अजनबी
August 18, 2020 in गीत
आज किसी ने सोये हुये
ख्वाबों को जगा दिया
भूली हुई थी राहें
भटके हुये मुसाफिर को मिला दिया
जिंदगी का फलसफा जो
कहीं रह गया था अधूरा
मुरझाई हुई तकदीर को
जीने के काबिल बना दिया
देना चाहता था मुझे बहुत कुछ
मगर उसे क्या पता था
उसकी चाहत की उसी आग ने
मेरा दामन जला दिया
बस राख के कुछ ढेर बाकी थे
वक्त की तेज़ आंधी ने उनको उड़ा दिया
खाली पड़े उन मकानों में
परछाईयाँ ही तो बस बाकी हैं
वरना हालत के इस दौर ने
सब कुछ मिटा दिया …..