Shikva

है लाख सितम ढाहे, ऐ जिंदगी,
शिकवा करूं मैं किससे किससे,
मिलता नहीं सभी को जन्नत,
सुख दुख दो पहलू हैं जिंदगी के,
है आरजू पाने की जन्नत
तो पार कर लेते हैं आग का दरिया,
न कर भरोसा नसीब का,
जाने कब किसी को दे देती है धोखा,
मेहनत ही सच्चा साथी है
जो हर पल निभाता साथ है तेरा,
मिल जाती है अपनी मंजिल,
गर मेहनत हो सच्चा सच्चा |


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12 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 14, 2019, 8:21 pm

    Nice

  2. Abhishek kumar - December 14, 2019, 8:27 pm

    सुन्दर रचना

  3. Amod Kumar Ray - December 15, 2019, 4:08 am

    गजब

  4. Abhishek kumar - December 15, 2019, 1:29 pm

    Good

  5. Pragya Shukla - December 16, 2019, 2:52 pm

    Sundar

  6. Anil Mishra Prahari - December 19, 2019, 11:56 am

    बहुत सुन्दर रचना।

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