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Vinita Shrivastava

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Vinita Shrivastava

@Vinita Shrivastava • Joined Jul 2018 • Active 7 years ago

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by Vinita Shrivastava

बलिदान

August 15, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

लाल लाल है रक्त उनका
लाल लाल मैदान है
याद रखना देशवासी
जिसने दिया बलिदान है

स्वार्थ नहीं था कुछ इनका
ना ही कुछ अरमान थे
भारत माता ,भारतवासी
इन पर ये कुर्बान थे

थे साहसी वीर बाँकुरे
भारत का अभिमान है
याद रखना देशवासी
जिसने दिया बलिदान है

–विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)–

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by Vinita Shrivastava

प्रगति

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

मत डरो विपदाओं से
समझो प्रभु का वास है
विपत्ति में भी दिया है देखो
प्रगति का पावन राज है

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by Vinita Shrivastava

शयम

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

बरस रहा है पतझड़ हम पर
टूट रहे हैं पल्लव
आजाओ अब शीघ्र श्याम
बनकर तुम बहार नव

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by Vinita Shrivastava

सांसारिक सुख

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

ये सांसारिक सुख मैं क्या रखा है
एक नज़र सेवा करके देखो

Comments Off on सांसारिक सुख

by Vinita Shrivastava

वतन

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

तू देश का अनमोल रतन है
बचा के रख इसे ये तेरा वतन है

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by Vinita Shrivastava

अवतार

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

जब जब पड़ा धरा पर , दानवों का भार
तब तब आ गए तुम, लेकर ये अवतार
मिटा दिया भू से, तुमने अनाचार

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by Vinita Shrivastava

त्याग

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

त्याग है एक सम्मान
रहे हमेशा इसका मान

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by Vinita Shrivastava

सुख

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

वो मनुज ही सफल है
जिसने जीवन में सेवा सुख दिया है

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by Vinita Shrivastava

जीवन एक परीक्षा है

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

जीवन एक परीक्षा है जिसमे
सेवा व धैर्य की साधना करनी होगी

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by Vinita Shrivastava

देश

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

देश हमारा फले फूले
सजा रहे ये संसार
वक़्त है अभी बचा लो इसे
खो जाये ये कहीं

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by Vinita Shrivastava

प्रकृति

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

घिरी हैं प्रकृति में,
आनंद की घटाएं ,
हृदयस्पर्शी हैं,
यहाँ की हवाएं,
जी करता है ,
इन्ही में समां जाएं

Comments Off on प्रकृति

by Vinita Shrivastava

ये धरा

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

गगनचुम्बी चोटियां ,
ये नीला अम्बर है,
हिमालय नभ मिल हुए,
खेत श्याम रंग है,
हिमालय का सौंदर्य ,
अति अनुपम है

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by Vinita Shrivastava

ईश्वर

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

ईश्वर ने किया प्रकृति का श्रृंगार
उसने दिया हमें ये अनमोल उपहार

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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by Vinita Shrivastava

मनुजता

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

ऐ मनुज जिस दिवस , मनुजतत्व पाओगे
स्वयं को पा लोगे , जग को अपनत्व दे जाओगे

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by Vinita Shrivastava

खो न जाना

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

आधुनिक है ये दुनिया
खो न जाना तू इसमें
माता पिता एक मोती हैं
खो न देना एक पल में

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by Vinita Shrivastava

सतपथ

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

जाग नर कीमती है तेरा,
छन छन तेरा
चल पड़ा सतपथ पर अब,
रुकना नहीं है काम तेरा

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by Vinita Shrivastava

विलक्षण

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

विलक्षण हैं उसके नियम,
नहीं पता नीति उसकी क्या है
आये हैं हम कहाँ से,
जाना हमें कहाँ है

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by Vinita Shrivastava

मानव

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

मानव तू आया है जिस हेतु जग में
बांध ले तू प्रेम दया का,सेतु जग में

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by Vinita Shrivastava

मृत्यु

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

मृत्युपथ पर जा रहा, वर्षा दो अमियासुधा
रख कर निज नरेतित्व में , माँ रक्षा करो रक्षा करो

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by Vinita Shrivastava

उत्साह

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

मैं निरुत्साहित हूँ,
उत्साह बनकर आओ
मैं असमर्थ,
समर्थ बनकर आओ

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by Vinita Shrivastava

सबका ज़िक्र है

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

वो है तेरे साथ ओ बन्दे,
फिर किसकी फ़िक्र है
जनता है वो तुझे
उसपे सबका ज़िक्र है

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by Vinita Shrivastava

लक्ष्य

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

हो अटल तेरा लक्ष्य
की कभी न डगमगा सके

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by Vinita Shrivastava

राहें

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

सुलगती हुई राहों में ,मेधवान बरसा करो
प्रनतपालिनी माता तुम, रक्षा करो रक्षा करो

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by Vinita Shrivastava

प्यार का मोह है

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

प्यार का मोह है इस दुनिया में
अर्थ न कोई जनता
माता पिता को छोड़ दिया तूने,
मोह के पीछे भागता

