Category: लघुकथा

  • जैसी करनी वैसी भरनी

    एक बहू अपनी सास को हमेशा भला बुरा कहा करती थी। सास चुपचाप रह जाती थी। क्योंकि उसका पति नहीं था। एक बेटा भी था तो वह बीवी के गुलाम बन कर ऐश की ज़िन्दगी गुजार रहा था। समय के पहिया यों ही घूमता गया। सास बेचारी पानी पानी कह कर मर गयी। मगर बहू ने पानी तक नहीं दिया। बहू व बेटे दोनों मिल कर खूब दानपुन किया। ताकि माँ की आत्मा को शांति मिल सके। और उसे किसी भी काम में बरकत हो। मगर ऐसा नहीं हुआ। दिनोदिन कर्ज के तले में दोनों दबते चले गए। घर में अशांति का माहौल छा गया। वह अपने पति को बाहर भेज दिया । ताकि कर्ज से छुटकारा मिल सके। मगर इसका परिणाम कुछ उल्टा ही हुआ। उसका पति शहर जा कर शराब व शबाब में ऐसा डूबा कि वो हमेशा के लिए उसका साथ छोड़ दिया। वह अभागन बहू इस संसार में आज भी दुख के दलदल में दबी हुई है। उसे सहारा देने वाला कोई नहीं है। औलाद तो सात थे। मगर सब अपने अपने ससुराल में है। कोई औलाद उसे देखने तक नहीं आते। जबकि आज भी वह औरत हर साल गंगा नहा रही है। उसे क्या पता कि जब घर में गंगा थी तो उसने कभी सच्चे मन से उसमें डुबकी लगाई ही नहीं। उस औरत को आज एहसास हो रहा है कि मैने अपनी सास को कभी सासु माँ समझी ही नहीं ।वह आज भी अपनी औलाद से सुख पाने की उम्मीद लगाए बैठी है।

  • कहाँ गया वो ? (रहस्य रोमांच) भाग — २

    आपने भाग १ में पढ़ा – (राम उसे देख कर बुरी तरह से डर गया। वह बांध के नीचे से रास्ते के तरफ आ रहा है। आखिर वह राम से क्या चाहता है। जबकि राम अपनी कंठ को अपनी ही थूक से बार बार भीगो रहा था)अब आगे
    वह अधेर उम्र की व्यक्ति राम से दस गज की दूरी बना कर बीच रास्ते पर खड़ा हो गया। कुछ देर बाद उसने कहा “मुझे प्रतिदिन इसी समय एक लीटर दूध चाहिए। क्या तुम दोगे” ?राम, जबाब में सिर हिलाया। — “मगर याद रहे दूध में किसी तरह की मिलावट नहीं होनी चाहिए ” ।राम उसकी भारी आवाज़ से पहले ही डर चूका था। उसकी रोंगटे काँटे के भांति खड़ा ही रहा। वह फिर सिर हिलाया ।इतना कह कर वह पुन: धीरे धीरे बांध के नीचे उतरने लगा। देखते ही देखते वह गायब हो गया। राम अपनी जान ले कर वहाँ से इतनी जोर साईकिल चलाया कि घर आ कर ही चैन की सांस ले पाया। उनकी पत्नी बेला के पूछने पर यह कह कर राम ने टाल दिया कि मेरे सिर में दर्द है। बेला के लाख कहने पर तब कहीं दो तीन निवाला उसने मुँह में डाला। चुपचाप बिछावन पर लेट गया। रात भर वही डरावनी आवाज उसकी कानो में गूंजती रही। वह प्रतिदिन की तरह सुबह उठा और गाय भैंस की सेवा में जुट गया । फिर शाम के चार बजे दूध ले कर बाजार चल दिया। अरे हाँ- उस रहस्यमयी के लिए अलग से एक लीटर दूध भी ले लिया था। दूध बेचते बेचते राम को बाजार में फिर देर हो गयी। डरते डरते फिर वही रास्ता से घर लौट रहा था। दूसरा रास्ता था ही नहीं जो, वह अपना घर जा सके। । मन में तरह तरह के डरावनी ख्याल उसके मष्तिस्क को झकोर कर रख देता था। फिर वही कल वाली डरावनी व सुनसान रात थी। रास्ते पर एक राही तक नहीं था। । राम जब बांध पर पहुंचा तब उसकी नजर वही अधेर उम्र की व्यक्ति पर पड़ी। वह राम से दस गज की दूरी पर दूध लेने के लिए एक कमंडल ले कर बीच रास्ते पे खड़ा था।
    शेष अगले अंक में

  • कहाँ गया वो ? (रहस्य रोमांच)

    छपरा जिला के सांई गाँव में ग्वालों की घनी आवादी थी। वहाँ के लोग गाय भैंस पाल कर ही अपना घर परिवार चलाते थे। उसी गाँव में राम नाम का एक ग्वाला था। वह प्रतिदिन शाम के समय बाजार में दूध बेचने जाया करता था। कभी कभार घर लौटने में देर हो जाया करता था। उस रात भी उसे देर हो चुकी थी। रात के यही कोई दस या सवा दस का वक्त था। वह अपनी साईकिल से मस्ती में आ रहा था। रास्ता सुनसान की आगोश में सो चुकी थी। रास्ते में एक राही भी उसे दिखाई नहीं दिया। फिर भी राम अपनी धुन में मंजिल तय करने मे मशगूल था। पूस की रात थी। ठंड काफी बढ़ चुका था। उस पर पछुआ के ब्यार राम के जिस्म को कंपा दिया करता था। फिर भी पापी पेट का सवाल था। दो किलोमीटर की दूरी पे कहीं कहीं बिजली के खंबे लगे हुए थे। परंतु बिजली नदारद थी। इसलिए राम के हाथ में दो सेल का एक 🔦 था। टॉर्च जलाते हुए बांध पर तेजी से जा रहा था। अचानक किसी की आवाज़ उसके कानो में टकराई … ” ए जरा रुको”। राम चारो तरफ टॉर्च जला कर देखा। मगर उसे कहीं कुछ दिखाई नहीं दिया। राम हिम्मत बांध कर जैसे ही आगे बढ़ने वाला था कि अचानक फिर वही आवाज ” ए जरा रुको “।राम पुन: अपनी टॉर्च चारो तरफ घुमाया। अचानक राम की नज़र एक अधेर उम्र की व्यक्ति पर पड़ी। वह लाठी के सहारे बांध के नीचे से उपर की ओर रास्ते के तरफ आ रहा था।
    शेष अगले अंक में

  • बलात्कार हुआ बेटी का….

    बलात्कार हुआ बेटी का बेटी से प्यार किसको है ,

    आग लगा दो या जला दो लाश की परवाह किसको है ,

    गाय मरती तो शहर जलता लाश लड़की की याद किसको है ,

    जिंदा है अभी हैवान पर उनकी तलाश किसको है ….

  • लेखक की गरीबी (३)

    (भाग दो में आपने पढ़ा – रुपा अपने पति के पेट की आग बुझाने के लिए खुद को दिलचंद के हाथों बिकने के लिए तैयार हो जाती है। वह अपने पति के ख़ातिर इज्ज़त क्या अपनी जान तक न्यौछावर कर सकती है। दिलचंद उसकी इज्ज़त दूकान के चंद पैसों के उधार से वह खरीदना चाहता है। क्या , दिलचंद रुपा के इज्ज़त को खरीद पाता है? क्या जीवनबाबु अपनी पत्नी को दिलचंद के हाथों बेच देता है?) यह जानने के लिए अब आगे —
    रुपा रोती हुई जी़वनबाबु से लिपट कर – “स्वामी । मैं टूट चुकी हूँ। मै आपको भूखे पेट कैसे सोने देती। दिलचंद से अपनी इज्जत की सौदा मैं शौक से नहीं किया। स्वामी यहाँ तक कि मैं उसके संग शर्त भी कर चुकी हूँ। जीवनबाबु – “रुपा। क्या तुम्हारा मन यह काम करने को कहता है”।रुपा जीवनबाबु को गले लगा कर — “नहीं स्वामी। मैं मर जाउंगी । मगर यह काम कभी नहीं करुंगी। शर्तें मान लेना यह तो मेरी मजबूरी थी। अपने पति के ख़ातिर ” ।जीवनबाबु — “अब कुछ नहीं हो सकता है। मेरे हिसाब से दिलचंद की शर्तें हम दोनों को मिलकर कर पुरा करना चाहिए। जरा बाहर देखो तो मुर्दे समाज गहरी नींद में सो गये है क्या”? रुपा जीवनबाबु को ऐसे देख रही थी जैसे वह आठवां अजूबा हो। रुपा बाहर झाँक कर देखी। उस समय सारे लोग नींद की आगोश में समा चुके थे। जीवनबाबु अपनी रुपा को ले कर घर से निकल पड़े। रुपा हर बार अपने पति के तरफ देख कर रो पड़ती थी। जीवनबाबु बिंदास दिलचंद बनिया के दूकान के तरफ बढ़ते जा रहे थे। कुछ क्षण पश्चात दोनो दिलचंद बनिया के दूकान पर पहुंच गए। जीवनबाबु रुपा को इशारा किया। दरवाजे पर दस्तक दो। दस्तक सुनते ही जैसे दिलचंद दरवाजा खोला वैसे ही उसकी नज़र जीवनबाबु पर पड़ी। वह डर गया। वह अपनी नज़र जमीन पर गड़ाते हुए कहा – “मुझे माफ कर दीजिए जीवनबाबु। मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई है ” ।जीवनबाबु -“माफी तो मुझे मांगना चाहिए। रुपा को लाने में जरा देर हो गई है “।
    दिलचंद जीवनबाबु को समझ नहीं पाया। वह हाथ जोड़ कर जीवनबाबु के पांव पे गिर कर अपनी गलती की क्षमा माँगने लगा। जीवनबाबु – “मेरी पत्नी पर बुरी नजर तूने इसलिए डाली कि मैं गरीब हूँ। तुम्हें भला मैं क्या कर सकता हूँ “।दिलचंद – “बस! बस! मुझे और शर्मिंदा नहीं करे जीवनबाबु। मैं अपनी दौलत के दम पर आपकी इज्ज़त व भाभी जैसी माँ को अपमान करने का दुःसाहस किया। मै भूल गया था कि मेरी भी दो जवान बेटियाँ है। जीवनबाबु आप मुझे इस गलती की कठोर सजा दे कर मुझे लज्जित करे। मैं इसी क़ाबिल हूँ। इतना कह कर दिलचंद दोनों के पांव पकड़ कर रोने लगा। जीवनबाबु – “आज मेरी कदमों में तेरी शान शौकत सब झुक गया।आज के बाद तुम किसी गरीब पर अपनी बुरी निगाहे डालने से पहले यह सोच लेना कि तेरी घर में भी बेटी या बहने होगी।
    इतना कह कर जीवनबाबु अपनी पत्नी रुपा को ले कर वहाँ से चल पड़े। दिलचंद बनिया उन दोनों को देखता ही रह गया।

  • लेखक की गरीबी (२)

    आपने पहले अंक में पढ़ा — जीवनबाबु के घर में अन्न के एक दाना तक नहीं है। रुपा एक भारतीय नारी की परंपरा पर चलने वाली है। वह अपने पति को भूखे पेट सोने देना नहीं चाहती है। जीवनबाबु के कहने पर रुपा दिलचंद बनिया के पास उधार राशन लाने के लिए चल पड़ती है। जबकि पिछला हिसाब भी चुकता नहीं हो पाया है… (अब आगे)
    कुछ देर बाद रुपा दिलचंद बनिया के दूकान पर पहुंच गई।
    दिलचंद रुपा को देखते ही कहा –“आओ भाभी। इतनी रात को इस गरीब की याद कैसे आ गयी “।रुपा — “भैया। मुझको उन्होंने भेजा है। घर में अन्न के एक दाना तक नहीं है। उनको आज दिन भर दाना तक नसीब नहीं हुआ है। मुझे कुछ राशन उधार चाहिए ।मै अपने पति को भूखे पेट कैसे सोने दूं”।दिलचंद –“भाभी। मैं आजकल उधार देना बंद कर दिया है। जो ले के जाता है फिर वापस नहीं आता है। अब आप ही कहिए उधार मैं कैसे दूँ “।रुपा दिलचंद की बातें सुन कर असमंजस में पड़ गई। अब वह करे तो क्या करे। कुछ क्षण पश्चात दिलचंद इधर उधर देख कर रुपा को अपने पास बुलाया और कहा — “एक बात कहूं? गर बुरा न मानो तो “।रुपा — “कहिए। दिलचंद — “भाभी। तुम अपने पति के पेट की आग बुझाना चाहती हो। मैं अपनी आग तुम से बुझाना चाहता हूँ। क्यों न हम दोनों मिल कर ऐसे चलें कि, सांप भी मर जाए और लाठी भी बच जाए “।इतना सुनते ही रुपा की पांव तले की ज़मीन खिसक गयी।
    बुत बन कर खड़ी ही रही। एक तरफ पति के पेट की आग तो दूसरे तरफ दिलचंद बनिया के हवस की आग। वह करे भी तो क्या करे। दस मिनट के बाद रुपा दिलचंद की शर्तें मान लेती है। दिलचंद खुश हो कर राशन तौला और उसे देते हुए कहा — “कब आओगी”? रुपा –“मैं उनको खाना खिलाकर पहुंच जाउंगी “।दिलचंद –“जरा जल्द आना। समाज से जरा बच के आना ।नहीं तो मेरी नाक कट जाएगी। घर में दो बेटियाँ भी जवान है। उन लोगों को पता लग गया तो अनर्थ हो जाएगा”। रुपा चुपचाप वहां से घर के तरफ चल पड़ी। रुपा अपनी आँखों में आँसू ले कर घर पहुंची। राशन के थैला देखते ही जीवनबाबु ने कहा –“देखा रुपा। दिलचंद बनिया हमें कितना इज्जत करता है। बेचारा बहुत ही नेक इन्सान है “।रुपा कुछ न कहती हुई रसोई के कमरे में जा कर खाना बनाने में व्यस्त हो गई। मगर आंसू की धार रुकने का नाम नहीं ले रहा था। कुछ देर गुजरने के बाद रुपा उनके पास आई और कही — “चलिए खाना तैयार है। जीवनबाबु के संग रुपा भी मन मार कर दो तीन निवाला मुंह में रख ली। फिर दोनो विस्तर पड़ गए। रुपा जीवनबाबु के सिन्हें से लग कर रोने लगी। रुपा दिलचंद की सारी बातें अपने पति को कह दी। जीवनबाबु बहुत देर तक चुप रहे। अंत में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा –‘क्या तुम दिलचंद की शर्तें मान चुकी हो ” ?(शेष अगले अंक में)

  • जहर की जरुरत नहीं….

    जहर की जरुरत नहीं पड़ी
    मुझे मारने के लिए,
    तुम्हारे ऐसे बरताव ने ही मुझे
    मार डाला.

  • लेखक की गरीबी

    जीवनबाबु अपने मोहल्ले में प्रतिष्ठत व्यक्ति थे। वह एक साहित्यकार भी थे। हमेशा किसी न किसी पत्र व पत्रिकाओं के लिए रचनाएं तैयार करते थे। उनकी पत्नी रुपा इतनी सुंदर थी कि वह कभी कभार अपनी पत्नी को ही देख कर कविता, गीत व ग़ज़ल रच लिया करते थे। कमी थी तो केवल अर्थ व्यवस्था की। वह अपना घर परिवार चलाने के लिए प्राइवेट कोचिंग व स्कूल में पढ़ाया करते थे। तब कहीं जा कर दो वक्त की रोटी जुटा पाते थे। कभी कभार किसी न किसी पत्र व पत्रिकाओं के माध्यम से दो तीन सौ रुपये का मनीअर्डर भी आ जाया करता था। एक दिन शाम के समय रुपा घर के चौखट पर बैठ कर रो रही थी। समय यही कोई सात बज रहा था। जीवनबाबु कहीं से पढ़ा कर घर लौटे। रुपा को रोते देख कर पूछ बैठे — “क्या हुआ रुपा? रो क्यों रही हो? किसी ने कुछ कहा क्या? “रुपा उनके सूखे होंठ देख कर समझ गई ,शायद उन्हें दिन भर दाना नसीब नहीं हुआ है। वह एक भारतीय नारी है। भला अपने पति को भूखे पेट कैसे सोने देगी। घर में अन्न के एक दाना तक नहीं है। रुपा — “आज घर में अन्न के एक दाना तक नहीं है। मैं आपके लिए खाना क्या बनाउंगी। मैं आपको भूखे पेट कैसे सोने दूंगी। यही सोच मुझे रोने पर मजबूर कर दिया है “।जीवनबाबु — “इतनी मेहनत करने के उपरांत भी हम अन्न के लिए तरस रहे है।क्या हमने तक़दीर पाई है”।रुपा – “मोहल्ले में शायद ही कोई ऐसा घर बचा होगा जिस घर से मैं आटा या चावल न लायी हूँ “। दिलचंद बनिया के पिछला हिसाब भी चुकता नहीं हो पाया है “।जीवनबाबु — “हिम्मत न हारो रुपा। आज नहीं तो कल अवश्य ही हमारी तकदीर बदलेगी। दुःख सुख तो इन्सान के जीवन में आता जाता ही रहता है। नाजुक परिस्थिति में इंसान को घबड़ाना नहीं चाहिए। सुख को सभी गले लगाते हैं मगर दुःख को कोई बिरले ही गले लगाते है । रात के नौ बज रहे है। एक काम करो गी “?
    रुपा — “क्या ।जीवनबाबु ” तुम दिलचंद बनिया के यहाँ जाओ। वह तुम्हें राशन उधार दे देगा ।मेरा नाम कह देना “।रुपा –“नहीं नहीं मै नहीं जाउंगी। आप ही चले जाइये न “।जीवनबाबु -“मैं आज तक दिलचंद बनिया के दूकान पर कभी नहीं गया।लेन देन के हिसाब भी हमेशा तुम ही करती आई हो। मुझे वहां जाना कुछ अच्छा नहीं लगेगा “।जीवनबाबु के लाख समझाने पर रुपा दिलचंद बनिया के दूकान पर जाने के लिए तैयार हुई। रात के यही कोई दस या सवा दस का वक्त था। मोहल्ले के सारे लोग खा पी कर बिस्तर पर लेट कर इधर उधर के बातों में मशगूल थे। माघ का महीना था। चारो तरफ कोहरा ही कोहरा था। रुपा अपनी पुरानी शाल से अपने को ढंकती हुई दिलचंद बनिया के दूकान के तरफ चली जा रही थी। (शेष अगले अंक में)

  • इन्सान और जानवर (भाग – २)

