Vijayanand V Gaitonde, Author at Saavan's Posts

मेरे जीवन का हर इक पल .! (भक्तिगीत)

मेरे जीवन का हर इक पल …….! (भक्तिगीत) मेरे जीवन का हर इक पल, तेरा ही अधिकार, कर ले तू स्वीकार, हे प्रभु, तू ही मेरा आधार……. नाम तेरा मन मन जपता हूँ, ज्ञान तुम्हीसे ही पाता हूँ, काज तेरे करता रहता हूँ , दान तेरा पा खुश रहता हूँ , जो लेता तेरा लेता हूँ , जो देता तेरा देता हूँ कृपा तेरी हो, जीवन मेरा, हो तुझको उपहार, तू ही मेरा आधार ……. प्यार तेरा, मेरा अमृत है, जो भी तू दे, सब स्वीकृत है, इसीलिये दु... »

Independence Day

Independence & the day; as it was in 2013 & now in 2019 INDEPENDENCE DAY ….! Independence of the country & its citizens is Not to be regarded by elected leaders as authority & license (to) Do whatever greedy, unholy acts they want to indulge in nuisance (but) Entails a great responsibility on their part for all their deeds & actions Provides freedom & liberty to them to do ... »

अच्छे दिन…!

अच्छे दिन…! अच्छे लोग तो खुश हो ही रहे हैं अच्छे दिनों से ..!. आशा बहुत अच्छा जो हो रहा है और भी होगा…! बुरे लोगों के बुरे दिन आये हैं बरबादी के …! ना सुधरेंगे फंसे हुए जो हैं ये घूस लेकर …! सजा मिलेगी लूटा देश जिन्होंने उन्हें जरूर ..! देश भक्ति के दिन अब आये हैं खुशहाली के ..! ” विश्वनंद” An attempt at Haiku in Hindi (5,7,5). »

The “getting free” lure …..!.

The “getting free” lure …..!. A young family, Mr. John, his wife, two kids, Doing well for themselves, Staying in a small bungalow, Found one morning, Their new car missing, Stolen from garage where it was parking. Very upset, disheartened they investigated, searched, looked everywhere But the car was no where. “Immediately complain to the police”, was neighbors advice, sound & they helped the... »

“नाम” में प्रभू के हम, मस्त हो के जी रहे ……! (गीत)

नाम साधना के अभ्यास के दौरान उभरा हुआ यह गीत प्रस्तुत करने बहुत ख़ुशी महसूस कर रहा हूँ  ..! “नाम”  में  प्रभू  के  हम,   मस्त  हो  के  जी  रहे ……! (गीत)   हम  है  भक्त  “नाम”  के,   हम  तो  मस्त  हो  लिए, “नाम”  में  प्रभू  के  हम,   विश्वमन  में  खो  लिए, “नाम”  में  प्रभू  के  हम,   मस्त  हो  के  जी  रहे ……! “नाम” में   प्रभु  के  हम ,  मस्त  हो  यूं   गा  रहे ……! &nb... »

सारी दुनिया का यही, क्यूँ है ये हाल सही..….!(गीत)

सारी दुनिया  का  यही,  क्यूँ  है  ये  हाल  सही..….! (गीत) सारी दुनिया  का  यही,  क्यूँ  है  ये  हाल  सही, बाँहों  में  और  कोई,   ख्यालों  में  और  कोई… ख्यालों  में  और  कोई,   बाँहों  में  और  कोई..…. यारों,   जिसे  कहते  वफ़ा,   वो  क्या  है  वफ़ा  सही, वफ़ा  ख़ुद  से  बेवफाईi,   तो  ये  कैसी  वफा,  भाई…. सारी  दुनिया  का  यही,  क्यूँ  है  ये  हाल  सही, बाँहों  में  और  कोई,   ख्यालों   में  और  क... »

तेरे गीत प्यार के हैं सुख मेरा …..! (गीत)

