आकाश से पाताल की होगी बातें
पर बातों का कोई भी तर्क ना होगा
जो शब्दों के सागर से ढूंढे ना मोती
तो मुझ में और मुझमे फर्क क्या होगा
Category: शेर-ओ-शायरी
-
तर्क
-
गजब है
गजब एहसास है
तुम्हारे पास होने का
दूर जाने का गम भी कम नहीं
तुम्हारी महक आज भी
महसूस होती है
जैसे सूखे फूलों में बास आती है -
सिलसिला
सिलसिला यूँ ही चलता रहे
मुलाकातों का
बीते ना पल यूं ही चलता रहे
तेरा मेरा मिलना बिछड़ना
फिर मिलना और हमेशा के लिए बिछड़ जाना -
रूहानियत
रूहानियत नहीं रही
अब तेरे अल्फाजों में
क्या करें मौत तगाजए ने
तुझे रह ही बना दिया -
फूलों में महक
फूलों में महक है
कागज़ में अल्फ़ाज़
आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं
दिल में उतर आया है चांद।
और बरस रहा है सावन
कितनी ही यादें ताज़ा हो गई हैं -
बहुत हो गया अब
लफ्जों को कविता में
पिरोते जा रहे हैं
जज्बातों को सहेज कर
रखते जा रहे हैं ।
बहुत हो गया अब
मरने का सामान
चलो छोड़ दिया तुम्हें
अब जीने जा रहे हैं -
तू ही तो था
तू ही तो था वो कन्धा
जिस पर सिर रख
रो लेती थी।
तू ही तो था यार
मेरा जिसको
कान्हा मैं कहती थी -
उसका चेहरा
उसका चेहरा ही नज़र
आता है देखूँ मैं जिधर
वो रूबरू आता है
मुझे अक्सर नज़र -
मेरी बदकिस्मती
मेरी बदकिस्मती थी
जो तुम ना मिले
मैंने तुम्हें ढूंढा है मूंगफली के दाने की तरह। -
कितनी ताकत
है कितनी ताकत तुझमें
मुझे तोड़ने की बता तू मुझे
मै हद देखना चाह्ती हूँ
तेरे गिरने की। -
हम रोए हैं
उनसे बिछड़ कर हम रोए हैं
देखना चाहिए क्या वह भी रोए -
बेखयाली
दिल की अठखेलियां और अंगड़ाइयाँ
धीमे-धीमे बढ़ती जा रही हैं
उम्र चांदनी की तरह घटती जा रही है
तुम्हें होश है कि नहीं
अब सितम करना बंद कर
बेखयाली में भी खयाल आता है तेरा
तू दिल से खेलना बंद कर। -
आंखों के सामने
आँखों के सामने बैठे हुए हैं
सिर झुकाए हुए
शायद उन्हें एहसास है
मेरे साथ किये
जुल्म सितम का। -
मोहलत
मोहलत की जरुरत थी
थोड़ा सा इंतजार कर लेते
बहुत कुछ सोंचा था
तुम्हारे लिये हमनें। -
आंसुओं से नहा कर
आंसुओं से नहा कर
धूप का चंदन घिस कर
तेरे प्रेम का उबटन लगाकर
उजली तो थी ही और निखर भी गई -
कयामत से पहले
कयामत से पहले
तेरा चांद देखना चाहते हैं
सितारों के जुगनू खुद में
समेटना चाहते हैं
आसमान जैसा मेरा दिल
ज़मी है तू मेरी हम तुझमें उतरना चाहते हैं। -
सफ़र
सफ़र की शाम हो गई
ज़िन्दगी की आरज़ू में
मौत बदनाम हो गई । -
जुस्तजू
जुस्तजू की और खो बैठे
चैन और करार
आते हैं सपनें उसके बार-बार -
आरजू
करी थी आरजू एक जो पूरी ना हुई
पर एक सबक दे गई किसी को
इतना नजदीक मत लाओ
कि वह आपकी शुभ -ओ-शाम जाए -
क्या हुआ
क्या हुआ अगर आप हमसे
खफ़ा हो गये ।
सांसे थम गई सपनें जुदा हो गए -
अच्छा हुआ जो
अच्छा हुआ जो तुमसे
मुलाकात नहीं हुई
मुझे कितनी शिकायतें हैं
तुम मेरी आँखों में पढ़ लेते। -
दर्द
दर्द की आह में तड़पते हैं
तुमसे मिलने को तरसते हैं
है इतनी गमगीन ज़िन्दगी फिर भी
तुम हाल पूछते हो तो कह देते हैं के अच्छे हैं । -
दावा
लहरों से टकराने का दावा करने वाले
अक्सर अपने ही आंसुओं में डूब जाते हैं
हमने जो पूछा क्यों गम शुदा हो तुम
तो हम से ही जाने क्यों रूठ जाते हैं -
दीप जलाओ शहीदों के नाम
एक दीप तो जला ‘विनयचंद ‘
मजार- ए-शहीद पे।
देश गुनुनाएगा तेरे लिए
नगमा हमीद के।। -
गुल -ए-गुलाब कहता है
गुल -ए-गुलाब कहता है
इतना हमसे ओ प्रीतम
मजार -ए-शहीद पर चढ़ा देना।
खुशबूओं से,सराबोर कर दूँगा तुझको
जरा मेरा भी मान बढ़ा देना।। -
वो गलियाँ
उन गलियों से आज भी गुजरती हूँ मैं
जिन गलियों से कभी गुजरता था तू
ठहर जाती है नजर वहीं किसी मोड पर
शायद आ जाये तू मुझको नजरलौट आओ ना तुम अपने शहर
