उनका प्यार से इनकार करना भी अब तो ऑनलाइन है। अब ये कौन सी डिजिटल इंडिया की नयी गाईडलाईन है।।
उनका प्यार से इनकार करना भी अब तो ऑनलाइन है। अब ये कौन सी डिजिटल इंडिया की नयी गाईडलाईन है।।
पानी और दूध की दोस्ती है अनमोल। “विनयचंद “ये साथ हो बिके एक हीं मोल।।
पानी और दूध का एक नहीं रंग रूप। आकर दोनों साथ में बन जाये समरूप।।
दर्द को छुपा कर जीना मेरी आदत सी हो गई है भीगी आँखों के साथ मुस्कुराना मेरी आदत सी हो गई है मर चुके है जजबात मेरे दिल के फिर भी टूटी ऊमिदों के साथ […]
Meri jindagi me aake mujhe apna bna ke Usne tode the sare jo kie the vaade
काट दो कुल्हाड़ी से फिर भी खुशबू हीं दूँगा। मैं तो मलयाचल का चंदन हूँ कुछ भी दाम नहीं लूँगा।।
अच्छा हुआ जो तुम… न आये मेरे जनाजे में , आज तो दफना ही दिया जाता हमें… जनाब ! अगर वक्त पर हिचकियाँ न आती !! :- सोमू आचार्य
Tu ruthta raha mai har baar tujhe manati rhi Apne dil ki khawaishon ko dil me jalati rhi Ye mukkamal mohabbat ki dastan hi kuch aisi thi Tu har baar mujhe thukrata raha Or mai […]
दिल में खुशी हो और होंठों पर हँसी हो जीवन बीते आपका सदा सर्वदा हर्ष में। मंगल हीं मंगल हो और सुखकारी बीते हर दिन हर पल हर मास इस नव बर्ष में।।
जब तक साँसें चली गैरों ने गुंजाईश रखी हमे जलाने की… कि जब धङकन थमी तो अपनों ने जला दिया !! :- सोमू आचार्य
अपनी शाम को शमा पर लुटाने निकला परवाना हूँ मैं ! जीता हूँ जिसके लिए, मरता हूँ जिसके लिए… उसकी हर हरकत का अफसाना हूँ मैं !!
देख देख यारा मेरा टीन एज खतम हो गया। साल बीसा मैं बनके सबसे बीस बन गया।।
तुम अपने दिल की प्यास बना ले। अलविदा कहने से पहले इतिहास बना ले । जा रहा हूँ मैं कहके ऐ मेरे दोस्त आने वाले बरस को कुछ खास बनाले।।
जिंदगी के किनारे रहकर जिंदगी गुजार दी मझधार में आये तो जिंदगी ने दबोच लिया
इश्क मे अब और क्या बाकी रह गया। हमने तो आपसे दिल लगाकर देख लिया।।
क्या कहर है सर्दी का आजकल राजनीति की गर्मी भी इसे ठंडा नहीं कर पाई
पूछो न हाल कृष्णा का… सब कुछ राधे राधे है।
जो ठहर जाए वो हवा नहीं होती, दुनिया में हर मर्ज की दवा नहीं होती । विनयचंद खुद सम्हाल अपने दिल को , क्योंकि यहाँ अदा- ए-वफा नहीं होती।।
अँधेरे में हवा का झोका भी बनकर साया सा नजर आता है ! जब दिल-ओ-दिमाग खो दे सुध… तब मेरे यार.. अच्छा खासा *चोराया भी प्रेतघाटी कि माया सा नजर आता है !! *(चोराया=चौराहा) मुठी […]
गमे-जुदाई किसी से बाँटी नहीं जाती। बगैर तेरे ये रातें अब काटी नहीं जाती। मिटा दो फ़ासले, जो हमारे दरम्यान है, गहरी कितनी खाई, जो पाटी नहीं जाती। देवेश साखरे ‘देव’
दिल को अपने जलाकर भी इश्क़ करता है। कुल्हड़ ही है जो गर्म चाय पर मरता है।।
तबल ऐसी कि साँसो में बसा लें उन्हें किस्मत ऐसी की दीदार को मोहताज हैं हम।
तुम्हें चाहा था आवाज सुनकर मुस्कुराती थी तेरे ख्वाब बुनकर अब जान गयी दर्द क्या होता है अक्सर हँस देती थी इश्क की बात सुनकर।
तमाशा देखने वाले आ गये, मेरे शहर मे कहां से ये लोग आ गये। सबूत देना होगा सबको अपने मौजूद होने का, आज कुछ अपने भी ऐसे हालात आ गये।
तमाशा देखने वाले आ गये, मेरे शहर मे कहां से ये लोग आ गये। सबूत देना होगा सबको अपने मौजूद होने का, आज कुछ अपने भी ऐसे हालात आ गये।
यूँ ना मिला कर रकीबों की तरह साथ चल फलसफ़े की तरह…… हिचिकियाँ रात भर आईं…. और सोने ना दिया तूने याद किया हो जैसे दिलबरोँ की तरह….
