शेर-ओ-शायरी

मुक्तक 6

बर्बादी किसे दिखेगी हमारी जहाँ में मीर , लुटने के बाद ग़म का खज़ाना जो पा लिया .. मुझको तेरी कमी तो सताती ही है मगर , तू दूर जा के खुश है ये सुकून की बात है . …atr »

दर्द ए दरिया कैद है इस दिल में

दर्द ए दरिया कैद है इस दिल में

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मुक्तक 3

खड़ी है जिंदगी फिर पूछती घर का पता क्या है, मुझे याद नहीं है मीर तू ही जाकर बता क्या है.. बड़ी मुश्किल है बेचारी किधर जाये ख़बर क्या है? कभी वो पूछती है फिर इधर क्या है? उधर क्या है?   …atr »

मुक्तक2

हो गयी मुद्दत  तुम्हारे सामने आया ही नहीं , है मगर सच ये कभी तुमने बुलाया ही नहीं. अब तो सांसो पर मेरे पहरा तुम्हारा ही रहे, है राज़ कि बातें,तेरे बिन एक पल बिताया भी नहीं.   …atr »

मुक्तक 1

मोहब्बत के सवालों से मैं अक्सर अब मुकर जाता , कहीं बातो ही बातों में मैं कुछ कहकर ठहर जाता..  कि तेरा नाम भूले से जबां तक आ गया ग़र तो, तू बदनाम हो जाये न इससे मैं सिहर जाता …     …atr »

तुम्हारे लिए..

अगर तुम बन गयी दीपक तुम्हारी लौ बनूँगा मैं, नदी के शोर में शायद तुम्हारी धुन सुनूंगा मैं. तुम्हारी याद में अक्सर यहाँ आंसू  टपक पड़ते, ये मोती है मेरे प्रीतम मगर कब तक गिनूंगा मैं… ..atr »

बरसते सावन में कभी तो भीगती होगी वो

बरसते सावन में कभी तो भीगती होगी वो

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कैसे करें शिकवे गिले हम उनसे

कैसे करें शिकवे गिले हम उनसे

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शाम ओ सहर उनके ख्यालों में खोए रहते है

शाम ओ सहर उनके ख्यालों में खोए रहते है

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अफ़साने मोहब्बत के होठों तक आ नहीं पाते

अफ़साने मोहब्बत के होठों तक आ नहीं पाते

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शोक ए हिज़्र करूं या जश्न ए वस्ल करूं

शोक ए हिज़्र करूं या जश्न ए वस्ल करूं

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कहीं हमको भी जाना है..

तू ही दौलत मेरे दिल कि तू ही मेरा खज़ाना है, मेरे दिल में मेरे साक़ी तेरा ही गुनगुनाना है. चलो अब देखते है फिर मुलाक़ातें कहाँ होंगी , कहीं तुमको भी जाना है कहीं हमको भी जाना है.. ….atr »

मुझको पिलाओ यारो…..

आज फिर जी भर के मुझको पिलाओ यारो, मैं तो झूमा हूँ, मुझे और झुमाओ यारो.. आज इतनी पिलाओ कि फिर होश न रहे, अब तो साकी से मुझे और दिलाओ यारो.. रात आधी है बंद है मयकदा, मेरे जीने के लिए इसको खुलाओ यारो.. पी पी के मरने में वक़्त लगेगा मुझे; आज ही बंद करके मय न जलाओ यारो. फिर कभी याद में उसकी न धुआं दिल से उठे , इसलिए दिल में लगी आग बुझाओ यारो… आज फिर जी भर के मुझको पिलाओ यारो.. …atr »

उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें

उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें

उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें जब मेरे शानों पे बिखरती है सुलझ सी जाती है मेरी उलझी हुई जिंदगी »

न उस रात चांदनी होती

न उस रात चांदनी होती

न उस रात चांदनी होती न वो चांद सा चेहरा दिखता न मासूम मोहब्बत होती न नादान दिला ताउम्र तडपता »

मैं तो सन्नाटा हूं

ये तो मुमकिन नही यूं ही फ़ना हो जाऊं मैं तो सन्नाटा हूं फैलूं तो सदा हो जाऊं »

सलाखें ग़ज़ल गाती हैं

अब तो उनके घर से सदायें आती हैं ,जो कभी मेरे न थे उनकी भी दुआएं आती हैं … सुना है उन मकानों में हज़ारो कत्लखाने हैं , जहाँ दिल चूर होते हैं , सलाखें ग़ज़ल गाती हैं… …… …atr »

…पुरानी नजरों से

उनको हर रोज नये चांद सा नया पाया हमने मगर उन्होने हमें देखा वही पुरानी नजरों से »

शागिर्द ए शाम

जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करें जुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें »

कैसे करें शिकवे

कैसे करें शिकवे गिले हम उनसे उनकी हर मासूम खता के हम खिदमतगार है »

ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त

ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त, कैसा वक्त है जो कभी होता भी नहीं, कभी गुजरता भी नहीं रब्तः संबंध   »

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