कभी इन राहों पर भी आया करो… क्या ये भी बैरन हैं तेरी मेरी तरह….
कभी इन राहों पर भी आया करो… क्या ये भी बैरन हैं तेरी मेरी तरह….
कोई तकलीफ नहीं है हमको उजालों से बस ज़िन्दगी के अँधेरे से डर लगता है रोज़ ही रूठना रहता था तुम्हारा भी बिछड़ने में गम ना होगा चलो अच्छा है तुम भी कहां रहे हो […]
नकाब चेहरे पर लिपटा है शोख लगता है…. ये उतर जाता तो बा-खुदा क्या आलम होता….
हम भी ताजमहल बना सकते हैं पर क्या करें:- हमसे रिश्तों की कब्र नहीं खोदी जाती
क्यूँ मुझसे नज़रे चुराते हो क्यूँ अपना प्यार छुपाते हो नींद नहीं आती तो फिर क्यूँ मेरे ख्व़ाब सजाते हो
वो बैठते हैं आजकल मेरे रकीबों के साथ जिनके हाथों में रहता था मेरा हाँथ बुरा नहीं लगता है मुझे पर अच्छा भी नहीं प्रतीत होता है क्या करूँ दिल दिल ही दिल में रोता […]
आज सोंचा जाकर उनसे थोड़ी गुफ्तगू कर लूँ तभी पीछे से उनकी भाभी आ गयीं हाय तौबा!
ना वास्ता किसी से रखते हैं लोग…… फिर जाने क्यूँ जिन्दगीं से खेलते हैं लोग….. हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं क्यूँ तैश में ही अक्सर रहते हैं लोग….. किसी की ज़िंदगी से […]
गलतफहमियों के बीज अविश्वास से पनपते हैं अधसुनी बातों को लोग पूरा सच समझते हैं बड़े तो हो चले हैं हम अपनी नजरों में प्रज्ञा ! ना जाने लोग क्यों मुझे अभी छोटा ही समझते […]
चौसर खेलने वाले भी जग में पूजे जाते हैं राज़-काज,अनुज,पत्नी और प्रजा सर्वस्व दांव पर रखकर भी एक भी बाजी ना जीते सर्वस्व हार ही जाते हैं समय की विडम्बना देखो ऐसे लोग भी धर्मराज […]
आसमां तो है सबका मगर मुझे हकीकत की जमी पर रहने का जुनून है
उनकी बगिया की बहार देखती ही रह गई कली जो खिली थी धूप की तपन में मुरझा गई …… अंजुमन में कितने मशरूफ थे तेरी स्मृतियों के अवशेष बातें बहुत-सी हुईं रह गए बस वचन […]
बिछड़ने से जरा पहले तुम्हें कुछ याद है हमदम तुम आये थे मुझसे मिलने बिछड़ने के इरादे से
सिले हैं होंठ मेरे उसूलों के धागों से पर क्या करूँ मेरे उसूल ही मेरे जीने का बहाना हैं…..
हाँथ फैलाकर मैने कभी कुछ भी नहीं माँगा पर तुझे पाने की चाहत कयामत तक रहेगी
हाँथ फैलाकर खुदा से कुछ भी नहीं माँगा मैने आज तक मगर ए हमदम! तुझे पाने की चाहत कायनात तक रहेगी
मन करता है… कि जी लूं कभी अपने हिस्से का जीवन कुछ न सोचूं न ही कुछ समझूँ। बन यायावर … देखूँ सब कुछ चहुँ दिशाओं मे कुछ न माँगू न ही कुछ जानूं। मन […]
जिसे हम भूल जाते हैं खुदा भी रूठ जाता है चैन उसको नहीं मिलता लोग भी मुँह चिढ़ाते हैं
मेरा प्रेम तुम्हारी स्मृतियों से अतृप्त है अभी कुछ और समेटना है मुझे सफ़र के लिए
ए काश !मेरा प्यार भी कोरोना जैसा होता हम उन्हें छू लेते और उन्हें भी हो जाता
दूर जाने का उन्हें एक और बहाना मिल गया है कोरोना वायरस अब मेरी मोहब्बत पर भारी हो चला है
ना तुम कुछ कहो ना हम कुछ सुनें बस खामोशियों को खमोशियों से बात करने दो
ये सन्नाटा चुभता है मेरे दिल को तुम्हारा बोलते रहना ही अच्छा लगता है
वो भी दिन थे _________ क्या पल छिन थे जब तुम मेरे हुआ _____________करते थे गीत गुनगुनाते थे प्रेम के लफ्ज़ हुआ करते थे ——‐————- रिमझिम बारिश की फुहार में भीगते थे बदन ——————— होंठो […]
कभी मायूस होती हूँ कभी बेचैन होती हूँ मगर तेरी मोहब्बत में डूबी दिन-रैन होती हूँ, कभी बातें कभी यादें कभी तन्हाई में तुझको भुलाकर सब ओ मेरी जान सिर्फ तुझमें ही खोती हूँ । […]
आज पिघली-पिघली है देखो पथ्थर की दीवार बन्धु,सखा,माँ-बाप सभी छूट रहे हैं विडम्बना देखो समय की कुछ बिछड़ रहे तो कुछ रिश्ते जुड़ रहे हैं जिस आँगन में खेली- कूदी वही छोड़ कर जाती है […]
आज कुछ बदला- बदला मिज़ाज है दिल भी बेताब है ——————– सिसकियाँ भी खामोश हैं लफ्जों में मिठास है ———————- गूंजती जा रही है गलियों में शहनाई ——‐‐‐————– बींद के इन्तज़ार में बीती जा रही […]
तुम लाख बिठा लो पहरे तुम्हारे दर पर आऊंगी जरूर !! ना उतरा है ना उतरेगा कभी तेरी आँखों का सुरूर !!
