Category: मुक्तक

  • झूठ

    झुठा मैं नहीं कुछ लोग हो गये है,
    अहम में सब आगे बढ़ गये है ।
    कौन अब किसे समझाये भला,
    सब अब समझदार हो गये है ।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • बदलता दौर

    बहुत कुछ बदल दिया बदलते दौर ने,
    रिश्तें की मिठास और अपनों का प्यार ने।
    पीढ़ी दर पीढ़ी चली एक नई सोच लेकर संग,
    आज की सोच को बदल दिया आपने।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • महाकाल

    सदैव हाथ रखते अपना भोले भण्डारी,
    करूणा निधान है मेरे भोले बाबा भण्डारी।
    काशी के है रखवाले भक्तो के है प्यारे,
    हर हर महादेव नाम गुंजे काशी में भोले भण्डारी।।

  • परिवर्तन

    परिवर्तन ही संसार का नियम है,
    समझो मेरे मित्र यार ।
    बूढ़ा बाप अब भी प्यारा है,
    बदल जाये भले ही दौर।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • दुःख

    सबके दुःख को पल में हरते,
    मेरे भोले बाबा भण्डारी।
    नीलकंठ मनोकामना पुरा करते,
    बड़े दयालु मेरे बाबा है भण्डारी।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • सत्य

    सत्य के राह चलते रहना,
    कभी ना होना दूर।
    मुसीबत को भांपते रहना,
    झूठ का दामन देना छोड़।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • तौर तरीके

    तौर तरीके दुनिया दारी,
    नारी है सब पर भारी।
    नारी से ही चलता संसार,
    नारी समर्पण है कल्याणकारी।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • काल

    ये काल की गति मेरा बचपन लौटा दें,
    गांव की पगडंडी खोया कल लौटा दें।
    बहुत याद आते है वे गुजरे हुए पल
    ये मेरी जिंदगी तुम मेरा अतीत लौटा दो।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • कोरोना का प्रकोप

    कोरोना के प्रकोप से बिलख रहें है लोग,
    ऐंस की जिंदगी खत्म हुआ समझो सब लोग।
    भूख आज कल भटक रहा सड़कों के किनारे,
    क्या थे क्या हो गये इस महामारी में हम लोग।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • भूख

    भूख आज कल दम तोड़ रहा,
    पेट का भूख लोगों को मरोड़ रहा।
    फिर भी बाज ना आ रहे हैं,
    देखो लोग घर बार झोड़ रहे हैं।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • खुशियां

    मान गया जीवन एक मोमबत्ती है,
    आशा विश्वास का दीपक जलाती है,
    खुद के बदन को पिघलाकर वह
    खुशियां घर घर बांटती फिरती है ।।

  • समर्पण

    नारी त्याग है बलिदान है,
    नारी समर्पण की परिभाषा है,
    नारी मां बहन बेटी और माता हैं,
    नारी जग में भाग्य विधाता हैं।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • नारी

    अपने शब्दों में बयां करो नारी का गुणगान,
    नारी के दुःख दर्द को समझो ना महान।
    नारी को इज्जत दो करो तुम सम्मान,
    नारी हित में मोर्चा कर बांटो जग में ज्ञान।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • विचार

    सोच विचार से निकलेगा,
    आज कल का परिणाम।
    चिंता फिक्र से ही उपजेगा,
    आज कल का इतिहास।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • कोरोना योध्दा

    कोरोना जैसी महामारी में,
    कर लो पुण्य प्रताप ।
    बांट कर खाने का पैकेट,
    कवि जी बन जाओ तुम भी महान।।

  • पुण्य

    पुण्य का हिसाब देकर नहीं बनना पाप का हकदार,
    अवगत इतना बस कराता चाहता।
    सैकड़ों लोगों का किया भूख से निदान,
    तुम भी आगे बढ़कर करो कुछ पुण्य प्रताप।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • सच

    सच को आईना ना दिखाईए,
    झूठ को दो खदेड़ भगाय।
    मित्र बन्धू को दो तुम जगाए,
    कुछ दान पुण्य करके बन जाये सहाय।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • भीड़

    भीड़भाड़ में उलझ कर,
    मैं अपना अस्तित्व खो दिया हूं।
    शहर में आकर मैं भूल गया हूं,
    मेरे यार मेरे दोस्त बता दो मैं कौन हूं।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • रोश

