June 25, 2017 in ग़ज़ल

जमाने बीत गए जिनको भुलाये हुए
आजफिर हैं क्यो याद वही आये हुए

कितने बेरुखी से तोड़े थे वो दिल को
दिल के टूकड़ो को हैं हम सम्भाले हुए
सोचते थे न आएगी क़यामत कभी
ये क्या हुआ वो हैं दर पे आये हुए
जिसे छूने की चाहत में उम्र गुज़ार दी
ज़नाज़े को मेरे हैं वही गले से लगाये हुए

जिन्दा था तो तन्हाई ने मार डाला,मौत पे
अपने तो ठीक दुश्मन भी रोते हैं आये हुए
“विपुल कुमार मिश्र”

मुक्तक

May 30, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

यूँ ही रोशनी नही होती,

मोम को जलना पड़ता है

यूँ ही चाहत नही मिलती

इश्क़ की हद से गुज़रना पड़ता है

“विपुल कुमार मिश्र”

 

ग़ज़ल

May 25, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

अक्सर खुशी का रिश्ता ग़म से होता है

इसीलिए हँसी में भी आँख नम होता है

 

मेरे हाल पर हँसने वालों ज़रा गौर करो

वक़्त ही तो है हरदम बदल रहा होता है

सुना है दर्द हद से गुज़रे तो लफ्ज़ होता है

तो लिखो किताब यहां पूरी ग़ज़ल होता है

जिंदगी के फ़लसफ़े से गुजरे तो जाना

जिंदगी है,खेल इसका भी अजीब होता है

 

हर दिल मे कोई न कोई ग़म होता है

खैर छोड़ो सबका अपना राज़ होता है

“विपुल कुमार मिश्र”

#VIP~

 

May 23, 2017 in शेर-ओ-शायरी

तू तो नही पर तेरी कहानी याद आयी

सबको भूले पर तेरी जफ़ा याद आयी

तेरे लिक्खे सब ख़तों को जला दिए

पर तुझपे लिखी वो ग़ज़ल याद आयी

“विपुल कुमार मिश्र”

#VIP~

मुक्तक

May 23, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

गुमशुम,मदहोश,खामोश कहाँ रहते हो

वो क्या कहते है,हाँ मोहब्बत में रहते हो

वो सुर्ख होंठ,क़ातिल नज़र बला की अदा

एक दीद में क़त्ल का सामान रखते हो

“विपुल कुमार मिश्र”

#VIP~

ग़ज़ल

May 22, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

वो लोग भी एक खास ही जगह रखते है

जो वक़्त पर मेरे सामने आईना रखते है

 

कोई क्या लगाएगा मेरे वफ़ा का अंदाज़ा

हम तो दिल भी किसी के पास रखते है

 

गर देखना हो कभी अश्क़ों की सुनामी तो

दरिया क्या हम समंदर भी आँख में रखते है

 

तुझे लिखने का गुनाह तो अब कर दिया है

सज़ा दो कदमो में तेरे पूरी ग़ज़ल रखते है

“विपुल कुमार मिश्र”

#VIP~

मुक्तक

May 21, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

आज भी मुझमे कही तुम रहते हो

मै तो अनपढ़ हूँ, तुम लिखते रहते हो

धड़कनो के सुर पे जब साज़ लगते है

मै तो खामोश होता हू तुम गाते रहते हो

#VIP~

May 21, 2017 in शेर-ओ-शायरी

इश्क़ का मज़ा तो सिर्फ बिछड़ने से आये

वो आशिक़ी ही क्या जिसमे शादी हो जाये

‘विपुल कुमार मिश्र

May 21, 2017 in शेर-ओ-शायरी

चलो दर्द में भी मुस्कुराते हैं

यादो के साथ टकराते है

तुम आओ तो सही

मिलकर दर्द को आंख दिखाते है

#VIP~

May 21, 2017 in शेर-ओ-शायरी

अक्सर हंसी का रिश्ता ग़म से होता है

इसीलिए खुशी में भी आँख नम होता है

#VIP~

ग़ज़ल

May 20, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

तेरे दुआओं में असर देखना है
अब तो ज़हर पी के देखना है
तन्हाई में बहुत बसर कर लिए
अब तो महफिलों में तन्हा देखना है
कहते थे कि मर जायेंगे भूलकर तुम्हें
अब तो बस उन्हें मरते हुए देखना है
ये स्याह रात,जाम और उनकी याद
अब तो अश्क़ को लफ़्ज़ों में देखना है
तेरी याद लिखने के सब सामान लायी है
अब तो बस ग़ज़ल बनते हुए देखना है
“विपुल कुमार मिश्र”
#VIP~

ग़ज़ल

May 20, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

ग़म को आराम नही होना चाहिए
अब तुम्हें हार ऐलान करना चाहिए
अपने साये को खुद पत्थर मारेंगें
शर्त है कि दोस्त खुश होने चाहिए
दिल,वो भी खाली क्या बात करते है
इश्क़ न हो,दुश्मनी जरूर होनी चाहिए
ये दुनिया वाले भी अजीब होते है
अकेले तो है पर व्यस्त होने चाहिए
#VIP~

May 20, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

ख़्वाहिश है कि कोई ख़्वाहिश न रहे
लौट आओ की अब हम – हम न रहे
#VIP~

May 16, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

उनके के होंठो से लफ्ज़ चुराकर

उनके ही कानो तक पहुचाया है

और वो पूछते है ….

आपके शब्दों में दर्द कहा से आया है

#VIP~

मुक्तक

May 13, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

ये पूनम की रात भी बड़ी अजीब होता  है

पास इसके भी किस्से कई महफूज होता है

कुछ हसीं तो कुछ दर्द – ऐ – गम होता है

क्या करे रातो में ही दीदार-ऐ-चाँद होता है

 

“विपुल कुमार मिश्र”

May 11, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

ये बरसात भी मुझसे कुछ कह रही है

मै ही नही मेरी याद में वो भी रो रही है

ग़ज़ल

May 7, 2017 in ग़ज़ल

ये मदहोश शाम और तन्हाई का आलम

अपनों के बारे में न सोचते तो क्या सोचते

 

करीब-ए-मर्क़ है फिर भी अकेले इसलिये

खबरी के बारे में न सोचते तो क्या सोचते

 

हुआ कभी जो गुमाँ दर्द ने सँवारा है,तो

उस फ़रिश्ते को न सोचते तो क्या सोचते

 

ठोकर खाया था राह-ए-जिंदगी में तो

दिल-ए-पत्थर न सोचते तो क्या सोचते

#VIP~

‘विपुल कुमार मिश्र’

May 4, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

 पागल,आशिक़,आवारा ही रहा

आइनों के हर टुकड़े में मै ही रहा

तू ने बेवफाई की इन्तहां कर दी

मै की तेरे साथ वफादार ही रहा

…..

#VIP~

मुक्तक

May 2, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

चाँद से गुफ़्तगू में सितारे गिनते रह गए

हम तो मोम थे रात भर जलते रह गए

बस यही एक भूल हमसे सरेआम हुई

भूलना था तुम्हे हम की याद करते रहे गए

#VIP~

विपुल कुमार मिश्र की कलम से

April 27, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

आँख की कीमत आशुओं से है

और दर्द ने दिल को दिल बनाया है

हम तो रह जाते सीधे-सादे ही

दोस्तों ने हमे भी मतलबी बनाया है

#VIP~

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