काल कलवित काल में, मशाल जो जलाएगा वन्दन अभिनन्दन है उसका, वह वीर कहलायगा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
काल कलवित काल में, मशाल जो जलाएगा वन्दन अभिनन्दन है उसका, वह वीर कहलायगा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
श्वेत माँ का आँचल है, दाग नहीं लगने देना निर्दोषों का रक्त,बहे का कभी भारत का मान सदा रखना -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
पर्वत से भाल, नदियों की चाल ये तरु विशाल, मन मेरे बसे हैं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मेरा देश प्रेम,मन है बेचैन कब शांति सन्देश मिलेंगे माटी से प्रेम, इसकी सुगंध में रमे हैं होऊं निहाल, जब भारत दर्श किये हैं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
क्या कभी विजय नहीं देखी, जो इतना घबराते हो जिसमे कवि का गुण नहीं, और कवि कहलाते हो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
न छेड़ना ऐ अरि तू नहीं तेरी खेर नहीं, मैं हूँ शांत चित्त, तुझसे मेरा बैर नहीं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जग मैं आया क्या करने, ऐ भी मानव भूल गया स्वार्थ हेतु,पथ भ्रष्ट हो, कितना स्तर गिर गया जग मैं आया क्या करने, ऐ भी मानव भूल गया -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
साहित्य सृजन इक, विश्व प्रेरणा होती है मिले प्रेरणा हर शब्द से, वो कविता ही माला होती है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
अकारण ही मनुज, क्यों मनुज से जलता है विजय पाने की होड़ मैं, विचारों से गिरता है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मैं तूफाँ नहीं, क्यों मुझसे डरते हो ईर्ष्या मैं क्यों, जल जल कर मरते हो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
चल कहीं नदिया किनारे, प्रिय नयन,सुन्दर चितवन नैनों में दमके,तेरे काजल है मेरा मन ऐ पागल जब बजती तेरी पायल झूमे जहाँ बस चाँद तारे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
चन्दन का वन हो, प्यारा मधुबन हो विष धार ,न विषम हों श्रष्टि में सम हों चन्दन सा वन हो प्यारा मधुबन हो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
तुम साज दो,में स्वर मिलाऊ आवाज़ दो ,संग संग आ जाऊँ लहर लहर आभास तेरा कश्ती दो तो पार हो जाऊँ तुम साज दो,में स्वर मिलाऊ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कहाँ चला अलबेला मन तू, बेस जिया में,पिया हमारे इन प्रिय को,जग में न खोजो, बसी नयन सुरतिया प्यारी कहाँ चला अलबेला मन तू -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
त्रिकोण से हैं रास्ते जिस रास्ते तू जायगा, फलित होंगे कर्म वैसे जिस रास्ते तू जायगा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
सांझ हुई,दीपक जलाओ आयंगे प्रियतम तुम्हारे हैं अँधेरे पंथ में जो है वही चांदनी हमारी सांझ हुई दीपक जलाओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
है प्रभु विनती हमारी मार्ग दो संसार को है निशा जहाँ जगती पर प्रकाश दो संसार को तुम हो नाथ अनाथ के सानिध्य दो संसार को है प्रभु विनती हमारी सार दो संसार को -विनीता […]
है प्रभु विनती हमारी मार्ग दो संसार को है निशा जहाँ जगती पर प्रकाश दो संसार को -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
सुना है इश्क की बजार खुली है मेरे शहरो मे, जो जहजे दिल के आदमी है उनके लिए नया आँफर लाया है मेरे शहरो ने। अब मेरे शहरो मे कोई इश्क से बीमार नही मिलेगा […]
बंजर भुमी मे बीज नही बारूद बोयेगे कह दो अब दुश्मन से हाथ जोड़ेगें नही बार करवायेगे✍✍ – ज्योति
✍✍✍काश मेरे मुल्क मे ना जाती ना धर्म होती , शिर्फ एक इंसायनित की नाम होती,, तो दिल्ली मै बैठे गद्देदार की रोटी नही सिझती। रामायण और कुरान मे भेद बताकर अपनी रोटी सेकते है […]
