धर्म की दूकान सदियों से चल रही है , कीमत तो चुकाई पर सामान नहीं मिला राजेश’अरमान’
धर्म की दूकान सदियों से चल रही है , कीमत तो चुकाई पर सामान नहीं मिला राजेश’अरमान’
बिखरी जा रही ज़िंदगी कुछ तेज रफ़्तार से कोई मोहलत नहीं कुछ भी दुरुस्त करने को राजेश’अरमान’
तेरी बेरुखी इस कदर काम कर गई बेवज़ह वक़्त को बदनाम कर गई रिश्तों पे पड़ी धूल जब जमने लगी ख़ामोशी के राज़ सरेआम कर गई राजेश’अरमान’
हर फैसले मेरे तेरे क़दमों में थे तूने क़दमों का फ़ासला कर लिया न हो दरम्यां सांसें भी अपनी लेकिन , तूने ज़ख्मों का काफिला चुन लिया राजेश’अरमान’
अजैविक गम की खाद से ख़ुशी हो गई बोन्साई राजेश’अरमान’
होठों पे ख़ामोशी की लहरें ढूंढ़ती है लफ़्ज़ों के समुन्दर राजेश’अरमान’
कुछ तो बात है तेरे शहर की ये ज़ख्मों को भी तन्हा नहीं रखते राजेश’अरमान’
वो खफा है अब इस बात पर आता नहीं सलीका गम उठाने का राजेश ‘अरमान’
अपनी उलझनों के हम यूँ आदी हो गए है कभी मुजरिम तो कभी फरियादी हो गए है न होता कुछ तो कुछ और जरूर होता बस इसी सोच में कोई बर्बादी हो गए है राजेश’अरमान’
ღღ__मैं कह ही नहीं पाता, या तुम समझ नहीं पाते साहब; . कि अक्सर कुछ सवालों के, कोई जवाब नहीं होते !!…..#अक्स .
ख़्वाबे-वफ़ा के ज़िस्म की खराश देखकर इन आँसुओं की बिखरी हुई लाश देखकर जब से चला हूँ मैं कहीं ठहरा न एक पल राहें भी रो पड़ीं मेरी तलाश देखकर ©® लोकेश नदीश
सब लफ़्जो का खेल है इस दुनिया में ये ही रिश्ते बनाते भी है बिगाड़ते भी यही है
ღღ__इसमें कोई शक नहीं, कि तुम सबसे जुदा थे “साहब”; . मगर ऐसा भी क्या जुदा होना, कि हमसे ही जुदा रहो!!…..#अक्स .
ღღ__तू गर नाराज़ है मुझसे, तो रह, खुदा करे; . मैं भी चाहता हूँ मेरे हक़ में, कोई बद्दुआ करे!!……#अक्स .
ღღ__इबादतगाह भी जाऊं तो, तुझे ही ढूँढती हैं नज़रें; . शौक-ए-दीदार ने तेरे, मुझे काफ़िर बना दिया !!…..#अक्स .
ღღ__आखिर इसमें उनकी, खता भी क्या है साहब; . जब मोम सा दिल रखोगे, तो दुनिया जलाएगी !!……#अक्स .
सुनते हो साहब, मोहब्बत गुज़र रही है अपनी; . ღღ__मैंने देखा था उसे, तेरे साथ जाते हुए !!….#अक्स .
ღღ__वो इक पल जिसमें तुम्हारे लब हों, मेरे लबों के पास; . उस वक़्त भी हम रहें शरीफ?? “तौबा साहब, तौबा” !!…..#अक्स .
चाहतों की दुनिया से अब उकता गये है सब दिखता है यहां, मगर कुछ मिलता नहीं
ღღ__यूँ तो अरसा हुआ है साहब, तुमसे गले मिले हुए; . पर जिस्म मेरा आज भी, इत्र-सा महकता है !!……#अक्स .
लो आ ही गयी साहब, उनकी याद, आज फिर आखिर; . और वो आज फिर नहीं आये, इतने इंतज़ार के बाद !!…..#अक्स
वो खुशनुमा चेहरा कितना नूरदार है आज की रात जैसे फैल गया हो चांद पिघलकर उनके रूखसारों पर
जब से तुझको पाया है , जिव देखो तुझ्सा लगता है , दुनियाँ मानो शीश महल , हर चेहरा ख़ुद का लगता है I …… यूई
ღღ__आँखों को ख्वाब की, इस कदर भूख है साहब; . जैसे लगता है ख्वाब में, “तुम” आ ही जाओगे!!…..#अक्स .