    (आपने भाग १ में पढ़ा – वीराने में कलूआ की मुलाकात एक अदभुत गिद्ध से होता है। वह मनुष्य की भाषा में बात करता है। वह अपने घर परिवार व समाज को छोड़ चूका है। क्योंकि सभी गिद्ध जानवर के मांस खा खा कर जानवरों जेसे बर्ताव करने लगे है। गिद्ध स्वंय अपनी आहार तालाश करने मे सक्षम नहीं है।वह इंसान के मांस खा कर जीवित रहना चाहता है। वह अपनी व्यथा कलूआ को कहता है ।कलूआ क्या जवाब देता है) अब आगे —
    कलूआ –“हे गिद्ध राज। मैं अवश्य आपकी मदद करूंगा। मैं अभी आपके लिए श्मशान से इन्सान के मांस ले आता हूँ। आप प्रतीक्षा करें। कुछ देर बाद कलूआ श्मशान से एक अधजली लाश ला कर उसके सामने रख दिया। गिद्ध लाश को देखते ही कहा – ” भाई। मुझे इन्सान के मांस चाहिए, जानवर के नहीं ” ।कलूआ निराश हो गया। कलूआ श्मशान से इसी तरह से चार पाँच मर्तबा अधजली लाश लाता रहा , मगर गिद्ध सभी लाश को जानवर के लाश कह कर कलूआ को निराश करता रहा ।कलूआ — “क्षमा हो गिद्ध राज। मै आपकी समक्ष इन्सान के मांस ही लाया हूँ। जानवर के नहीं। गिद्ध — ” शायद तुम्हें इन्सान और जानवर में फर्क नहीं मालूम “। कलूआ – ” मैं समझा नहीं गिद्ध राज। आप कहना क्या चाहते हैं “। गिद्ध — ” तुम यहाँ जितने भी लाशें लाए हो, सब अपने जीवन काल में इन्सान तो थे मगर व्यवहार जानवरों जैसा था । ए सभी गरीबों के खून चूस कर स्वार्थ की रोटी सेकने के ही कार्य किया। इन्सान हो कर भी अपने से कमजोरों पर जानवर जैसे बर्ताव करते थे। परायी बहू बेटी को हमेशा हवस के नजरों से तौलते थे। ए सभी धर्म की आर में अधर्म के घिनौने खेल खेलते थे। यहाँ तक कि मन्दिर मस्जिद को भी नही छोड़ा”। कलूआ –“हे गिद्धराज।इस संसार में हर कोई कुछ न कुछ जरूर पाप किया है। आपके कहे अनुसार इतना नेक इन्सान इस भ्रष्टयुग में मिलना बहुत ही मुश्किल है “। गिद्ध — ” मैं भूखा मरना पसंद करूंगा लेकिन जानवरों के मांस खाना पसंद नहीं करूंगा। यह मेरी प्रण है। कलूआ वहां से चुपचाप अपने घर के तरफ चल पड़ा।

  • इन्सान और जानवर

    कलूआ डोम श्मशान से लाश जला कर शाम के समय घर जा रहा था। अचानक किसी की आवाज़ उसके कानो में टकरायी।वह खड़ा हो कर चारो तरफ देखने लगा। उसे कहीं भी कुछ दिखाई नहीं दिया। कुछ क्षण पश्चात वह दो कदम आगे बढा ही था कि झाड़ी में एक बूढ़े गिद्ध को देखा। कलूआ –“सारा दिन मांस खाता ही रहता है। फिर भी शाम के समय टें टें करता ही र हता है “।गिद्ध–“भाई। मैं चार दिनों से भूखा हूँ। मुझे कहीं से भी इन्सान के मांस ला सकते हो? तुम्हारा अहसान मैं कभी नहीं भुलूंगा “।कलूआ इतना सुनते ही अचरज में पड़ गया। वह सोचने लगा एक गिद्ध मनुष्य की भाषा कैसे बोल सकता है। वह डर गया। दोनों हाथ जोड़ते हुए कहा — “हे अदभुत रहस्य। आप कौन है “।गिद्ध –‘ मैं समस्त गिद्धों के राजा हूँ। मेरे जाति के सभी गिद्ध जानवर के मांस खा खा कर जानवरों जेसे बर्ताव करने लगे है।मैं अन्य गिद्धों की तरह जानवर के मांस खाना नहीं चाहता हूँ। मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है। मैं अपना घर संसार व समाज को छोड़ चूका हूँ। अब इस बूढ़े शरीर में इतनी ताक़त नहीं कि मैं अपनी आहार स्वयं तालाश कर सकुं। क्या तुम मेरी मदद करोगे ? ”
    शेष अगले अंक में

  • मेरे भाई की शादी…

    बात 4-5 साल पहले की है। मेरे छोटे भाई ने एक लड़की पसंद कर ली। लड़की विजातीय थी, बस घर में कोहराम मच गया।
    जो चाचा,मामा फूफा मेरे भाई पर लाड लुटाते थे, मानो उसके दुश्मन बन गए। भाई ने लड़की से मुझे मिलवा रखा था ।बड़ी क्यूट सी लड़की थी,मुझे तो पसंद थी। मम्मी पापा सब बिचारे के पीछे पड़ गए। जब मैने पक्ष लिया तो मुझे कहा लड़की, तुम चुप रहो।
    भाई जो अभी तक गर्दन झुकाए बैठा था, बोला…क्यूं चुप रहेगी वो बड़ी बेटी है इस घर की, शादी हो गई तो क्या पराई हो गई । मैं उसका भाई हूं, और मेरे मामले में वो बोल सकती है। फ़िर तो भैया, भाई ने कवि “कुमार विश्वास’ जी की पंक्तियां गानी शुरू कर दी….”बड़े ही चाव से सुनते हो, तुम किस्से मोहब्बत के, मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा, तो हंगामा”……बस , फिर क्या था सब एक दूसरे का मुंह देखने लगे बस फिर हो गईं दलीलें शुरू, लड़की देखेंगे, उसका खानदान देखेंगे । भाई बोला हां- हां सब देख लेना।…..बस लड़की पसंद आ गई सबको। ख़ूब धूमधाम से शादी हुई। आज मेरी भाभी सबकी लाडली बन के रहती है।

  • बरसात का वो दिन..

    तेज़ बारिश से पूरी तरह तर होने के बावजूद मैं अपनी बाईक लेकर अपने ऑफिस से घर जा रहा था । सड़क पर गहरे हो चुके गड्ढों से जैसे ही मुलाकात हुई तो ऐसा लगा कि शायद सरकार हमें यह बताना चाहती हो कि इस धरती से नीचे भी एक दुनियां है जिसे पाताल लोक कहते हैं, खैर मैंने इतना सोचा ही था कि मेरी गाड़ी किसी गड्ढे में जाकर अनियंत्रित होकर गिर गई । पहले तो सहज मानव स्वभाव वश मैंने भी यहाँ-वहाँ देखकर यह तसल्ली करनी चाही कि किसी ने मुझे गिरते हुए देख न लिया हो । जब मैं पूरी तरह से आश्वस्त हो गया कि मुझे किसी ने गिरते हुए नही देखा तो उसके ठीक अगले ही पल इस बात का अफसोस मुझे सताने लगा कि चलो गिरते हुए किसी ने नही देखा, तो न सही, लेकिन गिरने के बाद तो देखना चाहिए था, अब तक कोई मुझे उठाने तक नही आया, यह आस मुझे इसलिये भी थी क्योंकि मेरा पैर चोटिल हो गया था और मुझसे खुद उठते नही बन रहा था । तभी सामने से कुछ लोग मुझे आते हुए दिखे, उनकी यह मानवता देखकर मन में यह भाव उमड़ आया कि लोग चाहें जो कहें लेकिन इस दुनियां में इंसानियत अभी मरी नही है । अरे.. मगर ये क्या, तेज़ रफ्तार से मेरी तरफ आते हुए वो लोग सहसा मेरे पास से होते हुए सड़क के दूसरी तरफ निकल गए, भला ये कैसी मानवता ? यहाँ आदमी गिरा पड़ा है और कोई उठाने वाला भी नही ।
    सड़क के दूसरी तरफ लोगों की भीड़ जमा हो गई थी मैंने भी कौतूहल वश यह जानना चाहा कि आखिर माजरा क्या है और यह जानने के लिए अपनी गर्दन को प्रत्येक कोण में घुमाकर यह देखने की कोशिश की कि कहीं वहाँ कोई बुजुर्ग आदमी तो नही गिर गया, तभी ये सब लोग मुझे छोड़ उन्हें उठाने और सहारा देने में लगे हों । तभी लोगों के जमावड़े के बीच बने झरोखे से मुझे जो दिखाई दिया वो अविस्मरणीय था, सड़क के दूसरी तरफ लोगों की जो भीड़ जमा थी वो इसलिए थी कि एक खूबसूरत लड़की की स्कूटी स्टार्ट नही हो रही थी और वहाँ जितने भी लोग थे सब बारी-बारी अपना हुनर आज़मा रहे थे । तभी मुझे यह समझ आया कि हमारे देश में हुनर की कमी नही है किसी लड़की की स्कूटी खराब हो जाए तो हर दूसरा शख्स थोड़ी देर के लिए मैकेनिकल इंजीनियर बन जाता है । लोगों की भारी मशक्कत के बाद उस लड़की की स्कूटी स्टार्ट हो जाती है और वो अपने गंतव्य को चली जाती है लेकिन कुछ लोग अब तक उसके जाने के बाद भी न जाने कौन से सुकून के एहसास से सराबोर थे जो अब तक वहीं खड़े थे तभी अचानक मेरे अंदर का कवि जाग उठता है और मेरे मन से शब्दों के बाण निकलने को आतुर हो उठते हैं..

    ‘के अब ज़मीन पर उतर जाओ कमबख्तों..
    चली गई वो अब तो घर जाओ कमबख्तों..’

    वो लोग जो मेरी तरफ से, मेरे पास से होकर सड़क के दूसरी तरफ गए थे वो वापस इसी तरफ आ रहे थे अब उनकी नज़र मुझ पर पड़ी ।
    अरे भाई साहब कैसे गिर गए ? मुझे उठाते हुए उन्होंने पूछा..
    बस अभी अभी गिरा हूँ गाड़ी अनियंत्रित हो गई । मैंने जवाब दिया ।
    ‘सड़क ही ऐसी है भगवान बचाए ऐसी सड़कों पर तो..’ उन्होंने खेद जताते हुए कहा..
    ‘सही कहा आपने, भगवान न करे कि आपके साथ कभी ऐसा हो लेकिन अगर हो, तो मेरी ये दुआ है कि ठीक उसी वक्त सड़क के दूसरी तरफ किसी खूबसूरत लड़की की स्कूटी स्टार्ट न हो’
    वो लोग मेरी बातों का मतलब समझ गए थे लेकिन अब उनके पास मेरी इस बात का कोई जवाब नही था..

    – प्रयाग

  • मैकेनिकल इंजीनियर

    ‘कैसी सड़क हो गई है इतने गढ्ढे हैं कि समझ नही आ रहा कि गाड़ी सड़क पर चला रहा हूँ या सर्कस में, मेरा इतना सोचना ही हुआ था कि मैं गाड़ी समेत लड़खड़ा कर सड़क पर गिर पड़ा, आस पास देखा कि किसी ने गिरते हुए देख न लिया हो । तसल्ली हुई कि गिरते हुए तो नही देखा लेकिन शायद गिरने के बाद देख लिया था क्योंकि कुछ लोग मुझे मेरी तरफ आते हुए दिखे, लेकिन ये क्या.. ये तो सड़क के दूसरी तरफ निकल गए जहाँ एक खूबसूरत सी लड़की अपनी गाड़ी को स्टार्ट करने की जद्दोजहद में परेशान दिखाई दे रही थी मैंने भी सोचा वाह क्या टाईमिंग है उसकी गाड़ी

  • अपहरण

    ” अपहरण “हाथों में तख्ती, गाड़ी पर लाउडस्पीकर, हट्टे -कट्टे, मोटे -पतले, नर- नारी, नौजवानों- बूढ़े लोगों  की भीड़, कुछ पैदल और कुछ दो पहिया वाहन से, नारा लगाते  चिल्लाते उसी  कुछ झण्डा  चमकाते दलगत राजनीति से ओत – प्रोत हौशले से  नारा लगाते हुए कि – हर जोर जुल्म की टक्कर , में संघर्ष हमारा नारा है।अभी तो यह अंगड़ाई है ,आगे और लड़ाई है |आप हमारे भाई हैं,समर्थन के लिए बधाई है।उनके बूच से कुछ लोग बोलते हैं कि-विवेक को हमें छुड़ाना है, नया जमाना लाना है।नया जमाना आएगा ,वह धूल में मिल जाएगा | गली – मोहल्ले में शोर है,अपहरणकर्ता चोर हैं।जनता को हमें बचाना है,नई व्यवस्था लाना है।उममें से कुछ लोग कहते रहे सभी लोग सड़क किनारे खड़े हो जाओ ! खड़े -खड़े हो जाओ भाई , हमसे अब तुम मत टकराओ।सुशासन हमको लाना है, भ्रष्टाचार मिटाना है। जनता को जगाना है। विवेक को छुड़ाना है।सड़क के किनारे राहगीर खड़े हो जाते हैं वही  नारा लगाते हुए भीड़ आगे बढ़ती जाती है। नारा लगाने वाले कहते हैं कि-आप हमारा साथ दो हम विवेक को आजादी देंगे।      एक व्यक्ति से हमने पूछा कि विवेक वह कौनहै  जिसके लिए जिसके लोग नारेबाजी और प्रदर्शन हो रहा है। इतना सुनते हीउसी भीड़ से  एक व्यक्ति आगे बढ़ता है और कहता है तुम विवेक को नहीं जानते,  विवेक एक  कवि – लेखक है।मैंने कहा  कि -जब  वह  एक कवि और लेखक है तो यह तय है कि  उसके पास धन नहीं है|  वह ध्यान ही करने वाला  है | यदि वह एक सामान्य नागरिक है तो उसका  अपहरण नहीं होना चाहिए था। उसका विषय –  वस्तु मुफ्त है। वह एक रचनाकार है | वह अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को सुधारने का कार्य करता है और लोगों के दिल को जीतने का काम करता है। अपहरण ! अपहरण को तो धन- दौलत  की लालच मैं किया जाता है जिसे हम सब ने आज तक सूना है | जब उसके पास धन नहीं है ऐसी स्थिति में अपहरणकर्ताओं ने अपहरण किस लिए किया होगा ! हमने उससे प्रश्न किया | उस व्यक्ति ने मुझसे उत्सुकता से बोला – क्या कहा  है, आपको मालूम है कि जितने भी अपहरन होते हैं वह सभी बड़े आदमियों के ही होते हैं ?  नहीं सभी अपहरण बड़े आदमियों के ही नहीं होते। कुछ तो बुद्धिमानो के भी  अपहरण होते हैं।मैंने कहा कि अपहरण करने के पूर्व रुपए का लोभ, कर्ज का स्वार्थ ही तो होता होगा |  यह भी जानकारी मिलती है कि अपहरणकर्ता उसकी जमीन हथिया लेने  के लिए भी अपहरण करते हैं और कुछ अपहरणकर्ता महिलाओं का भी अपहरण करने की हिम्मत करके बलात्कार जैसी घटना को अंजाम दे दिया करते हैं।ऐसे भी अपहरण की कहानी सुनने में आती है कि अपने ही माता- पिता को अपने खुद को कब्जे में लेकर उनका धन धीरे- धीरे  चूसने का कार्य लड़के ,भाई ,बंधू ही शुरू कर दिया करते हैं। इसकी चर्चा प्रायः पेंशन योजना प्राप्त लोगों को लेकर काफी चर्चा में आती  है |  उन्हीं खुद के  लड़के गार्जियन के पुरानियान होने  पर परिवार का भरपूर इस्तेमाल अपने हित साधन के लिए किया करते हैं। उनके ए टी एम को लेकर सारी पेंशन निकाल लेते हैं और मनमानी करने लगते हैं। पेंशन भोगी का  पूरा पैसा खुद निकाल कर  हड़प लिया करते हैं। नारे बाजी करने वाला सामने आया और बोला तुम बड़े भोले लगते  हो ! हमें एक चाय की चुस्की लेने के लिए चाय वाले को आदेश दो हम विवेक जैसे महान तेजस्वी लोगों का अपहरण क्यों किया जाता है, इसमें  कार्यवाही कैसी होती है फल क्या निकलता है हम तुम्हें सब तुम्हें विधिवत बताऊंगा।हमने भी उसकी बात सुनी | बात रोचक लगी उसकी बात पर ध्यान देने के लिए बहुत अच्छी तरह से तैयार हो कर चाय की दुकान पर गया | दूकान पास में ही थी |  दो प्याली चाय के लिए आर्डर दे दिया। एक प्याली चाय हमने ली और दूसरी  प्याली चाय उस व्यक्ति की तरफ बढ़ा दिया ।उसने चाय की चुस्की ली फिर  बोला  कि – जनाब ! कुछ लोग तो अपहरण का नाटक भी करते हैं। अमूमन अपहृत युवती, बच्चे, बड़े,लोग साधारण  आदमियों में से नहीं होते हैं | अपहृत ब्यक्ति  बड़े आदमी ही होते हैं। अपहरण करने के बाद मानव जीवन में ही वह देवता हो जाता है। आप कहेंगे देवताओं की मूर्तियों की पूजा अर्चना की जाती है तो सुनो ! हम कह सकते हैं कि भगवान की भक्ति की ही भांति उस व्यक्ति को भी हर जब तक कब्जे में रखा जाता है उसे भी सुविधाएं उपलब्ध कराने में सफल प्रयास किया जाता है | जबतक अपहरणकर्ताओं की पहुंच उसके मालिक तक नहीं किया गया होता है और उसके एवज में रिश्वत के रूप में मागी गई रकम नहीं मिल पाई होती है।तब तक अपहरण से अपहरण करने अनजान वाले लोगों के खिलाफ आवाज उठती है नारे गढ़ते हैं। नारा प्रदर्शन किया जाता है। सरकार को कार्यवाही कठोर करने के लिए तैयार किया जाता है। पुलिस प्रशासन को प्रारंभ जांच करने का विधान सरकार करती है। प्रदर्शन जोर पकड़ने वाला होता है तब सरकार की नीद खुलती है।अपनी सरकार बचाने , सरकार की इज्जत बचाने की कोशिश होने लगती है। उधर प्रदर्शन करने वाले लोगों को अपने जीवन में चुनाव प्रचार अभियान चलाने की चिंता बनी रहती है। जोरदार नारेबाजी अनशन प्रदर्शन करने वाले लोगों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया स्वरूप जनता सहानुभूति रखने लगती है। प्रदर्शन करने वाला शख्स अपनी जीत चुनाव में देखने सुनने की फिराक में रहते हैं। नेता बनने का सपना देखने लगते हैं। कुछ एक लोग चुनाव में टिकट भी पा जाते हैं और जनता की सहानभूति का फायदा उठाकर चुनाव जीत जाते हैं।अगवा करने का मतलब क्या होता है यह अनोखा तरीका और खेल तो आप अबतक समझ लिए होगे।आगे उसने कहा कि अपहरण करने वाला फिर फिरौती की रकम की बात करता है जिसमें प्राय: औरतों का इस्तेमाल किया जाता है। औरतें मर्दों की अपेक्षा अधिक लोकप्रिय मुख्य भूमिका में कार्य करने में सक्षम होती हैं। वह फेसबुक पेज, ट्यूटर, इंस्ट्राग्राम, लिंकडम आदि साइटों पर सक्रिय रहती हैं।अनेक तरह तरह से लोगों को रिझाने की कोशिश करने में सफल भी हो सकती है। कुछ तो अपने जाल में फंसाकर धन की प्राप्ति की इच्छा जाहिर कर सोशल साइट पर लाइव हो कर भी धन उगाही की घटना को अंजाम देने का वादा कराने में सफल हो जाती हैं। फंसे हुए लोगों से ख्वाइश के हिसाब से नाच गाना आंख मारना आदि तरह तरह से रिझाने में सफल प्रयास करती हैं।फिल्मी स्टाइल में नृत्य गान करते हुए योजना को मंजूरी तक पहुंच सके का प्रयास करते हुए अंजाम तक पहुंचाने की भूमिका निभाती नजर आने लगती हैं। जनाब हैं समझते हैं कि आप समझ गए होंगे।आपने पूछा था कि अपहृत व्यक्ति कैसे देवता हो जाता है?उसने कहा कि अपहरण करने वाले व्यक्ति के जीवन से जुड़ी ख़बरें आप को ज्ञात नहीं है आप तो बड़े भोले हो। भाईजान अगवा किया गया आदमी के लिए शासन प्रशासन लग जाता है। उसकी  खोज  बीन कराने के लिए तैयारी  की जाती है। पुलिस प्रशासन को यह बतला दिया जाता है कि अमुक व्यक्ति की खोज करने के लिए अपहरण करने वाले लोगों की पहचान की जाय उसकी कुण्डली खंगाली जाय ।उस पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। कमेटी बनती है और सुरु हो जाती है खोज !विभिन्न मतावलंबी दल भी उसमें भी वोट की खोज में लगे रहते हैं। वहीं शासन प्रशासन के पास अपनी सरकार और पुलिस की इज्जत बचाने की कोशिश करती है। शासन सत्ता के लोग बड़े आदमियों के लिए तैयार आवश्यक कदम उठाने की लगी रहती है। बाकी के पूर्व सोच के हिसाब से हल्ला चिल्ला  मचाने की तैयारी में जुटे हुए आगे बढ़ने की उम्मीद लिए होड़ में लग जाते हैं।अपहृत व्यक्ति के खिलाफ मोर्चा खोल कर अपहरण करने वाला शख्स रुपया नहीं आया यह जानकर आश्चर्य करते हुए आगे का हिस्सा करने पर उतारू हो जाता है।रुपए को हासिल करने के लिए आज कल नया प्लान बनाया जाता है और किसी औरत को अपने अधीन काम करने की व्यवस्था दी जाती है। वहीं  औरत अपहृत के छोड़ने के लिए रुपए की मांग करती है।रुपया पहुंचा दिया जाय , इतना ,नहीं तो , किसी को खबर नहीं करनी होगी, नहीं तो, न मामले में क्या होगा, जानते हो!, पुलिस को बताया तो , क्या होगा,समझ गए न , हम फिर फोन करेंगे, आदिकभी कभी वीडियो काल करके अपहृत से बात भी कर देते हैं। वायस रिकार्डिंग का भी प्रयोग होता है।वह व्यक्ति आगे बोला अरे भाई जान आप का अपहरण कभी हुआ है अथावाई नहीं?मैंने कहा आप तो दिलचस्प आदमी लगते हो!जबकि उसकी नीयत साफ नहीं लगी उसकी बात बिच्छू की डंक की भांति मुझे चुभी।मैंने कहा कि क्या वाहियात की बातें करने लगे हो,मेरा अपहरण कोई क्यों करेगा। मेरे पास कुछ भी तो नहीं है।इतना सुनकर उसने कहा कि अपहरण किसका होता है किसका होना चाहिए, किस लिए होता है यह हमें  मत समझाइए! आपने पूछा तो मैंने यह सब बता दिया वर्ना  —— ।भाईजान आपने मुझे चाय पिलाई । आप बड़े आदमियों में शामिल हैं। वर्ना आज कल कौन किसको पूछता है । पहले का समय पीछे छूट गया जब लोग अपने घर आने वाले अतिथियों का स्वागत खातिर किया करते थे। खैर मकदम पूछते थे।अपहरण करने वाले व्यक्ति केवल पैसे के लिए ही अपहरण नहीं करते हैं। फिर आप एक कवि हैं सम्मेलनों में जाते ही होंगे। धनवानों के बीच तालमेल ज़रूरी हो सकता है।बुद्धिमान व्यक्ति के साथ मिलकर धनवान नाम कमाने के लिए साथ लगा मीठी वाणी से स्वागत आभार व्यक्त करता है। मुख्य भूमिका में नजर आने लगते हैं।मसलन बुद्धि और विवेक से धन बल बुद्धि के माध्यम से लोगों को जन बल की शक्ति मिलती है। धन शक्ति के आगे बुद्धि शक्ति अधिक लोकप्रिय है। परन्तु बुद्धि शक्ति के आगे धन शक्ति सर झुका देती है। जिस प्रकार नारी शक्ति पुरुष शक्ति को अपने अधीन कर लेती है उसी प्रकार बुद्धि शक्ति के खांसने छीकने पर राह के सभी अवरोधक रोड़े हट जाते हैं। पुलिस भी चौबीसों घण्टे नौकरी करने की आवश्यकता पर सुख नहीं रह पाती कुछ की फिराक साहब उसे भी होती है। नेता जी की नेतागिरी चमकाने का मौका मिल जाता है। रही बात अपहृत के घर वाले वी वी , बच्चे की । वह भी कुछ एक दिन आंसू बहा कर रह ही जाते हैं।भारी हो हल्ला मचाने को रोकने के लिए मदद के रूप में परिवार को सरकार कुछ रूपयों की मदद दे कर पल्ला झाड़ लिया करती है।यह सब कुछ चलते रही की बातें सुनकर मैं तो वहां से निकालना ही सही समझा और वहां से निकल लिया।- सुखमंगल सिंह, अवध निवासी

  • जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि

    एक समय की बात है। गुरू द्रोण अपने दो शिष्य युधिष्ठिर एवं दुर्योधन को पास बुलाया।द्रोण -“तुम दोनो संसार को देख आओ, कौन अच्छा है कौन बुरा है “।दोनो आदेश के पालन करने के लिए निकल पड़े । कुछ दिन गुजरने के बाद दोनों गुरू द्रोण के पास पहुँचे। पहले युधिष्ठिर बोला -“मुझे छोड़ कर संसार में सभी अच्छे थे “।दुर्योधन बोला -“मुझे छोड़ कर संसार में सभी बुरे व्यक्ति थे “।ठीक उसी प्रकार जैसी हमारी दृष्टि होगी, वैसी हमारी सृष्टि होगी।

  • ओडिशा यात्रा -सुखमंगल सिंह

    यात्रायें सतयुग के सामान होती हैं और चलना जीवन है अतएव देशाटन के निमित्त यात्रा महत्वपूर्ण है | मानव को संसार बंधन से छुटकारा पाने हेतु जल तीर्थ की यात्रा करना चाहिए – सुखमंगल सिंह sukhmangal@gmail.com मोबाईल -९४५२३०९६११
    यात्रायें हमेशां ज्ञान -उर्जावृद्धि में सहायक होती है – कवि अजीत श्रीवास्तव
    https://plus.google.com/collection/0FouTE

    मूल रूप से Sukhmangal Singh ने साझा किया
    यात्रायें सतयुग के सामान होती हैं और चलना जीवन है अतएव देशाटन के निमित्त यात्रा महत्वपूर्ण है | मानव को संसार बंधन से छुटकारा पाने हेतु जल तीर्थ की यात्रा करना चाहिए – सुखमंगल सिंह sukhmangal@gmail.com मोबाईल -९४५२३०९६११
    यात्रायें हमेशां ज्ञान -उर्जावृद्धि में सहायक होती है – कवि अजीत श्रीवास्तव
    गाड़ी तीन घंटे बिलम्ब से चल रही थी जिसकी सूचना रेल प्रसारण यंत्र से किया गया | साथ में दो लोगों के रहने से राह बोझिल नहीं हुई | फिर क्या था कि दस बजे सूचना प्रसारित हुई कि रेलगाड़ी दो घंटे और बिलम्ब से है |
    चाह यह नहीं कि सिर्फ मेरा नाम पहुंचे |
    चाह यह कि पूरे विश्व में हिंदी का सलाम पहुंचे ||
    हमारा यही मिशन है | इस मिशन में कठिनाइयों की चर्चा के लिए कोई स्थान नहीं है |
    उड़ीसा के लोग बड़े प्यारे हैं मैं सन २०१५ में भी गया था सपत्नीक |श्री जगन्नाथपुरी और ढेंकानाल तक |
    उड़ीसा संपर्क क्रान्ति रात्री १२:३० बजे मुगलसराय आई | एस ५ में लोअर वर्थ -९ और १२ पहले से ही रिजर्व था | हम दोनों बैठ गए |
    घर से दिव्य मकुनी बाटी बनवाकर सफर के लिए रख रखा था हम दोनों ने उसे खाया और एक गुण खाकर पानी जमकर पिया | खैनी जमी ! कुछ बातें हुईं और नीद लगने लगी हम दोनों अपने अपने वर्थ पर सो गये |
    रात्रि के तीन सवा तीन के लगभग बीच में जग गया था ,उसी समय फ्रेश हो लिया था फिर लेता तो नींद लगी और खुली ८:३० पर सुबह | देखा मित्र यात्री कवि अजीत श्रीवास्तव डायरी में कुछ लिख रहे थे | सायद उस फेस बुक से सम्बंधित ! जिस रचना को मेरे मोबाइल से देखा था | लिखा था (नाम न लेते हुए ) मैं समस्या देता हूँ,समाधान नहीं |मुझसे बढ़के कोई इंसान नहीं | देखकर उस समय मित्र मुस्कराये ! कुछ बोले नहीं |
    चाय…चाय..चाय गरम चाय ! चाय वाला आया | हम दोनों ने चाय पी | खैनी जमी |
    यात्री संगी ने कहा -सुखमंगल जी कुछ लोगों ने फेसबुक को बन्दर के हाथ अस्तूरा समझ लिया है | ऐसों को कोई टिप्पड़ी नहीं दी जाती और एक कागज पर लिखकर मुझे दिया –
    जो समस्या देते हैं ,समाधान नहीं !
    ऐसों से बढ़के ,कोई शैतान नहीं ||
    कविता करना ,इक तपस्या है !
    कविता, कविता है परचून की दूकान नहीं ||

    हिंदी के लिए प्रचार – प्रसार की सबसे अधिक जरूरत यदि कहीं है तो वह है अहिन्दी भाषी क्षेत्र में ,इसी उद्देश्य को मिशन के तहत अहिन्दी भाषी क्षेत्रों के भीतरी इलाकों में पहुंचकर हिंदी की अलख जगाने का कार्य विगत दो वर्षों से कर रहा हूँ | जो हिंदी आज विश्व फलक पर नंबर दो पर है ,उसे नंबर एक का दर्जा दिलाने में यह मिशन सफल होगा यही आशा है |
    इसका मूल कारण यह है कि अहिन्दी भाषी क्षेत्रों के लोग आज विदेशों में बड़े-बड़े पदों पर अधिकाधिक् मात्रा में मौजूद हैं |
    इस मिशन में अखिल भारतीय सद्भावना एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखमंगल सिंह और कार्यकारी महासचिव अजीत श्रीवास्तव लगे हैं |
    ढेंकानाल (उडीसा ) प्रधान महाप्रबंधक ,दूरसंचार कार्यालय के हिंदी पखवाड़ा -२०१७ में हम (दोनों ) को आमंत्रण मिला ! मुझे मुख्य वक्ता और अजीत श्रीवास्तव को सम्मानित अतिथि के रूप में (काव्यपाठ )करने हेतु |
    सितम्बर १२,२०१७ को हम पहुचे मुगलसराय जं० सायं ०६ बजे | संपर्क जन क्रान्ति एक्सप्रेस का समय ०७:३० का रहा |
    एक बार तो मैंने सोचा कि उन श्रीमान् को यह रचना फेसबुक पर भेज दूं लेकिन अजीत जी ने मना कर दिया ,कहा कि ऐसा लिखने वालों को भगवान भरोसे छोड़ देना चाहिए | नोटिस
    में नहीं लेनी चाहिए | ऐसे लोगों की फेस बुक पर भारी भीड़ होती है जो लोगों के बहुमूल्य समय खराब करते हैं |
    चाय वाला घुमते -घामते फिर आया | एक – एक चाय हम दोनों ने और पी | खैनी जमी |
    उघर कम्पार्टमेंट में लोग अपनी – अपनी चर्चाओं में दो तीन के ग्रुप में मशगूल थे | सफर
    में चर्चाएँ खूब होती हैं अत्यधिक महत्वपूर्ण होने के बावजूद वे सभी चर्चायें सफर समाप्ति
    के साथ छूट जाती हैं | मैंने कागज के सफेद पन्ने बहुत सारे रखे थे उन्हें बी आई पी अटैची
    से निकाला और हो रही चर्चा के मूल को नोट करते चला |
    दोनों तरफ पहाड़ और झाड़ियाँ | कभी जंगल रहे होंगे |काटे गए हैं ! कहीं कहीं बस्तियां है | अगल बगल की जमीन की मिटटी लाल | मौसम कुछ-कुछ कोहरा कुछ -कुछ धुप |
    लोगों की चर्चा आरक्षण पर केन्द्रित थी | हम दोनों लोग श्रोता की भूमिका में रहकर बात को गंभीरता से सुन रहे थे |
    धुंध ! अगल -बगल | चिमनिया पीठ पर छोटे -छोटे बच्चे | मजदूरी करने की कतार में आदिवासी महिलाएं | नजर जहां तक दोनों ओर जाये ,पगडंडियों पर आते -जाते आदिवासी मजदूरों की बड़ी कतारें | सर पर गठरी में क्या है ,कुछ पता नहीं ! हाँ हाथों में जलावन लकड़िया और कोयले ! छोटे बच्चे पीठ पर उससे बड़े बच्चे पैदल | ट्रेन टाटा नगर आ पहुंची | आधा घंटे रुकी और फिर अपने गंतब्य को चल दी |
    दोनों बोतलें जो खाली हो चलीं थीं में पानी की व्यवस्था हमनें टाटा नगर में क्र ली | स्टेशन पर कुछ गमले दिखे बचा हुआ पानी उन्हीं गमलों में उड़ेल दिया था | दो-दो मकुनी बाटी, नीबू के अचार के साथ खाया गया | गुड खाने के बाद पानी पेट भर पिया | एक-एक चाय के बाद खैनी जमी | अब ट्रेन की सीटी बजी |उड़ीसा संपर्क क्रान्ति आगे बढ़ी | चर्चा थी कि थम ही नहीं रही थी | चर्चा में सामिलों को भी भुवनेश्वर ही जाना था |
    राजनीति ने सत्तर सालों में कुछ ऐसीस्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है कि आरक्षण पर बोलना किदो भाग होना | कहीं देखा गया है कितनावग्रस्त स्थितियां भी पैदा हो जाती हैं |यह अच्छी बात रही कि ट्रेन में ऐसा कुछ नहीं रहा | सभी के मुखर स्वर आरक्षण को आर्थिक आधार पर दिये जाने के पक्ष में रहे |-sukhmangal singh
    sukhmangal@gmail.com

