पल – पल रचता यहां कुछ नया , जो था कल तक सच , जिंदा वोह आज नहीं , है लगता जो आज सच , मौत उसकी कल यहीं
पल – पल रचता यहां कुछ नया , जो था कल तक सच , जिंदा वोह आज नहीं , है लगता जो आज सच , मौत उसकी कल यहीं
पल – पल बदलता सब कुछ यहां , जो कल था तूं , है वोह आज नहीं , है जो आज तूं , होगा वोह कल नहीं
कोई कोना जिस्म का उड़ के बैठा किसी कोने में अब सफर साँसों का गुजरता है कभी जिस्म में कभी, किसी कोने में राजेश’अरमान’
कुछ परछाइयाँ सी चलती है मेरे पीछे , वक़्त भी बहरूपिया होता है गुमाँ न था राजेश’अरमान’
कभी मन करता है फिर से दुनिया को औरों की नज़र से देखूँ शायद मेरी नज़र में कोई भ्रान्ति दोष हो एक बार देखा जब दुनिया को दूसरी नज़र से लगा आँखों पे कोई चाबुक […]
गहरे राज़ छुपे है अपनी ही साँसों में लो तो ठंडी छोड़ों तो गर्म -गर्म राजेश’अरमान’
आँखें तो बस देखती रही ज़िंदगी के आवागमन को राजेश’अरमान’
कोई पुल ऐसा भी होता जिस पर चलते सिर्फ तुम राजेश’अरमान’
मर गई आत्मा ,शरीर कहने को ज़िंदा है पंछी मन का उड़ गया ,आँखों में परिंदा है राजेश’अरमान’
यह रुके हुए आँसुओं का हिज़ाब है या फिर आने वाला कोई सैलाब है […]
न सूत न कपास फिर भी बंधी आस जुलाहे ले के बैठे लट्ठ कभी तो आएगी कपास राजेश’अरमान
चारों और अधर्म के जंगल भक्ति हो गई दावानल राजेश’अरमान’
दो इशको का मिलन है यह हमारा इशक है खुदा की तसवीर यह इशक यह तेरा इशक और यह मेरा इशक
है यह तेरा भी इशक और है तो मेरा भी इशक ना कम तेरा इशक ना कम मेरा इशक दो एह्सासो का मिलन है यह हमारा इशक
मेरा इशक तेरे मन में सिमटा हुआ परिंदा तेरा इशक मेरे मन को अपने संग ऊङाता हुआ परिंदा मेरा इशक तेरे आँचल में सिमटी हुई मेरी रूह तेरा इशक मेरी रूह में सिमटी […]
मेरा इशक झील का रुका हुआ पानी तेरा इशक नदी की बहती हुई धारा मेरा इशक वोह आग, जो आग को पानी कर दे तेरा इशक वोह आग, जो पानी को आग कर […]
अच्छा हुआ आँखों से बह गए आँसूं जो जिगर में जम जाते तो हादसा होता राजेश’अरमान’
अपनी हर सांस तो बस तेरी चाह में गुजरी तेरी सारी उम्र जमाने की परवाह में गुजरी सोचा था कहोगे उदास तुम मेरी खातिर न हो क्या कहेगा ज़माना ,फिक्र ज़िंदगी की राह में गुजरी […]
एक कोई राह अपना लो , वो राह यूई को दिखला दो या तो मुझे अपना बना लो, नहीं तो इस रिश्ते को दफना दो ……… यूई
अपनीयत को गर है जन्मना तो , शिकवे – शिकायतें सब दफ्ना दो दिल से दिल की धड़कन मिला दो , अपनी रूह में मेरी रूह बसा दो
दर्द देना गर फितरत है तेरी , अपनीयत का तुम गला दबा दो चाहें जितने भी फिर ज़ख्म दिला दो, अपनीयत के दर्द से मुझे बचा दो …… यूई
दिल और रूह से जुड़ा , हमारा यह रिश्ता दो नावो की सवारी , सह नहीं सकता
मेरे लफ्ज़ ग़ुलाम बन गए तेरे लफ़्ज़ों की सरफ़रोशी से राजेश’अरमान’
दर्द अपनों को , भूले से भी दिया नहीं करते गर देना ही है दर्द तो , अपना उन्हें कहा नहीं करते …… यूई
कल रात फिर आँखों में गिरफ्तार हुए कई ख्वाब नशे में आवारागर्दी करते राजेश’अरमान ‘
देख लेता मैं भी तेरे जलवे गर तेरे जलवे पराये न होते राजेश’अरमान’