तसव्वुर में तेरे, अब तो कटती नहीं रातें; . आखिर तेरे इंतज़ार की, कोई इन्तेहा तो हो!!….#अक्स
ढूंढने से ही मिलता है, पर रस्ता ज़रूर होता है; जो महँगा होता है कभी, वो सस्ता ज़रूर होता है!!…..#अक्स
ღღ__ख्वाहिश है इश्क की, और वो भी सुकून के साथ; . तुम भी ना साहब, कभी-2 अच्छा मजाक करते हो !!……#अक्स .
ღღ__दिल तो करता है कभी-2, तेरी यादों को ज़हर दे दूँ साहब; . फिर सोंचता हूँ, भला ये भी, कोई उम्र है ख़ुदकुशी करने की!!….#अक्स . .
इस वीराने में अचानक बहार कहां से आ गयी गौर से देखा तो ये महज़ इज़हार ए तसव्वुर था
सोच कर यह , ख़ता दर ख़ता किए जा रहे हम , प्यार में तो वोह मिलने से गए , सजा देने ही शायद आ जाएँ लौट कर […]
तेरी यादों के कागज को , छुपा रखा है , अपनी पलकों से थोड़ा पीछे , कहीँ सालों से बह्ते आँसू , इनको गीला कर , धुँधला ना कर दे […]
गम–ए–इशक में डूब कोई मरीज–ए–मोहब्बत ना बच पाया रफ्ता रफ्ता सरकती मौत देखी यूई ना मर पाया ना जी पाया …… यूई
ღღ__अक्सर खुद ही खुद से बाज़ियॉं, खेलता रहा साहब; . डर तो अब लगता है, जब खुद को हार बैठा हूँ !!…..#अक्स .
ღღ__कशिश आज भी वही है, और शिद्दत भी वही है “साहब”; . महज़ ख्वहिशों का तेरी, “अक्स” बदला हुआ सा लगता है!!……#अक्स .
नींद की चाहत तो नही होती , बस इक आस सी रहती है , कम्बख्त आ जाए तो शायद , ख्वाब में ही मुलाकात हो जाए […]
गर जमाने ने किया होता , कसम ख़ुदा की, सब कर गुजरते हम I अफसोस यह खंजर उन हाथों ने मारा जिनको ता–उमर दुआओं में चूमते रहे हम I […]
बवंडर तन्हाई और दर्द के भी ना गिरा सके एक अश्क जिनमें बरसों बाद तेरी एक आवाज़ ने क्यों छलका दिए पैमाने उनमें […]
ღღ__आज भी तुमको, झूठ बोलना नहीं आता “साहब”; . कि ठीक होने में, और कहने में बहुत फर्क होता है!!……#अक्स .
शरारतें की है बहुत जिंदगी में हमने अब जिंदगी है जो शरारत करती है
ღღ__सज़ा में एक ही लफ्ज़ है, तेरे हर इक गुनाह का मेरे पास; . कि तुम इतने मासूम हो साहब, जाओ “माफ” किया तुम्हें!!……#अक्स . .
ღღ__मेरे होंठों पे आज भी, कायम है तेरी खुशबू; . इनपे भला शराब का, अब असर कहाँ होगा !!…….#अक्स .
!!!! SAGAR KE DI SE !!!! Kisi ko chorne aaya tha Aaj shamsaan main Dil main khayaal aaya Ki khud ko yahi chor jaaun Phir se khayal aaya Apne sukh ke liye kaise apno ko […]
अब कलम उठायी है तो कुछ लिख देते है वर्ना जिंदगी किसी कहानी से कम नहीं
तेरी तस्वीर के आगे सर झुका नही सकती बोझिल पलकेँ मै उठा नही सकती…!!! मज़बूरी का आलम ये कि इस बुझती शम्मा को फ़िर से मै जला नही सकती…!!! रश्मिजैनRJ®
हर हिंदुस्तानी की इक ख़ास पहचान , ये तिरंगा …. भारत माँ की करता बेनज़ीर शान , ये तिरंगा …. सीमा पर तैनात हर जवान में डाल दे जान , ये तिरंगा ….. ” […]
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