तुम अपने मुहब्बत में
कर लो परीक्षा सनम।
पास निश्चित करुँगा पर
आगे की तेरी इच्छा सनम।।
Category: शेर-ओ-शायरी
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शायरी
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शायरी
कुछ छंद अनोखे लाए हैं
कुछ गीत सुहाने लाए हैं।
हम तो तुम्हारे आशिक़ हैं
कुछ भाव तराने लाए हैं।। -
इश्के 🗼
दुनिया दरकिनार होना चाहती थी हमसे
पर दरकिनार हो न पाई ।
मुहब्बत ने ईंटे तो काफी लगाए
पर इश्के मीनार हो न पाई।। -
गीत बन्द पड़े हैं
गीत बन्द पड़े हैं
कल्पनाओं के अंतस में
मीत सुनने को बेताब है -
देख लेना
एक वक्त ऐसा भी लाऊँगी मैं
जो हमें देख के अनदेखा कर देते हैं
वो हमें देखने को तरसेंगे -
कोरोना की छुट्टी
ये कोरोना की छुट्टी भी
अब बेकार हो गई ।
मोबाइलों में होम वर्क
और पव जी बेकार हो गई।। -
गर्मी की छुट्टी
गर्मी की छुट्टी हो गई
गर्मी के आने से पहले।
शायद स्कूल लग जाऐंगे
नानी 🏡 जाने से पहले।। -
वक्त जरा रुक जा
ऐ वक्त जरा रुक जा
कुछ देर के लिए।
दुनिया में लाॅकडाउन है
नये सबेर के लिए।। -
लाॅकडाउन का चौथापन
चौथापन है लाॅकडाउन का
फिर भी कोरोना अभी जवान है।
करते रहो अध्यादेश जारी
तुम्हें क्या जनता कितनी परेशान है।। -
दिल क्यों टूट जाता
आलिंगन भी दिल से दिल को ना मिलाता।
फिर बेबफाई से दिल आखिर क्यों टूट जाता।। -
जीवन चलता है
जीवन चलता है चलता रहेगा
कल घुटनों के बल चलते थे आज पैरों पर खड़े हैं -
कसम दे देकर
कसम दे देकर बर्बाद किया तुमने
जहर की बात तुम ना करो तो अच्छा है -
गीत मुस्कुरा के
गीत मुस्कुरा के गाता हूं
जाने क्यों ग़ज़ल लिखने में आंख भर आती है -
दूरियां बनाने से कुछ नहीं मिलता
दूरियां बनाने से कुछ नहीं मिलता
रिश्ते नज़दीकियों से ही चलते हैं -
कब से जाम लिए
कब से जाम लिये बैठा हूँ
नजरों से पिलाने वाले कहाँ गए -
नागन
ए नागन ज़रा देखें तो तुझ में कितना है जहर।
तूने अनगिनत आशिकों के दिल ढाया है कहर।। -
तारीफ़
फलक के सितारे भी तारीफ़ करते हैं तेरी अदा को।
जरा मैं भी तो देखूं खुदा ने किस कदर बनाया है आपको।। -
किरदार
किरदार निभा रहा हूँ अपना
नया भारत हूँ मैं
और दिल का तिरंगा लहरा रहा हूँ -
तूने दूर किया है
तूने दूर किया है मुझको अपने साये से
मेरी दीवानगी देखो
तुझमे ही डूबा रहता हूँ -
आलिंगन
मैंने जिस दिन से आलिंगन
किया तुझे
रात दिन खुमार में ही रहता हूँ -
फूल की राहों में…
फूल की राहों में काँटे बिखरेता है कौन?