मेरे लफ्जों में तभी तक दम है जब तक तुम हो, तब तक हम हैं। मेरी प्रेरणा तुम हो,मेरी कविता तुम हो जब तक दिल है तब तक तुम हो।
तुम चले जाओगे तो मेरी सांस चली जाएगी दर्द रह जाएगा,आवाज चली जाएगी। ज़िस्म रह जाएगा रूह चली जाएगी ।
खामोश सा अफसाना है राज़ कोई गहरा ना जान सके कोई वो चीज़ है तेरी नज़र
इजाजत है आपको! मेरे बारे में कुछ भी सोचिए बेवफ़ा सोचिए,अदावती सोंचिये आपकी तरह हमसे यूँ लफ्जों की दगेबाज़ी नहीं होती।
साल भी खत्म होने को आया, सब आये पर तुम न आये। इंतजार चार दिन और है तुम्हारा, फिर आये तो फिर क्या आये???
वो तख्त कहाँ वो ताज कहाँ वो कलगीधर सा शाह कहाँ। हे दशमपिता हे गुरु गोविन्द तेरे बिन मुझे कुछ चाह कहाँ।। ,,,,,,,,कोटि कोटि प्रणाम,,,,,,,,,
ए बारिश तेरे रूप अनेक, तू समझ किसे ही ना आती कभी तरसाए मौसम में, कभी बेमौसम बरस जाती आते जाते आँसू कभी , खुशी और गम के दे जाती कल्पना तेरे बिना जीवन की, […]
ख्वाबों में जिसको देखा था मैंने, हकीकत में साथ वो रहने लगा है सोचा था साथ कौन देता है अब, हर कदम साथ वो चलने लगा है दिल की बातें किसे सुनाती, बिन बोले सब […]
अब न रह विस्वास किसी पे, जब अपने ही दरिन्दगी में उतर आयें। अपराध बढ़ रहा चरम पे, कैसे रुके कोई बतलायें।।
जनाब!अपने दिल को सम्हाल कर रखिये, दुनिया से आप इसको जरा बचा कर रखिये। असर हुआ है अगर इस पर किसी की बात का, तो अपने दिल को पत्थर-सा का बना कर रखिये।
यूं न मेरी मोहब्बत को रुसवा कर, ज़माने ने बहुत दर्द दी है। बस एक बार मिल रूह से रूह तक, चले जायेंगे हम यहाँ से ज़माने से किसे हमदर्दी है।। नवीन द्विवेदी
चंद शेर /मुक्तक लाख करो साजिस बुनियाद हिन्द कोई हिला सकता नही | क्रांतिबिरो बलिदान जवानो सहादत कोई भुला सकता नहीं | श्याम कुँवर भारती [राजभर] भारत की मिट्टी माथे तिलक चंदन लगाएंगे हम | […]
मेरे ख़ुदा मुझको बता, सब कुछ तो तेरे खाते में दर्ज़ है। तारीफ़ तेरी हो या फिर मेरी, इसमें क्या हर्ज़ है।।
लम्हों को जी लो दिल कहता है जो आज में जीता है वो ही कल खुश रहता है । तो मुस्कराईये और अपना कल बनाइए ।
भूल तो गये ही हो आप मुझे…… पर ठीक से अपना ख्याल रखना।।
तेरी हँसी- वादियों का मारा हूँ मैं, तुझे जिस्मों-जान तक उतारा हूँ मैं। प्यार करके कहती हो, शादी-शुदा हूँ मैं। तो कान खोलकर सुन लो, दो बच्चों का बाप होते हुए, अभी तक कुँवारा हूँ […]
कभी तो मिल ही जाओगी ए मंजिल! यूं रोज तड़पाना अच्छी बात नहीं
मुहब्बत जता के इनकार नहीं किया जाता। जमाने को बता के प्यार नहीं किया जाता।।
जीने को इशारा दे दो डूबते को सहारा दे दो अर्सा हुआ तुझे देखे हुए, इन नजरों को नजारा दे दो।
जीने को इशारा दे दो डूबते को सहारा दे दो अर्सा हुआ तुझे देखे हुए, इन नजरों को नजारा दे दो।
जी लो जीभर के ज़िन्दगी की आरज़ू है जो मिला है अच्छा है जो ना मिला उसकी जुफ्तज़ू है
जीने को इशारा दे दो डूबते को सहारा दे दो अर्सा हुआ तुझे देखे हुए, इन नजरों को नजारा दे दो।⚘⚘⚘⚘
अंधेरों में इतना कहाँ जोर है । आ रहा है सूरज हुआ भोर है।।
कभी तो इन गलियों में आकर तो देखो, माना बहुत अन्धेरा है । शायद तुम्हारे आने से मेरा जहान रौशन हो जाये।
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