तेरे गीत प्यार के हैं सुख मेरा …..! (गीत) मै तो पहले गाता न था, गीत क्या है ये न जानता, तुझसे प्यार क्या हुआ, दिल मेरा चहक उठा, अब तेरे ही गीत गा रहा, तेरे गीत गुनगुना रहा …..! जाने क्या है पाया तेरी भोली आंखों में, रात दिन जो तरसूँ  मैं इन्हें ही  देखने, मुझपे अपनी रहम नजर कर ज़रा….! मैं तो पहले गाता न था….! कब से तेरे प्यार में  मैं जी रहा मगर, कैसे मानूँ तुझको  ही नहीं है ये ख़बर, मेरी दिल की बा... »

भजनों में, पूजन में, हे गणराजा … ! (भक्ति गान )

भजनों में, पूजन में, हे गणराजा … ! (भक्ति गान ) भजनों में, पूजन में, मगन है मन हमरा, हम और हमरा सबकुछ, हे गणराजा है तुम्हरा……! जो हमरा है आता, वो तोसे ही आता, जो हमरा है जाता , वो तोका ही जाता, हमरा ना यहाँ कुछ भी, बस तू ही इक हमरा, हम और हमरा सबकुछ, हे गणराजा है तुम्हरा……! हमरा लगता हम ही करते हैं सारा काम, काम में भूल जाते हम लेना तोरा नाम, तोरी कृपा से ही तो, चले काज ये सब हमरा, हम और हमरा सबकु... »

दुनिया हमारे दम से है …..!( गीत )

दुनिया हमारे दम से है …..! बदले हज़ार बार ज़माना तो गम नहीं, दुनिया हमारे दम से है, दुनिया से हम नहीं …..! क्यूँ फ़िक्र है तुम्हे मेरे यारों बेकार की, मंजिल मिलेगी आ के खुद, जो मंजिल का गम नहीं, दुनिया हमारे दम से है, दुनिया से हम नहीं …..! दुनिया की न परवाह, तो दुनिया बेजार है, आ कर मनाएगी तुम्हें, तुम मानो या नहीं, दुनिया हमारे दम से है, दुनिया से हम नहीं …..! चाहे सताए लाख ज़माना हमें तो क्या, खुशि... »

तेरे ही आसपास कल्पना कवि की है,…..! (गीत)

तेरे ही आसपास कल्पना कवि की है,…..! (गीत) तेरे ही आसपास कल्पना कवि की है, कल्पना कवि की है, वंचना कवि की है, वंचना कवि की है, वंदना कवि की है ……..! तू स्फूर्ति है कवि की, प्रणयमूर्ती तू ही है, तू ही कमी कवि की, और तू ही पूर्ति है तेरे ही आसपास कल्पना कवि की है……! कितने कवि जगाये तूने, उच्चपद चढा दिए, कितने कवि बनाए, जो कि बन के व्यर्थ हो गए, तू ही उदय कवि का, और तू ही अस्त है ….! तूने खिलाये फूल ह... »

चला खुद को लेकर न जाने कहाँ …!

चला खुद को लेकर न जाने कहाँ …! चला खुद को लेकर न जाने कहाँ, अनजाना सफ़र ये, न जाना जहाँ ……! समझ जब ये आया, समझता हूँ मैं, जाना समझता न कुछ भी यहाँ. ……! यहाँ जानना क्या और क्या जानूँ मैं, कहाँ किससे पूंछूँ समझ ये कहाँ. …….! इसी भ्रम में लेकर हूँ खुद को चला, न जानू क्या खोया, क्या पाया यहाँ …..! ये क्या सोचकर मैं भी लिखता हूँ ये, क्या लिखकर पता कुछ मिलेगा यहाँ …? उम्मीद में हूँ पता कुछ चले कहा... »

बेकार की ये बेचैनी है …..!

