तेरी गली से मैं अचानक जो गुजर गया! दर्द तेरा जिगर में एक बार फिर उभर गया! खामोशियाँ में ढल गया हर याद का मंजर, सिलसिला-ए-अश्क से मेरा दामऩ भर गया! Composed By #महादेव

टूटे अल्फ़ाज़ों को  नसीहत की जरूरत क्या  बिखरे ख्वाबों को किस्मत की जरूरत क्या   जो बिक गया खुद ही  सरेआम बाज़ारों में  फिर   इंसान की कीमत की जरूरत क्या   हर इक शै का […]

समझते  सब  है पर मानता कोई नहीं     पहचान सब से है पर जानता कोई नहीं   यूँ तो पड़ा हूँ खुली किताब की तरह      पढ़े लिखे  सब है पर बांचता कोई नहीं                           […]

उठे जब भी सवाल ज़िंदगी की तरफ उठे है हाथ मेरे तेरी बंदगी की तरफ महज इत्तफ़ाक़ था या और कुछ मेरा इशारा है दिल्लगी की तरफ वो हर जगह जो मोज़ू था मगर नज़र […]

 हर शख्स बस अपने ही ख्याल बुनता है  जिसका जवाब नहीं वही सवाल चुनता है   कोई कैसे कहे वो गुमसुम सा  क्यों है  जिसे  भी देखिये अपने ही जाल बुनता है                                    राजेश’अरमान’

मुझमे में हु कही… आईना में अक्सर देखा खुद को जब मैंने कही , चहेरे पे चहेरा हर दम दीखता है , वो मासूमियत सा खिलखिलाता बचपन, देखू कहा,अब तू बता, ऐ मन,ढूंढ़ता हरदम दीखता […]

मुझको तेरी जुदाई बेइंतहाँ सताती है! शामों-सहर मुझको तेरी याद रूलाती है! बिखर रही है जिन्दगी दर्द के पायदानों पर, अश्कों में तैरती मुझे मंजिल नजर आती है! Composed By #महादेव

#देश_में_विधवाओं_का_ये_कैसा_हो_रहा_सम्मान_है ,, #लाखो_माएं_बेघर_और_बच्चे_अनाथ_है ,, #द्वारिकाधीश_तेरी_नगरी_में_एक_गंभीर_समस्या_है ,, #तेरी_गोपियाँ_कलियुग_में_हो_गयी_विधवा_है ………!! ……………………………………………~~**#चंद्रहास**~~

वो यादें उनसे बिछड़े मुझे एक ज़माना बीत गया, याद में उनके रहते एक अफ़साना बीत गया, किताबो के पन्नें पलट गए हज़ार ज़िन्दगी के , पर साथ छूटे उनका मेरा ऐसा जैसे संसार मेरा […]

ये नज़ारे आसमान को ताकता ढूंढता में वो एक तारा, न जाने कहा छुप बेहटा बादलो के बीच कही तो मुस्कुरा रहा है, वो पंछी हर राह मुड़ता कही अपना रास्ता बना हवाओ के बीच […]

  हम मर्दों की ख़ास निशानी होती है ,, हसीं चेहरा देखा नहीं की नियत फिसल जानी होती है …………..!! चलते चलते निगाहों में बात बन जाती है ,, कमबख्त ये गलतफ़हमीयां दूर होते ही […]

हर मुसीबत को न्योता दिया नहीं जाता ,, जरुरत न पड़े तब तक सर ओखली में नहीं जाता …..!! सम्मान लौटा रहे हो तो वो पूछेंगे नहीं ,,जिनसे नेताओं के बदजुबानी का सवाल पुछा नहीं […]

किसी सितम की जब कभी इन्तहाँ होती है! सोती हैं ‘तकदीरें मगर आँख रोती है! वक्त के कदमों तले कुचल जाती हैं मंजिलें, डूबती तमन्नाओं की सहर कब होती है? Composed By #महादेव

तेरी कश्ती मेरी कश्ती   बस इतनी सी तो रवानी है हर ज़िन्दगी की कहानी है सब कागज की कश्ती है और ख़ुद को पार लगानी है   दिखती सब अलग सी हैं असल में […]

कागज की कश्ती जिसमें तैरता था बचपन कभी बहता था पानी की तेज धारों में बिना डरे, बिना रुके न डूबने का खोफ़ न पीछे रह जाने का डर जिंदगी गुजरती गयी बिना कुछ लिखे […]

कर रहे थे बसर जिंदगी गुमनाम गलियों में आपकी मोहब्बत ने हमें मशहूर कर दिया पुकारने लगे लोग हमें कई नामों से हमें यूं बदनाम होना भी अच्छा लगा आपका तस्व्वुर हमारे ज़हन में गुंजता […]

ये बूढ़ी आँखें। ये सब कुछ तांके।। ये सल भरे पन्ने। पुरानी किताबें।।   विशाल से वृक्ष थे। जो अब झुक गय हैं।। दौड़ते धावक थे। जो अब रुक गय हैं।।   कुछ गांठों को। […]

लङता अंधेरे से बराबर नहीं बेठता थक हारकर रिक्त नहीं आज उसका तूणीर कर रहा तम को छिन्न भिन्न हर बार तानकर शर लङता अंधेरे से बराबर   किया घातक वार बयार का तम ने […]