की परवरिश जिन ख़्वाबों की औलाद की तरह दफ़न कर मुझे फ़र्ज़ निभाया औलाद की तरह राजेश’अरमान
गम की फसलें सींचता आँखों की बारिश से हर ख्वाब ने दम तोडा अपनी ही गुजारिश से राजेश’अरमान’
किसी ने सूद से भरी पुरवाइयां चुनी किसी ने दर्द भरी शहनाइयां चुनी हमें कुछ चुनने का हुनर न आता था सो गम से लिपटी तन्हाईयाँ चुनी राजेश’अरमान’
जरूरत के हिसाब से , खुद से पहचान हुई कई हिस्से अब भी अजनबी है मेरे अंदर राजेश’अरमान’
उसकी नज़रों की तलाशी में मेरे किरदार बदले से मिले मैं ढूंढ़ता रहा उसकी आँखों में चंद कतरे पर जमे से मिलें राजेश’अरमान’
अब मंज़िल मेरे साथ-साथ चलती है जब से बनाया मंज़िल अपने साये को राजेश’अरमान’
चंद क़दमों में थक के बैठ गया राही मंज़िल मुसीबत नहीं जो बैठे- बैठे गले पड़े राजेश’अरमान’
कुछ खास है वो मेरे वास्ते दे गए सब बिना मोल-भाव के राजेश’अरमान’
वीराने भी अब गुफ्तगू करने लगे नज़र लग गयी इसे भी जमाने की राजेश’अरमान’
चाहा था इक बार फिर अजनबी बन जाना वो मिलते है हर बार अब अजनबी से राजेश’अरमान’
कुछ तो हैरान होगी ज़िंदगी भी जब हमने अपना मुँह मोड़ लिया राजेश’अरमान’
मंज़िल की बेताबी खत्म हुई यूँ कारवां से दिल लगाया हमने राजेश’अरमान’
क्यों यह परदा दारी है, आ खुल के मेरे सामने आ मुझसे नज़र मिला के कह, तू कभी ना ग़लत हुआ सब नजरों में बन खुदा, भय का यह व्यापार चला मुझसे ना कहना ओ […]
गरूर–ए–नजर में तेरी, मेरा सर झुका रहा तूने जब आवाज़ दी, दिल ने पलट कर कहा शायद तूँ बदल गया, घर मेरा मुझे मिल गया फिर तू मुझे छल गया, दिल से मेरा घर गया […]
रूह मेरी तड़प तड़प गई, तूने ना पुकार सुनी तुझसे ना–उम्मीदी में, बैरंग सी यह फिज़ा बुनी ज़िन्दगी तो बसर गई, हर रिश्ता तार–तार हुआ तेरे–मेरे इस खेल में, हर किरदार दागदार हुआ …… […]
जाने क्यों तुम नाराज हुए, ख़ुद ही मुझको ज़ुदा किया ना थे हम हमराज़ कभी, फिर क्यों यह शिकवा किया ता–उमर चली तूने अपनी राह्, दिल मेरा लोच्ता रहा चला जब मैं अपने दिल की […]
था मैं चला कहां से, इसकी ना कोई याद मुझे हुआ मैं ग़लत कहां पे, इसका ना आभास मुझे चेतना है धुंधली सी, शायद था मैं कोई अंग तेरा क्या वोही है घर मेरा, जिस्मे […]
जुर्म उनके ,सितम उनके ,खता उनकी हम तो अब भी खाली हाथ बैठे है राजेश’अरमान’
जीतने की ख्वाइश में कछुए सा चल रहा हूँ, लेकिन ख्वाइशों का खरगोश सोने के लिए रूकता ही नहीं राजेश’अरमान’
अपने साये भी अब अनजान नज़र आते है बिन बुलाये से मेहमान नज़र आते है हर शक्स उदास हर रिश्ते अब तो पत्थरों से ये बेजान नज़र आते है राजेश’अरमान’
तालीम कुछ गिनती की यूँ काम आई बस जाती सांसों को गिनता रह गया राजेश’अरमान’
सच ने जब भी तोडा है दम झूठ ने ही उसे अग्नि दी है राजेश’अरमान’
था वो गुलाब के मानिंद नज़र बस तेरी काटों पे गड़ी मैंने भी महसूस किया कैक्टस को नज़रे जो कभी फूलों पे पड़ी राजेश’अरमान’
जब अपनी ही साँसें एहसान जताने लगे समझ लो साँसें भी अपनी हो गई है राजेश’अरमान’
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