    मेरे गांव की मिट्टी में रोश बहुत है,
    लोगों में भाई चारे का प्यार बहुत है।
    सोंधी महक मिट्टी की याद आती है,
    मेरे गांव के युवाओं में जोश बहुत है।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • माली

    मत मांग मुझे मैं अब हो गया हूं खाली,
    पहले जैसे नहीं रह गये मेरे गालों पर लाली।
    थक हार बेचैन सा हो गया हूं मैं दोस्त,
    अब मैं घास छीलने वाला लगने लगा हूं माली।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • न्योछावर

    सब कुछ न्योछावर कर दिया,
    अब तो बख्स दे मुझे ।
    रहम करके मेरे ऊपर दोस्त,
    अब मत मांग मुझे ।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मेरा गांव

    मेरे गांव का मिट्टी मुझे बुला रहा है,
    मेरे गांव का झप्पर मुझे याद आ रहा है।
    मेरे मां के हाथों का ब्यंजन और लोरी,
    मेरा गांव इशारों इशारों में मुझे बुला रहा है।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • स्ततीत्व

    बचा लो अब अपना अस्तित्व,
    गांव शहर में बदल रहा है,
    याद कर लो गांव की सोंधी मिट्टी,
    अब शहर गांव को निगल रहा है।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • जीवन की नैया

    मिट्टी खजानों का अनमोल घर है,
    जीवन प्रदान कर रहा शहर को है।
    खनिज पदार्थ खाद्य पदार्थ का खजाना,
    मिट्टी पर ही अमीर गरीब का नजर है।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • ठोकर

    उलझ लेने दो मुझे मुझ में ही,
    पता तो चले मैं कौन हूं ।
    अपनों से खा खा कर ठोकरें,
    अपने आपको मैं भूल गया हूं।।

    ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मिट्टी की खुशबू

    खूशबू मिट्टी की तो एक है,
    तड़प दिल का मित्र अनेक है।
    सबको याद सताता है गांव,
    मिट्टी के संग जुड़े प्यारे खरवास है।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • डर

    दौड़ खेल कर तो हम भी बड़े हो गये,
    जिम्मेदारीयां संग शहर में दौड़ गये।
    पेट की भूख शहर की याद दिला दी,
    इसलिए अपने वतन मिट्टी को वेबस होकर छोड़ गये।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मैं कौन

    बता दो दहाड़ कर डर नहीं लगता,
    शेर पिंजरे से अब जख्म नहीं देता।
    शायद भूल गये हो तुम मैं कौन हूं,
    वरना बातें बनाकर कर नहीं घुड़कते मुझे है पता‌।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • बुलंदि

    बुलंदियों से पुछ लिया कौन हो तुम,
    शेर के भेष में कोई और हो तुम।
    मुझे भी जान लो ये मित्र कौन हूं मैं,
    अपने लिबाज़ को उठा देखो मेरे मित्र हो तुम।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • लाकडाउन

    इस लाकडाउन में मैं तुम और चाय है साथी,
    कोरोना जैसी वैश्विक महामारी है सब पर भारी।
    करो जतन सब मिलकर कोरोना के प्रकोप का
    कुछ आदमखोर इंसानों से ये दुनिया आज हारी।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मजदूर हूं साहब

    मैं मजदूर हूं साहब यह सौभाग्य है मेरा,
    देश के लिए करना मजदूरी काम है मेरा।
    करते करते मजदूरी देश को समृध्द बनाऊंगा,
    आन बान शान का लाज रखना काम है मेरा।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • ख्वाब

    अभी तो तुमसे मिले थे हम,
    अभी तुम मुझे छोड़ चले गये।
    दिखलाकर मुझे सुनहरे ख्वाब,
    आंखों से दूर कहां तुम चले गये।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • राष्ट्र निर्माता

    मजदूर ही राष्ट्र का निर्माता,
    इनको हम क्यों भूल गये ।
    चन्द रूपये पाकर हम,
    इनको हम क्यो अलग किये।।

  • मेरे दोस्त मजदूर

    हमें गर्व है तुम पर,
    मेरे मित्र मजदूर ।
    किस्मत को मत कोसों,
    हम है बहुत मजबूर।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • लाल

