मैं हर बात समझती हूं दिमाग की थोड़ी कच्ची हूं नादानियां कूट-कूट कर भरी है मुझमें फिर भी दिल की अच्छी हूँ मैं हर बात समझती हूं कल्पनाओं में विचरण करती हूं खट्टे मीठे सपनों […]

इश्क के दो पन्ने मैं भी लिखूंगी तुम्हारी याद में रात भर मैं भी जागूंगी। —————————— प्रीत की चादर ओढ़ कर अंबर के तले, तेरे सपने मैं भी बुनूँगी इश्क के दो पन्ने मैं भी […]

क्या कहूँ!! दिल में कितनी उदासी छाई है, तेरी बेरुखी मेरी जान पर बन आयी है। ———————————— मैं एक गुमशुदा सी शाम हूँ और, तू मेरी रुसवाई है। ——-‐———–‐—————- इन तूफानों के आगे, दिल में […]

”मेरा भोला प्रियतम” जिनकी नज़रों से ललित कलाएं निकलती हैं, अधरों पर राग अंगड़ाइयां लेते हैं। केशों से बसंत दुग्ध पान करती है, और रात अठखेलियां करती है जिनसे। जिनकी एक चितवन मात्र से, बिजलियां […]

आज दादी की बहुत याद आई! वो बेचैन आत्मा ना जाने कहाँ घूमती होगी…. ब्रह्मांड के किन कोनों से गुजरती होगी… कोई नहीं जानता… जब मैं भूखी होती थी तो दादी मां अपने हाथों से […]

किसने कितना फ़र्ज निभाया, किसने कितने पत्थर फेंके… हमने इस कठिनाई के दौर में, लोगों के असली चेहरे देखे… डॉक्टर,पुलिस और सफ़ाईकर्मियों में जीवन्त मानवता के लक्षण देखे… इस बुरे वक्त के अविस्मरणीय पलों में […]

आयी विपदा न कोई सहाय हुआ छूटा रोजगार बहुत बुरा हाल हुआ तुम्हारा कष्ट भी किसी ने न जाना पसीने से सींचा जिन शहरों को… किसी ने तनिक एहसान न माना सुनो लला!अब परदेश न […]

ज़िन्दगी की राहों का है ये कौन चितेरा, धूमिल -धूमिल गलियारों में है करता कौन सवेरा। घनघोर घटा से केशों पर डोले मुग्ध पपीहा, किसने उपवन रंगीन किया है ये  कौन चितेरा। अलि मंडराते पुष्पों […]

जिसका जन्म हुआ यज्ञ की प्रज्वलित अग्नि से जो द्रुपद की पुत्री कहलाई फूलों की नर्म सेज पर सोई एक दिन हुई पराई जिसके स्वयंवर में स्वयं कृष्ण जी आये वनवासी अर्जुन ही मछली की […]

हे सखी! कौनी विधि पूजई जाई । सावित्री पूजा,कईसे पूजई जाई? बरगद की डाढ़ मगाई या फिरी, बरगद के नीचे जाई। हे सखी! कौनी विधि पूजई जाई । चारि बजे ते पुलिस लागि हई , […]

नि:शब्द हूँ निस्तेज मैं मस्तिष्क के आवेश में शब्द भारी पड़ रहे कलम की स्याही से नित यह कह रहे ना उल्लिखित कर पाऊँगा मैं तेरे भाव को ना प्रकट मैं कर पाऊँगा तो मैं […]

जिनिगिया एगो खिलौनवा बा, जेकरा से सबै खेलत बिया। कौनो तड़पत बिया, कौनो रूतल बिया। जिनिगिया एगो खिलौनवा बा, जेकरा से सबै खेलत बिया। अंखियन के सपनवा , टूटल बिया। जिनिगिया एगो खिलौनवा बा, जेकरा […]

सीतापुरिया अवधी बोली:- हमका देखि बोलीं भऊजी काहे नाई सोउती हऊ तुम ? राति-राति भरि किटिपिटि- किटिपिटि फोन म का लिखती हउ तुम? हम बोलेन ओ भाउजी ! थोरी-बारी कविता लिखा करिति हन हम, घर […]

वहि घरका ना जाउ कबहुं जहां ना होइ सम्मान नीके जहां कोइ नाइ मिलइ हुंआँ जाइते हइ अपमान रूखी-सुखी खाइ लेउ बढ़िया व्यंजन छोड़ि प्रेम की छूड़ी रोटी छप्पनभोग सि बढ़िया होइ आधी राति का […]