अपनी छाया में भगवन, बिठा ले मुझे (२) मैं हूँ तेरा तू अपना बना ले मुझे (२) अब मुझे गम का गम, ना ख़ुशी की ख़ुशी (२) है अंधेरा भी मेरे लिये रोशनी मैं जीयूं […]
✍✍ मत करना प्यार आज की युवती से, प्यार नही सौदा करती आज की युवाओ से, पैसा- को महत्व देती वो ना देगी प्यार , वादे तो बहुत होगी पर पैसा लेगी हजार, पैसा- पैसा […]
क्यों तुम शमा-ए-चाहत को बुझाकर चले गये? क्यों तुम मेरी ज़िन्दग़ी में आकर चले गये? हर ग़म को जब तेरे लिए सहता रहा हूँ मैं- क्यों तुम मेरे प्यार को ठुकराकर चले गये? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
✍✍इतना जगह दिया तुझे दिल की फुलवारी मे, तु दो खुदगर्ज निकली तोड़ ली सारी फल और झकोर दी मेरी कोमल सी फुलवारी।✍✍✍ – ज्योति
किसी ने पूछा, दिल की खूबी क्या है, हमने कहा, हजारो ख्वाहिशों के नीचे दबकर भी धड़कता है
मुझे मंजूर नहीं है १६ जुलाई २०१८ जग में अपने अस्तित्व को लेकर मैं हैरान हूँ इस जीवन का उद्देश्य क्या है, मैं अनजान हूँ आखिर मेरा जन्म हुआ क्यों है मैं परेशान हूँ तेरा […]
कुर्सी की चाहत बचपन ऐ दिल में सजाये बैठे हैं, शतरंज के सारे मोहरे अपनी मुट्ठी में दबाये बैठे हैं, इरादे किसी शीशे से साफ़ नज़र आते हैं के हम, ख़्वाबों की एक लम्बी फहरिस्त […]
आजतक सूरज कितने अच्छे बुरे अनदेखे पलों का साक्षी है पर उसकी चाल, उसके कर्म पर कभी कोई फर्क नहीं आया हर सुबह उसी ऊर्जा और, उसी शक्ति के साथ निकलता है बिना किसी भेदभाव, […]
ज्योति
ज्योति
तुझे देखने की आश लगा बैठा हूँ, तुझे पाने की आरजु दिल मे सजा बैठा हूँ,, कौन से दिन आयेगें मिलन की पंडितो से दिखाकर बैठा हूँ।। ज्योति
मेरी उजड़ी हुई घर को बसायेगा कौन, माँ ! जब तु ही नही रही बहु लयेगा कौन। ज्योति
चल जिन्नदगी के पन्ने मे तेरा नाम लिखता हूँ, तुम्हारे साथ जीने मरने का वादा अदालत मे गीता मर हाथ रख कर कहता हूँ।। ज्योति
मेरे उजड़ी हुई फुलवाड़ी ,(बाग) देखकर मत हँसना यारो,, बागीयो ही ने उजाड़ा है यारो।
नजर प्यासा -प्यासा सा है, तुमहे देखने के लिए,, सुना है तुम्हारी मेहदी रचाने वाली है किसी दुसरे नाम की।। ज्योति
सपनो तो बहुत देखे थे ,, तुम्हारे हाथ मे हाथ डालकर, तु ही तो खुदगर्ज निकली किसी के हाथ पाने के बाद।।
काश अगर मै जानवर से दिल लगाया होता, मेरे साथ भले वो वादे जीने और मरने की नही करती,, लेकिन दुम हिलाया होता।।
Umar hai choti,khawhishe jada hai. zindgi ye bta,ab tera kya irada hai.. siyah hai kam,panne jada hai. khawhishe kuch aur, likhne ka irada hai.. zindgi ye bta ,ab tera kya irada hai….. rasten hai lambi […]
इतनी खुद्दारी थी मुझमें के भिखारी हो गया, हर रिश्ता जैसे मुझपर ही भारी हो गया, संबंधों की सारी फहरिस्त झूठी निकली, एक जानवर जब मेरे जीवन की सवारी हो गया॥ राही (अंजाना)
शतरंज की बिसात का वो मोहरा हूँ मैं, जो आखरी खाने पर पहुँच वजीर बन जाता है।। राही (अंजाना)
जीत और हार के डर से आगे निकल आया हूँ, मैं राही अपने ही सपनों से आगे निकल आया हूँ।। राही (अंजाना)
कोई गवाह कोई सबूत नहीं मिलेगा तुम्हें, मोहब्बत ख्वाबों में जो जवान हुई है मेरी ।। राही (अंजाना)
वक्त की जंज़ीर भला मुझे बांधेगी कैसे, मैं तो पानी हूँ पत्थर भी चीरे हैं मैने।। राही (अंजाना)
ख़ामोशी की कीमत एक दिन मुझे समझ तब आई, जब वो मुझसे कहती गई न हुई मेरी सुनवाई।। राही (अंजाना)
अपने ही अपनों को काटने को बैठे हैं, यहां इसांन जानवर से भी बड़े दांत लिए बैठे हैं।। राही (अंजाना )
A small hole can Sink a lofty boat in water, But a smart idea can float u on water…. Rahi
अँधेरे सभी मिटाने को अब दीपक स्वयं जलाने होंगे, मन के मैल मिटाने को अब प्रेम के रंग चढ़ाने होंगे।। राही (अंजाना)
Diamond can only reflect on a face of women but can’t change anything but Time has the power to convert an unknown stone into a precious diamond.. Raahi
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