झंकार उर में मात कर दो, माँ वीणा पाणी वर दायनी हैं अवगुण जहाँ, हुंकार भर दे अज्ञान तम दूर भागे, मेरे सर पे हाथ रख दो झंकार उर में मात करदो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

मैं हार कर भी तेरी कहानी की तरह हूँ। मैं हार कर भी तेरी निशानी की तरह हूँ। मैं ठोकरें खाता रहा हूँ उम्र भर लेकिन- मैं जोशे-ज़िन्दग़ी में ज़वानी की तरह हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

गिल्ली डंडे के खेल पुराने हो गए, कंचे के काँच दिखे जमाने हो गए, भरे रहता था आसमाँ जिन पतँगों से कभी, अब ज़मी पर बच्चे भी निराले हो गए।। राही (अंजाना)

हे वेद-पुत्र,हे देव-पुत्र सुचि संकल्प निराले हे वसुधा के प्यारे है विपदा भारी जहाँ बने अबिलम्ब सहारे बिगड़े काज बना दे सुचि संकल्प निराले -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

पैदा कर मोहे माँ मेरी ने दुनियाँ देयी दिखाई, मैं मूरख मुझको माँ की न ममता समझि में आई, दूर सफर में चलत मोहे जब कछु न दिया दिखाई, तब बचपन की एक शाम अनोखी […]

पैदा कर मोहे माँ मेरी ने दुनियाँ देयी दिखाई, मैं मूरख मुझको माँ की न ममता समझि में आई, दूर सफर में चलत मोहे जब कछु न दिया दिखाई, तब बचपन की एक शाम अनोखी […]

छोड़ कर घरबार अपना, सीने पर गोली झेली बहा के अपने रक्त को, बचा ली मांगों की रोली खेल सकें हम सब होली, सीने पर झेली गोली -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

शिव की पूजा करते हो , शक्ति की करते हो हत्या समाज देश पर आती है, नित नयी विपदा मान रखो नारी का, नारी सम्मान करो मत मारो गर्भ में इसको, धरती पर कन्या आने […]

दुर्गा काली लक्ष्मी का, शिव ने भी सम्मान किया नतमस्तक होकर शिव ने, इनको ही प्रणाम किया शिव ने ही नारी को, शक्ति का है नाम दिया -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

कान्हा ओ कान्हा, मेरा भी माखन चुरा ले माखन चुरा के कान्हा प्यारे, चित भी मेरा चुरा ले जो हो मन में मेरे विकार, इनको भी तू चुरा ले -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

प्रेम की डोरी से,यशोदा की लोरी से बंध गए नन्द किशोर छल कीन्हे बड़े कान्हा,प्यारी मईया से, बहुत प्रेम है इनको, ग्वाल औ गैया से माखन चोरी से,ब्रज की होरी से बंध गए नन्द किशोर […]