अपनी  बेचैनी और घबराहट की निरर्थकता पर उभरी हुई इस  रचना ( गीत) को  इसके podcast के साथ प्रस्तुत और share करने बहुत खुशी महसूस कर रहा हूँ  ……   बेकार की ये बेचैनी है ….! बेकार की ये बेचैनी है, बेकार की सब घबराहट है, तुम इससे विचलित मत होना, ये अपने सोच की खामी है ….. रहता इनमें कुछ तथ्य नहीं, मन की ही ये मनमानी है, मन की ही ये शैतानी है……! सोचो ये कौन ठिकाना है, ये जग ही मुस... »

कभी कभी, तुम राहें भूल कर…! (गीत )

  कभी  कभी, तुम  राहें  भूल  कर……! (गीत ) कभी  कभी,   तुम  राहें  भूल  कर, मेरी  गलियों  मे  आया  करो…. कभी  कभी  तुम  ख़ुद  को  भूल  कर, ज़रा  नजरें  मिलाया  करो…………! ख़ुद  में  इतने  खोये  हो, न  तुझको  कुछ  ख़बर, काम  के  सिवा, न  तुझको  आता  कुछ  नज़र, कभी  कभी,   सारे  काम  भूल  कर, ज़रा  दुनिया  को  देखा  करो….. कभी  कभी,   बेवजह  ही  सही, दुनिया को निहारा  करो…… कभी  कभी,   तुम  राहें  भू... »

Retirement का सुकून ……..!

  Retirement  का  सुकून  ……..! अब सुकून आ गया है जिन्दगी मे थोडा, जब से मैंने औरों संग दौड़ना है छोडा… जब से मैंने औरों जैसा दौड़ना है छोडा… अब तो वक्त मिल रहा है, कुछ तो ख़ुद के वास्ते, सोचने, मैं कौन हूँ  और  कौन से हैं रास्ते….. लग रहा है सब नया, जो दृष्टि कुछ नयी मिली, पहले जैसी दुनिया भी है, लगती अब नई नई …… भा रहा निसर्ग जैसे स्वर्ग ही यथार्थ ये, मुक्त मन जो हो गया है, व्यर्थ के स... »

अहसास का अहसास …!

अहसास  का  अहसास  …! मुझे   अहसास  हो  रहा  है, कि  मेरा  दिल,  न  मेरे  काबू  में,  ना मेरे  पास, भटक  रहा  है,  जाने  क्या  आस  लिए,  तेरे  ही  आसपास.……. मुझे  अहसास  हो  रहा  है. कि  ये  दुनिया  कितनी  सुंदर  और सुनहरी है, और  ये मेरी  जिंदगी  कितनी  प्यारी  और हसीन  है, वक्त  की  भी  कुछ  कमी  नहीं  है, फिर  भी  मेरे  दिल  को  तड़पने  की  ही  है  चाह, जाने  क्या  है  इसकी  कमी,  किसकी  है  इसक... »

ये चली कैसी हवा ….!

ये  चली  कैसी  हवा ….! सोचा  था  खरीदार  बन, आया  हूँ  इस  जहाँ  मे  मैं, ये  चली  कैसी  हवा, कि  बिकता  ही  चला  हूँ  मैं…..….   ! . जाना  था  मुझको  कहाँ, और, आ  गया  किस  मोड़  पर, अपनी  चाहतों  को  दूर  ही कहीं  पे  छोड़  कर, कि  अपना  कहने  को  ख़ुद  ही  को, ख़ुद  से  ही  डरता  हूँ  मैं, ये  चली  कैसी  हवा, कि  बिकता  ही  चला  हूँ  मैं …..…!. .   पास  है  सबकुछ  मेरे, पर  फ़िर  भी  ज... »

A poem, I want to write ….!

 A poem, I want to write ….!   I have been longing… To write a poem… A poem, I am unable to write…..!    I have tried it with all my intellect & might  But for this art, neither intellect nor might seems right.   Poetry, it is said, is a spontaneous overflow, Of powerful emotions; Of the dormant wonderful hidden inhibitions, That lies buried in our hearts…… And come alive at moments, we never ... »

सुंदर से इक फूल ने ….!