  • कोरोनवायरस -२०१९” -२

    कोरोनवायरस -२०१९” -२
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    कोरोनावायरस एक संक्रामक बीमारी है| इसके इलाज की खोज में अभी संपूर्ण देश के वैज्ञानिक खोज में लगे हैं | बीमारी फैलने से पूरे विश्व में हाहाकार मचा हुआ है| लॉकडाउन में शव ले जाने के लिए भी लोग तैयार नहीं नहीं है । वायरस वोहान चीन से आया हैयह तो तय हो चुका है |
    विश्व में सारे धार्मिक स्थलों को बंद करने का ऐलान किया गया है जिससे यह बीमारी लोगों में भारी मात्रा में फैलने से रोका जा सके| विविध तरह के उपाय और व्यवस्थाएं की जा रही हैं | सुरक्षाकर्मी- स्वास्थ्य कर्मी और प्रशासन का अमला बखूबी जनता और जीवन की भलाई के लिए कार्य कर रहा है | हम अप्रैल माह में अप्रैल माह में हुए प्रयासों पर प्रकाश डालना चाहते हैं।-
    प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने विश्व के लगभग 60 देशों में ऐसे कठिन घड़ी में दवा खाद्य सामग्री और सुरक्षा व्यवस्था पहुंचा कर महान कार्य किया |
    ब्राजील ने कहा हनुमान जी की तरह संजीवनी लाए हैं मोदी ! आगे कहा हमारे सभी नागरिक आप का धन्यवाद करते हैं !
    अमरीका के राष्ट्रपति ट्रंप जी ने कहा मुश्किल हालात में मित्र मित्रता दिखाया है, मोदी महान ! महान कार्यों के लिए डब्ल्यूएचओ ने भी मोदी की तारीफ की !
    उधर पूरे विश्व में मार्च माह में ही मरने वालों की बाढ सी आ गई ।
    एक तरफ भारत कोरोनावायरस से झेल रहा है वही दूसरी तरफ पाकिस्तान सीमा पर घुसपैठ करने से बाज नहीं आ रहा है| स्थानीय नागरिकों को गोला – बारूद से भारी नुकसान पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। विरोध स्वरूप भारतीय सेना ने भी हमला कर पाकिस्तानी बंकरो को तबाह कर दिया।
    भारतीय सीमा पर चीन ने अपनी सेना भारी मात्रा में लगाकर भारत से विरोध करने पर उतारू हो गया है | वार्ता की तैयारी चल रही है | भारतीय सेना भी सीमा पर उतनी ही मात्रा डट गयी ।
    आगे हम विश्व की एक झलक दिखाने का प्रयास कर रहे हैं कहां क्या हुआ। –
    भारत के राजस्थान अजमेर में कोरोनावारयर्स पुलिस पर जनता ने हमला किया। जिसकी कार्यवाही की जा रही है | राष्ट्र में भी पुलिस सुरक्षा पर हमला किया गया ।
    मिलेट्री – सी आर पी एफ और पुलिस भी पी पी ई किट्स और मास्क बनाने में लग गई। कमांडेंट मुकेश कुमार ने बताया के पी पी किट्स और मास्क बनाने का काम आई टी बी पी के जवान कर रहे हैं।
    स्पेन में कोरोना वायरस से लोगों की हालत ज्यादा खराब है। इंडोनेशिया में एक डॉक्टर का कोरोना वायरस से निधन हो गया। न्यूयॉर्क, यूक्रेन पर भी कोरोना का भारी प्रभाव पड़ा जिससे लाक डाउन बढ़ाया गया । यू एस, इटली ने लाग डाउन नहीं किया इसी से मरने वालों की संख्या बढ़ी।
    भारत ने समय से लॉकडाउन किया जिससे अप्रैल माह में वायरस फैलने से रोका जा सका। दिल्ली एन सी आर में 12 अप्रैल को भूकंप का झटका 5:00 पर 5:45 पर 3.4 की तीव्रता में आया झटके से भारी नुकसान हुआ।
    जर्मनी, नीदरलैंड्स स्पेन की कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या बढ़ी। टर्की के इस्तांबुल में 2 दिन का लाभ डाउन किया गया परंतु प्रधानमंत्री इस्तांबुल के सार्वजनिक क्षेत्र में होने से जनता उनका उपहास करने लगी।
    संयुक्त राष्ट्र संघ ने कहा कोरोनावायरस विश्व युद्ध के बाद मानव पर सबसे बड़ा खतरा है । अप्रैल 2 तक महामारी के कहर से जहां पूरी दुनिया कराह रही थी वहीं दुनिया के 15 देश बचे हुए थे हैरानी की बात यह है कि इनमें से अधिकतर देश अफ्रीकी महाद्वीप के हैं जहां किसी भी तरह के वायरस का संक्रमण दुनिया में सबसे ज्यादा कहर बरपाता है।
    कोरोनावायरस काल में यू ए ई ने निर्णय ले लिया भारत के लोगों को जिनमें कोरोनावायरस नहीं है उन्हें भारत में भेजना चाहता है। उधर चीन मैं अफ्रीका के लोगों का पासपोर्ट जप्त कर रहा था | जबरन लोगों को कोरंटीन कर रहा था | सड़क पर अफ्रीकी लोगों को बैठने भी नहीं दे रहा था | जिसे देखते हुए नाइजीरिया ने चीन पर नाराजगी जताई।
    ईरान के राष्ट्रपति हसन ईरानी ने सेना डे के अवसर पर कोरोना से बचने के लिए सेनेटरराइस गाड़ियां और तोपे लगा दी जो लोगों को से सेनेटराइज करें उन्हें सड़क पर उतारी दी |
    वोहान चीन से कोरोना फैलाने के विरोध में अमेरिका, जापान सहित पांच शक्तिशाली देशों ने चीन की कंपनी पर नाराजगी जताई भारत भी नाखुश होकर चीन की कंपनी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। अमेरिका सहित विश्व के लगभग 108 देश चीनी कंपनियों के विरोध में खड़े हो गये । इस बीच चीन की सेंट्रल कंपनी ने आर्थिक संकट की शंका जाहिर की। चीनी जिस – जिस देशों को रैपिड किट्स , मास्क भेजें ज्यादातर देशों ने उन्हें खराब बताया और चाइना के सामान का बहिष्कार किया। वापस कर दिया | कोरिया के स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा चाइना से स्वास्थ्य से संबंधित जो सामान आये हैं वह खराब है उसे बैन कर दिया जाना चाहिए। आई सी एम आर ने जिस कंपनी की किट्स खराब थी उसे बैन कर दी। भारत को सेल्स लिस्ट – सेल्फ निष्ठ बनाना है अब भारत में किड्स, मास्क , वेंटीलेटर ,टेस्टिंग किट बनने लगा है।
    पश्चिम बंगाल की बात करें तो पश्चिम बंगाल में मस्जिद में भारी भीड़ जुताई गयी , लागडाउन को तोड़ा गया | भारत सरकार ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को पत्र लिखा और इस भयावह स्थिति में कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया। अहमदाबाद से लंदन के लोगों को जांच करने के उपरांत भेजा गया | उन्हें अपने देश पहुंचाने का कार्य भारत सरकार की पहल पर हुआ |
    यूपी के बुलंदशहर में 17 जमाती पकड़े गए उन्हें कोरेंटीन किया गया | असम में 12 तब्लीग के लोग पकड़े गये । बढते जमाती को देखते हुए यूपी सरकार ने प्लान बनाया जहां भी जमाती छुपे हो उन्हें खोजा जाय ,डीजीपी ने एक आदेश जारी किया। यूपी के मुरादाबाद में कोरोनावायरस के मरीज को ले जाते समय एंबुलेंस की टीम पर पुरुषों और महिलाओं ने पथराव किया तत्पश्चात पुलिस सक्रिय हुई और उन पर कार्रवाई की जा रही है।
    मध्य प्रदेश के इंदौर में भागते हुए जमातियों क्यों को पकड़ा और उन्हें कोरेंटीन किया गया | पुलिस उन पर उचित कार्यवाही कर रही है।
    कोटा राजस्थान में कुछ औरतें प्लास्टिक के थैले में थूक कर घरों के अंदर फेंकने का कार्य किया बाद में पकड़ लिया गया। प्रशासनिक कार्यवाही की गयी |
    चंडीगढ़ में 200 लोगों को मॉर्निंग वॉक करते हुए पुलिस ने पकड़ा और उन पर कार्रवाई हुई। अप्रैल 18 को यूपी में मरीजों की संख्या जो कोरोना से पीड़ित की 125 हो गई जिसमें से 86 मरीज केवल जमात के ही मिले।
    न्यूज़ चैनल ए बी पी 14/४/२० को एक बैठक में सुनील कुमार अलग एमडीएस के ए एडवाइजर ने ला ग डाउन बढ़ाने का समर्थन किया।
    अमूल इंडिया के आर एस सोढ़ी ने कहा- कि भारत में 70 परसेंट किसान है वहां पैसा लगाने की आवश्यकता है।हमने अपने कर्मचारियों को 25 से 30 परसेंट इंसेंटिव देना शुरू कर दिया है।
    राजीव जुनेजा सी ई ओ मैकाइंड फार्मा ने कहा – बिजनेस बचाने से ज्यादा आज जान बचाना जरूरी है दुनिया चेंज होने वाली है अब अलग तरह से काम करने की आवश्यकता है।
    प्रांजल वर्मा बिजनेस पत्ररकार ने कहा – कि कुछ कंपनियों की सोच बन गई है अपना पैसा बचा कर रखें और सरकार से मांग करते रहे जबकि रिजर्व पैसे को कंपनियों को कर्मचारियों में बांटना चाहिए।
    सुधीर कुमार जी ने कहा – प्रॉफिट कम हो जाए सभी बिजनेस वाले 1 साल के लिए सामान का सप्लाई बढ़ाएं तो मांग बढ़ेगी कर्मचारी का ध्यान दें| कर्मचारियों का ध्यान दें ने से लगाकर काम करेंगे । कम प्रॉफिट पर 1 वर्ष माल बेचे, मांग बढ़ेगी ,निर्यात बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया जाना चाहिए। राजस्थान के कोटा में 750 छात्र फंसे हुए थे उन्हे अपने प्रदेश आने पर अलग-अलग सरकार विचार कर रही हैं।
    राजस्थान के कोटा में यूपी के छात्रों को लाने के लिए आगरा और झांसी से 250 बसें यू पी सरकार ने भेजा और छात्र वहां से यूपी आ गये । वहीं बिहार के परिवहन मंत्री नीरज कुमार सिंह ने कहा मानवता जरूरी है प्रधानमंत्री भारत सरकार के निवेदन पर सोशल डिस्टेंसिंग पालन आवश्यक है। आज तक के डिबेट में एम एच खान ने कहा – मौलाना साद को एक एन जी ओ चलाने वाला बताया | वह मुसलमान के नाम पर लोगों को मारने का काम कर रहा है| सबसे ज्यादा शाहीन बाग को लेकर दिल्ली में हिंदू- मुसलमान किया गाया , देश बड़ा है, देश रहेगा तो पार्टियां रहेंगी और लोगों को गलत बयानबाजी से बचना चाहिए।
    प्रस्तुत कर रहा हूं एक रचना-
    मां को मा ना कहें,
    पिता को पिता ना कहें।
    तो उन्हें
    क्या कहें !
    बिना जल के नदी में,
    नहाने जाओगे?
    किससे पैदा हुए और
    कौन तुम्हारी शाख!
    देश नहीं रहेगा ,
    देश में रह पाओगे ।
    तो तुम रह पाओगे?
    किसके साथ मिलकर ,
    अपना गाना गाओगे।
    एक तरफ देश कोरोनावायरस से जूझ रहा दूसरी तरफ यूथ कांग्रेस अध्यक्ष की गाड़ी पकड़ी गई शराब सप्लाई कर रहा था | बी बी श्रीनिवास ने कहा हमने गाड़ी राहत कार्य में लगाई थी। इन दिनों शराब के ठेके बंद थे उसी का फायदा उठाने के लिए राहत कार्य के नाम पर शराबी बनाने का घिनौना कार्य किया गया| पुलिस कार्यवाही कर रही है।
    उधर मंडियों में सब्जियों और फलों के दाम व्यापारी अधिक लेने लगे जब इसकी जानकारी जिलाधिकारी तक पहुंची तो उन्होंने कड़ी कार्रवाई की मंडियों पर शिकंजा कसा गया तदुपरांत दुकानदार उपभोक्ताओं से सही दाम लेने लगे।
    प्रधान मंत्री जी के संसदीय क्षेत्र में जिलाधिकारी और डी आई जी पुलिस, पुलिस अधीक्षक सहित शासन के सभी लोग तत्परता दिखाया कड़ाई से कानून का पालन होने लगा जिसका बुद्धिजीवियों कवियों साहित्यकारों और पत्रकारों ने स्वागत किया।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र में तबलीगी जमात के लोगों ने निजामुद्दीन इलाके से आकर धार्मिक जलते किये और क्षेत्र में जाकर लोगों के घरों में छुप गये उनमें से बजडिहा, मदनपुरा आदि क्षेत्रों से लोगों को पकड़ा गया और उन्हें कोरोंटीन किया गया।
    प्रयाग के एक प्रोफेसर अपने साथ कुछ जमातियों को प्रयाग लाया जिससे वहां भी काफी कोरोनावायरस फैला दिया | यूनिवर्सिटी में जमात में भाग लेने की बात को छुपाया और पुलिस को जब यह बात ज्ञात हुआ तो उन्होंने प्रोफ़ेसर सहित जमातीयों को पकड़ कर कोरंटीन किया।प्रशासनिक कार्यवाही हो रही है |
    अप्रैल 22 लखनऊ हॉट स्पॉट के कुछ लड़कों ने पुलिस पर हमला करके उन्हें घायल कर दिया । तदुपरांत वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने कड़ा निर्देश जारी किया । सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने पर 7 वर्ष की सजा का प्रावधान लाया गया | अलीगढ़ के भोजपुरा इलाके में भी पथराव से पुलिस घायल हो गए सब्जी बेचने वाले लोगों ने पथराव किया भयानक भीड़ में पुलिस पर पथराव किया गया ।
    यह तो तय है कि कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे बड़े वाहक भारत में बने तबलीग जमात के निजामुद्दीन मरकज में आये लीग ! जमात के लोगों और उनके संपर्क में आने वाले 9000 लोगों की पहचान की जा रही है जिसमें से लगभग 106 विदेशी नागरिक हैं| मौलाना साद ने जिम्मेदारी से भागकर अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया | मामले को छुपाया और भारत की जनता के बीच तबलीगीओं द्वारा कोरोनावायरस फैलाने का कार्य कराया। एक तरफ जमात के लोग डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मी कर्मियों से अभद्रता और मारपीट जगह-जगह किये जिसको ध्यान में रखकर यूपी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने का फैसला किया जिससे यू पी में इस तरह से जमातीयों का घिनौना कार्य बंद हुआ| प्रदेशों में कोरोनावायरस में जुटे कर्मचारियों का बीमा किया गया। जमात और जमातियों के पलायन से कोरोनावायरस को भारी झटका लगा।
    सामूहिक नमाज और मंदिरों में भीड़ पर रोक लगाई गई। महामारी फैलाने वालों पर कठोर कार्रवाई करने का फैसला लिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निवेदन और सदेश का स्वागत किया गया | पी एम् जी ने कहा –
    डरने की जरूरत नहीं
    बस हमारा साथ दें।
    हम कोराना वायरस की,
    कठिन घड़ी को लड़ रहे हैं।
    हम जीतेंगे ऐसा सभी को,
    अपनी सोच बनानी होगी।
    दूरी पालन करते हुए
    आगे बढ़ाने वाले कर्मचारियों की,
    मदद करनी चाहिए।
    – सुखमंगल सिंह, अवध निवासी

  • कोरोना वायरस काल २०२०

    कोरोना वायरस काल २०२०
    —– — —— – ————
    कोरोनावायरस दुनिया को अपने आगोश में लेता जा रहा था बात अप्रैल माह की कर रहा हूँ अप्रेल ० 1 की तरफ ध्यान दें तो लगभग 2361 लोग मरकज से निकले परंतु मरकज के लोग मात्र 1000 लोगों की मौजूदगी का दावा किया | कोरोना फैलने से रोकने के लिये उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में मरकज के तबलीगी जमात से शामिल होकर प्रदेश में लौटे लोगों की पहचान कर उनकी जांच करने का निर्देश मुख्यमंत्री ने दिया | मरकज और वहां से आए लोग पुलिस प्रशासन की बार-बार अपील के बाद भी जांच कराने से बचते रहे। पब्लिक में शामिल होने वाले परिवारों के लोगों को एक-एक घर का पता लगाकर कोरंटीन करना शुरू किया गया | केंद्र सरकार में जनता के हित के लिये पार्सल ट्रेन चलानी शुरू की जिससे खाद्यान्न, दवा, स्वास्थ्य उपकरण को यथा स्थान आवश्यकतानुसार पहुंचाया जा सका | सरकार ने राशन का वितरण कोटेदारों के माध्यम से करना शुरू किया| गरीबों को फ्री राशन वितरण किया जाने लगा | लाग डाउन का प्रभाव नदियों के जल स्तर पर भी पड़ा| नदियों का जल जलस्रतर स्वच्छ होने लगा | जिसे वैज्ञानिकों ने भी इसे स्वीकारा | जिन फैक्ट्रियों से नदियों में प्रदूषण फैल रहा था उन फैक्ट्रियों के बंद होने से नदियां स्वच्छ होने लगीं | मगर विकराल महामारी से मरने वालों की देश- विदेशों में संख्या बढ़ने लगी कहीं-कहीं तो उन्हें जलाने- दफनाने के लिए मदद में रिश्तेदार भी नदारद दिखे।
    वायरस की महामारी का ठाव
    गरीबी उन्मूलन में ब ढे पांव
    अर्थव्यवस्था गिरा धाय
    दुनिया में हुआ गांव गांव।
    भोजन राशन बांटने वाले लोगों का जमावड़ा होने लगा | जो जमावड़ा बड़ा आगे आये लोगों में अधिकतर को तो जिसे एक-दो दिन देखा गया वे फोटो खिंचवा कर लोग अपना नाम मीडिया सोशल मीडिया में प्रमुखता से दर्ज कराने की होड़ में लगे दिखे | कुछ लोग दो – चार दिन राहगीरों को मदद दी | इसी बीच शासन के निर्णय पर थाना और पुलिस चौकियों से भोजन और अन्य राहत सामग्री बांटने का निर्णय लिया गया। जो अनवरत चलता रहा | कोरोना वायरस से निपटने के लिए सरकार ने कमर कस ली |
    भारत के प्रधानमंत्री सभी दलों से सभी मुख्यमंत्रियों से और सचिवों से बैठक का राहत के लिए निर्णय लेते रहे| बैठकें कीं | सांसद वेतन कटौती का अध्यादेश आया | अध्यादेश को मंजूरी मिली | राष्ट्रपति- मंत्री -प्रधान मंत्री , सांसद तक का 30 परसेंट वेतन कम कर दिया गया और सांसद निधि भी अस्थाई रूप से स्थगित कर दी गई| राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने- अपने राज्यों में भी इसी तरह का आदेश पारित किया | विदेशों में तो जंगली जानवर भी कोरोना से प्रभावित होने लगे जिसे ज्ञात होते ही भारत में चिड़िया घरों की जांच के लिए आदेश दिया गया | उन्हें सुरक्षित रहने की व्यवस्था दी गई | सुबह – शाम मॉर्निंग वॉक करने वाले लोगों पर नजर रखी जाने लगी| बाहर निकलने पर रोक लगने लगी | वाहनों के दस्तावेज की समय सीमा जून तक बढ़ा दी गई| प्रधानमंत्री के आदेश से कंपनियां अपने कर्मचारियों को 3 महीने का वेतन देना शुरू किया | किरायेदारों का किराया मकान मालिक छोड़ना शुरू किये | तंबाकू बिक्री पर सरकार ने रोक लगा दिया | बड़े हॉस्पिटल – सरकारी हॉस्पिटल ऑनलाइन मरीजों को सलाह देना शुरू कर दिया | ऐसे समय में सोशल मीडिया ने जनता का भरपूर सहयोग – सहायता किया | दुनिया में लागडाउन में सोशल मीडिया पर लोग ज्यादा से ज्यादा काम करते देखे गये | बुद्धिजीवियों ने पुस्तकों का अध्ययन किया | पुस्तकों का अध्ययन – अध्यापन किया | प्रधान मंत्री केयर फंड में लोगों ने दान लेना शुरू किया | काफी दान इकट्ठा हुआ वही टुकड़े-टुकड़े दलों ने सहयोग में आगे आने से मना किया | एक पूर्व मुख्यमंत्री ने चैनल पर ही प्रधानमंत्री केयर फंड में दान करने से इनकार किया और इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और तो और केयर फंड की जांच की मांग उठा ली।
    ब्रिटेन, स्पेन और फ्रांस में घरेलू घरेलू हिंसा पाँव पसारना शुरू कर दिया | घरेलू हिंसा की शिकायतें बढ़ने लगी | इटली में धीरे-धीरे हिंसा के मामले बढ़ते गये अमेरिका सहित दुनिया के अन्य देशों के लीग अपने देश जाने से इनकार करने लगे| अमेरिकियों से भारत में बात करने पर केवल एक परसेंट ही अमरीकी अमेरिका जाना चाहते थे | महामारी से बेरोजगार होने वाले लोगों की संख्या , संयुक्त राष्ट्र संघ ने 40 करोड़ ,केवल भारत में ही रोजगार जाने की आशंका जाहिर की।
    भारत में कोरोनावायरस का इलाज करने वाले और सुरक्षा में लगे लोगों के मनोबल को बढ़ाने के लिए तरह तरह के उपाय सुझाए गये | संपूर्ण जनता ने दीप जलाया ताली- थाली बजाई जगह-जगह जय जय कार के नारे लगे| ड्रोन और हवाई जहाजों के माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों – पुलिसकर्मियों पर फूल बरसाये गये | महामारी से बचाव के लिए सैनिटाइजेशन तनल लगने लगे | मशीनों का निर्माण भारत में होने लगा| डॉकिया पोष्टाफिस से घर तक रुपए पहुंचाने लगे | जर्मनी अमेरिका सहित दुनिया के देशों में भारतीय प्रवासी बुद्धिजीवी, भारत में भारतीयों को सलाह मशविरा देने लगे | विश्व जिस वायरस से जूझ रहा है उससे बचाव के उपाय सुलझाने लगे| लोग पशु- पक्षियों को भी दाना- पानी देने लगे|
    उन्हीं दिनों वही नेपाल के रास्ते से जालिम मुखिया नाम का एक व्यक्ति भारत में कोरोना फैलाने के लिए नेपाल के रास्ते से 50- 50 संक्रमितो भारत में भेजना शुरू कर दिया | जिसकी सूचना पुलिस को मिलने पर पकड़ लिया गया | बैंकों ने केवल पैसे का लेन – देन कुछ कर्मचारियों के माध्यम से करने लगे | मास्क सेनेटाइजर , वेंटिलेटर कीटस भारत में बनने लगे| आज भरपूर मास्क वेंटिलेटर भारत में बन रहे हैं| उद्योग से व्यापारी उक्त सामानों को विदेश भेजने की मांग उद्योगपति करने लगे| कोरोना वायरस से जंग जीतने के तौर तरीके प्रधानमंत्री न्यूज़ चैनल, प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को बताने लगे | डॉक्टर – वैज्ञानिक- कवि- लेखक- बुद्धिजीवी अपने-अपने माध्यम से लोगों तक सूचना पहुंचाने लगे | महामारी से दुनिया में और भारत में भी कोरोनावायरस से काफी लोग मारे गये | इस बीच संयुक्त राष्ट्र संघ महासचिव ने महामारी से निपटने की कोशिशों में महिलाओं पर ज्यादा ध्यान देने की बात की।जननी की रक्षा भारत का प्रथम कर्तब्य है ही |
    पुलिस प्रशासन ने इस संकट की घड़ी में बहादुरी का परिचय दिया भारत के साथ साथ विदेशों में विदेशी पुलिस कर्मियों ने भी बहादुरी का काम किया| पुलिस कर्मी स्वास्थ्य कर्मी शासन- प्रशासन 24 घंटे ड्यूटी पर रहकर लोगों की मदद करने लगे रहे | स्वास्थ्य कर्मी भी अपना जान जोखिम में डालकर लोगों की मदद करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी | ड्यूटी पर लगे रहे । एक रचना प्रस्तुत –
    हिम्मत दिखाने वालों पर सदा भारत नाच करता,
    मातृत्व अवकाश ठुकराकर हालत पर निगाह रखती
    ऐसे देश प्रेमी नारी से दुनिया से दुनिया सीख लेती।
    कर्नाटक, जंबू ,आंधरा , महाराष्ट्र सहित तमाम राज्यों में पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले किए गये हमलावर ज्यादातर तबलीगी जमात के थे अथवा उनके समर्थक ही रहे | उन लोगों पर प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है | प्रशासन बराबर निगाह रखे हुए हैं। कोरोना काल में –
    पौष्टिक आहार पर रखना होगा ध्यान,
    खान-पान से ही होगा लोगों का कल्याण।
    हां शक्ति बढ़ाने के लिए योग जरूरी,
    प्रोत्साहन देने से होगी दूर मजबूरी।
    कोरोना लड़ाई तक परिवार से रखे दूरी,
    दोस्त रूप में ईश्वर करेगा आवश्यकता पूरी।
    राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता बहुत जरूरी,
    भारतीय अखंडता से दुनियां की घटी दूरी।|
    – सुखमंगल सिंह ,अवध निवासी