सीतापुरिया अवधि:- राति क द्याखँइ चांद-सितारा दिनमाँ चांद निहारइ दिन भरि छोटुआ-छोटुआ कहिके अम्मा लाल पुकारइ अम्मा भई बाँवली। टूटी खटिया फटी चटाई जब अम्मा पहुड़इ चरमर-चरमर होइगइ पाई। अम्मा भाई बाँवली… घुटनन माँ तनिकऊ […]

सीतापुरिया अवधि:- राति क द्याखँइ चांद-सितारा दिनमाँ चांद निहारइ दिन भरि छोटुआ-छोटुआ कहिके अम्मा लाल पुकारइ अम्मा भई बाँवली। टूटी खटिया फटी चटाई जब अम्मा पहुड़इ चरमर-चरमर होइगइ पाई। अम्मा भाई बाँवली… घुटनन माँ तनिकऊ […]

घर में ही बैठो और रहो मौन ना करो किसी से झगड़ा ना कोई कुतर्क नहीं पड़ो किसी प्रपंच में यदि रहना है सुखी तो बढ़ाओ अपनी सहनशक्ति को और बटाओ हाँथ घर के काम […]

किसी का दम निकलता है घर में तो कोई सड़कों पर मारा-मारा फिरता है भूंख लगती है तो सिर्फ प्यास बुझा लेता है इतनी धूप में सब घर में बैठे हैं तो कोई सड़कों पर […]

…नंबर अच्छे आये।) अब आगे… एक दिन मैने उससे पूँछा कोई ज़िंदगी में है तुम्हारी? उसने कहा नहीं । मुझे पता था की वो किससे प्यार करता है ।वो मेरा बहुत अच्छा दोस्त बन गया […]

कॉलेज का पहला दिन था थोड़ी देर से गई क्लास में जाकर बैठी,शिक्षाशास्त्र पढ़ाई जा रही थी । सब मुझे देख के अचंभित थे।बहुत सवाल थे सबके मन में..टीचर के जाते ही सबने मुझे आ […]

प्रस्तुत है हाइकु विधा में रचना :- जिसका जो हो कर्म करे मानव ना करे चोरी जीत ले बाजी हर दांव की वह ना थके कभी संघर्ष करे नित जीवन में वो ना रुके कभी […]

प्रस्तुत है हाइकु विधा में कविता:- मजदूर हूँ पैदल चल पड़ा घर की ओर विपदा आयी सबने छोड़ दिया मौत की ओर आशावादी हूँ खुद ही जीत लूँगा यह युद्ध भी तुम कौन हो? समाज […]

यूँ कहना तो बड़ा आसान है भूल जाना सारे बन्धनों को जाति -पाति को छोड़ देना परंतु सच्चाई यह है की जाति- पाति के ताने-बाने हमने ही बनाये हैं और उनको हम ही पोषित करते […]

एक बाद कहूँ गर सुनते हो तुम मुझे अच्छे अच्छे लगते हो जब होते हो नाराज़ कभी तो प्यारे प्यारे लगते हो एक बात कहूँ गर सुनते हो तुम मुझे भोले -भाले लगते हो

कहीं खो से गए हैं सपने और जाग पड़ी हैं नींदे लॉक डाउन में जैसे सहम गये हैं जीवन के माइने कहीं रिश्तों की डोरी ने मजबूत हो रही है तो कहीं टूटने लगी है […]

धृतराष्ट्र की महत्वाकांक्षाओं ने ही बीज बोया महाभारत का धृतराष्ट्र आंखों से अंधे थे उन्होंने दुर्योधन के व्यक्तित्व को अंधा बना दिया इतिहास धृतराष्ट्र को ही महाभारत का जिम्मेदार ठहराता है गलत नहीं है क्योंकि […]

माँ से बोली एक बेबस बेटी:- अविस्मरणीय है कोख तेरी माँ जिसमें स्फुटित हुई हूँ मैं । तुझे किसने बता दिया है माँ बेटा नहीं बेटी हूँ मैं । तभी से तू बेसुध है तेरे […]

गुजारिश कर ——————- और माँग ले कर्ण के कवच-कुण्डल जीवन का यही सत्य है अपनी मृत्यु को टाल दे औरों की मृत्यु का कारण बन जगमगा जीवन के प्रकाश में किसी के जीवन में तिमिर […]

