आ गया सावन देखो साथ,सात रंगों को लेकर हरियाली और खुशहाली बिखरी हुई है कण कण पर -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
आ गया सावन देखो साथ,सात रंगों को लेकर हरियाली और खुशहाली बिखरी हुई है कण कण पर -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
दिन दिवस ,रैन अँधेरी दुष्प्रवत्तियाँ हैं घनेरी मुझको प्रकाश दिखला दो, अपना हाथ बड़ा दो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मेरी चादर का,मैल हटा दे माया मोह की,फांस मिटा दे आये जग मैं क्यों,वो मकसद बता दे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मेरे गुरुवार,मन का दिया जला दो ठहर ठहर जाते मेरे पग, मुझको पंथ दिखा दो, मन का दिया जला दो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
विवेक संयम नियम अनुशासन सही मार्ग गुरु से मिले, वो करे जीवन मैं शासन -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
सोई हुई चेतना को, आप गुरुवार जाग्रत करदो मन की इस मरुस्थल मैं, स्नेह की बरसात करदो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
वरदहस्त रख दे,सर पे तो मुझको चैन मिले तू बैठा है अंतर मैं कब तुझसे नैन मिले -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
आईने को देख कर,ठहर जाता हु में कहता है जो आइना,सहज जाता हु मैं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जख्म ज़माने से मिले, जुल्म के, आलम मिले है वक़्त की पाबंदियां बिखरे न कोई आशियाँ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
फिक्र किसी को नहीं किसी की, है ऐतराज सभी को औरों से क्या लेना,रखना अपनी बात सभी को -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जिसके पास ज़मीर है, वह मनुज ही अमीर है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कविता,अस्त्र है,शाश्त्र है तलवार है होगा परिवर्तन, यह विचार है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
हे मनुज तू स्वच्छंद नहीं है अब तू पाबंद फिर क्यों है तू मंद हे मनुज तू स्वच्छंद -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मिला है जो तुमको अवसर, न उसको व्यर्थ गवाना अर्थ जीवन का है यही की, खो कर फिर है कुछ पाना -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
तुझको अपने सिरहाने रख सोता हूँ, मैं तुझ संग ही अपने सपने बोता हूँ।। राही (अंजाना)
इंतज़ार के बाद मिलने का मज़ा आ गया, सुबह दरवाजे पर मेरे उसका तार आ गया।। राही (अंजाना)
बारिश में नहाये तो हम सभी थे मगर, जिनके उतरने थे सारे रंग उतर गए।। राही (अंजाना)
उसके चेहरे को देखकर मैं दीवाना हो गया, मेरी छोड़ो आइना भी उसका दीवाना हो गया।। राही (अंजाना)
कोई दवा कोई दुआ काम न आई, आँख जब बन्द की तो सामने माँ आई।। राही (अंजाना)
यार इसमें तो मज़ा ही नहीं, कोई हमसे खफा ही नहीं, इश्क है मर्ज़ है दोस्त, इसकी कोई दवा ही नहीं।। राही (अंजाना)
हाथों की लकीरों में तेरा नाम नही देखा तो, लेकर कलम हाथों में खुद ही तेरा नाम लिख लिया।। राही (अंजाना)
तुमसे अपने आंसू छिपाने पड़ते हैं, मुझको तो लाख बहाने बनाने पड़ते हैं, तुम्हे तो मुझे हंसते हुए देखना है, मुझको तो गम भी ठिकाने लगाने पड़ते हैं।। राही (अंजाना)
मन करता है सपने जो देखूं, मैं सच में उनसे मिल जाऊं, मन करता है पढ़ लिखकर मैं अपने, माँ पापा से आगे बढ़ जाऊँ, मन करता है डर को जीतूँ, इस दुनियाँ से मैं […]
मोहरे बड़े होकर भी पीछे खड़े रहते हैं, बिसात पर सैनिकों का ओहदा ज़रा हटके है।। राही (अंजाना)
मुमकिन नहीं के किसी की तकदीर खरीद ले कोई, बादशाह कितना भी बड़ा हो इस शहर का कोई।। राही (अंजाना)
पत्थरों को चीर कर रस्ते बना लेता है, जब पानी अपनी सारी हदें मिटा देता है।। राही (अंजाना)
मन करता है पढ़ लिख कर मैं, माँ पापा का नाम कराऊँ, मन करता है सपनों को देखूं, आसमान में मैं उड़ जाऊं, मन करता है डर को जीतूँ, इस दुनियाँ से मैं लड़ जाऊं, […]
मेरी आँखों की पलकों पर तेरी यादें बसती हैं, इस डर से इनको झपकाने से डरता हूँ मैं।। राही (अंजाना)
मेरी आँखों की पलकों पर तेरी यादें बसती हैं, इस डर से इनको झपकाने से डरता हूँ मैं।। राही (अंजाना)
उसको समझना बड़ा मुश्किल होने लगा, कोई भी बहाना न उस पर चलने लगा, छोटी से न जाने कब बड़ी हुई मेरी बेटी, के अब चिंता में ये बाप हर दम डरने लगा।। राही (अंजाना)
एक तिनका भी उड़ा जाती है, जब हवा मूड बना जाती है, मिलती नहीं जब खबर यार की, तब उसकी तबियत बता जाती है, राही (अंजाना)
जिसको जैसे समझ आये समझाना पड़ता है, एक शिक्षक को बड़ा दिमाग लगाना पड़ता है, बहुत शरारत करते हैं जब, बच्चे मन के सच्चे हैं जब, गुरु ज्ञान की महिमा को फिर सबको दिखलाना पड़ता […]
Bhar gaya h man jhuti baton k meethe swad se ! Sach suna de koi to tavyat sudhar jaye !!