  • हैसियत

    एक औरत अपने आठ महीने के बेटे के संग बीच चौराहे पे आयी। वह हमेशा की तरह एक मैली थैली में से एक कटोरा निकाल कर बैठ गयी। आने जाने वालों से कहती -“पापी पेट का सवाल है। भगवान के नाम पे कुछ दे दो साहब “।मै उसे वहाँ दो साल से देखता आ रहा था। मैं जब जब वहाँ से गुज़रता था तब तब उसके कटोरे में दस या बीस रुपये रख दिया करता था। एक दिन अचानक एक स्कॉरपियो गाड़ी उसके सामने रुकी। अंदर से कोई कुछ कहा ।फिर आगे बढ गयी। वह भीखारन मैली थैली मे कटोरा रखी, बच्चे को गोद में ले के वहाँ से चल पड़ी। यह माजरा मैं समझ नहीं पाया। कुछ क्षण पश्चात मैं देखा कि, वह औरत गाडी़ में बैठ गयी। मैं अपनी बाइक से उसे पीछा करने लगा। कुछ देर बाद वह गाड़ी एक आलीशान बंगले के करीब रुकी। वाचमैन दौड़ कर गेट खोला। गाड़ी अंदर चली गयी। मै अपनी शक को दूर करने के लिए वाचमैन से कुछ जानना चाहा उस औरत के बारे में। जब मैं अपनी उलझन वाचमैन को बताया तो वह हंसते हुए कहा -” भाई। वह मेरे मालकिन है।यह बंगला गाड़ी सब उन्हीं के तो है। “मैं इतना सुन कर वहाँ से चल पड़ा। सोचने लगा किसी की हैसियत उसके गंदे कपड़ों से कभी लगाई नहीं जा सकती।

  • चिपको आंदोलन 1970

    चिपको आन्दोलन की शुरुआत 1970
    में सुंदरलाल बहुगुणा, गौरा देवी,
    कल्याण सिंह रावत पर्यावरणविद ने की।
    वन विभाग के अधिकारियों को 2400 से अधिक
    पेड़ काटने के आदेश पर खदेड़ा।
    इसकी शुरुआत तत्कालीन ‘चमोली जिले’ से हुई ।
    फिर धीरे-धीरे पूरे उत्तराखंड में फैल गई
    इस की सबसे बड़ी बात यह थी
    कि इसमें स्त्रियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था
    और अपनी जान जोखिम में डालकर राज्य के वन अधिकारियों को पेड़ कटाई पर विरोध किया।
    और पेड़ों पर अपना परंपरागत अधिकार जताया।
    आज पर्यावरण दिवस पर हम ‘चिपको आंदोलन ‘की
    इस घटना को कैसे भूल सकते हैं?
    पेड़ हमारे लिए वास्तव में हमारे जीवन का आधार है
    जो हमारे जीवन की आधारभूत आवश्यकताओं को
    पूरा करते हैं।
    और हमें बहुत सी जड़ी बूटियां, लकड़ियां और जरूरत के सामान उपलब्ध कराते हैं।
    हमें इन्हें नहीं काटना चाहिए।
    बल्कि हमें उनके हो रहे अंधाधुंध कटाई को रोकना चाहिए।
    और संकल्प लेना चाहिए कि वृक्षारोपण करेंगे और उनकी
    रक्षा भी करेंगे।

    आप सभी को पर्यावरण दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏🙏
    कवयित्री:- प्रज्ञा शुक्ला

  • दिन

    दिन प्रतिदिन हम यहीं है करते,
    नारी को देते उच्च स्थान ।
    घर की लक्ष्मी मानते,
    करते सुबह शाम गुणगान।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • गलतफहमी

    बारह वर्ष की बब्ली कोचिंग पढ कर घर आयी। वह चुपचाप अपने कमरे में जा कर रोने लगी। जब बब्ली की माँ को पता चला कि, बब्ली अपने कमरे में रो रही है। वह दौड़ती हुयी बब्ली के पास आयी –“क्या बात है बेटी। किसी ने कुछ कहा क्या “?बब्ली रोती हुयी –“मम्मी ।कोचिंग के सर आज मुझे क्लास के अन्दर जाने नहीं दिया।
    वे सब कहते है कि, तुम्हारे पापा बाहर से आए है। हो सकता है वह कोरोना के चपेट में हो “।मम्मी –“बेटी। कोरोन्टाईन सेंटर में तुम्हारे पापा चौदह दिन रह कर आए है। अगर बिमारी होता तो क्या वो घर आ सकते? “कल तुम अपने पापा के कोरोन्टाईन के प्रमाणपत्र अपने सर को दिखा देना। दूसरे दिन बब्ली ने वैसा ही किया। जब कोचिंग के सभी शिक्षकों को पता चला तो सभी अपनी गलती को स्वीकार किया। बब्ली को अन्य छात्रों व छात्राओं के संग बैठ कर पढने का अवसर पुनः प्राप्त हुआ।

  • पुरानी बड़गद (रहस्य रोमांच)

    यह घटना बिहार जिले में स्थित समस्तीपुर की है। बैशाख का महीना था। गाँव के लोग गर्मी से व्याकुल थे। उसी गाँव के ३५ वर्ष के युवक महेश गर्मी से परेशान हो कर रात के बिछावन आंगन में बिछा कर सो गया। अगल बगल के लोग भी सोए हुए थे। अचानक महेश की आंखे रात के दो बजे खुल गयी। वह उठ कर चारो तरफ देखा। चांदनी रात पूरी अपनी जवानी पर थी। दूर दूर के पेंड़ पौधे साफ साफ दिखाई दे रहा था। चांदनी( 🌙) रात सुनसान की आगोश समायी हुई थी। महेश को धीरे धीरे नींद आने लगा। वह सिर झूकाए पुरिया में से तंबाकू निकाल कर हंथेलियों पे रगड़ने लगा। अचानक कोई शख्स 🌃 हाथ बढाया।उसको, तंबाकू मांगने का ईशारा था। महेश सोचा कि शायद गेना होगा। वह उसके तरफ नहीं देखते हुए अपनी चुटकी से तंबाकू उसके तरफ बढा दिया। वह शख्स ले लिया फिर, वहाँ से पुरानी बड़गद के तरफ चल पड़ा। जब वह दस कदम आगे बढा तब महेश उसके तरफ जैसे देखा उसके रोंगटे खड़े हो गए। वह देखने में दस फीट का रहा होगा। उसका लिवाश सफेद धोती व कमीज था। महेश के कंठ सुखने लगा। वह चाह कर भी चीख नहीं पाया। वह बेहोश हो कर गिर पड़ा। उसके गिरने की आवाज़ उसकी पत्नी के कानो में सुनाई पड़ी । वह चीखती हुयी महेश के तरफ दौड़ पड़ी। अगल बगल के लोग घबड़ा गए। सभी दौड़ कर महेश के दरवाजे पर पहुंचे ।महेश की पत्नी छाती पीट पीट कर रोने लगी। इतने में ही एक तंत्र मंत्र जानने वाला गाँव के ही एक व्यक्ति आ कर झाड़ फूंक शुरू किया। दो घंटे बाद महेश को होश आया। तब जा कर पुरी घटना विस्तार पूर्वक बताया। गाँव के बड़े बुजुर्ग रामटहल ने कहा –यह बात सही है कि, यह पुरानी बड़गद के पेड़ पड़ कली साया का बसेरा है।

    समाप्त

  • जेष्ठ की तपती धूप

    जेष्ठ की तपती धूप में, एक माँ अपने छह महीने के बेटे को अपनी पीठ में बांध कर मजदूरी कर रही थी। बच्चा भूख व गर्मी से तड़प रहा था। वह जोर जोर से चिल्ला रहा था। वहाँ के मुंशी जी का कहना था कि,कोई मजदूर मेरे मौजूदगी में अगर बैठा पाया गया तो ,उसकी उस दिन की हाजरी काट दिया जाएगा। यही सोच कर माँ अपने बच्चे को दूध पिलाने में असमर्थ थी। वह बच्चा रो रो कर व्याकुल था। बच्चे की तड़प और पसीने से भीगी दुखियारी माँ की हालत मुझ से देखी नहीं गयी। मैं उसके करीब जा कर कहा –“कैसी है आप। काम तो होता रहेगा। कम से कम बच्चे को एक मर्तबा दूध तो पिला दीजिए “। माँ –“बेटा। मेरी आज की हाजरी मुंशी जी से कैसे कटवाउं? यदि ऐसा आज हो गया तो मैं अपने बीमार पति के दवा कहाँ से लाऊंगी। वह अस्पताल में दवाई के बगैर आखरी सांसे गिन रहा है”।उस माँ की इतनी बातें सुन कर मेरी आँखें भर आयी। मै उन्हें दस हजार रुपये देते हुए कहा—“माँ जी। यह पैसों से आप अपने पति का इलाज करा ले। ताकि,
    कभी भी आप अपने पति के इलाज के लिए जेष्ठ की तपती धूप में अपने बच्चे को दूध पिलाने मे असमर्थ न हो। ” इतना कह कर वहाँ से मै चल पड़ा। रास्ते में मैं यही सोचता रहा कि, इस माया के संसार में कितने गम है????

  • सच्ची दोस्ती सच्चा प्यार (भाग -२)

    (आपने अगले पेज में पढा कि, अमित अपनी उलफत की दास्तां अपने दोस्त सुरेश को सुनाया। क्योंकि, अनिता के प्यार में वह पागल हो गया था। सुरेश अमित को किस तरह सही रास्ते पर ला कर खड़ा किया। आगे पढिए—-)
    ——————————–
    सुरेश -“वह तुम्हारा अमानत नहीं है। अपने को संभालो अमित। इस संसार में लड़कियां उसे ही चाहती है जिसके पास दौलत और गुण हो। गुण तभी जन्म लेगा जब तुम मन लगा कर पढाई में मेहनत करोगे। हर लड़की की एक सपना देखती है कि, उसका पति एक अच्छे एमप्लाएड हो ताकि, सुकून से दो वक्त की रोटी उसे खिला सके। आज तुम्हारे पास है ही क्या? सिवाए दुःख के।दोस्त, इस संसार में डूबता हुआ सुरज को कोई नहीं देखता। मै चाहता हूँ कि
    तुम एक नयी प्रभात बन कर उसे प्रभावित करो जिसने तुम्हें धिक्कारा है”।सुरेश के बातों का प्रभाव अमित पर गहड़ा पड़ा। बस उसी दिन से कुछ करने का जज्बा उसने ठान लिया। अनिता से अमित धीरे धीरे दूरी बनाने के प्रयास करने लगा। वक्त यों ही गुज़रता गया। अमित अच्छी पढाई के लिए वह शहर छोड़ दिया। जिस शहर में उसे नफरत ही नफरत मिला। एक नया जीवन शुरू करने के लिए वह दक्षिण भारत चला गया। वहाँ वह दिन में कहीं काम करता था और रात में पढाई किया करता था। उसका मेहनत व इमानदारी को देख कर एक सेठ अपनी कंपनी के प्रबंधक बना दिया। वह अपनी मेहनत व लगन से उस कंपनी को आगे बढाने का प्रयास करने लगा।
    (शेष हम अगले पेज में लिखेंगे। धन्यवाद दोस्तों)

  • कॉलेज का पहला दिन(भाग-2)

    …नंबर अच्छे आये।) अब आगे…
    एक दिन मैने उससे पूँछा कोई ज़िंदगी में है तुम्हारी?
    उसने कहा नहीं । मुझे पता था की वो किससे प्यार करता है ।वो मेरा बहुत अच्छा दोस्त बन गया । हम दोनों सब कुछ शेयर कर लेते थे । एक दिन उसकी गर्लफ्रेंड ने कहा-मुझसे बात ना किया करे ।मैने भी कहा जब उसे बुरा लगता है है तो मुझसे बात ना किया करो। पर उसने कहा मैं सबको छोड़ सकता हूँ पर तुमको नहीं ।मैने पूछा ऐसा क्या है?उसने कहा-तुम बाकी लडकियों जैसी नहीं हो।तुम्हारा स्वभाव बहुत अच्छा है और चरित्र भी।तुम्हारी पूजा करने का मन करता है ।तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हो और हमेशा रहोगी। एक दिन किसी की बुरी नज़र हमारी दोस्ती को लग गई । हमारी दोस्ती को कलंकित किया गया ।और कुछ छोटी सोंच वालों ने उंगली भी उठाई । मैने उन लोगों को बहुत समझाया । और पवित्रता भी साबित की ।मगर कोई फायदा नहीं हुआ । मैने ये सब अपने दोस्त को बताया ।उसने कहा-ये सब चलता है तुम चिंतित ना हो,लोगों ने तो सीता को भी नहीं छोड़ा था फिर तुम क्या हो? ऐसे लोगों से मतलब ही ना रखो जो तुम्हें समझते नहीं।मैने कहा-मैं उन लोगों को नहीं छोड़ सकती वो लोग मेरे जीने का जरिया हैं ।और उनके कहने पर मैं आज अपनी पवित्र दोस्ती को खत्म कर रही हूँ, हो सके तो मुझे माफ कर देना।शायद तुम भी यही करते अगर तुम्हें मुझमें और अपने प्यार में से किसी एक को चुनना होता । वो सन्न रह गया उसने कहा-जो तुम्हें उचित लगे,पर तुम्हारे जैसी दोस्त मिलेगी नहीं ।हमनें रजामन्दी से एक-दूसरे को अलविदा कहा । ना जाने क्यूँ हम दोनों की आखें नम थीं।फिर हमारी मुलाकात और बात नहीं हुई।

  • अंधा और लंगड़ा

    एक था अंधा
    एक था लंगड़ा ।
    दोनों का याराना
    हो गया तगड़ा।।
    आग लगी
    जब गाँव में ।
    सब भागने लगे
    शीतल छाँव में।।
    कोई बता न पाया
    अंधा को।
    कोई भगा न पाया
    लंगड़ा कै।।
    अंधे का सहारा लंगड़ा
    और लंगडे का सहारा अंधा।
    राह बतावे लंगड़ा
    चढ़ ऊपर अंधे का कंधा।।
    बचाव हुआ दोनों का
    और बन गए एक मिसाल।
    ‘विनयचंद ‘जो नेक भाव हो
    सब रहे सदा खुशहल।।

  • कॉलेज का पहला दिन !!(भाग1)

    कॉलेज का पहला दिन था थोड़ी देर से गई
    क्लास में जाकर बैठी,शिक्षाशास्त्र पढ़ाई जा रही थी ।
    सब मुझे देख के अचंभित थे।बहुत सवाल थे सबके मन में..टीचर के जाते ही सबने मुझे आ घेरा।बारी- बारी से सवाल पूंछने लगे। मुझे लाज़ आ रही थी,इतने लोगों के बीच। मैने किसी से दोस्ती नहीं की,सब मुझे बहुत पसंद कर रहे थे। एक लड़का देखते ही जा रहे था कुछ बोल नहीं रहा था ।मेरी निगाहें कई बार उस पर गई।वो पढ़ने में बहुत अच्छा था,हर सवाल का जवाब दे रहा था ।मेरे ह्रदय से आवाज आई:-काश ये परीक्षा में मेरे पास बैठता..मै घर आ गयी ।परीक्षा थी मैं अपना रोल नंबर ढूंढ़ कर बैठी ..डर लग रहा था । सामने से आवाज आई-तुम किस कॉलेज से हो?मैने जवाब दिया,फिर उस लड़के ने पलट के देखा ।
    अरे ये क्या! ये तो वही लड़का था । शायद मेरी दुआ मंज़ूर हो गई थी । उसने मुझसे कहा:-जो आता हो दिखा देना।हम्म्म्म मैने कहा।हम दोनों ने एक-दूसरे की सहायता की ।
    अच्छे ंनंबर आये।(अगला भाग फिर कभी)

  • सच्ची दोस्ती सच्चा प्यार(भाग-१)

