समझते  सब  है पर मानता कोई नहीं     पहचान सब से है पर जानता कोई नहीं   यूँ तो पड़ा हूँ खुली किताब की तरह      पढ़े लिखे  सब है पर बांचता कोई नहीं                           […]

 हर शख्स बस अपने ही ख्याल बुनता है  जिसका जवाब नहीं वही सवाल चुनता है   कोई कैसे कहे वो गुमसुम सा  क्यों है  जिसे  भी देखिये अपने ही जाल बुनता है                                    राजेश’अरमान’

  हम मर्दों की ख़ास निशानी होती है ,, हसीं चेहरा देखा नहीं की नियत फिसल जानी होती है …………..!! चलते चलते निगाहों में बात बन जाती है ,, कमबख्त ये गलतफ़हमीयां दूर होते ही […]