प्यार पनपता है
November 6, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
प्यार पनपता है….
इक नन्हे पौधे की तरह
खोलकर महीन मिट्टी की परतों को
पाकर चंद बूंदे पानी की
खोलकर अपनी हरी बाहें
समा लेना चाहता है दुनिया को इनमें
मगर कभी कभी रूंध जाता है
दुनिया की आपाधापी में
किसी के पैरों तले|