    अनिता नाम था। देखने में साँवली सलोनी। उसकी आँखें किसी गहड़ी झील से कम नहीं था। उसकी मुस्कान व अदा का क्या नाम दें, मेरे पास शब्द ही नहीं है। कुदरत ने केवल उससे गोरा रंग ही चुराया था। चंचल स्वभाव के कारण ही अमित उसे कब कहाँ क्यों और कैसे दिल दे दिया पता तक नहीं चला। वह हमेशा अमित के संग हंसी मजाक, लड़ाई झगडा कर लिया करती थी। कभी कभी एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे। दो तीन दिन बाद फिर एक दूसरे को देख कर मुस्करा दिया करते थे। अनिता में बचपना कूट कूट के भरी हुई थी। कयी मर्तबा अपनी नजरों के किताब भी उसके सामने खोला मगर, वह पढने में नाकामयाब रही। अल्हड़पन में ही उसकी जवानी दो दगा़ बाजों के बीच फंसा हुआ था। वक्त यों ही गुज़रता गया। एक दिन अनिता कॉलेज से घर आ रही थी। अमित अनिता को रोकते हुए कहा -“अनिता ।ंमै तुम से कुछ कहना चाहता हूँ “।अनिता अपनी नजर दूसरे तरफ फेंकती हुयी –“बोलो”।अमित –“मैं…. मैं…… “।अनिता –“ए मैं मैं क्या लगा रखे हो। जल्दी बोलो मेरे पास समय नही है”।अमित -“मैं तुम्हें अपने दिल से चाहता हूँ। क्या मेरे लिए तुम्हारे दिल में कोई जगह है”?अनिता –“व्हाट नोनसेंस। कहीं तुम्हारा दिमाग खराब तो नहीं हो गया। प्यार मुहब्बत अपने से बराबर वालों के साथ होता है। तूम कहाँ और मैं कहाँ। अपने दिल से मेरा सपना देखना छोड़ दो। जीवन में कुछ कर लो अमित यदि यह समय गुजर गया तो हाथ मलते रह जाओगे। प्यार मुहब्बत ही हर इनसान का लक्ष्य नहीं होता है”। इतना सुनते ही अमित को गहड़ा झटका लगा। उसका दिमाग सुन्न हो गया। उस दिन से अमित अनिता से दूर रहने लगा। अमित अपनी जख़्म दिखाए तो किसको दिखाए। कुछ दिन गुजरने के बाद, एक दिन शाम के समय अमित अनिता को किसी गैर के साथ देखा। शायद वह गैर उसका अपना था। तभी तो दोनों एक दूसरे के हाथो हाथ रखे जीने मरने की कसमे खा रहे थे। आधा घंटा गुजरने के बाद वह अपनी बाइक से वहाँ से चल पड़ा। उसका चेहरा मैं देख नहीं पाया। क्योंकि वह अपनी पीठ मेरी ओर घूमा कर बाते करने में मगन था। अनिता जैसे ही अपने घर की ओर चलने लगी वैसे ही अमित उसे पुकारा –“जरा ठहरो “।अनिता –“तूम मेरे पीछे क्यों पड़े हो। मै तुमसे प्यार व्यार नहीं करती”।वह और आंसू के झील में डूब कर रह गया। अंत में उसने अपनी प्रेम कहानी अपने जिगरी दोस्त सुरेश को सुनाया। सुरेश –“तू कहीं पागल तो नहीं हो गया है। अगर वह तुम से प्यार नहीं करती है तो तुम्हें जबरदस्ती भी करने का कोई हक नहीं…….. (शेष अगले पेज में इस कहानी के अंत करेंगे। धन्यवाद)

  • ओ बीते दिन

    ओ बीते दिन
    ये उन दिनों की बात है,जब बेरोजगारी का आलम पूरे तन मन मे माधव के दीमक में घोर कर गया था,घर की परिस्थिति भी उतना अच्छा नही था कि वे निठल्ला घूम सके…….
    …क्योंकि बाबू जी कृषि मजदूरी करके पूरे परिवार का भरण पोषण कर अपने फर्ज को निभा रहे थे ।
    और इधर माधव गाँव मे ही रह कर पढ़ाई के साथ-साथ अपने माँ के साथ घर के हर कामो में हाथ बटाते.और इसी तरह उन्होंने हायर सेकेंडरी स्तर तक कि पढ़ाई पूरा कर लिए……….और कुछ दिनों बाद निजी विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्य करने लगा.लेकिन कब तक अल्प वेतन मे जिंदगी की गाड़ी कैसे चल सकता है | एक तो जवान बेटा है………..कई बार तो अपने माँ बाप के ताने सुनना पड़ता था,माधव के मन मे निराश के बादल छा जाते लेकिन अपने मन को डिगने नही दिया…………….अपने दोस्तों के साथ मन में उठने वाले पीड़ा को बाँट कर मन के दुख को हल्का कर लेते और आगे के बारे में सोंच कर उमंगता के साथ कार्य मे जुट जाते…………….. “मन के हारे हार है,मन के जीते जीत”
    यही भाव लेकर हमेशा चलता.और रोज अखबारों में इस्तिहार को देखेते कहीं अपने लायक रोजगार तो न निकला हो एक दिन अखबार के माध्यम से शहर के एक स्कूल में चपरासी का पद निकला था. वेतन भी कुछ अच्छा था साथ ही साथ शहर की बात है.माधव सोचने लगा और मन मे कुछ नया करने का विचार लाया…………और चपरासी के लिए अपना आवेदन डाक के द्वारा भेज दिया,ओ तो ईश्वर के अच्छे कृपा माने या अपना शौभाग्य,कुछ दिनों बाद उनको नौकरी का आदेश मिल गया,परिवार में खुशी का माहौल छाने लगा क्योंकि होना भी चाहिए बेटा का जो नौकरी लगने वाला है,माधव खुशी-खुशी माँ बाप का आशिर्वाद लेकर शहर की ओर नौकरी करने चल पड़ा……..ओ पहला दिन जैसे-तैसे अपने पद के ज्वानिंग करने स्कूल के कार्यालय में गया…….
    ज्वानिंग जैसे ही किया और वहाँ के प्राचार्य से मिलने गया……..तो प्रचार्य के हिड़कना उनके ऊपर मानो ऐसे बिजली गिरा हो जैसे माधव यहाँ आ कर कोई पाप कर गया हो,क्या पद ही ऐसा होता कि कोई छोटे कर्मचारिय का सम्मान न हो …………माधव आवक स रह गया और अपना कार्य ईमानदारी के साथ करने लगा……लेकिन चपरासी के पद उनको हर समय खलने लगा और वह कमर कस लिया कि मुझे इससे अच्छ पदों में कार्य करना है……………..और अपने योग्यता में विस्तार करते गया,कभी-कभी अन्य कर्मचारी के खीझ को सुनता,प्राचार्य का डाँट ऐसा लगता मानो कोई सीने मे भाला बेद रहा हो………………..
    ये सारी बात को माधव एक चुनौती के रूप में स्वीकार कर अपने कार्य मे लगा रहा । और एक दिन उच्च पद में जाने का अवसर प्राप्त हुआ ……………लेकिन माधव को हर समय ओ बिता हुआ पल को याद कर यही सोचते क्या छोटे कर्मचारी,कर्मचारी नही होते क्या वे सम्मान के पात्र नही है इसी तरह उनके साथ व्यवहार किया जाता है ………………..यही सोच कर मन मे कई सारे प्रश्न उठने लगता और ओ बीते दिन याद कर बार-बार अपने आप से प्रश्न करता अरे ओ मेरे बीते दिन ………

    योगेश ध्रुव भीम

  • दूरी

    मैं खिड़की पर खड़ा था और वह दरवाजे पर
    खिड़की से दरवाजे कि ये दूरी तब भी थी
    जब वह मेरे पास आ रही थी और अब
    भी है जब वह मुझे छोड़ कर जा रही है।

  • मौकापरस्त मोहरे

    वह तो रोज़ की तरह ही नींद से जागा था, लेकिन देखा कि उसके द्वारा रात में बिछाये गए शतरंज के सारे मोहरे सवेरे उजाला होते ही अपने आप चल रहे हैं, उन सभी की चाल भी बदल गयी थी, घोड़ा तिरछा चल रहा था, हाथी और ऊंट आपस में स्थान बदल रहे थे, वज़ीर रेंग रहा था, बादशाह ने प्यादे का मुखौटा लगा लिया था और प्यादे अलग अलग वर्गों में बिखर रहे थे।

    वह चिल्लाया, “तुम सब मेरे मोहरे हो, ये बिसात मैनें बिछाई है, तुम मेरे अनुसार ही चलोगे।” लेकिन सारे के सारे मोहरों ने उसकी आवाज़ को अनसुना कर दिया, उसने शतरंज को समेटने के लिये हाथ बढाया तो छू भी नहीं पाया।

    वह हैरान था, इतने में शतरंज हवा में उड़ने लगा और उसके सिर के ऊपर चला गया, उसने ऊपर देखा तो शतरंज के पीछे की तरफ लिखा था – “चुनाव के परिणाम”।

  • चिट्ठी

    प्यारी गौरैया!
    आज तुम्हें इतने दिनों बाद अपनी छत पर देख अपने बचपन के दिन याद आ गए ,तब तुम संख्या में हमसे बहुत ज्यादा थीं, आज हम हैं ज्यादा नहीं पर कुछ पेड़ हैं
    लेकिन तुम सब अब पता नहीं कहां चली गईं।
    शायद हमारे घरों ने तुम्हारे घर छीन लिए लेकिन सच कहूं गौरैया! जब हमारा नया घर बना था तो तुम्हारी याद ही नहीं आयी , आज जो आंसू आए वो शायद उस समय आते तो कुछ करती मैं तुम्हारे लिए क्योंकि,
    मुझे याद है जब मैं भैया दीदी सब स्कूल चले जाते थे तो तुम होती थीं मां के साथ आंगन में चीं- चीं करती हुई। तुम और तुम्हारे साथी सुबह हमसे पहले हमारे आंगन में आ जाते थे, हमारे दिए गए या ऐसे ही छोड़ दिए गए अनाज के दानों से तुम अपना पेट भर लिया करतीं थीं और इधर- उधर पंखों की फड़फडाहट से सुबह से दोपहर का सन्नाटा, जब तक हम वापस ना आ जाते तोड़ा करतीं थीं
    तुम हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गईं थीं।
    घर के अंदर उपस्थिति का , तुमसे अपनेपन का एहसास आज होता है जब तुम इस घर में नहीं दिखती हो।
    गाहे- बगाहे जब तुम आती हो तो पता नहीं क्यों रूठी हुई लगती हो।
    लेकिन “प्यारी गौरैया” आज मां अकेली हो जाती हैं हमारे जाने के बाद और तुम भी नहीं होती हो उनके साथ ।
    आज तुम्हारी चीं-चीं की आवाज़ सुनना है मुझे
    ‘एक बार आ जाओ ‘ तुम्हारे लिए मैं घोसला बनाऊंगी
    ये मेरा वादा है तुमसे प्यारी गौरैया!
    कंचन द्विवेदी

  • दोस्ती से ज्यादा

    hello friends,
    कहने को तो प्रतिलिपि पर ये दूसरी कहानी है मेरी लेकिन सही मायनो मे ये मेरी पहली कहानी है क्योकि ये मेरे दिल के बहुत करीब है चलिये आपका ज्यादा वक्त जाया नी करते और कहानी शुरू करते है

           आज मै बहुत खुश हू और वजह भी जायज है यार आखिर इतने वक्त बाद घर वापिस जो जा रही हू  5 साल बाद अपने देश India वापिस जा रही हू, हाँ क्यों India मेरा घर नही हो सकता क्या मेरे लिए तो India ही मेरा पहला घर है माँ पापा का घर भी है
    सॉरी बातों बातों मैं आपको अपना नाम बताना तो मैं भूल ही गई , मेरा नाम है खवाहिश, हाँ वही जो हर किसी कि कुछ ना कुछ होती ही है चलिए आपसे बाते करते करते मै airport से घर भी पहुंच गई वैसे London मे रहना भी किसी हसीन ख्वाब से कम नही था पर घर कि बात ही कुछ ओर होती है घर पर जाते ही सबसे पहले कौन याद आता है माँ, मैने भी जाते ही उन्हे ही पुकारा …..
    माँ …………..कहाँ हो आप ?????
    माँ ……आई बेटा ……तेरे आते ही रौनक वापिस आ गई
    मैं भी कम नौटंकी थोडी हूं वही अपने पुराने dialogues
    हाँ हाँ सब पता है मुझे कितना miss करती थी आप मुझे तभी तो कभी मिलने नी आई
    ये क्या आते ही तेरी शिकायतें शुरू हो गयी ….खुद ही पहले मना करती है आने से ओर अब खुद ही शिकायत करने बैठ गई
    सॉरी माँ मैं तो बस मजाक कर रही थी आपको तो पता ही है मेरा
    हाँ हाँ सब पता है मुझे तेरा ओर तेरे पापा को भी
    माँ आप फिर से पापा को बीच मैं ले आई
    तो ओर क्या करूँ तुम दोनों हो ही ऐसे
    अच्छा ठीक है हमारी बात तो होती ही रहेगी ये बताओ पापा कहाँ है
    वहीं जहाँ होना चाहिए …..office….दुनिया मैं एक ही जगह बनी है उनके लिए तो
    अरे कौन है जिसने हमें याद किया …….
    पापा …..आप कब आये ……
    बस अभी जब आपकी माँ हमारी बुराई कर रही थी
    माँ …….तो कौन सा कुछ गलत कह दिया सही तो कहा है
      
         और बस फिर शुरू हो गई कभी ना खत्म ना होने वाली नोंक झोंक …..

    आज के लिए बस इतना ही ……तो ये थी मेरी ओर मेरी छोटी सी family……

    बाकी हम पढेंगे next part me…see u soon friends…. I hope आपको मे अच्छे से entertain कर सकूं ……

        

                    उसी शाम मैं अपनी favorite जगह पहुंची जहाँ मैं अक्सर जाया करती थी आेर  वो जगह थी मेरठ सिटी पार्क , जी हाँ मै मेरठ की रहने वाली हूं ओर यहाँ का पार्क मेरी पसंदीदा जगह में से एक है यहाँ एक अलग ही सुकुन है हर जगह हरियाली,हंसते खेलते बच्चों की किलकारियाँ,बहते फव्वारे, ओर यहां की सबसे खूबसूरत बात जो इस जगह को खास बनाती है वो है तालाब के बीचों बीच इस पार्क का  बना होना । सब कुछ बहुत अच्छा था दिल लगाने के लिए ओर  प्यार करने वालों ये लिए आज मौसम भी बहुत सुहावना था मैं वहां कि खूबसूरती अभी निहार ही रही थी कि मेरे कानों में किसी की तेज आवाज पडी शायद कोई लडकी किसी को डाँट  रही थी उसकी आँखें गुस्से से भरी हुई थी वो एक लड़का लड़की पर भडक रही थी शायद वो एक दुसरे से प्यार करते थे वों उन्हे गुस्से मैं बोल रही थी ये क्या तुम्हारी उम्र है प्यार करने की , तुम्हे शर्म नही आती ये सब करते हुये । मुझे बहुत अजीब लगा कि प्यार का उम्र से क्या लेना देना और वो लोग इतने भी छोटे नही थे कि प्यार ना कर सके । बस बार बार एक ही बात कहे जा रही थी कि ये सब कुछ धोखा है दर्द से सिवाय कुछ नही मिलता इन सबसे ओर ये सब गलत है मैने उसे शांत कराया और उन लोगों को वहाँ से भेजा और वो लोग thanks बोल कर वहाँ से चले गये । फिर मैंने उस लड़की की तरफ देखा जो दिखने में तो बहुत मासूम ओर प्यारी थी उसकी आँखों में एक अजीब सा दर्द था जिसे मैं समझ नही पा रही थी उसकी गहरी आँखें जैसे कुछ कहना चाहती हों । उसके गुस्से को देखते हुये मैंने बहुत हिम्मत करके उससे पूछा आप उन लोगों पर इतना गुस्सा क्यों कर रही थी वो दोनो एक दूसरे से प्यार करते थे तो इसमें गलत क्या है उसने जो जवाब दिया उसे सुनकर मैं हैरान थी उसने कहा प्यार करना गलत नही है पर दोस्ती की आड में ये सब करना गलत है दोस्ती से ज्यादा का प्यार गलत है अपनी हवस को प्यार का नाम देना गलत है दुनिया को कहते फिरो कि हम दोस्त है पर उसकी आड में अपनी हवस पूरी करना गलत है उसकी बातें सुनकर मैं खामोश हो गई और जब वो जाने लगी तो मैंने उससे पूछा कि ये उनका आपसी मामला था आप को उनसे क्या लेना तो वो गुस्से से बोली मेरा लेना है क्योकि वो लड़का मेरा भाई था और ये हक मैं किसी को नही देती कि कोई किसी की भावनाओं से साथ खिलवाड करे । आज वो लडकी शायद इस झूठ को सच मान कर जी रही हो कि ये दोस्ती प्यार में बदल जायेगी पर ऐसा कुछ नही होगा चला जायेगा वो एक दिन छोडकर । आप ऐसा क्यों कह रही हैं और वो बस इतना कहकर चली गई ……..
     
                           
                                         कुछ कहानियां अधूरी रह जाती हैं…………………………………………..

