ढ़लते दिसंबर के साथ इश्क़ भी तेरा ढ़ल गया। तू तो कहता था कि बिना मेरे तेरा मन कही नही लगता…. अब तू बता कि वो तेरा प्यार कहाँ गया?
ढ़लते दिसंबर के साथ इश्क़ भी तेरा ढ़ल गया। तू तो कहता था कि बिना मेरे तेरा मन कही नही लगता…. अब तू बता कि वो तेरा प्यार कहाँ गया?
तु दिखी मुझे हीरा की तरह, हुआ प्यार मीरा की तरह, मिले हम सरफिरा की तरह, बाप तेरा खा गया खीरा की तरह, मैं पेट में बना पीड़ा की तरह, उसने निकाल दिया जलजीरा की […]
तुम मेरे पास रहो या रहो मुझसे दूर। मेरा प्यार कम न होगा करुँगा भरपूर।।
ये मौसम सुहाना फिजा भीगी तेरी यादें हैं छायी काले बादल हों जैसे।
हमारी आदत नही है यूं ही किसी की तारीफें करना तुम हो ही इतने अच्छे की हम शायर हो गये।
अब तो बन गई किस्मत जब से मिल गयीं ख़ुशियाँ
Apni khaamiyo ka harzaana bhar Kar, Un par kaam kar rahi hu main… Tumhe aur tumhari yaadein bhula Kar, Ab aage badh rahi hu na main… ❤ #Sheetal
संवर कर आऊँगा जब तुम्हारी महफिल मे, निगाहें तुम्हारी सिर्फ मुझ पर ठहर जायेगी। देखेंगे जब सब तुम्हारे होठो पर हल्की-सी हँसी, महफ़िल मे हमारी मोहब्बत ही चर्चा बन जायेगी।।
लफ्ज़ो में कहाँ बयां होती है मोहब्बत जब बेहिन्तहा होती है हम ही थे जो ये खता कर बैठे अब नसीब में बस अधूरी नज्म होती है
तशरीफ़ कैसे रखे अभी फ़रमान बाँकी हैं। हाले दिल क्या कहे अभी पहचान बाँकी है।।
बादलो की गरज हो या मौसम तूफानी है देश की रक्षा में जाने कितने देते कुर्बानी है दुश्मनों से कह दो आंख न उठे गलती से समुंद्री लहरों पे खड़ा हर शेर हिंदुस्तानी है!
आरज़ू नही रखता कि पूरी कायनात मे मशहूर हो शक्सियत मेरी। जनाब! आप जितना जानते हो बस उतनी ही है पहचान है मेरी।।
रात भर होंठों पर मुस्कान, भोर से ही सीने में गुलों का खिलना था बात कोई नई न थी, बस इस शाम अपने हमदर्द से मिलना था । ख़ैर,शाम ढ़लने के साथ ही, सौ रूपये […]
जब भी तेरा नाम लेकर तुझको कोई बुलाएगा। मेरा चेहरा तेरे मन के परदे पर नजर आएगा।।
इन खुली जुल्फों में न जाने कितने राज छुपे होते है कभी चाँद कभी रातें तो कभी तारे फूल बनके सजे होते है वो लट आँखों से होठो तक गुजर जाए तो संमा बदल देती […]
खुली जुल्फों में न जाने कितने राज छुपे होते है कभी चाँद कभी रातें तो कभी तारे फूल बनके सजे होते है वो लट आँखों से होठो तक गुजर जाए तो संमा बदल देती है […]
निगाहों के पैमाने से शख्शियत भांप लेते है, राह चलते ही बुलंदियों के कद मांप लेते हैं।। जलने वालों का कुछ हो नहीं सकता, वो तो मेरी बेफिक्री से भी जल बैठे ॥ सरहदें बदलती […]
निगाहों के पैमाने से शख्शियत भांप लेते है, राह चलते ही बुलंदियों के कद मांप लेते हैं।। जलने वालों का कुछ हो नहीं सकता, वो तो मेरी बेफिक्री से भी जल बैठे ॥ सरहदें बदलती […]
जलने वालों का कुछ हो नहीं सकता, वो तो मेरी बेफिक्री से भी जल बैठे ॥ @नील पदम्
एड्स दिवस बनाने वाले काश! संयम दिवस भी बनाया होता। बह्मचर्य का पालन करके समय से पहले ना कोई जान गवाया होता।।
तेरी गिलाओं का बदला मेरा प्यार होगा। तू हीं मेरा पिछला और तू हीं अगला मेरा प्यार होगा।।
क्यों प्यार किया ये मत पूछो। अपनी आकुलता का कैसे इजहार किया ये मत पूछो।।
मुहब्बत की दुनिया में कदम जो रखेगा। मुश्किलों से हीं दामन उसका भड़ेगा।।
जिंदगी की ताजगी अब महसूस करता हूं सिर्फ ख्वाबों में सूख गए वो गुलाब जो छुपा कर रखे थे किताबों में.
