हर भोर
उगता सूरज
नई किरणों के संग
नए खेल रचता
नई ऊर्जा का संचार
दिन भर तपस
कभी ज्यादा
कभी कम
इस ज्यादा
इस कम
में दबे बैठे है
कई प्रश्न
राजेश’अरमान’
Category: शेर-ओ-शायरी
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हर भोर
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वज़ूद अपना ज़माने
वज़ूद अपना ज़माने से जुदा रख
अपने अरमानों को गुमशुदा रख
परिंदे के वास्ते अर्श की सरहदें कहाँ
अपने अंदर कोई दोस्त कोई ख़ुदा रख
राजेश’अरमान’ -
पिंजरे तो खोल
पिंजरे तो खोल दिए लेकिन
पंछी उड़ गया पिंजरे लेकर
राजेश’अरमान’ -
बरपने लगा
बरपने लगा शोर कुछ अपने पाले सन्नाटों में
कुछ उधर भी है खलबली उनके दिए काँटों में
माना की कोई मरासिम नहीं उनके सायों से ,
अब भी मौजूं है मगर हर किसी की आहटों में
राजेश’अरमान’ -
तेरा सजदा – 26
तेरा सजदा – 26
कोई तुझे सूख में ही जपता
कोई तुझे बस दुःख में जपता
….. यूई
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तेरा सजदा – 25
तेरा सजदा – 25
कोई तुझे प्यार से जपता
कोई तुझे निहार के जपता
….. यूई
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तेरा सजदा – 24
तेरा सजदा – 24
कोई तेरे जन्म को जपता
कोई तेरे मरन को जपता
….. यूई
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तेरा सजदा – 23
तेरा सजदा – 23
कोई तुझे भोग लगा कर जपता
कोई ख़ुद को खिवा कर जपता
….. यूई
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तेरा सजदा – 22
तेरा सजदा – 22
कोई तुझे भूखा रह कर जपता
कोई भर पेट खा कर ना जपता
….. यूई
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तेरा सजदा – 21
तेरा सजदा – 21
कोई तुझे शांत बैठ कर जपता
कोई तुझे नाच नाच कर जपता
….. यूई
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तेरा सजदा – 20
तेरा सजदा – 20
कोई सब पाने को जपता
कोए सब खोने को जपता
….. यूई
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तेरा सजदा – 19
तेरा सजदा – 19
कोई तुझे इक रंग में जपता
कोई तुझे हर रंग में रमता
….. यूई
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तेरा सजदा – 18
तेरा सजदा – 18
कोई तुझे बस ख़ुद में जपता
कोई तुझे हर शय में जपता
….. यूई
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तेरा सजदा – 17
तेरा सजदा – 17
कोई तुझे इक नाम में जपता
कोई तुझे कितने नामों से जपता
….. यूई
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तेरा सजदा – 16
तेरा सजदा – 16
कोई हवाओ में बैठ कर जपता
कोई गुफाओं में छिप कर जपता
….. यूई
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तेरा सजदा – 15
तेरा सजदा – 15
कोई तेरा नाम ओड़ के जपता
कोए तेरा नाम लिख के जपता
….. यूई
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तेरा सजदा – 14
तेरा सजदा – 14
कोई झंडे पे लिख कुछ जपता
कोई झंडे के रंगों में जपता
….. यूई
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तेरा सजदा – 13
तेरा सजदा – 13
कोई पानी में डूब तुझे जपता
कोई आग पे चल तुझे जपता
….. यूई
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तेरा सजदा – 12
तेरा सजदा – 12
कोई दिन में इक बार ना जपता
कोई दिन भर तुझे जपता रहता
….. यूई
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तेरा सजदा – 11
तेरा सजदा – 11
कोई दिए की लौ में रमता
कोई बाती की लौ में रमता
….. यूई
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तेरा सजदा – 10
तेरा सजदा – 10
कोई पथरो में देख् तुझे भजता
कोई बिन देखे ही तुझको भजता
….. यूई
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तेरा सजदा – 9
तेरा सजदा – 9
कोई ध्यान में जा करता सजदा
कोई शोर मचा कर करता सजदा
….. यूई
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तेरा सजदा – 8
तेरा सजदा – 8
कोई धूप जला कर करता सजदा
कोई धुनी रमा कर करता सजदा
….. यूई
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तेरा सजदा – 7
तेरा सजदा – 7
कोई मनके गिन गिन करता सज़दा
कोई मनके चुन चुन करता सजदा
….. यूई
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तेरा सजदा – 6
तेरा सजदा – 6
कोई माला घूमा कर करता सज़दा
कोई माला नचा कर करता सज़दा
….. यूई
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तेरा सजदा – 5
तेरा सजदा – 5
कोई आग लगा कर करता सज़दा
कोई आग बुझा कर करता सज़दा
….. यूई
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तेरा सजदा – 4
तेरा सजदा – 4
कोई बाहे जोड़ कर करता सज़दा
कोई बाहे खोल कर करता सज़दा
….. यूई
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तेरा सजदा – 3
तेरा सजदा – 3
कोई सर उठा कर करता सज़दा
कोई सर झुका कर करता सज़दा
….. यूई
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रिश्तों की बानगियाँ
रिश्तों की बानगियाँ अब तेजी से बदलने लगी है
वास्ता लाश से कम कफ़न से ज्यादा हो गया है
राजेश’अरमान’ -
ऊंची दीवारें भी पल
ऊंची दीवारें भी पल में मिट जाती है
बस नज़रें दीवार के पार जानी चाहिए
राजेश’अरमान’ -
उसने खौफ से कभी
उसने खौफ से कभी आइना साफ़ न किया
आ जाएँ न नज़र कहीं तस्वीर साफ़ उसकी
राजेश ‘अरमान’ -
तजुर्बों से सीखा
तजुर्बों से सीखा मगर बस इतना सीखा
फिर गिर पड़े तज़ुर्बा जो गिरने का था
राजेश ‘अरमान’ -
“इंतज़ार” #2Liner-72
ღღ__भला लफ़्ज़ों में इंतज़ार को, कहाँ तक लिखे कोई “साहब”;.कभी तुम खुद ही आके देख लो, कि अब थक रहा हूँ मैं !!….#अक्स.
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“कलमकार”