जब शोर मचा होता है दिल में खामोशी अच्छी लगती है ————— रात होती है ख्वाबों में तो मायूसी अच्छी लगती है ————— गूंजती है जब बेचैनी तो खामोशी अच्छी लगती है —————-
किसी को मिलती है जन्नत की रौनक किसी के आशियाने में अँधेरा पसरा हुआ है खुदा से पूंछ्ना है मुझे
मेरे ह्रदय में स्पंदन होता है हे राम! अब हर दम होंठो पर बस नाम तुम्हारा होता है
दर्द के रिश्ते यूँ ही नहीं निभाये जाते मुस्कुराना पड़ता है ——— गहरे जख्म खाने के बाद दिल में लिपटे रहते हैं गम झूँठी हँसी दिखानी पड़ती है —————— चलना पड़ता है राह पर ठोकर […]
ये दर्द के रिश्ते यूँ ही नहीं निभाये जाते मुस्कुराना पड़ता है गहरे जख्म खाने के बाद
एहसास की पावन चौकी पर भाव की मूरत बैठी है ———————- शब्द अलंकार से सुसज्जित हैं और कल्पना की आराधना होती है ———————— इसी को कहते हैं काव्य सौन्दर्य जो हर कवि की आत्मा कहलाती […]
आँचल में अपने छुपाकर वो, दुनियाँ की बुराइयों से बचाती है सारे जहान की खुशियाँ अपने दामन में लिपटाकर हमपर लुटाती है वही आँचल लाज़ बचाता है, और उसी से पसीना सुखाती है स्त्री की […]
ये कैसा वक्त है शताब्दियों सा लगता है हर पल मुझको घड़ी की सुइयां स्थिर ही रहती हैं ना जाने क्यूँ
स्त्री ऐसी वाणी है हर भाग में पायी जाती है ये तो ऐसा गीत है जो हर राग में गाई जाती है पिता और भाई के संरक्षण में रहती है संरक्षण में वह रहती है,शासन […]
तमाम जिंदगी बिता दी मैंने तुम्हें मनाने में और कितना वक्त लगेगा तुमको लौट आने में
तुमको इतनी भी फुर्सत नहीं जो मेरा हाल भी नहीं पूंछ सकते दर्द दे सकते हो लेकिन मरहम नहीं लगा सकते
संकल्प ले समाज में शिक्षा का संदेश फैलाएंगे बेटा हो या बेटी सब को एक साथ पढ़ाएंगे
करुँ कितना भी श्रिंगार पर जानती हूँ तेरे आगे कुछ भी नहीं हूँ मैं दीद जिस दिन नहीं होती तेरी चांद छत पर नहीं आता आईना जितनी दफ़ा देखूँ तेरा ही चेहरा नज़र आता
गुलशन फिज़ाओ में यूं ही नहीं महकते हैं इश्क की बूंदाबांदी से खिल उठते हैं एहसास की रोशनी से महक उठते हैं गीत यूंही नहीं बना करते दिल के जख्मों को हरा करते हैं
खुदा का वास्ता भी दिया उसे लेकिन रोक ना पाए
आज फिर मुस्कुराने की कोशिश कर रात ये कहकर छोड़ देती है
रात भर सोंचते रहे तुमको जाने कब सुबह हो गई
आसमान धुंधला नज़र आता है आईना तो वही है लेकिन चेहरा गमगीन नज़र आता है आसमान मिटती बनती रहती हैं रेखायें फिर भी नसीब बदलता ना नज़र आता है
बस मीठे शब्दों के बाण मारता था मुझे पता था वो जालिम बेदर्दी है
बस तो जाता गम हमारे आशियाने में बड़ा अफसोस है लेकिन फिर निकलता नहीं
तुम तो रस्ता ही भूल गए तुम्हारे इन्तज़ार में कोई कब तक जागे
उम्मीदों का दीया जलाकर इस आशा में बैठे हैं कल सूरज खुशियाँ लाएगा चाँद सजाकर बैठे हैं
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