किताब जब खोलोगे तुम यादों की मेरा नाम सबसे नीचे होगा पन्ने जब पलटोगे वफ़ा के मेरा ही चेहरा दिखेगा
किताब जब खोलोगे तुम यादों की मेरा नाम सबसे नीचे होगा पन्ने जब पलटोगे वफ़ा के मेरा ही चेहरा दिखेगा
पहले खफ़ा थे हम उनसे अब वो निभा रहे हैं जितना मैं पास जाऊँ उतना ही दूर जा रहे हैं
वो मुझे यूँ रुला रहा है जैसे याद कर रहा है । यूँ देखता है जैसे मुझे प्यार कर रहा है ।
तेरी एक अच्छाई बताऊँ:- अगर तू बेवफा ना होता तो मैं शायर ना होती कदर खुशियों की कैसे जानती जो रात भर ना रोती ।
रोंक लिया है हमनें अपने आप को जैसा चाहते थे तुम मैनें खुद को बना लिया
बहारें आने वाली थीं लेकिन ना आई कली जो खिलने वाली थी शाख पर ही ना आई
कौन जाने यहाँ किसको सब व्यस्त हैं खुद में किसी से क्या शिकायत जब तू खुद ही तेरे मद में
कौन जाने यहाँ किसको सब व्यस्त हैं खुद में किसी से क्या शिकायत जब तू ही खुद ही तेरे मद में
छिपा कर ज़ख्म घूमती हूँ तेरे दिए हुए तड़प उठती है तन्हाई किसी का हाथ पड़ने से
धुँधली यादों की परछायी छुपाने की जो कोशिश की मिट गई सांसों की रेखा लिपट कर आ गयी यादें
भूल जाऊँ मैं सब कुछ नामुमकिन है ये खुद को भुला सकना मेरे बस में फिर भी है तेरा नाम मिटा सकना नहीं बस में नहीं हद में
तेरे इश्क में किया है हमनें मै से मैखाने का सफ़र
कोशिश नाकाम ही रही गज़ब फ़ितूर छाया है लगता है क्यूँ ऐसा तेरा अक्श आया है
लौट आओ मुसाफिर देर हो चुकी है जिंदगी हमेशा मौका ना देगी
इत्मिनान से पढ़िए — मेरे दिल के हैं अल्फ़ाज़— हर बात का मतलब नहीं होता कभी तो दिल से काम लीजिये तू ही तू बस नज़र आयेगा हर नफ़स ।
तेरे शहर में मेरा कितना नाम हो गया तेरे नाम से जुड़कर मेरा चर्चा आम हो गया
थक के चूर —-हो गई है रात— बादल गरज़ रहे हैं है इतना शोर फिर भी जाने कैसे लोग सो रहे हैं
ना झूठे थे मेरे वादे ना झूठी थी मेरी कसमें तुमने इल्जाम दे देकर मेरे दिल को दुखा डाला
बढ़ी कीमत चुकाई मैने प्यार की तुझे रास ना आयी तो मैं क्या करूं
बढ़ी कीमत चुकाई मैनें प्यार की मगर तुझे रास ना आत आयी तो मै क्या करूँ
धूप मल ही रहे थे तुम्हारे प्यार की कि तुम तुमने दिल से बेदखल कर दिया देखो मेरे प्यार की शाम हो गई
भिगोकर बादाम दूध में केसर छिड़क दिया खुदा ने कुछ यूं ही तुमको बनाया होगा अफसोस ना कर तेरा रंग श्याम है मैंने कुछ ऐसे भी लोग देखे हैं जो दिल के काले होते हैं
मैंने कोई धोखा नहीं दिया तुम्हें तुमको ही धोखा हुआ अफसोस इस बात का है कि तुम्हें इस बात का कोई इल्म नहीं
आसमान के चादर में लिपटे अनगिनत सितारे हैं चांद फिर भी तन्हा है, जबकि लाखों उसके दीवाने हैं।
मेरे वीराने जहाँ को भी कोई बसाएगा क्या यह ऐसे ही उजड़ा रहे जाएगा दो चार दिन को तो आते है सब पर जिसका इंतजार वह कब आयेगा इंतजार करते हुए थक सी गई है […]
