बारह वर्ष की बब्ली कोचिंग पढ कर घर आयी। वह चुपचाप अपने कमरे में जा कर रोने लगी। जब बब्ली की माँ को पता चला कि, बब्ली अपने कमरे में रो रही है। वह दौड़ती […]
बारह वर्ष की बब्ली कोचिंग पढ कर घर आयी। वह चुपचाप अपने कमरे में जा कर रोने लगी। जब बब्ली की माँ को पता चला कि, बब्ली अपने कमरे में रो रही है। वह दौड़ती […]
यह घटना बिहार जिले में स्थित समस्तीपुर की है। बैशाख का महीना था। गाँव के लोग गर्मी से व्याकुल थे। उसी गाँव के ३५ वर्ष के युवक महेश गर्मी से परेशान हो कर रात के […]
जेष्ठ की तपती धूप में, एक माँ अपने छह महीने के बेटे को अपनी पीठ में बांध कर मजदूरी कर रही थी। बच्चा भूख व गर्मी से तड़प रहा था। वह जोर जोर से चिल्ला […]
(आपने अगले पेज में पढा कि, अमित अपनी उलफत की दास्तां अपने दोस्त सुरेश को सुनाया। क्योंकि, अनिता के प्यार में वह पागल हो गया था। सुरेश अमित को किस तरह सही रास्ते पर ला […]
…नंबर अच्छे आये।) अब आगे… एक दिन मैने उससे पूँछा कोई ज़िंदगी में है तुम्हारी? उसने कहा नहीं । मुझे पता था की वो किससे प्यार करता है ।वो मेरा बहुत अच्छा दोस्त बन गया […]
एक था अंधा एक था लंगड़ा । दोनों का याराना हो गया तगड़ा।। आग लगी जब गाँव में । सब भागने लगे शीतल छाँव में।। कोई बता न पाया अंधा को। कोई भगा न पाया […]
कॉलेज का पहला दिन था थोड़ी देर से गई क्लास में जाकर बैठी,शिक्षाशास्त्र पढ़ाई जा रही थी । सब मुझे देख के अचंभित थे।बहुत सवाल थे सबके मन में..टीचर के जाते ही सबने मुझे आ […]
अनिता नाम था। देखने में साँवली सलोनी। उसकी आँखें किसी गहड़ी झील से कम नहीं था। उसकी मुस्कान व अदा का क्या नाम दें, मेरे पास शब्द ही नहीं है। कुदरत ने केवल उससे गोरा […]
ओ बीते दिन ये उन दिनों की बात है,जब बेरोजगारी का आलम पूरे तन मन मे माधव के दीमक में घोर कर गया था,घर की परिस्थिति भी उतना अच्छा नही था कि वे निठल्ला घूम […]
मैं खिड़की पर खड़ा था और वह दरवाजे पर खिड़की से दरवाजे कि ये दूरी तब भी थी जब वह मेरे पास आ रही थी और अब भी है जब वह मुझे छोड़ कर जा […]
वह तो रोज़ की तरह ही नींद से जागा था, लेकिन देखा कि उसके द्वारा रात में बिछाये गए शतरंज के सारे मोहरे सवेरे उजाला होते ही अपने आप चल रहे हैं, उन सभी की […]
प्यारी गौरैया! आज तुम्हें इतने दिनों बाद अपनी छत पर देख अपने बचपन के दिन याद आ गए ,तब तुम संख्या में हमसे बहुत ज्यादा थीं, आज हम हैं ज्यादा नहीं पर कुछ पेड़ हैं […]
hello friends, कहने को तो प्रतिलिपि पर ये दूसरी कहानी है मेरी लेकिन सही मायनो मे ये मेरी पहली कहानी है क्योकि ये मेरे दिल के बहुत करीब है चलिये आपका ज्यादा वक्त जाया नी […]
मिनी पैट्रोल पम्प समर अपनी नयी बाइक से फर्राटे भरते हुये घर से निकला।वह अपनी किराने की दुकान का सामान लेने लालपुर जा रहा था।रास्ते मे उसकी बाइक का पैट्रोल खत्म हो गया।वहाँ कोई पैट्रोल […]