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by Vinita Shrivastava

आधुनिक है ये दुनिया

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

आधुनिक है ये दुनिया
खो न जाना तू इसमें
माता पिता एक मोती हैं
खो न देना एक पल में

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by Vinita Shrivastava

सच्ची सीख

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

पतितों का उत्थान हो माँ , सत्मार्ग दिखा,
देकर सद्बुद्धि माँ , सच्चाई की रीत सीखा

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by Vinita Shrivastava

गरीब भूका सो रहा

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

गरीब भूका सो रहा,
अमीर भी है रो रहा
तो फिर सच्चा सुख कहाँ
वो है हरी चरणों में

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by Vinita Shrivastava

अज्ञानी

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

मैं अज्ञानी आत्मा हूँ,
मुझको लख्या देदो
एक सहारा है तुम्हारा
एक बार दरस देदो

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by Vinita Shrivastava

परिवर्तन

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

कर दे परिवर्तन, ऐ तांडव निरतन
न हो अब क्रांति, शांति शांति बस शांति

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by Vinita Shrivastava

संभल

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

देखो निर्मित हो रही हैं
अवगुणो की ये सुरंग
संभल जा ऐ मानव
यही है वक़्त

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by Vinita Shrivastava

अवगुण

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

देखो निर्मित हो रही है, अवगुणो की ये सुरंग
वैभव में मैं रम गया, माया का छह है रंग

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by Vinita Shrivastava

कल्पनाएं

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

संग्राम मय जीवन में आएं बहुत विपदाएं
परोपकर के लिए हो मेरी
हर एक कल्पनाएं

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by Vinita Shrivastava

नीराधा जीवन

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

निराधा इस जीवन को, आज तुम आधा दे दो
इस हृदय के मरुपथ को, आज शीतल धरा दे दो

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by Vinita Shrivastava

ये जीवन

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

एक भरोसा तेरा है,
भूल न जाना सांवरिया
देर करो न तुम हरी
ये जीवन अकेला है

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by Vinita Shrivastava

कांटें भी फूल

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

साथ जो मेरे तुम हो हरी,
तो कांटें भी फूल बनें

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by Vinita Shrivastava

परोपकार

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

परोपकार के लिए हो,
अब मेरी कल्पनाएं
व्यर्थ ही भटक रहे,
चरणों में अब दो विश्राम

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by Vinita Shrivastava

सीप

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

त्रिलोक का अलोक जो,
तुम वो महादीप हो
संसार के सागर में,
तुम ही एक सीप हो

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by Vinita Shrivastava

हर्ष

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

ऐ हिमालय ऐ धरा , यूहीं मुस्कुराते रहें
न हो क्रंदन स्वर, सभी उर हर्षाते रहें
बस छह इतनी , देशहित शहीद होते रहें

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by Vinita Shrivastava

हर्ष

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

ऐ हिमालय ऐ धरा , यूहीं मुस्कुराते रहें
न हो क्रंदन स्वर, सभी उर हर्षाते रहें
बस छह इतनी , देशहित शहीद होते रहें

1 Comment »

by Vinita Shrivastava

भटक रहा हूँ

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

आँधियों से लड़ने में,
मैं तो रहा असमर्थ
लक्ष्य मिला नहीं मुझे,
भटक रहा हूँ व्यर्थ

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by Vinita Shrivastava

समर्थ

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

हे समर्थ संग चलो,
पथ में तुम न छोडो
बनकर डीप चलो,
तिमिर में न छोडो

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by Vinita Shrivastava

माया

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

अब तो अलोक दो , मनुजता दुखित हो रही
मदमोहमाया से मेरी माँ, रक्षा करो, रक्षा करो

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by Vinita Shrivastava

माटी

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

माटी की ये जीर्ण काया,
उस पर ग्रसित मोह माया

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by Vinita Shrivastava

माया

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

अब तो अलोक दो , मनुजता दुखित हो रही
मदमोहमाया से मेरी माँ, रक्षा करो, रक्षा करो

1 Comment »

by Vinita Shrivastava

पूर्ण है विश्वास

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

पूर्ण है विश्वास मुझे,
इस दिवस तुम आओगे

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by Vinita Shrivastava

माँ

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

पथ दिखाके,लक्ष्य दिखती’
है पथ प्रदर्शक माँ

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

Tags: माँ पर कविता, माँ पर कुछ पंक्तियाँ, माँ पर गीत, माँ पर मार्मिक कविता, माँ बाप पर कविता, रुला देने वाली कविता 4 Comments »

by Vinita Shrivastava

जीवन के ये रस्ते

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

काँटों से भरे हुए है,
जीवन के ये रस्ते,
घाव मिलते पग पग पर
लक्ष्य से हैं भागते

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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by Vinita Shrivastava

सांझ दिवस

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

सांझ दिवस और रैन में,
बीएस तुमको ही पुकारा है

सृष्टि के कण कण में,
तुमको ही पुकारा है

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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by Vinita Shrivastava

वीर सपूत

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

सत्य और आदर्श से,
कालिमा चीर दो

बाद चलो वीर सपूत,
धरती के तुम वीर हो

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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by Vinita Shrivastava

मति

July 31, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

लाख मिले जो तुम्हे प्रलोभन,
हो स्थिर मन,स्थिर मति तेरी

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