    बहुत आहत हुआ हूं देख तुम्हरा हाल,
    एक मशाल जलाऊंगा बनकर मैं मिशाल।
    मजदूर नहीं मजबूर होगा करूंगा मैं प्रयास,
    मुझ पर भरोसा रखना मैं हूं देश का लाल।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • बड़ा इंसान

    चादर बांट हौसले मुझे नहीं तोड़ना,
    मजदूर भाई मुझे तुम्हारा राह नहीं मोड़ना।
    तुम्हारे हक का हम दे सकें मेहनताना,
    बड़े बनकर तुम्हारा हक मुझे नहीं है छिनना।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मजबूरी

    कभी झांक कर देखना मजदूर के घर,
    मजदूर कितना मजबूर हो गया है ।
    टूट के बिखर कर कितना दुखी हो गया,
    पेट के भूख ने ही ऐंसा हाल बना दिया है।।

    ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मजदूर का किस्मत

    इस संसार में ना जाने कितने चेहरे है,
    जिम्मेदारीयों पर बहुत सारे पहरे है।
    मजदूर परेशान क्यो है जान तो लिजिए,
    उसके किस्मत पर ना जाने कितने लहरें है।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • वेदना

    अन्तर्मन की वेदना पढ़ ना सके कोय,
    मजदूर की मजदूरी दे ना सके कोय।
    खून पसीने कौन बहता बैठ कर खाते लोग,
    मजदूर की मेहनत को समझ ना सके कोय।।

  • शान

    शान से जीना शान से मरना
    मजदूर की यही निशानी है।
    एक एक कतरे का हिसाब दे
    मौज में रहना ईमानदारी है।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मजदूर का दर्द

    कविदीप लिखों एक ऐंसा संदेश,
    जो मजदूरों का हक करें अदा ।
    खून पसीने का सही मुल्य मिले,
    आपके लेखनी को पढ़ मजदूर हो फिदा।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मजदूर बेचारा

    मजदूर है जीता शान से,
    देख खुशी तिलमिलाए अमीर।
    मजदूरी करके चैन से सोता खाट पर,
    मखमल का बिस्तर आराम ना दें शरीर को।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मजदूर

    कहानी बड़ी सुहानी है,
    मजदूर की बड़ी मेहरबानी है।
    सिना ठोंक डटे है रहता,
    यही तो मजदूर का ईमानदारी है।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • अमीर

    महल के बिस्तर चुभते रहते,
    धन दौलत में अमीर जीते मरते।
    मजदूर के जैसे खुदकिस्मत कहा,
    चैन से कभी कहां सोते रहते।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • हास्य ब्यंग

    हे भगवान ये लाकडाउन हटा दो,
    नहीं तो ये कोरोना मिटा दो ।
    तंग आ गया हूं फोन उठाकर झूठ सुनते -2,
    ये कमीने दोस्तों का मोबाइल ब्लास्ट करा दो।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • दिल

    खुलीआंखों से हमने भी ख्वाब देखें,
    तेरे चेहरे पर हमने भी जज्बात देखें ।
    सुना था आंधी कुहासे को उड़ा ले जाता है,
    दो टूटे हुए दिल को कांटेदार गुलाब मिला देता है।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • कलंक

    रोज मर्रा की जिंदगी में,
    बहुत कुछ सीखा हैं हमने।
    दुनिया में ना जाने कितने हैं रंक,
    जीवन पर लगा यह कैसा अभिशप्त का कलंक।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • तोज्ञफा

    प्यार का तोहफा खरीदने में वक्त तो लगता है,
    सच्चे प्यार को बंया करने में वक्त तो लगता है,
    दिल से दिल का तार जोड़ने में वक्त तो लगता है,
    प्यार को इजहार करने में वक्त तो लगता है,

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • आतंकवाद

    आतंकवाद के जड़ों में पानी डालो करके गर्म,
    हिन्दू मुस्लिम कहकर बरगलाने वालों को दो सजा।
    मजहबी बनकर जो फैलाते है आतंक दो सजा,
    फांसी के फंदे पर लटका कर आंख नोंचकर दो सजा।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • चीन का चाल

    कोरोना के डर से सारी दुनिया कांप गयी,
    चीन के दोगलेपन चाल को दुनिया भांप गयी।
    एक एक भयानक शहर को कोरोना निगल रहा,
    कोरोना के आतंक से देश दुनिया सहम रहा।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

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