अजी कैसा विकास करते हो छलों को बाहुपाश करते हो जिन पेड़ो से मिलती है साँसें उन पेड़ों का विनाश करते हो हर चीज़ है, पर समय नहीं ख़ुदकुशी का क्यों प्रयास करते हो मौन […]

अच्छा है , जितना जल्दी जान लो काले कर्म जितने किये यहाँ हैं, अकेले देना हिसाब वहाँ हैं,   खातिर जिनकी किये कुकर्म यहाँ, उनमें होगा ना कोई संग वहाँ