दिल लगता नही मेरा इधर
इन हवाओं मैं लगती है मुझको कमी
सांसों मे जुलती नही अब खुशबू तेरीयाद है आज भी मुझको शहर का वो चौक
जहां देखा था तुझको पहली दफा
वो रंग आज भी पसंदीदा है मेरा
जो पहना था तूने उस रात कोदीदार को तेरे तरस गई अखियां
दीदार को तेरे तरस गई अखियां
आ जाओ लौट के तुम
फिर से अपनी गलियां। -
मुखोटे
जीत हार चलते रहते,
लोग चेहरे बदलते रहते।
मुखोटे लगाकर मिलते एक दूसरे से,
बगल में छुरियां दबाए रखते।
निमिषा सिंघल -
किताबों में दबे फ़ूल सी है जिंदगी मेरी
किताबों में दबे फ़ूल सी है जिंदगी मेरी
सूखी सी है मगर महक अभी तक बची है -
महबूब वतन
महबूब वतन की रक्षा को शमशीर उठाया करते हैं
कोई पूछे मोहब्बत कितनी है दिल चीर दिखाया करते हैं -
दिल के जख्म
कुछ जख्म दिखाए जा नहीं सकते।
घायल किया जिसको तुमने
दिल चीर दिखाए जा नहीं सकते।। -
शीतलता
मेघ की गोदी से गिरती
बूंद बन कर देखना
मिलता है आशीष
शीतलता में घुल कर देखना -
मंच
यह मंच कला को सौंपा है
इसे कलंकित करना ठीक नहीं
मासूम कला की बस्ती को
दुख रंजित करना ठीक नहींरंजित-राशि
-
इश्क़
इश्क़ यदि मासूम है तो बगावत क्यों होती है। ः
मतलबपरस्त है तो इनायत क्यों होती है।। -
मासूमियत
मेरी मासूमियत को हथियार मत बनाना।
दिल में दगा रखकर प्यार मत बनाना।।
मैं तो खाके धोखा खामोश रह जाउँगा
खुद को बेबफाओं का सरदार मत बनाना।। -
कल का भरोसा क्या कीजे
जिंदगी का भरोसा क्या कीजे,
सांसो का भरोसा क्या कीजे, जो आज है सच तो है सिर्फ वही,
आने वाले कल का भरोसा क्या कीजे।
निमिषा सिंघल -
कालचक्र
देखन कि जब उठी लालसा
देखा आँखे मीदं
कालचक्र पर बिछा के पलका
सोया था गोविंद -
दिल
किसी ने पत्ता कहा पीपल का
किसी ने पान पत्र समरूप कहा।
किसी ने मुट्ठी जैसा दिल माना
तो कर लो दुनिया मुट्ठी में। -
आँचल
यूँ तो मूँह बांधकर घुमा करती हूँ डगर-डगर।
पर सिर पे आँचल रखने से जी घबराता क्योंकर।। -
पर्दा
नारी ने चाहा की पर्दा प्रथा दूर हो उससे
पर लोग हंस रहे हैं उसे बेपर्दा करके
👩🏫👩🔧👩🏭👩🔬👩🚀👮♀👷♀👸👱♀🤰🤱
आखिर क्यों -
जस्न- ए-जिन्दगी
जस्न- ए- ज़िन्दगी एक शौक होता है।
मौत के बाद तो सब बेख़ौफ होता है।। -
दौर
गजब का हुनर है लोगो मे सच्चाई को छिपाने का।
खुद से ही खुद को खुदा मान बैठे है जमाने का।।
-
खुदा
गजब का हुनर है लोगो मे सच्चाई को छिपाने का।
खुद से ही खुद को खुदा मान बैठे है जमाने का।।
-
February
जाते हुये जनवरी ने जख्म फिर हरे कर दिये।
फ़रवरी प्रेम माह ने फिर दामन उम्मीद से भर दिये।।
-
दो पल
जब कोई हमसे हँसकर थोड़ा सा बोला देता है,
अपने दिल के दरवाजे हल्के से खोल देता है।
हम खुशी मे अपने आपको भूल सा जाते है,
दो पलो मे ही सारे जीवन की खुशियाँ पा जाते है। -
आफताब
बड़ा इतराता है जुगनू चांद की धूल को मल कर
तेरी तारीफ तो बस इस रात ने की है
बेपर्दा कर सके जो अख्ज की भीड़ को इतनी हिम्मत तो
बस अफताब ने की है -
राम उपासक
पिता बचन को मान रामजी
गए वास को वन में।
राम उपासक बनके भरतजी
सन्यासी हो रह जीवन में।। -
कम नहीं आँकना
यूँ तो किसी के गिरेवान में मत झाँकना ।
झाँककर भी किसी को कम नहीं आँकना।
गिरिवर उठाने वाले से बचाकर माखन
क्योंकर छीका नित -नित ऊँचा टाँगना।। -
Samay
समय तो समय पर ही समय से चलता रहता है।
फ़िक्र कहां है किसी को किसी की…?
जमाना तो यूं ही आगे बढ़ता रहता है। -
दीदार को बेकरार
नब्ज टटोलकर देख ले निर्मोही
तुम्हारे हीं प्यार में बीमार हूँ।
ये दिल दे चुकी कब के तुझको
सिर्फ एक दीदार को बेकरार हूँ।। -
तू और मैं
तुम्हें देख दिल मेरा चहकता है
जो दुनिया देखूं तो बहकता है।
तुम से है मेरी दुनिया प्रियतम
तेरे दिल में मेरा दिल धड़कता है।।