कभी तेरे प्यार का लावा था रगों में जिसमे कई हसरतें जलकर मर गई आज उस लावे के साथ-साथ माशूका की नजरें भी सर्द पड़ गई.
तुम सरेआम कहती हो मैं बुरा मेरा दिल बुरा क्या वह वक्त भी बुरा जो तुम्हारा मेरे दिल में गुजरा.
जिस जिंदगी में तुम साथ हो उसी जिंदगी में मुझे बार-बार है जन्म लेना सकून मुझे मिल जाए तब जन्नत का खुदा वो जिंदगी मुझे एक दिन की और देना.
काश में समंदर की गहराई में आराम से पड़ी होती तुम होते कान्हा मेरे चमकते मोती और मैं तुम्हारी राधा सीप होती.
चकाचौंध वाली जिंदगी पा ली मैंने अब ना करना पड़ता भूखे पेट बसर पर जो खुली आंखों से देखा था सपना तयना कर पाया उसकी परछाई तक का भी सफर.
समझदार जब से अपनी नज़र मे बेहिसाब-सा मैं लापरवाह हो गया हूँ, सबको लगता है कि अब मै बहुत समझदार-सा हो गया हूँ।।
मै भीड़ मे नही हूँ शामिल,मेरा जिन्दगी जीने का अन्दाज़ निराला है। मुझे दुनिया के दिखावे से कही ज्यादा अपना ‘ऐटिट्यूड’ प्यारा है।।
जाने कैसे दौर से गुजर रहा हूँ मैं, वक़्त के हर मोड़ पे लड़खड़ाता हूँ, वो बन्दा ही जख्म-ए-संगीन देता है, जिसको पूरे दिल से मैं अपनाता हूँ ।। *नील पदम् *
सूरज की किरणे भी सुबह-सुबह कयामत ढ़ा रही है, पूछ रही है,कैसे है वो?जिनकी तुम्हे याद आ रही है।
तबकी बात और है, ना करो तबकी बातें, थे तब भी लेकिन, जख्म हँसते ना थे। होंगे सांप तब भी, यकीनन आस्तीनों में, रहते थे खामोश, तब ये डसते ना थे ।। Copyright@ नील पदम्
हाथ की लकीरों का क्या?बनती है और बिगड़ जाती है। भरोसा मेहनत पर रखो, किस्मत खुद ही सुधर जाती है।।
हुनर रखता हूँ दर्द-ए-दिल छिपाने का पर मेरे अरमान मचल रहे है, मेरे अश्क़ो पर बारिश की बूंदे भी अब तो बेअसर से दिख रहे है। उनसे मिलने को अब तो हम उन्ही से फरियाद […]
जब से अपनी नज़र मे बेहिसाब-सा मैं लापरवाह हो गया हूँ, सबको लगता है कि अब मै बहुत समझदार-सा हो गया हूँ।।
ब्रह्ममुहुर्त में जगना सीखो दिन करो जो मेहनत। निशा काल आराम करो तो श्रेष्ठ रहेगी तेरी किस्मत।।
अमृत बेले बिस्तर छोड़ो दिन में करो न आलिस। देर रात न जागो तो बन जाओगे खालिस।।
मैंने तो तुझे रहमदिल समझा था पर तुम तो बड़े बेरहम निकले। सिर्फ़ जख्म दिखाने मैं आया था पर तेरे कुचे से घायल हम निकले।।
अगर आग घर में लगाए कोई पानी से उसको बुझा देंगे हम। लगाए जो जीवन में आके कोई इन अश्कों से कैसे बुझाएगे हम।।
टूटे प्रेम अनादर से मिला सके न अल्लाह। मोती टूटे ना जुड़े कित लेपन कर लाह।।
बिना पंख की बेटी होती फिर भी कहते परी मेरी। बेटा दूर नजर से हो फिर भी कहते छड़ी मेरी।।
पिता नहीं कोई राजा बेटा राजकुमार हीं होता। दुर्लभ दर्शन मिले जहाँ ऐसा एक प्यार हीं होता।।
पत्थर से बन कर रह गई जख्मों को सहकर भी रोई नहीं तुमने ही दिल कहीं और लगा लिया वरना तुमसे अजीज तो आज भी कोई नहीं.
तुमने बसा ली अपनी दुनिया मुझे तो किसी छत का भी सहारा नहीं चाह कर भी मैं तुम्हारा हाल ना पूछ सकू कहीं कह दो की अब ये हक तुम्हारा नहीं.
मेरे दिल का हाल बुरा है इसका इल्जाम तुम पर लगाती हूं पिया ना यकीन तो हो चलो मेरी बढ़ती धड़कन तुम्हें सुनाती हूं
दुनिया चाहे लाख खूबसूरत है सिंगार चाहे खूब करें पर सादगी की अपनी ही बात है पुराने भददे कपड़ों में भी वह कुछ अलग सी लगती है जाने उसमें ऐसी क्या बात है
बदला खूब लिया उसने मुझसे मुड़ कर देख मुझे चली गई मुस्कुरा कर थोड़ा सा दिल का दर्द मुझे दे गई
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