांद गगन में कोटि सितारे टीम -टीम रह गए। सूरज के आने से पहले हीं सब के सब ये मद्धिम रह गए।। लाख हौसला हो जुगनू में अन्धकार कब मिटा सका है। […]
ये कैरोना कहाँ से है आया बलम। मौत बनके जगत में है छाया बलम।। जूठ खान-पान से पनपे ये बिमारी सनम। अशुद्धि में पले -बढ़े है ये बिमारी सनम।। ना जूठा खाऐंगे ना जूठा पीऐंगें। […]
वन-वन भटका खोज में, गूलर के फूल के। आखिर खोज न पाया मैं सिवा एक उसूल के।। फूल नहीं होता इसमें होते केवल फल अगणित। बिन फूलों के फल कहाँ से बोलो आए अगणित।। जैसे […]
मैं बनूँ फूल बगिया का तमन्ना है यही है मेरी। भला हो मुझसे जगिया का तमन्ना है यही मेरी।। बीच झाड़ी लताओं के लाल पीले गुलाबी -सा। हरे उपवन की हरियाली में मस्त झूमूँ शराबी-सा।। […]
देखो रितुराज ने अपने हाथों कैसे प्रकृति का सिंगार किया। रंग बिरंगे फूलों से कुदरत का रूप सँवार दिया।। हार गले में गेन्दा के और कर कंगन कचनार दिया। बेली चमेली जूही के बालों में […]
लौहपुरुष नहीं मैं फिर भी फौलाद हूँ। आखिर भारत माँ का जो औलाद हूँ।।
अँखियों का रंग अँखियों में जो डाल दिया। फिर क्योंकर हाथ गुलाल लिया
आशा रख वावरी ! वो आऐंगे। तेरे तन मन को रंग जाऐंगे।।
जो लेके आओगे तू बाल्टी मैं भी रखूँगा सरोवर तैयार। रंगों से नहाएंगे साथ साथ यार।।
रंगों की बाल्टी और गुलालों की झोली। लेके आऐंगे तेरे घर ,मनाने हम होली।।
तिलक पसन्द होली है अपनी आकर तिलक लगा देना। प्रेम पर्व होली है इसको प्यार से सब मना लेना।।
बाल हत्या का ले के विचार ‘ हो गई अग्नि में होलिका सवार। उड़ गई वरदान की चादर अजर रहा बालक प्रह्लाद जल गई होलिका हो तार तार।।
नफरत भरे मन की होलिका न जलाई। तो तुमने क्या खाक होली मनाई।।
जल गई होलिका धू धू करके कैसे आज चौक में। ऐसे हीं जलते हैं दुष्ट भक्त जलाने के शौक में।।
होलिका दहन में हम वैर भाव जाएंगे। कल निर्मल हृदय से होली हम मनाऐंगे।।
नारी तेरे मान को आखिर जग क्या लिखेगा? कलम भी तू है काॅपी भी तू है। सरस शब्द कविता भी तू है।। तू वाणी विद्या बद्धि की सरिता सम किताब है तू। तू हीं शारदे […]
मातृशक्ति को समर्पित नारी का तू कर सम्मान। नारि बिना ये जगत मशान।। नारि है विद्या नारि है बुद्धि धन दौलत की नारि है खान।। नारी का सब कर सम्मान। नारि बिना ये जगत मशान।।
देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।। कण-कण में नया उल्लास है। आज धरती बनी रे खास है।। लाओ रंगों की भर-भर झोली। सब मिलकर हम खलेंगे होली।। देखो आई सुहानी होली। कैसी […]
कहीं पिचकारी का धार कहीं रंगे गुलाल। कहीं फूलों की होली कहीं हुरदंगे धमाल।। कहीं होली लठमार फिर भी प्यार का त्योहार। प्यार हीं प्यार ।। होली में यार।।
राम कह लो या कह लो तू श्याम। जब तक मन शांत नहीं तेरा सुन वावरे ना हीं सुख ना हीं शांति ना हीं मिलेगा आराम।।
रंगों का त्योहार मनोहर होली आई होली आई। प्रेम प्रसून के गुलदता ले होली आई होली आई ।। दया का पानी प्रेम के रंग को दिल दरिया में घोलो रे। मधुर मनोरम मस्त मिठाई भर […]
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