 सुंदर से इक फूल ने ….! कल  जैसा  था  वह  आज  नहीं, कल  कैसा  होगा  पता  नहीं, है  आज  अलग  इन  दोनों  से, हर दिन जैसे नव फूल  खिले. पर  दिल  अपनी  मनमानी  मे, जाने  कैसी  शैतानी  मे, इस  सुंदर  आज  को  छोड़, यार, कल  मे  ही  है  रहता  उलझे… (या  बीता  हुआ  कल,  या  आनेवाला  कल) सुंदर से इक फूल ने उस दिन, चुपके से मुझे पास बुलाकर, कुछ मुस्काकर, कहा ये मुझसे… “ऐसे क्यों मुरझाये हो तुम, ऐसे क्यों घबर... »

ए जीनेवाले सोच जरा….!

ए जीनेवाले सोच जरा….! मरने के लिए जीते हैं सब, फिर भी मर मर कर जीते हैं. यहाँ कभी न मन की प्यास बुझी, प्यासे ही सब रह जाते हैं. ए जीनेवाले सोच जरा, ऐसा जीना क्या जीना है, गर मर मर कर यूं जीना है, तो जीकर भी क्या करना है. जग जीवन के जन्जालों मे, ना समझ सका ख़ुद को मानव, चिंताओं व्यर्थ व्यथाओं की, गाथाओं मे खोया मानव. कुछ ऐसे दीवानेपन में, मेरे भी जीवन मे इक दिन, जागा जीवन का अर्थ नया, जब किस्मत से ... »

दिल क्यूँ मांगो “More” ….!

   दिल क्यूँ  मांगो “More” ….! दिल तुम्हरी नहीं मानेगे हम, क्यूँ तुम मांगो “More” “More” “More” ही दुःख का कारण, सुख ले जावे चोर…..! इतना सारा पास जो अपने, देख तो उसकी ओर, जो कुछ है, इसमे ही समाया समाधान संतोष….. ! भगवत्प्रेम और भक्तिभाव में होकर मन मदहोश, सुख है, जो है, उसका करना परिपूर्ण उपभोग, सुख है, जो है, उसका करना प्यार से सद्उपयोग …..! ये जीवन है प्रभु की पूजा, ठान ले तू हररोज, प्रभु ... »

मेरी कविता प्यारी मुझको ….!

मेरी कविता प्यारी मुझको…….! मेरी कविता प्यारी मुझको, औरों को ये सरदर्द है, समझ के भी आदत ना छूटे, जाने कैसा ये मर्ज है…….! फिर भी अर्ज है…! मेरी कविता प्यारी मुझको, औरों को ये सरदर्द है…..! कभी जो लब पर ये आ जाती, और कुछ पंक्ति मै लिख पाता, फिर जो कोई पास हो मेरे, पकड़ सुनाने उसको लगता, मचले मेरा दिल तब ऐसे, जैसे मेरा यही फर्ज है, मेरी कविता प्यारी मुझको,औरों को ये सरदर्द है, समझ के भी आदत ना छूटे,... »

हरदम कौन ये मेरे दिल में…..!

हरदम  कौन  ये  मेरे  दिल  में….. हरदम  कौन  ये  मेरे  दिल  में, सुख  में,   दुःख  में,  हर  मुश्किल  में, हर्ष  में  मेरे,   या  अश्कों  में, गीत  मजे  से  गाता  है, शब्द  कहाँ  से  लाता  है,   धुन  भी  लेकर  आता  है ……. हरदम  कौन  ये  मेरे  दिल  में, गीत  मजे  से  गाता  है…….. कभी  न  समझा,   न  समझूंगा, कौन  है  ये,   क्या  नाता  है, क्यूँ  इसने  इस  मेरे दिल  को  अपना  ही  घर  माना  है, इसकी  क... »