कितना भी पढ़ लूँ मगर भूल ही जाता हूँ, तेरे चेहरा मुझे किसी किताब से कम नहीं लगता।। राही (अंजाना)
कितना भी पढ़ लूँ मगर भूल ही जाता हूँ, तेरे चेहरा मुझे किसी किताब से कम नहीं लगता।। राही (अंजाना)
जबसे ज़िन्दग़ी में आप मिल गये हैं। रास्ते मंज़िल के फ़िर से खिल गये हैं। जागे हुए पल हैं ख़्वाबों के नज़र में- ज़ख्म भी जिग़र के जैसे सिल गये हैं। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
जबसे ज़िन्दग़ी में आप मिल गये हैं। रास्ते मंज़िल के फ़िर से खिल गये हैं। जागे हुए पल हैं ख़्वाबों के नज़र में- ज़ख्म भी जिग़र के जैसे सिल गये हैं। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
क्यो कुचलते हो परतीभा के परतीभाओ को, चंद पैसो के लिए तुम्हारे घर खुशी जाती पैसो की,, यहाँ परतीभा वाले बच्चे की लाशे मिलते नदी या रेल किनारे मे,, क्यो कुचलते हो चंद पैसो के […]
बारिश की चन्द बूंदों ने मेरा घर ढूंढ ही लिया, भिगाया मुझे और मेरे एहसासों को चूम ही लिया, सूखा पड़ा था मेरे आँगन का जो कोना कभी, आज मेरे दिल संग मन का आँचल […]
गुफ्तगू बन्द न हो, बात से बात चले, मै तेरे साथ चलूँ, तू मेरे साथ चले, तुझे देखूं तो दिल जले, न देखूं तो ये जान जले, काश तेरे संग मेरे जीवन की, सुख दुःख […]
जो आँखों से बयाँ होते हैं, वो लफ़्ज़ों में कहाँ होते हैं, गुफ्तगू ख़्वाबों में करने वाले, सुना हकीकत में जवाँ होते हैं, मोहब्बत का काजल लगाने वाले, सच कहूँ रौशनी की ज़ुबा होते हैं॥ […]
गुफ्तगू बन्द न हो, बात से बात चले, मै तेरे साथ चलूँ, तू मेरे साथ चले, तुझे देखूं तो दिल जले, न देखूं तो ये जान जले, काश तेरे संग मेरे जीवन की, सुख दुःख […]
दाने दाने को तरसे क्यों जो बीज यहाँ पर बोए, अपने ही बच्चों की खातिर क्यों वो भूखा सोए, अपनी मेहनत का वो क्यों न उचित मूल्य पिरोये, सपनों में रंग भरने को वो क्यों […]
न तन पर कपड़े न पैरों में चप्पल का होश होता है, ये बचपन बस अपने आप में मदहोश होता है, इच्छाओं की दूर तलक कोई चादर नहीं होती, बस माँ के आँचल में सिमटा […]
तुम्हारी एक मुस्कान से सुधर गई तबियत मेरी, बताओ ना तुम इश्क़ करते हो या इलाज करते हो।
मार्गदर्शन तुम्हारा सब follow करें, हर समस्या में ध्यान तुम्हारा धरे। भागने की जरूरत नहीं है कहीं, सारी knowledge ले सकते हो घर बैठे ही। बस मन से धरो इनका ध्यान, गुरु google है सबसे […]
मैं कुछ कहता नहीं वो सब जान लेती है, सच महबूबा नहीं है कोई वो माँ है मेरी।। राही (अंजाना)
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