चांदनी रात में अकेला यहाँ आता है कौन? -
ए माँ
मत माड़ ए माँ मुझे, तू अपनी कोख में।
बेटा बन कर दिखाउंगी, आ जाने दे जग में।। -
थप्पड़
उनका एक थप्पड़ इश्क़ में घी का काम कर गया।
बुझे चिंगारी को बेशर्म शोला और शबनम बना दिया।। -
मय
मै अपनी जवानी गुजार दी मय के मयख़ाने में।
अब तो बस खाली पैमाना बच गया मेरे जिंदगानी में।। -
किताबें खोल कर
किताबें खोल कर देखा नहीं तुमने शायद
पुराना बहुत हूँ पर अंदाज़ वही है -
बरसों बाद आया हूँ
बरसों बाद आया हूँ उसी अंदाज़ में
वही स्फूर्ति का तूफान लेकर मैं -
गज़ल बन जाओ
गज़ल बन जाओ तुम गीत हम बने
कुछ तुम कहो तो कुछ हम कहें -
सावन व महबूब
एक तरफ सावन के रुसवाई तो दूसरे तरफ महबूब की जुदाई।
ए मेरे खुदा तू ही बता कैसी है सावन व महबूब की खुदाई।। -
शायरी
हम देश के सिपाही
ये हिन्द है हमारा।
चंदन लगे हैं माटी
अभिमान है हमारा।। -
शायरी
देश के भीतर कोरोना है
और सरहद पर आतंकवाद।
संयम और धीरज से हमसब
निज देश को रखेंगे आबाद।। -
खाली-खाली
यूँ हीं नौराता बीत गया
और गई बैशाखी खाली-खाली।
कहर कोरोना के कारण
जेब तिजोरी सब हो गए खाली।। -
सैनिक
ना तीर से डरते हैं
ना तलवार से डरते हैं।
हम तो वीर सैनिक हैं
सिर्फ गद्दार से डरते हैं।। -
दवा-ए-वियोग
नब्ज टटोलकर भी पूछते हो
तुम्हें रोग क्या है ?
दिल दिलदार का पूछता है
दवा-ए-वियोग क्या है? -
बेताब
एक तरफ सावन के बरसात तो दूसरे तरफ अश्कों के शैलाब। जब जब बैरी कँगना खनके तब तब दिल हो जाए बेताब।।
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महफूज
दिल के वीराने में फिर, उल्फते गीत गा रहा है कोई।
महफूज धड़कनो में मुद्दत बाद, एहसास दे रहा कोई।। -
कंगाली ईनाम
कोरोना कें कहर में
न ताली काम आई
न थाली काम आई।
काम आई तो सिर्फ
घर घर कंगाली
ईनाम आई।। -
मनमर्जियां
हां मशगूल हूं अपनी दुनिया में
मुझसे बेहतर मुझे कोई जानता नहीं
खामोश रहूं? या सवाल करू?
मेरे शब्दों को कोई पहचानता नहीं। -
आईना
आईना नहीं है आंखें मेरी
फिर भी हकीकत तो जानती हैं
ना तुम राही हो ,ना हमराही हो
फिर भी तुम्हें अपना मानती हैं । -
कहर कोरोना के कारण
कैसे होगी शहरी अब
कैसे होगा इफ्तार भला।
कहर कोरोना के कारण
बन्द पड़ा बाजार भला।। -
नौराते का त्यौहार
न फूल मिला न हार मिला।
न नारियल चुन्नी सिंगार मिला।
मन्दिर में ताले लटक रहे
यूँ हीं नौराते का त्यौहार गया।। -
महबूब की गलियां
मन का घोड़ा ,बेशक़ लंगड़ा
हरदम जाए भागे-भागे।
जन्नत भी फीका लगता है
महबूब की गलियों के आगे। -
शायरी
बेशक़ बदनाम हो गई उनकी गलियों में
बाकसम अब भी अपनी -सी लगती है। -
धरती
ज्ञान और विज्ञान की धरती
त्याग और बलिदान की धरती।
क्यों बन रही है आज एक
जालिम और बेईमान की धरती।। -
मय
ए आँखें, ए होंठ किसी मय से कम नहीं।
वो मय किस काम का जिस मय में आप नहीं।। -
कयानात
काली स्याह जुल्फे तेरी, काली घटा पे कयामत ढाती है।
गर बिखरा दे अपनी जुल्फ, मेरी कयानात में रौशनी आ जाती है।। -
गिरफ्त
कौन कहता है तेरी अदा के कायल हम नहीं है।
रात दिन तेरी गेसुओं मे उलझा रहता हूँ ए क्या कम है।। -
आँखें
यों न देख इस अदा से कहीं मर हम न जाए।
ए आँखें देखे है कई मर्तबा दीवानो को मरते हुए।। -
अल्फ़ाज़ हैं कुछ…
आजकल अल्फ़ाज़ हैं कुछ बिखरे- बिखरे
कितने भी समेंटूं गज़ल नहीं बनती। -
शायरी
ऐ वक्त जरा रुक जा
क्या लाँँकडाउन है सिर्फ हमारे लिए? -
दीदार -ए-माहताब
नजरें चाह रही दीदार-ए-माहताब का
नाचीज़ को क्या पता अमावस भी होती है।