होली के रंग अब फीके न पड़ेंगे। हम उनमे रोज महसूस होंगे।।
तुम क्यो चुप से हो गये हो। फिर से कुछ बदल से गये हो।।
तेरी बातें ही है जो एक उम्मीद से हमें तेरे पास ले आती हैं वरना सुकून -ए -जिंदगी तो हमें अकेले रहने में ही मिलता है……
किताब-ए- जिंदगी अपनी लिखी है पेन से हमने जिसे मिटाने की गुंजाइश कहां बख्शी है…
शोभे सरोवर राजहंस से बगिया शोभे कोयलिया से। ज्ञानी जन से सभा की शोभा दुनिया शोभे मधुर बोलिया से।।
भरोसा अपना पर नहीं गैरों पर कर लीजिएगा जनाब “अपने” अपने कहलाने के लायक नहीं है। रूठना है तो खुद मान जाइएगा जनाब यहां कोई मनाने के लिए नहीं है।
घुली है हवाओं में खुशबू तेरी शायद तेरे आने का पैगाम लाती है ना ठहरती है ना जाती है शायद दिल तोड़ने का सामान लाती है।
मेरी नादानियों का सिला यह मिला हमको हम बदनाम हो गए और वह समझदार बने बैठे हैं……
😉उनका दिल इतना नादान है 😘जिसे भी देखता है मोहब्बत हो जाती है 🤐🤐
ए दोस्त! मुझमें कभी इतनी हिम्मत ना आयी बस तुझे दूर से देखती रही कभी पास ना आयी
इस तरह बसा है तू दिल में तुझे कैसे भूल सकती हूँ तुझे दिल से निकाल नहीं सकती पर दिल को निकाल सकती हूँ
मुझे ठुकरा कर वो दर- दर भटक रहा है खुदा का खौफ देखो कभी इसके दिल से कभी उसके दिल से निकल रहा है ।
हमारे रिश्ते में मोवन कम था वर्ना, इश्क की गुझिया खूब खुश्क होती।
तुम्हारा इंतजार किया आम पकने की तरह तुम रोज ख्वाब में आए शाम की चाय की तरह तुम खो गए चाभी के जैसे मगर मैनें ढूंढा है तुम्हें मूंगफली के दाने की तरह
कौन कहता है दूरियां प्यार को बढ़ाती हैं दूरियां बस दूरियां होती हैं बस दूरियां ही बढ़ाती हैं
गूंजती रहेगी फिजाओं में आवाज मेरे दिल की हर एक धड़कन धड़कती रहेगी तेरा नाम सुनकर तन्हाई एक कोने में पलती रहेगी।
यहां किसी को कुछ भी नहीं मिलता किसी को मंज़िल तो किसी को रास्ता नहीं मिलता
एक गलतफहमी ने रिश्ता तोड़ दिया जिसे अपना सब कुछ मानते थे आज उसी को छोड़ दिया
कितनी बार पढ़ा था मैंने तेरी आंखों में अपना नाम पर तेरी आंखें भी तेरी तरह फरेबी थी
गिरेबान पर हाथ डालने से पहले एक बार सोच तो लिया होता जिसे हाथ लगा रहे हो वो तुम्हें दिल में बिठा कर पूजा करता है….
एक वक्त था दिन रात सोचा करते थे तुम्हें आज तुम्हें सोचने की फुर्सत ही ना रही ….
तुम हमारे बारे में सोचते भी कैसे जिंदगी ने कभी इतनी फुर्सत ही नहीं दी
तुमने कह तो दिया मेरे दामन में दाग बहुत हैं पर शायद तुमने कभी अपने ज़िस्म पर पड़ी चादर नहीं देगी।
ना रही कोई हसरत ना कोई उम्मीद, तुझे जब से भूल गई जिंदगी बड़े आराम से कट रही है…
बड़ी घुटन होती थी जब हम तुम्हारे हुआ करते थे रिश्ता बोझ बन गया था जब हम तुम्हारे हुआ करते थे
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