है लाख सितम ढाहे, ऐ जिंदगी,
शिकवा करूं मैं किससे किससे,
मिलता नहीं सभी को जन्नत,
सुख दुख दो पहलू हैं जिंदगी के,
है आरजू पाने की जन्नत
तो पार कर लेते हैं आग का दरिया,
न कर भरोसा नसीब का,
जाने कब किसी को दे देती है धोखा,
मेहनत ही सच्चा साथी है
जो हर पल निभाता साथ है तेरा,
मिल जाती है अपनी मंजिल,
गर मेहनत हो सच्चा सच्चा |
Shikva
Comments
12 responses to “Shikva”
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Nice
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Thanks
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सुन्दर रचना
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Thanks
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गजब
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Thanks
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Good
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Thanks
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Nice
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Thanks
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Sundar
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बहुत सुन्दर रचना।
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