♥️♥️mother’s day special♥️♥️ जो नज़रो से परख ले वो माँ होती है । दर्द को दिल में जो रख ले वो माँ होती है । कर कोई काम तू बुरा खुदा से चाहे हो छुपा […]

जब से सावन मेरी जिंदगी में बहार बनके आया तब से हम कविताओं को अपनी डायरी में जगह नहीं देते। शब्द लपेट लेते हैं अपने दामन में उसको दिल में जगह नहीं देते घाव कितने […]

आसमान के तारे भी सूक्ष्म मलिन से लगते हैं जब भारत के सैनिक वर्दी पहन ओढ़ कर चलते हैं जान ठोकर खाती है कदमों में और होंठों पर मुस्कान लिए चलते ऐसा जिगरा तो केवल […]

मधुशाला खोल के भारत ने हरिवंश राय बच्चन की रचना को चरितार्थ किया मंदिर-मस्जिद बैर कराते मेल कराती मधुशाला फैली है चारों ओर महामारी फिर भी खुली हुई है मधुशाला पूरा भारत है लाक डाउन […]

आज उनकी गली में उजाले होंगे जमीं पर पर बिखरे अनगिनत सितारे होंगे पैरों तले होंगे आसमां कितने? नजरों में जन्नत के नजारे होंगे कितनी मसरूफ है जिंदगी अपनी उनके जहां में सुकून के आलम […]

भीष्म पितामह श्रेष्ठ योद्धा भारत का मान बढ़ाते हैं अपनी प्रतिज्ञा नहीं तोड़ते रण में लड़ने जाते हैं हस्तिनापुर की सीमाएं सुरक्षित करने का प्रण ह्रदय में लेकर वह प्रिय पाण्डवों के सामने उपस्थित हो […]

मुझे अच्छा नहीं लगता यूँ मलिन वस्त्रों में लिपटे रहना। यूँ अपनी स्मृति खोकर बेसुध पड़े रहना मुझे अच्छा नहीं लगता। गीतमाला सजाकर चंद्र को ताकते रहना मुझे अच्छा नहीं लगता। अब बिन वजह गगन […]

एक दोपहर ऐसी भी:’ मैं कुछ उधड़-बुन में थी अपनी आकांक्षाओं की निर्मम हत्या करके अपने दंश भरे पलंग पर लेटी… कुछ आराम पाने की अभिलाषा हृदय में लेकर… तभी तुम्हारी स्मृतियों के चक्रव्यू ने […]

भोजपुरी देवी:- कवन मैया गोर बाड़ी गीत कवन मैया गोर बाड़ी हमका पता ना कवन मैया गोर बाड़ी। निमिया के डाल पर झूला पर बा हमार मैया झूललबाड़ी हमका पता बा। सोने की थाली में […]

कोरोना योद्धा सभी वंदनीय हैं। पर ना जाने क्यों कुछ अराजकता तो इन पर पत्थर फेंकते हैं, जिन पर फूलों की वर्षा करनी चाहिए । हर पल तत्पर होकर इस महामारी में अपनी देशभक्ति निभा […]

करोना योद्धा सभी वंदनीय हैं। पर ना जाने क्यों कुछ अराजकता तो इन पर पत्थर फेंकते हैं, जिन पर फूलों की वर्षा करनी चाहिए । हर पल तत्पर होकर इस महामारी में अपनी देशभक्ति निभा […]

औरत खिलौना नहीं उसमें भी जान होती है…. औरत होती है ममता की मूर्ति प्यार की उपमा हजारों फूलों की खुशबू विद्यमान होती है उसमें…. औरत पैरों की जूती नहीं सिर का ताज है… तपती […]

औरत खिलौना नहीं उसमें भी जान होती है औरत होती है ममता की मूर्ति प्यार की उपमा हजारों फूलों की खुशबू विद्यमान होती है उसमें औरत पैरों की जूती नहीं सिर का ताज है तपती […]

भोजपुरी काव्य :- तोहरे बिन ज़िनिगिया सूनल बा हमार …. केकरा से हम बोलब बतियाइब केकरे संग ज़िनिगिया बिताइब तोहरे बिन ज़िनिगिया सूनल बा हमार…. साज श्रिंगार तोहरे बिन अधूरा बा तोहरे संग ही साजेला […]