Few words from Mushaira

mushaira

Saavan 

ये कारवां चले तो, हम भी चलें
ये शम्मा जले तो, हम भी जलें
खाक करके हर पुरानी ख्वाहिश को
इक नया कदम, हम भी चलें……


 

कभी ठहरी सी लगती है,
कभी बहती चली जाती है
जिंदगी है या पानी है
न जाने क्यों जम जाती है


कोई वक्त था, जब एक रब्त चला करता था हमारे दरम्या
गुजर गया वो रब्त, अब साथ बस वक्त चले


मुश्किल है राहें, सूनी है अकेली सी
इस अकेलेपन में साथ तन्हाई चले


 

 

Comments

3 responses to “Few words from Mushaira”

  1. nitu kandera

    Kya bat

  2. Satish Pandey

    जिंदगी है या पानी है
    न जाने क्यों जम जाती है
    वाह वाह

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