कभी मन करता है फिर से दुनिया को औरों की नज़र से देखूँ शायद मेरी नज़र में कोई भ्रान्ति दोष हो एक बार देखा जब दुनिया को दूसरी नज़र से लगा आँखों पे कोई चाबुक […]

आँखों से जो बह निकले ,                               वोह दर्द ज़रा से हल्के थे        जो दिल ही दिल में द़फन हुए ,                               वोह दर्द यूई के अपने थे                                                                        …… यूई

याद–ए–बचप्न दिल को मुसकराती है याद–ए–मेह्बूब खून–ए–अश्क रूलाती है ए ख़ुदा मेरा यार लौटा दे या अगले बचपन में पहूँचा दे                                                 ..….  यूई

                       उदास लम्हों की गहराईयों में                        मैं खामोश                        महफिलो की रंगीनीयों में                        मैं खामोश                        यह खामोशी ही अब                        यूई की […]

इस दर्द में जीने की आदत सी हो गई लगता था उस पल कि मर जायेंगे तेरे बिन अब तो यह मौत ही अपनी ज़िन्दगी हो गई                                         ……   यूई

यह नशा वोह नशा इसमे नशा उसमें नशा नशे में नशा सबसे रंगीन नशा रुक जाओ ज़रा इतनी जल्दी क्यों है तुमने वोह नशा चखा ही कहाँ अभी मैंने तुम्हे छुआ ही कहाँ एक पल  […]

है यह तेरा भी इशक               और है तो मेरा भी इशक ना कम तेरा इशक               ना कम मेरा इशक दो एह्सासो का मिलन है              यह हमारा इशक

मेरा इशक तेरे मन में सिमटा हुआ परिंदा               तेरा इशक मेरे मन को अपने संग ऊङाता हुआ परिंदा मेरा इशक तेरे आँचल में सिमटी हुई मेरी रूह               तेरा इशक मेरी रूह में सिमटी […]

मेरा इशक झील का रुका हुआ पानी               तेरा इशक नदी की बहती हुई धारा मेरा इशक वोह आग, जो आग को पानी कर दे               तेरा इशक वोह आग, जो पानी को आग कर […]

रिश्तों का जुड़ना   कभी टूटी हड़ियों का , जुड़ना देखा है क्या ? टूटे हुए दोनों हिस्सों को , साथ में रख, श्वेत सीमेंट की लेप लगा , श्वेत कपड़े की खेप लगा , […]

अपनी हर सांस तो बस तेरी चाह में गुजरी तेरी सारी उम्र जमाने की परवाह में गुजरी सोचा था कहोगे उदास तुम मेरी खातिर न हो क्या कहेगा ज़माना ,फिक्र ज़िंदगी की राह में गुजरी […]

दर्द देना गर फितरत है तेरी , अपनीयत का तुम गला दबा दो  चाहें जितने भी फिर ज़ख्म दिला दो, अपनीयत के दर्द से मुझे बचा दो                                                       ……  यूई

दर्द अपनों को , भूले से भी दिया नहीं करते  गर देना ही है दर्द तो , अपना उन्हें कहा नहीं करते                                                        ……  यूई

कभी बादलों से कभी बिजलिओं से बनती है सरगम कलकल बहते पानी चलती हवाओं से बनती है सरगम इठलाती घूमती बेटियां होती झंकार बनती है सरगम अपनी साँसें भी जब सुर में हो बनती है […]

कोई वज़ह यूँ भी निकल आती तेरे मिलने की तारों की सजी डोली लेके आता कहार मेरे मन के द्वार मैं मन ही मन में रूप लेता निहार काश उस डोली में कोई ख्वाब सजा […]

चल पड़ा फिर जिस्म किसी राह में मन को छोड़ अकेला क्यों नहीं चलते दोनों साथ -साथ कोई रंजिश नहीं फिर भी रंजिश फूल की बगावत किसी टहनी से भवरे की शिकायत किसी फूलों से […]

रात अपना ही कोई किस्सा बन जाता हूँ दिन के उजाले में कोई हिस्सा बन जाता हूँ निकल तो जाता हूँ बाज़ारों में कहीं शाम के होते ही न चलने वाला कोई सिक्का बन जाता […]

मेरे जज्बात अब पत्थर हो गए है अब फूलों की बातें पहरों में सिसक रही है अब लहरें समुन्दर की सांसें बन गई है अब हवाओं में फैल गए है नग्मे दर्द भरे अब जमाने […]