पन्ने ज़िन्दगी की किताब में जोड़ने पड़ते हैं, अपने हिस्से के किस्से खुद ही लिखने पड़ते हैं, छोड़कर कई बार रास्तों को सफर में, हाथ किताबों से मिलाकर दोस्त छोड़ने पड़ते हैं।। राही (अंजाना)

मैं अपनी तमन्नाओं पर नकाब रखता हूँ। मैं करवटों में चाहत की किताब रखता हूँ। जब भी क़रीब होती हैं यादें ज़िन्दग़ी की- मैं दर्द तन्हाई का बेहिसाब रखता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

खेल खेलने को बहुत कुछ जुटाते हैं हम, कुछ न कुछ सोंच के कुछ तो बनाते हैं हम, जिंदगी के सागर में नसीब पानी नहीं हमें, तो मजबूर होके कचरे की नाव चलाते हैं हम।। […]

बिन निज भाषा के ज्ञान के बजे ना कोई बीन, अंग्रेजी जो भी पढ़े होवे हिय से हीन, संस्कारों की खेती अब न कर पाये कोई दीन, हिन्दी को अपनी कोई ले न हमसे छीन।। […]

मैं तुमको अपना मित्र बना लूँ क्या? मैं तुमको अपने दिल की हर बात बता दूँ क्या? कोई तो इशारा कर दो एक बार, मैं तुम्हें अपने दिल में बसा लूँ क्या? राही (अंजाना)

किसी चीज को ठोकर मारना हमारी संस्कृति नहीं है यही वजह है हम फुटबॉल में विश्व चैंपियन नहीं है लेकिन हम एक दूसरे की टाँग खींचने में माहिर है इसीलिए हम कबड्डी में विश्व चैम्पियन […]

कंकड वाले रास्ते हो ,या हो साफ रास्ते, सफर को पुरा करने के लिए अरमान बाँकी है। बाँध लिया कफन तेरे नामो की माथे पर ,, तेरे सफेद हाथो मे मेहदी लगाने का ख्वाइश अभी […]

औरत की बेफिक्र चाल, धक् सी लगती है किसी को औरत की हँसी, बेपरवाह सी लगती है किसी को औरत का नाचना, बेशर्म होना सा लगता है किसी को औरत का बेरोक टोक यहाँ वहाँ […]

स्वैत आँचल को तेरे चेहरे से छिटकते देखा है बरसात के बाद चटक धूप मैं तुझे खिलते देखा है सुआपंख साड़ी को तेरे तन से लिपटते देखा है वो भीनी-भीनी,वो सोंधी-सोंधी खुशबू तेरे तन की […]

जो कभी किया ही नहीं वो वादा याद आया, मुझको तेरी गली से निकला तो वो इरादा याद आया, न मन्दिर न मस्ज़िद थी राह में मेरे कोई, फिर सर झुका तो तेरा चेहरा याद […]

यूँ तो हर एक नज़र को किसी का इंतज़ार है, किसे दिख जाये मन्ज़िल और कौन भटक जाए, कहना कुछ भी यहाँ दुशवार है, एक ही नज़र है फिर भीे पड़े हैं पर्दे हजार आँखों […]

चाँद से चांदनी और तारों से उनके घर का पता पूछते हैं, चलो एक बार फिर से उनके इंकार की वजह पूछते हैं, दिल लगाया ही था तो मुकर क्यों गए, आओ उनसे मिलकर उनके […]

कचरे की गठरी लेकर मुझको चलना पड़ता है, हर कदम पर मुझको बहुत सम्भलना पड़ता है, पैरों पर चुभते कंकड़ भी मुझको रोक नहीं पाते, जब रोटी की खातिर घर से मुझको निकलना पड़ता है, […]

कदम दूसरों के लड़खड़ाकर खुद की अकड़ कायम रखती है, ये वो शराब की बोतल है जो अपना रुतबा कायम रखती है, भुला देती है खून के रिश्ते जितने हों गहरे सारे, पर ये बोतल […]

खून का हर एक कतरा , वतन के नाम कर देंगे। वतन की मिटटी का ये जिस्म, वतन पे कुर्बान कर देंगे। कोशिशे तुम लाख करो गद्धारों, हर कोशिश को हम नाकाम कर देंगे। कोई […]