    उस दिन के बाद से हम अक्सर मिलने लगे वो मुलाकातें कब दोस्ती मे बदल गई पता ही नी लगा । एक शाम मैं उसके साथ पार्क में घूम रही थी तो उसने मुझसे पूछा कि आज तुम बहुत खुश लग रही हो क्या बात है तो मैंने उससे कहा कि आज मेरा fiancé आ रहा है तो सुनकर वो भी खुश हो गई। ते मैंने कहा कि आज जब वो मुझे लेने आयेंगे तो तुमसे भी मिलवाउंगी इस बात पर वो मुसकुरा कर रह गई। थोडी देर बाद मेरे fiancé मुझे लेने आ गये मैंने उसे भी अपने fiancé को दिखाया पर जब मिलने को बोला तो उसने मना कर दिया और मेरे fiancé तो इस से भी ज्यादा शरमीले इँसान थे उन्होने पहले ही मना कर दिया था अरे इतनी बातें करली पर मैने आपका नाम तो पूछा भी नही अपना नाम तो बताओ क्या है तुम्हारा नाम ?
    याना……….मेरा नाम याना है
    तुम्हारा नाम तो बहुत अच्छा है यार बिल्कुल तुम्हारी तरह
    याना……thanks
    अच्छा ठीक है मैं चलती हूं फिर मिलूंगी तुमसे
    याना…..ठीक है बाय
    मैने जाते जाते उससे पूछा कि तुमने ऐसा क्यों बोला कि कुछ कहानियां अधूरी रह जाती हैं
    याना……….अभी तुम जाओ अगली बार बताउंगी
    और तभी उसे urgent call आया ओर वो चली गई ।
    मेरे fiancé ने आके पूछा कहाँ गई तुम्हारी दोस्त ? ओर मेरा गुस्सा उस वक्त सातवें आसमान पर था
    हाँ हाँ तुम तो v.i.p हो जो तुम्हारे लिए सब काम छोड कर यहीं खडी रहेगी। अच्छा बाबा सॉरी
    ठीक है चलो अब घर चलते हैं
    और उस दिन के बाद से वो मुझे नही मिली मैं हर दिन उसका इंतजार करती पर वो नही आई!
    मुझे कुछ भी अच्छा नही लग रहा था पता नही एक अजीब सा रिश्ता बन गया था दिन रात गुजरते गये पर वो नही आई।
    एक ठंड से भरी शाम मैं उदासी से घिरी पार्क पहुंची तो देखा वे शॉल में लिपटी बैंच पर बैठी थी उसे देखकर मैं बहुत खुश हो गई और जाकर उससे लिपट गई उसने गंभीर होकर कहा खवाहिश बैठो मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी मुझे कुछ समझ नही आया मैं उसके पास बैठ गई और उससे पूछा क्या हुआ इतनी चुप क्यों हो ?
    याना …… उस दिन तुमने पूछा था ना कि कुछ कहानियाँ अधूरी रह जाती है मैंने ऐसा क्यों कहा ?
    खवाहिश ….. हाँ पर वो तो उस दिन की बात है मंने तो बस ऐसे ही पूछ लिया था
    याना………आज मैं तुम्हे एक कहानी सुनाती हूँ
              5 साल पहले की बात है तब मैं college में थी नयी नयी सी जिंदगी शुरू हुई हो ऐसा लग रहा था आँखों में सपने लिए मैं भी जी रही थी पर मैंने नही सोचा था कि उसके आने से मेरी जिंदगी इक पल में बदल जायेगी। मुझे आज भी याद है 16अक्टूबर का वो दिन जब उसका facebook पर मेरे पास message आया था उसका
    16oct2010
    Harshil….हाय
    Yana…….हैलो
    Harshil…कैसी हो आप ?
    Yana……मैं ठीक हूं आप बताओ ?
    Harshil….मैं भी अच्छा हूं और बताओ क्या करती हो आप ??
    याना……..m doing graduation
    Harshil… कहाँ से ???
    Yana……. Ccs university
    Harshil……वहाँ तो मैं आता रहता हूँ मैं कभी आया तो क्या आप मिलोगी ??
    Yana……देखती हूँ पक्का नही कह सकती और वैसे आप आप करके बात करने की जरूरत नही है तुम करके भी बात कर सकते हो मुझे अच्छा लगेगा
    Harshil….ओर बता मोटी फिर खाना खा लिया क्या ???
    Yana……ये हुई ना बात और वैसे मैं मोटी नही हूं
    Harshil…..मुझे क्या पता मै कोई देखा थोडी है तेरे को
    Yana…हाँ ठीक है पर मैं मोटी नही हूँ
    Harshil…मैं तो मोटी ही बोलूंगा
    Yana….ठीक है मोटे
    Harshil….ओय मैं मोटा नही हूँ
    Yana….तो क्या मैं भी मोटू ही बोलूंगी
    Harshil….खाना खा लिया तूने ??
    Yana…..हाँ
    Harshil….भूखी सी अकेले अकेले खा गई
    Yana……नही तो अकेले कहाँ खाया घर वालों के साथ खाया😁😁
    Harshil…..भूखी सी ज्यादा दांत नी निकल रहे तेरे
    Yana……नही तो😂😂
    Harshil…..मोटी हो जायेगी खा खा कर
    Yana……नही होती तू अपना सोच
                   
    और इसी के साथ शुरू हो गई हमारी कभी ना खत्म होने वाली नोंक झोंक । हमारा सारा दिन एक दूसरे से बात करते हुये बीत जाता। हमारी सुबह gud morning के msg से शुरू होकर रात की gd nyt पर खत्म होने लगी।हम दोनों एक दूसरे की दुनिया बन गये थे जोबहुत खूबसूरत थी फिर वो दिन भी आया जब हमने पहली बार एक दूसरे को देखा।
    उसे देखते ही मैं उसकी हो गई थी ये बात मुझे भी तब महसूस नही हुई। मैं उसमे कुछ खोकर सी रह गई थीउसकी नशीली आँखे मेरा दिल चुराने के लिए काफी थी ऐसे ही समय बीतता गया और हम कब एक दूसरे की जरूरत बन गए पता ही नी चला और फिर जब उसने मेरे जन्मदिन पर surprise दिया और मुझे गले से लगाया तब महसूस हुआ कि हम दोस्ती से आगे बढ़ चुके थे पर मैने उससे इस बारे मे कुछ नही कहा ओर इकतरफा प्यार मे जीती रही। क्योंकि मैं जानती थी कि वो मुझे अपना नाम कभी नी देगा क्योंकि उसकी नजर में मैं कभी दोस्त से ज्यादा कुछ नही थी या ये कह लो कि वो इससे ज्यादा कुछ समझना ही नही चाहता था पर हम लोगों का रिशता दोस्ती से ज्यादा था मैं उसके लिए कुछ भी कर सकती थी ओर ये बात वो भी अच्छे से जानता था फिर एक दिन वो भी आया जब हम दोनों के बीच की सारी दूरियां मिट गई हम दोनों एक दूसरे में इस कदर समा गये जैसे सागर में बारिश का पानी , मैंने अपने आपको उसे सौंप दिया क्योंकि मैं उसे प्यार करने लगी थी पर उसने किस हक से मांगा था मुझे मैं ये आजतक नही जानती थी पर एक बात समझ गई थी कि हमारा रिश्ता दोस्ती से ज्यादा का था उस दिन मैंने फैसला किया कि अपने दिल की बात उसे जरूर बताउंगी और इस रिश्ते को एक नाम दूंगी। पर आने वाले तूफान से मैं अनजान थी जिसने मेरी लाइफ को बदल कर रख दिया जिस दिन मैं अपने दिल की बात उसे बताने वाली थी उसी दिन मुझे पता चला कि वो abroad जा रहा है और ये सुनते ही मेरा दिल धक् से रह गया मेरी आँखों के सामने वो सारे लम्हे घुम गये जो मैने उसके साथ बिताये थे और वो जाते जाते अपनी आखिरी निशानी दे गया और मेरी आँखों में छोड़ गया कभी ना खत्म होने वाला इंतजार तभी आसमान में जाते हुये हवाई जहाज से उसका ध्यान टूटा और वो हकीकत मे वापिस आ गई और साथ ही उसकी आँखों से आंसू भी और मेरी भी और जाते जाते उसने मेरे हाथ में एक कार्ड ओर एक gift थमा दिया इससे पहले मैं उससे कुछ पूछ पाती वो चली गई। उसके जाने के बाद जब मैंने कार्ड देखा तो हैरान रह गई आज उसकी शादी थी उससे मिलने की खुशी और कहानी में इस तरह खो गइ कि मैने ध्यान ही नही दिया कि उसके हाथ मेहंदी से भरे हुये थे और शादी की जोड़ा पहन रखा था मैं बैठी रो रही थी तभी मेरा fiancé वहाँ आये ओर मुझे राता देख पूछने लगे कि क्या हुआ ओर ये तुमहारे हाथ में gift कैसा ? मैं रोते रोते उनके गले से लग गई और उन्हे सब कुछ सुना दिया सुनते ही वो बोले कि उसका नाम कहीं याना तो नही था मैंने बोला हाँ पर आपको कैसे पता? कहते ही कहते मेरा सिर चकरा गया ओर मैं वहीं बैंच पर बैठ गई। मैं इतनी बडी बेवकूफी कैसे कर सकती हूँ मेरे दिमाग मे ये बात पहले क्यों नी आई कि मेरे fiancé का नाम भी harshil है मेरे fiancé ने जल्दी जल्दी वो gift खोला जो उसने मुझे दिया था उसमें एक सिंदूर का box था और उसके साथ ही एक chit भी थी जिसपे उसने लिखा था कि harshil के नाम का सिंदूर तुम्हारे माथे पर ज्यादा अच्छा लगेगा और एक कार्ड था जिस पर लिखा था
               यूं तुम मुझसे बात करते थे या कोई प्यार का इरादा था
    ये सुनते ही harshil की आँखों से आंसू बहने लगे ये कहते हुये कि काश उस दिन ये कार्ड ले लिया होता तो आज हम साथ होते ये कहते हुये वो मुझे वहीं छोड़कर चला गया। मैं ऊपर आसमान मे उस अधूरे चाँद को देखने लगी उस चाँद को देखकर मन ही मन कहा सच कहा था उसने………….
                               
                                               कुछ कहानियाँ अधूरी रह जाती है

    समाप्त

  • मिनी पेट्रोल पंप

    मिनी पैट्रोल पम्प

    समर अपनी नयी बाइक से फर्राटे भरते हुये घर से निकला।वह अपनी किराने की दुकान का सामान लेने लालपुर जा रहा था।रास्ते मे उसकी बाइक का पैट्रोल खत्म हो गया।वहाँ कोई पैट्रोल पम्प नही था।पूछने पर पता चला कि यही धरमपुर मे गुप्ता जी के वहाँ पैट्रोल मिल जाता है। फिर क्या था?समर अपनी बाइक घसीटता हुआ पहुँचा और आवाज लगायी,गुप्ता जी!पैट्रोल दे देना।
    तभी गुप्ता जी की लड़की मिनी आयी और समर से बोली,पिता जी घर पर नही है?आपको कितना पैट्रोल चाहिये?
    मिनी बहुत ही सुन्दर व आकर्षक थी।समर उसे निहारता ही रह गया।उसकी सांवरी सूरत देखकर वह सब कुछ भूल सा गया।और अचानक पूँछ बैठा,क्या नाम है आपका?क्या करती हो? मिनी ने कहा पैट्रोल कितना लेगे? समर बोला,दो लीटर दे दीजिये। मिनी आयी और पैट्रोल बाइक मे डालकर चल दी। समर ने कहा,मैने आपसे कुछ पूछा था?मिनी ने कहा,मै मिनी हूँ और सिविल एग्ज़ाम की तैयारी कर रही हूँ।समर ने भी अपना परिचय दिया और चल दिया।

    समय बीतता रहा और समर जानबूझकर गुप्ता जी के वहाँ पैट्रोल लेने जाता रहा ताकि वह मिनी को देख सके। समर हर पल मिनी के ख्वाबों मे ही खोया रहता था।लेकिन वह अपने प्यार का इज़हार करने से डरता था क्योंकि मिनी उच्च शिक्षित थी और वह निरक्षर।

     जब भी समर बाइक लेकर गुप्ता जी के वहाँ जाता तो मिनी ही पैट्रोल डालने आती और दोनो खूब बाते भी करते।एक दिन मिनी की बस छूट गयी तो समर उसे लालपुर मे कोचिंग तक छोडने गया।रास्ते मे समर ने कई बार सोचा कि वह अपने मन की बात कह दे।पर कह न सका। उसने मिनी से पूछा,शादी के बारे मे क्या ख्याल है?तुम्हे कैसा लड़का पसंद है? तब मिनी ने बताया कि उसकी शादी दिल्ली मे बैंक मैनेजर के साथ पक्की हो गयी है।और अगले माह वह परिणय सूत्र मे बँध जायेगी।
    इतना सुनकर तो जैसे समर के पैरो के नीचे से जमीन खिसक गयी।मिनी को कोचिंग छोड़कर तुरंत ही वह घर की ओर चल पड़ा।रास्ते मे सोच रहा कि मिनी मुझ जैसे निरक्षर से क्यो प्यार करेगी?क्यो शादी करेगी? समर ने अपनी दुकान खोलना भी बन्द कर दिया और शहर जाना भी छोड़ दिया।दिन भर एकान्त मे वह रोया करता और सोचता रहता कि काश!मिनी,उसकी मिनी!उसकी जिन्दगी मे होती।

    लगभग दो महीने बीत गये।समर आज किसी काम से लालपुर जा रहा था।तभी धरमपुर गाँव आते ही उसे मिनी की याद सताने लगी। फिर क्या था?वह अपनी बाइक लेकर चल दिया गुप्ता जी के घर की तरफ और सोच रहा कि अब तक तो मिनी की शादी हो गयी होगी और वह आराम से अपनी ससुराल दिल्ली मे होगी।

    समर पहुँचा तो देखा कि गुप्ता जी के घर मे ताला लगा हुआ है।पास पड़ोस मे पूछने से पता चला कि सब अस्पताल गये है। समर अस्पताल पहुँचा तो गुप्ता जी मिल गये और बताने लगे कि घर में रखे पैट्रोल मे आग लग गयी जिससे मिनी का चेहरा झुलस गया।उसकी शादी का रिश्ता भी टूट गया।गुप्ता जी जोर जोर से रोने लगे।समर के तो होश ही उड़ गये कि उसकी मिनी के साथ ये सब क्या हो गया?
    समर वार्ड मे गया मिनी बिस्तर पर लेटी थी।समर ने धीरे से आवाज दी,मिनी! मिनी ने जैसे ही समर को देखा तो रोने लगी और बोली कहाँ चले गये थे तुम?बोलो? देखो!मेरे साथ क्या हो गया?

    समर ने मिनी को शान्त कराया और फिर कहा कि वह बहुत दिनो से कुछ कहना चाहता है। मिनी बोली तो बताओ ना।समर ने मिनी का हाथ थामते हुये बोला कि क्या वह उससे पहले दिन से ही बहुत प्यार करता है। मिनी बोली तब की बात और थी अब तो वह सुन्दर भी न रह गयी।
    समर ने कहा कि उसे इससे कोई फर्क नही पड़ता।बस मिनी तुम ये बताओ कि तुम मुझ जैसे निरक्षर से शादी करोगी? इतना सुनकर मिनी की आँखों से आँसू बहने लगे और उसे देखकर समर भी ……

  • “काशी से कश्मीर तक सद्भावना यात्रा सन1994”

    “काशी से कश्मीर तक सद्भावना यात्रा सन1994”
    किसी भी यात्रा का उद्देश्य सिर्फ मौजमस्ती व् पिकनिक मनाना ही नहीं होता | यात्राएं इसलिए
    की जाती हैं कि हम एक-दुसरे की सभ्यता ,संस्कृति,रहन सहन व् विचारों को जान सकें ,करीब
    से देख   अच्छाई ग्रहण  सकें तथा अपनी संस्कृति सभ्यता से प्रभावित कर सकें | अखिल –
    भारतीय सद्भावना संगठन द्वारा आयोजित गाठ छ: अगस्त से बाइस अगस्त तक ‘काशी से
    कश्मीर तक की सद्भावना यात्रा अपने आप में एक मिसाल बन गयी | सुखमंगल सिंह के साथ
    युवा कवि कुमार हेमंत का सहयोग पाकर यात्रा ने एक संस्कृति पहचान कायम की | इस यात्रा
    में कुमार   हेमंत उत्साहित करते रहे परिणामस्वरूप
    निर्विघ्न  यात्रा पूरी हुई किन्तु गरीबी ,बेरोजगारी ,व् भ्र्ष्टाचार के चलते समाज की दशा दिनों
    दिन खराब होती जा रही | ऐसे में लोग प्रेम मोहब्बत ,भाईचारे ,विश्व बंधुत्व को फालतू चीज
    मानने लगे हैं किन्तु अन्दर ही अन्दर आज के विषम परिस्थिति में भी जनमानस में प्रेम व्
    भाईचारे के प्रति आस्था व् विश्वास है ,जिसके चलते समाज की गाडी आगे बढ़ती रही | बनारस
    से आगे बढ़ने पर देखने से ऐसा लगता है कि हमारा प्रदेश अभी भी काफी पिछड़ा प्रदेश है जहां
    विकास होना चाहिए, वहां नहीं हुआ है | जान नेता अपने कर्तब्यों से विमुख होकर सिर्फ राज-
    धानियों के होकर रह गये हैं |  जौनपुर जैसा ऐतिहासिक शहर आज तक उपेक्षित पड़ा है और
    तो और !
    देश की राजधानी दिल्ली के बाहरी इलाके भी ,  प्रदेश की राजधानी लखनऊ मेन बड़े-बड़े नाले
    खुले हुये हैं|गंदगी से सारा शहर पटा पड़ा है | सिर्फ सरकारी बंगलों व राजनेताओं के आवासों
    पर ही सारी सुविधाएं भरी पड़ी है | एसे मेन कैसे विकास कारी हो ,यही अहम प्रश्न है |पंजाब
    मे आज भी लोगों के मन मे भय व आतंक व्याप्त है | हर एक आदमी एक दूसरे को शक की
    निगाह से देख रहा है | पंजाब के आगे जम्मू मेन भ्र्श्ताचार का हर तरफ बोलबाला है | किसी
    पर किसी का अंकुश नहीं रह गया है |  यहाँ कोई किसी का विश्वास भी नहीं करने वाला | जम्मू
    में दहशत का माहौल व्याप्त था एक अंजाना डर लोगों के मन में समाया हुआ था | हिमांचल
    प्रदेश में हालाकी शांति थी ,मगर वहाँ के लोगों के चेहरे पर असंतुष्टि व व्याकुलता नजर आयी ,
    लगता था वह वर्तमान व्यवस्था से क्षुब्ध थे | कश्मीर में डोडा जिले व आस-पास के इलाकोण में
    भयावह सन्नाटा छाया हिया था |कभी -कभी अज्ञात स्थानों से गोलियों के चलने की आवाज साफ
    सुनाई दे रही थी | सेना के जावाज़ जवानों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुये श्री नगर नहीं
    जाने दिया ,मगर फिर भी हम लोग कुछ दूर जाने में सफल रहे | जम्मू में ए0 डी0 सी 0 डिप्टी
    कमिश्नर ने पहले ही श्रीनगर न जाने के लिए आगाह किया था | यद्यपि हमारे ऊपर श्रीनगर
    जाने की धुन सवार थी | इसी बात को लेकर कुमार हेमंत से कहासुनी भी हो  गई फी क्या था
    स्थिति हो भाँपते हुये माँ वैष्णवो देवी चल दिया  | म्झे इस यात्रा से ऐसा लगा कि देश का युवा
    वर्ग ज्यादा सद्भावना जागृत कर सकता है | बसरते उसके सामने बेरोजगारी ,रोटी कि समेस्या
    न हो ! रास्ते में जीतने भी युवक मिले सभी ने भाई-चारे व प्रेम जागृत करने पर बल दिया |
    लखनऊ  में -लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र सद्भावना के प्रति काफी उत्साहित थे | उन लोगो
    ने हम लोगों का काफी उत्साह व मन के साथ स्वागत किया | दिल्ली के रोहणी व पाल्म में
    नागरिकों नें भावना और मन से स्वागत किया | रोहणी में मैंने 15 अगस्त पर झण्डा फहराते हुये
    कहा कि अगर देश में फिर से भाई चारा कायम हो जाय तो यह देश स्वर्ग बन सकता है ,वशर्ते इस
    देश को स्वावलंबी बनाया जाय न कि विदेशी कंपनियों की गुलामी स्वीकार की जाय |महाप्रबंधक
    दूर संचार ,वाराणसी रवीन्द्र नाथ प्रभावर ,जिलाधिकारी वाराणसी नेत्राम, लखनऊ में अखण्ड प्रताप
    सिंह मुखी गृह सचिव, उत्तर प्रदेश ,लखनऊ सचिवालय के अनुभाग अधिकारी एस 0 पी 0 त्रिपाठी ,
    लखनऊ जिलाधिकारी श्री खरे जी ,दिल्लीमें गुरुद्वारा कमेटी के लोग ,अंबाला में दूरसंचार विभाग के
    महाप्रबंधक ए 0 के गिरोत्रा व जौनपुर में साहित्य महारथी श्री पाल सिंह ‘क्षेम ‘ ,समय के संपादक-
    दिनेश सिंह ‘दमभू ‘जी ,दिल्ली से मारकंडेय सिंह , असफाक अहमद रामपुर,मस्तराम बरेली ,दुर्गा
    प्रसाद अवस्थी लखनऊ ,डा भानू शंकर मेहता , पंडित प्रकाश महाराज (तबलाबाद्क ),वी 0 के 0
    गुप्त व माताओं एवं बहनों का भी आदर व प्यार पाकर यात्रा और भी -मंगलमय बन गयी थी |यात्रा
    की निर्विघ्नता हेतु श्रीमती उर्मिला सिंह जो कि मेरी धर्म पत्नी हैं कि वझ से हो सकी | बाबा भोले के
    दक्षिणी गेट पर आरती पत्नी ने की , तथा भानु शंकर मेहता जी ने हरी झंडी दिखाकर यात्रियों को
    रवाना किया | इस यात्रा के प्रति मैं अपने संगठन के सदस्यों के प्रति आभारी हूँ | जिन्होंने बड़े
    उल्लास व जोश के साथ यात्रा का सफल आयोजन किया और मनोबल बढ़ाया | अंत में अपने पुत्र –
    पौत्रियों ,अजीत कुमार सिंह ,विनीत कुमार सिंह एवं सुपुत्री कु कीर्ती सिंह को शुभाशीर्वाद दूगा कि
    कम उम्र में पिता द्वारा लिए गये संकल्प  को सहन ही नहीं किया अपितु उत्साहित भी किया कि
    जाइये पिता श्री ! पंजाब -कश्मीर की आज हाल्ट नाजुक है | आपके जाने से शायद जनता में अब
    भी भाईचारे का भाव कायम हो सके |
    -सुखमंगल सिंह ,अवध निवासी 