कलमकार के कलम की स्याही जिस दिन यारों खत्म हो गई,
या तो कोई जुल्म हुआ है उस दिन या वो अात्मा परम् हो गई, -
“लाजवाब” #2Liner-71
ღღ__भटक रहा था कबसे, मैं इक अनछुए सवाल की मानिन्द;.तेरे खामोश-से जवाब ने “साहब”, लाजवाब कर दिया मुझे!!….#अक्स.
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“रुक जाओ ना” #2Liner-70
ღღ__सुनो…तुम रुक ही जाओ ना मेरे पास, हमेशा के लिए;
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यूँ रोज़ आने-जाने में साहब, वक़्त बहुत लगता है !!……#अक्स.

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जुबाँ

आखिर तुझे भी कोई बुला रहा होगा ,तुझे याद कर कर
के कोई मुस्कुरा रहा होगा |
यूँ ही नहीं जुबाँ लड़खड़ा जाती है हर किसी को देखकर, कोई तुझे भी नगमों में गा रहा होगा | -
“बाज़ी” #2Liner-69
ღღ__एक बाज़ी गर जीत भी गया, बेईमानी से वो साहब;
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महफिल फिर से सज जायेगी, कि वफात बाकी है मेरी !!……#अक्स -
desh

ब्रह्मा-ऋषि-मुनि-चरक का तो ये देश हो सकता नहीं ,,
क्यूँ बताते हो डॉक्टर पेट में बेटी है बेटा नहीं ..!!
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फिरास़त
ये तो फिरास़त है मेरी जो विरासत ए इश्क कर दी है तेरे नाम,
वरना जाबिरों को काबिल ए वफा समझता ही कौन है , -
उम्मीद
गम के फसाने को तेरी खुशियों ने लूटा , तेरी हर दीद की उम्मीद ने अखियों को लूटा ,
उजाले की हर किरन को तूनें कनखियों से लूटा,तुझे पाने की हर कोशिश को तेरी सखियों ने लूटा , -
“तलब” #2Liner-68
ღღ__तुमसे मिलने की तलब, कुछ इस तरह लगी है “साहब”;
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जिस तरह से कोई मयकश, मयखाने की तलाश करता है !!…..#अक्स.

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रोशनी कुछ और है

कुछ गरीबों का आशना
फिर जला है शायद
राजा जी के महल में
आज रोशनी कुछ और है
……यूई