वैराग-चित्‌ संपदा   कर पाए जब तूं दिल से प्रति सुख और दुख के, एक समान उपेक्षा  कर पाए जब अंतर मन से विभिन भ्रांतियों पर, चिरकाल विजय  कर पाए जब यह अनुभूति ना इधर […]

गुरु – महिमा   यह रचना है , गुरु-देव की महिमा का गुनगान , वो ख़ुद के चित्‌ में है अन्तहीन , जिनकी परिभाषा है असीम , ऋषि की विशिष्टताओं का पैग़ाम  जो देकर हमको […]

धीरे से उठाना    सदियों से गह्न निद्रा में , है सोया यह समाज़ , धीरे से उठाना  युगों का अंधकार समेटे , है सोया यह समाज़ , धीरे से उठाना    इसको सुबह की […]

ज़िंन्दगी एक दिन की   मेरा हर सुबह मौत के गर्भ से ख़ुद को जन्म देना हर रात ढले अपने ही कंधों पे ख़ुद को मरघट ले जाना उस मंदिर के आँगन में, ख़ुद को खुद […]

अर्जुन की राह    मन मेरा शंकित हो कहता , अर्जुन मैं भी हो जाता , गर सारथी मेरा कृष्ण हो पाता , जीवन मेरा भी तर जाता , गर कृष्ण को मैं ढूंढ़ पता  […]

मृत्यु – एक पड़ाव   अंधकार नही , जीवन का द्वार है मृत्यु  भय नही , उससे मिलने की राह है मृत्यु    होता तात्पर्य मृत्यु का मिटना , पर मिटता यहां कुछ भी नहीं […]

ख़ुद को कर्म–पथ पे जिवा, धर्म–पथ भी निभाना है धर्म–पथ पर चलते हुए, भूलों को राह दिखानी है अपने तन की पीर भुला, औरन की पीर घटानी है जिनके अपने भूल चुके, अपना उन्हेँ बनाना है हार चुके मनों को , जीत की राह दिखानी है   नाम, वैभव, वित की चाह भुला, परार्थ की राह अपनानी है लोग जो तम में बस्ते है, दिल में उनके दीपक की लो जलानी है ना–उम्मीदी से भरे दिलों को, उम्मीद की किरणों से सजाना है जिन्हें लोग तुछ मान चुके, सम्मान उनका लौटाना है सबके दिलो में सम्मानता ला, भिन्नता को दफनाना है   यह जो मेरा जीवन है , यह कर्म–धर्म का जीवन है यूई कर्म–धर्म की राहों को, अब सहर्ष निभाना है तन–मन से अपना इस राह को, मानव–धर्म को नयी ऊँचाई दिलाना है                                       […]

कर्म–पथ  कर्म–पथ पर चलना है, कोई दुरमति राह अपनानी नहीं मिलेगी उलझी डगर यहां, इसमें कभी घभ्ह्रना नहीं बड़ते हुए कठिन राहो पर, भूले से कभी उक्ताना नहीं मंज़िल अपनी पाए बिना, मन से कभी […]

याद है आज भी वो दिन जब किताब के बीच कोई फूल दबा देते थे और खाली लम्हों को उस सूखे फूल से महकाया करते थे याद है आज भी वो दिन किताबों के पन्नें […]

अधूरे ख्वाब   थे ख्वाब जो चुन-बुन सजाए हमनें पा मुझको तन्हा , बहुत तड़पाते हैं .   कारवाँ तेरी यादों का लंबा है , या मेरे ग़मों की रात गहरी है , दशकों बीते, […]

ए ज़िन्दगी    कैसे शिकायत करूँ तुझसे खुदा की बंदगी पाई तुझसे बस तुझमें सिमटा रह्ता हूँ हर पल तेरे ही संग रहता हूँ   कभी टेडी मेडी लकीरों में कभी रंग भर उन्ही लकीरों […]

मुझे याद रहा,  तुम भूल गए  कहने को दो दिल चार आँखे हम, थी एक रूह में बस्ती जान हमारी कहने को दिया और बाती हम, थी बस लौ ही पहचान हमारी   मदमस्त हवाओं के झोंकों से, थे लहराते गाते जज़्बात हमारे, उतार सजाया आस्मानो में, थे सपने जो जनमें पलकों तले हमारे   कुछ यूँ खाईं थी क़समें हमने, हर हाल में प्यार निभाएँगे मिल पाए तो ज़िन्दा हैं, ना मिल पाए तो यादों में निभाएँगे   हुए गर तन से ज़ुदा तो क्या, ज़ुदा ना मन से कभी हो पाएँगे गर साँसें छोड़ जाएँ साथ तो क्या, जन्मो का साथ निभाएँगे   बरसों से हम उसी मोड़ पे अटके, राह जहां से तुम बदल गए मोहब्बत को नए मायने दे कर, उन मायनों को ही तुम बदल गए   उठा फर्श से अर्श पे बिठा हमको, अपना अर्श ही तुम बदल गए वफाएँ लेती थी तुमसे सबक वफ़ा का, अपना सबक ही तुम बदल गए   जब मुझको सब यह याद रहा, कैसे तुम सब भूल गए मर के भी यूई भूल ना पाया, […]

अजी कैसा विकास करते हो छलों को बाहुपाश करते हो जिन पेड़ो से मिलती है साँसें उन पेड़ों का विनाश करते हो हर चीज़ है, पर समय नहीं ख़ुदकुशी का क्यों प्रयास करते हो मौन […]