  • गांव की बेटी

    दिन की शुरुआत अंगीठी के
    उठते धुएं से शुरू होती
    पकाती परिवार के लिए रोटी
    फिर भी सुने समाज की खरी-खोटी
    थक जाए कितना भी तू
    फिर भी आराम ना लेती
    देख तुझे मैं यही कहती
    कैसे यह सब है करती
    मेरे गांव की तू बेटी.
    मीलो चलती पानी भरकर लाती
    रख घड़ा जमी पर फिर से
    दोपहर का खाना बनाती
    रख गमछे में प्याज और चार रोटी
    फिर से खेत की तरफ रवाना होती
    खिलाकर रोटी पिलाकर पानी
    पति की प्यास बुझाती
    ले हसिया हाथ में कटाई में लग जाती
    वह थकी मांदी होकर भी काम करती रहती
    पता नहीं कैसे यह सब कर पाती
    मेरे गांव की तू बेटी.
    दिहाड़ी लेकर जमीदार से
    घर की ओर जाती
    फिर से पकाती और
    परिवार को खिलाती
    झाड़ पोंछ उन्हीं कपड़ों को
    नहाकर पहन लेती
    जैसे वो हो कुछ भी नहीं
    ऐसे वो सोती
    गहरी नींद में जाकर वह
    खुद ही अपना अस्तित्व खो देती
    इतना सब करके भी
    वो कोई वजूद ना पाती
    थक कर ऐसे सोई है वो
    चिंता उसे कोई ना सताती
    बच्चों से लिपट कर बस चैन से
    हर रोज वो सो जाती
    पता नहीं कैसे यह सब कर पाती
    मेरे गांव की तू बेटी.

  • बच्चा

    एक बच्चा,अपने मन से कुछ बनना चाहता था
    पर मां-बाप की ही उस पर चलती रही.

    जैसा हम कहते हैं वैसा ही करो
    और उसकी इच्छाएं है यूहीं आग में जलती रही.

    ख्वाब टूट गए उसके तो हकीकत में क्या जिएगा
    यही सोच उसके दिल और दिमाग में चलती रही.

    ख्वाब उसके टूट चुके थे
    रिवायत ये बचपन से ही चलती रही.

    वह तो कई साल पहले ही मर गया था
    पर लाश पचपन तक चलती रही.

  • सच्चाई

    मुंह में राम बगल में छुरा लिए आते हो
    अपनी गंदी राजनीति से सबको लड़वाते हो
    क्या फर्क पड़ता है कि तुम हिंदू हो या मुसलमान
    अपने उन्ही मेले हाथों से
    शांति के कबूतर उड़ाते हो
    अल्लाह के बंदे, भगवान की रचना है हम
    क्यों अयोध्या को आधा-आधा कटवाते हो
    अगर सच्चे इंसान हैं हम तो
    फिर क्यों तुम घबराते हो
    इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है
    कि तुम नमाज पढ़ते हो या फिर दिए जलाते हो.

  • सात चिड़ियों का बसेरा

    एक बाग में था पेड़ हरियाणा
    विशालकाय, सुंदर, मतवाला
    बैठा हो जैसे साधना में तपस्वी कोई
    सम्पूर्ण, समृद विशाल हृदय वाला.

    जागृत हो जाता होते ही सवेरा
    जिस पर था सुंदर साथ चिड़ियों का बसेरा
    खाकर फल उसके चिड़ियों ने
    बीजों को जग में जा बखेरा.

    किसी चिड़िया का पहली डाल पर बसेरा
    किसी का था ऊंची अटारी पर डेरा
    सुंदर चिड़ियों का परिवार बढा
    पेड़ दिखने लगा और भी घनेरा.

    बीत गए कई साल खुशी से
    उड़कर आकर बैठती बस उसी पे
    घूमती फिरती सभी खुले आसमान में
    चिड़ियों का ना था वास्ता जमी से.

    एक दिन ऐसा तूफान आया
    पेड़ ऐसा बुरा चरमराया
    टूटी कई टहनियां उसकी
    चिड़ियों का दिल बहुत घबराया.

    घबराई तो है वो प्रकृति की चाल से
    दुखी भी है वों सभी पेड़ के इस हाल से
    लड़ना पड़ेगा तो वह लड़ेंगी काल से है
    पर चिड़ियों का बसेरा ना उड़ेगा कभी तेरी डाल से.

  • हैप्पी बर्थडे सांध्या

    इतने सालो से अपने कंधो पे
    जिम्मेदारी माँ की ले रखी है
    माँ की तू बेटी है
    घर की तू तरक्की है
    अनपढ़ माँ की अब तू इकलौती
    कलम और तख्ती है
    किस तरहा सुधर गया जीवन
    दुनिया हक्की बक्की है.

    जो तेरे कर्म मे था
    परिश्रम तूने गहन किया
    कई मुश्किलें सर आन पड़ी
    सभी को तूने सहन किया
    गरीबी मे साथ दिया माँ का
    फटे कपड़ो को भी पहन लिया
    छोड़ना ना कभी
    जो माँ का हाथ थाम लिया
    आज के दिन तूने जन्म लिया
    हैप्पी बर्थडे मेरी बहन संध्या.

  • दलित

    इस आजाद भारत में
    आज भी मेरी वही दशा है.
    छुआ – छूत का फंदा
    आज भी मेरे गले में यूहीं फंसा है.
    मै हूँ दलित गरीब
    भेदभाव का शिकंजा मेरे पैरो में कसा है.
    मै तिल तिल कर जी रहा
    समाज मेरे बुरे हाल पर हंस रहा है.
    ये मत भूलो, जिस घर में तुम हो रहते
    वो मेरी दिहाड़ी मजदूरी से ही बना है.

    फसल उपजाऊ सबकी भूख मिटाऊँ
    पर खुद भूख से मै ही लड़ता हूँ.
    साथ चलने का हक़ भी मै ना पाऊं
    पर सबके उठने से पहले सड़के साफ मै ही करता हूँ.
    जात के नाम पर वोटो से कितना खुद को बचाऊ
    पर राजनीती का अखाडा मै ही बनता हूँ.
    महलो तक का भी निर्माण मैंने किया
    पर आज भी मै झोपड़े में ही बसता हूँ.
    हजारों इमारतें बना चुका
    पर एक ईंट जितना मै सस्ता हूँ.

    हजारों साल हो गए सहते -सहते
    नींच जात होने के अपमान मे
    ना कभी आगे बढ़ने दिया
    अछूत होने के गोदान ने
    जाने क्यों रोंद कर रखना चाहा
    पैरो तले इंसान को ही इंसान ने
    अब समानता का अधिकार
    मुझे दिया है सविधान ने
    उससे पहले तो जीने का हक
    मुझे दिया है उस भगवान ने

    🌋🌋🌋नीतू कंडेरा🌋🌋🌋🌋

  • उद्धव गोपी सम्वाद

    उद्धव गोपी सम्वाद

    उद्धव जी कहते हैं गोपियों से ।

    परमेश्वर को पहचानो , सत्य उसे ही जानो ।
    क्यों रोती उसके लिए ,ये रोना छोड़ो और मेरी बात मानो।
    जो आधार है जगत का वो आधार को पहचानो।

    गोपी ने कहा उद्धव जी से कहा

    तुम तो ज्ञानी हो हमारा दर्द क्या जानो ।

    तुम ये ज्ञान छोड़ो भी हमारा प्रेम पहचानो।

    बेदर्दी हो तुम विरह की पीर क्या जानो ।

    मानो उस कान्ह को उसे ही प्रीतम मानो ।

  • उद्धव गोपी सम्वाद

    उद्धव गोपी सम्वाद

    उद्धव जी कहते हैं गोपियों से ।

    परमेश्वर को पहचानो , सत्य उसे ही जानो ।
    क्यों रोती उसके लिए ,ये रोना छोड़ो और मेरी बात मानो।
    जो आधार है जगत का वो आधार को पहचानो।

    गोपी ने कहा उद्धव जी से कहा

    तुम तो ज्ञानी हो हमारा दर्द क्या जानो ।

    तुम ये ज्ञान छोड़ो भी हमारा प्रेम पहचानो।

    बेदर्दी हो तुम विरह की पीर क्या जानो ।

    मानो उस कान्ह को उसे ही प्रीतम मानो ।

  • गाँव की एक रात

    काली आधी रात में,
    दुनिया देख रही थी सपने |
    आलस का आलम था चहु ओर
    रात भी लग रही थी ऊंघने |

    तब मैंने छत से देखा,
    बतखो के झुण्ड को तलाब में |
    ठंडी हवा भी चलने लगी,
    रात के आखरी पहर मे |

    मछलिया खूब उछाल रही थी,
    फड़ फाड़ा रही थी इधर उधर |
    सोचा हाथ लगाउ उनको,
    पर ना जाने गई किधर |

    तभी कुछ शोर सुनाई दिया आसमान में,
    बागुले उड़ रहे थे एक पंक्ति में |
    जैसे वो सब मस्त है आजादी में,
    मैंने भी आजादी महसूस की उन सबकी संगति मे |

  • ठंड

    ******** ठंड********

    ठंडी का मौसम था और चीनू की बीमार माॅ मुंबई जाने वाली थी दवा कराने के लिए चीनू बडे सुबह ही उठ कर घर का सारा काम निपटा कर नहा कर पतले कपडे डाल लेता है ।धुप अच्छी निकली रहती है वह पतले कपडे पहने ही अपने माँ को बस स्टेशन छोडने के लिए जौनपुर बस डिपो गया ।
    वहा चीनू अपने माँ का हाल देखकर अपने माँ को वाराणसी स्टेशन से ट्रेन पकडाने का निर्णय कर निकल जाता है। और वहा पहुंच कर अपने माँ को ट्रेन पर बैठाकर वापस जौनपुर के लिए रवाना होता है तो शाम हो जाता है । और ठंडी भी बढ गया था चीनू बस मे पीछे की तरफ जाकर एक सीट पर बैठ जाता है सिकुड कर इसी आश मे शायद पीछे ठंडी कम लगे लेकिन ठंड बढ जाने के कारण चीनू की हालत पतली हो गई थी ।बस वाराणसी से जौनपुर के लिए रवाना होता है ठंडी हवाओ को चीरती हुई आगे बढती है बस और ठंडी हवा बस मे आने लगती है और चीनू ठंड से कापने लगता है।
    तभी बगल वाली सीट पर एक दम्पति आते है और चीनू को उस हाल मे देखकर पुछ ही लेते है कहा तक जाना है चीनू कापते हुए बोलता है चाचा जौनपुर जाना है तभी उनकी पत्नी चीनू के पास वाली सीट पर बैठ कर चीनू को अपने कम्बल से ढक लेती है और बाते करती हुई रास्ते भर आती है ।चीनू को भी काफी आराम महसूस होता है और वह उस औरत से ऐसे चिपका था जैसी वह अपने माँ से चिपका हो ।चीनू को समझ मे नही आ रहा था कि वह उनका कैसे सुक्रिया अदा करे ।

    महेश गुप्ता जौनपुरी
    मोबाइल – 9918845864

    ✍✍✍✍✍✍✍✍✍

  • लघुकथा

    आत्मकथा

    दोस्तो मैं बहुत गरिब परिवार से रह चुका हूॅ बात उस समय की है जब मै क्लास सेकेंड में पढता था ।उस समय मुझे बडी ही मुश्किल से किताब और कलम के पैसे मिलते थे ।उस समय घर पर मैं कलम खरिदने के लिए पैसे मांगे तो मुझे नही मिला मेरी माँ बोली बेटा एक दो दिन चलाओ इसके बाद दिला दुगी ।
    मैं दुसरे दिन स्कूल चला गया और बिना होम वर्क किये स्कूल में मेरा पीटाई हुआ ।और मैं घर आकर बोला मैं कल स्कूल नही जाऊंगा ।
    मेरे बगल मे एक अंकल रहते थे जो स्मोकिंग करते थे उन्होने मुझे बुलाया और कहा बेटा मेरे लिए बाजार से सिगरेट लेकर आ जाओ । मैंने पैसा लेकर जैसे ही आगे बढा वो मुझे रोक कर बोले बेटा एक रूपये का तुम कुछ खा लेना ।मैं बोला ठिक है अंकल मैं बाजार जाकर उनके लिए सिगरेट लिया और एक रूपये का अपने लिए कलम खरिदा और मैं बहुत ही गर्वित होकर कलम लेकर वापस आ गया ।और अंकल को सिगरेट और पैसे वापस किया ।अंकल ने पुछा बेटा कुछ खाया मैं बोला हा अंकल खाया उस दिन को मैं आज तक नही भूल पाया ।मेरे आज तक समझ में नही आता कि मैं उस दिन झुठ बोलकर सही किया कि गलत ।

    महेश गुप्ता जौनपुरी
    मोबाइल – 9918845864

  • मेरा राजा बेटा

    खुशियों का एहसास लाया,
    जब तू मेरी जिंदगी मे आया
    छू ना पाए तुझे मुश्किलों का साया,
    बीड़ा मैंने यही उठाया.
    दुख तुझपर कोई ना आए,
    इसी जिद्द पर मै अडी हूँ
    जब तू खुद को निराश पाए,
    हमेशा साय की तरहा,
    ” तेरे पीछे ही मै खड़ी हूँ ”
    खून का रिश्ता तुझसे गहरा और पक्का है,
    तुझपर है भरोसा एक तू ही लगता मुझको सच्चा है,
    बार-बार कहती यही “मेरा राजा बेटा सबसे अच्छा है,
    तू कितना भी बड़ा हो जाये “तू फिर भी मेरा बच्चा है “.

  • लघुकथा

    ( लघुकथा )

    एक गरीब महिला अपने परिवार के साथ एक टुटी झोपड़ी में रहती थी उसके परिवार में एक बेटी और एक बेटा था | उसकी माँ पास के गॉव में जाकर झाडू पोछा करके कुछ खाने कि चीजे लाती थी उसमें भी खाना सिर्फ दो लोगो को होता कभी माँ भूखी सो जाती थी तो कभी बेटा यह बोलकर सो जाता था कि माँ आज मुझे बिल्कुल भूख नहीं हैं | जैसे तैसे गरीब महिला का घर चल रहा था एक दिन रात को बहुत ही भयंकर ऑधी तूफान आया उसमें गरीब महिला का घर टूट गया और घर में पानी भर गया | गरीब महिला का परिवार एक कोने में डरा सहमा बैठा था | अचानक कि कि का आवाज आने लगा जब गरीब महिला पास में जाकर देखा तो वह एक कौआ का बच्चा था जो ऑंधी तूफान कि चपेट में बुरी तरह से ठण्ड के कारण कॉप रहा था गरीब महिला ने उसे हाथ से उठाकर पुचकारते हुए कपडे से ढ़क दिया कौआ का बच्चा उसके बाद भी कि कि करता रहा गरीब महिला ने उसे चावल के दाने दी खाने को कौआ बडे़ प्यार से सब दाने चूग गया | कौआ अब उस घर का पारिवारिक सदस्य बन गया महिला के जाने के बाद बच्चो का ख्याल करने लगा ऐसे ही दिन बितता गया कौआ को गरीब महिला कि लाचारी धीरे धीरे समझ में आ गया और अब वह भी वैसे ही करने लगा जैसे परिवार के अन्य सदस्य करते थे एक दिन खाता एक दिन भूख नहीं हैं बोलकर सो सो जाता | कौआ यह निर्णय किया कि आज से मैं अपने लिए दाना चूग कर खुद ही लाऊगा | कौआ एक लम्बी उड़ान भरा वह जाकर एक जंगल में उतरा कुदकते फुदकते आगे बढ़ ही रहा था कि उसको ढे़र सारा अनाज का भण्डार दिखा पड़ा और ढ़ेर सारी सोने चॉदी हिरे जावरात का भण्डार दिखा | कौआ भर पेट दाना चूगने के बाद एक हिरे का हार अपने में दबा कर घर कि तरफ उड़ान भरा हिरे का हार ले जाकर गरीब महिला के सामने रख दिया | गरीब महिला खुशी के मारे उछल पड़ी और हिरे का हार ले जाकर बाजार में बेंच कर ढ़ेर सारी सुख सुविधा की सामान ले आयी | सब मिलकर खुशी से रहने लगे एक परिवार कि तरह अचानक ऑंधी तूफान तेजी से आ गया कौआ सबको घर में ले जाने के लिए कॉव कॉव करता रहा | सब लोग घर में चले गये लेकिन कौआ तूफान कि चपेट में आ कर बाहर रह गया इतनी तेज तूफान थी कि कौआ का प्राण ले गया जब महिला बाहर निकली तो देखी कौआ जमीन पर पड़ा अपना प्राण त्याग दिया था महिला उसे सिने से लगा कर रोने लगी यह कहकर कि एक तूफान मेरे परिवार को खुशहाल बना दिया और एक तूफान मेरे परिवार के सदस्य को ले गया |

    महेश गुप्ता जौनपुरी

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