“काशी से कश्मीर तक सद्भावना यात्रा सन1994” किसी भी यात्रा का उद्देश्य सिर्फ मौजमस्ती व् पिकनिक मनाना ही नहीं होता | यात्राएं इसलिए की जाती हैं कि हम एक-दुसरे की सभ्यता ,संस्कृति,रहन सहन व् विचारों को जान […]
दिन की शुरुआत अंगीठी के उठते धुएं से शुरू होती पकाती परिवार के लिए रोटी फिर भी सुने समाज की खरी-खोटी थक जाए कितना भी तू फिर भी आराम ना लेती देख तुझे मैं यही […]
एक बच्चा,अपने मन से कुछ बनना चाहता था पर मां-बाप की ही उस पर चलती रही. जैसा हम कहते हैं वैसा ही करो और उसकी इच्छाएं है यूहीं आग में जलती रही. ख्वाब टूट गए […]
मुंह में राम बगल में छुरा लिए आते हो अपनी गंदी राजनीति से सबको लड़वाते हो क्या फर्क पड़ता है कि तुम हिंदू हो या मुसलमान अपने उन्ही मेले हाथों से शांति के कबूतर उड़ाते […]
एक बाग में था पेड़ हरियाणा विशालकाय, सुंदर, मतवाला बैठा हो जैसे साधना में तपस्वी कोई सम्पूर्ण, समृद विशाल हृदय वाला. जागृत हो जाता होते ही सवेरा जिस पर था सुंदर साथ चिड़ियों का बसेरा […]
इतने सालो से अपने कंधो पे जिम्मेदारी माँ की ले रखी है माँ की तू बेटी है घर की तू तरक्की है अनपढ़ माँ की अब तू इकलौती कलम और तख्ती है किस तरहा सुधर […]
इस आजाद भारत में आज भी मेरी वही दशा है. छुआ – छूत का फंदा आज भी मेरे गले में यूहीं फंसा है. मै हूँ दलित गरीब भेदभाव का शिकंजा मेरे पैरो में कसा है. […]
उद्धव जी कहते हैं गोपियों से । परमेश्वर को पहचानो , सत्य उसे ही जानो । क्यों रोती उसके लिए ,ये रोना छोड़ो और मेरी बात मानो। जो आधार है जगत का वो आधार को […]
उद्धव जी कहते हैं गोपियों से । परमेश्वर को पहचानो , सत्य उसे ही जानो । क्यों रोती उसके लिए ,ये रोना छोड़ो और मेरी बात मानो। जो आधार है जगत का वो आधार को […]
काली आधी रात में, दुनिया देख रही थी सपने | आलस का आलम था चहु ओर रात भी लग रही थी ऊंघने | तब मैंने छत से देखा, बतखो के झुण्ड को तलाब में | […]
******** ठंड******** ठंडी का मौसम था और चीनू की बीमार माॅ मुंबई जाने वाली थी दवा कराने के लिए चीनू बडे सुबह ही उठ कर घर का सारा काम निपटा कर नहा कर पतले कपडे […]
आत्मकथा दोस्तो मैं बहुत गरिब परिवार से रह चुका हूॅ बात उस समय की है जब मै क्लास सेकेंड में पढता था ।उस समय मुझे बडी ही मुश्किल से किताब और कलम के पैसे मिलते […]
खुशियों का एहसास लाया, जब तू मेरी जिंदगी मे आया छू ना पाए तुझे मुश्किलों का साया, बीड़ा मैंने यही उठाया. दुख तुझपर कोई ना आए, इसी जिद्द पर मै अडी हूँ जब तू खुद […]
( लघुकथा ) एक गरीब महिला अपने परिवार के साथ एक टुटी झोपड़ी में रहती थी उसके परिवार में एक बेटी और एक बेटा था | उसकी माँ पास के गॉव में जाकर झाडू पोछा […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.