
Tag: couplets
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“जुदा” #2Liner-61…….
ღღ__इसमें कोई शक नहीं, कि तुम सबसे जुदा थे “साहब”;.मगर ऐसा भी क्या जुदा होना, कि हमसे ही जुदा रहो!!…..#अक्स.
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कोई बद्दुआ करे!!#2Liner-60……
ღღ__तू गर नाराज़ है मुझसे, तो रह, खुदा करे;.मैं भी चाहता हूँ मेरे हक़ में, कोई बद्दुआ करे!!……#अक्स. -
“शौक-ए-दीदार” #2Liner-59……
ღღ__इबादतगाह भी जाऊं तो, तुझे ही ढूँढती हैं नज़रें;.शौक-ए-दीदार ने तेरे, मुझे काफ़िर बना दिया !!…..#अक्स.
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“खत” #2Liner-58…..
ღღ__आखिर इसमें उनकी, खता भी क्या है साहब;.जब मोम सा दिल रखोगे, तो दुनिया जलाएगी !!……#अक्स.
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“तौबा साहब, तौबा” #2Liner-56…
ღღ__वो इक पल जिसमें तुम्हारे लब हों, मेरे लबों के पास;.उस वक़्त भी हम रहें शरीफ?? “तौबा साहब, तौबा” !!…..#अक्स.
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“तुमसे गले मिले हुए” #2Liner-56
ღღ__यूँ तो अरसा हुआ है साहब, तुमसे गले मिले हुए;.पर जिस्म मेरा आज भी, इत्र-सा महकता है !!……#अक्स.
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“याद” #2Liner-55
लो आ ही गयी साहब, उनकी याद, आज फिर आखिर;
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और वो आज फिर नहीं आये, इतने इंतज़ार के बाद !!…..#अक्स -
“ख्वाब” #2 Liner-54
ღღ__आँखों को ख्वाब की, इस कदर भूख है साहब;.जैसे लगता है ख्वाब में, “तुम” आ ही जाओगे!!…..#अक्स.
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“इन्तेहा” #2Liner-53
तसव्वुर में तेरे, अब तो कटती नहीं रातें;
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आखिर तेरे इंतज़ार की, कोई इन्तेहा तो हो!!….#अक्स -
“रस्ता”……#2Liner-52
ढूंढने से ही मिलता है, पर रस्ता ज़रूर होता है;
जो महँगा होता है कभी, वो सस्ता ज़रूर होता है!!…..#अक्स
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“ख्वाहिश” #2Liner-51
ღღ__ख्वाहिश है इश्क की, और वो भी सुकून के साथ;.तुम भी ना साहब, कभी-2 अच्छा मजाक करते हो !!……#अक्स.
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“यादें” #1Liner-50 ….
ღღ__दिल तो करता है कभी-2, तेरी यादों को ज़हर दे दूँ साहब;.फिर सोंचता हूँ, भला ये भी, कोई उम्र है ख़ुदकुशी करने की!!….#अक्स..
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” हार बैठा हूँ !” #2 Liner- 49
ღღ__अक्सर खुद ही खुद से बाज़ियॉं, खेलता रहा साहब;.डर तो अब लगता है, जब खुद को हार बैठा हूँ !!…..#अक्स.
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“अक्स” #2 Liner-48
ღღ__कशिश आज भी वही है, और शिद्दत भी वही है “साहब”;.महज़ ख्वहिशों का तेरी, “अक्स” बदला हुआ सा लगता है!!……#अक्स. -
“फर्क” #2Liner-47
ღღ__आज भी तुमको, झूठ बोलना नहीं आता “साहब”;.कि ठीक होने में, और कहने में बहुत फर्क होता है!!……#अक्स.
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“सज़ा”#2Liner-46
ღღ__सज़ा में एक ही लफ्ज़ है, तेरे हर इक गुनाह का मेरे पास;.कि तुम इतने मासूम हो साहब, जाओ “माफ” किया तुम्हें!!……#अक्स..
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“खुशबू” #2Liner-45
ღღ__मेरे होंठों पे आज भी, कायम है तेरी खुशबू;.इनपे भला शराब का, अब असर कहाँ होगा !!…….#अक्स.
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“सुकून” #2Liner-44
ღღ__कब तलक भटकोगे आखिर, महज़ सुकून की तलाश में;.ये वो शै है “साहब”, जो शायद तेरे नसीब में ही नहीं !!……#अक्स.
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“आरजू” #2Liner-44
ღღ__आरजू मौत की नहीं लेकिन, अब जी के भी क्या करना है;.ज़िन्दगी जी भर के यूँ जी है, कि अब ‘जी’ भर गया शायद!!…..#अक्स..
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“मौत” #2Liner-43
ღღ__मौत को भी आखिर, गुमराह कब तलक करते;
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ज़िन्दगी छोड़ दी हमने, हर लम्हा तुम्हारा करके !!…….#अक्स -
“नींद” #2Liner-42
ღღ___हाँ ये सच है की हम जागेंगे, उम्र-भर तन्हा तेरे बगैर;.मगर नींद तुझको भी नहीं आएगी, किसी और की बाँहों में!!…..#अक्स.
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“खुशनसीब” #2Liner-41
ღღ___अब ये कैसे कह दूँ “साहब”, कि खुशनसीब नहीं हूँ मैं;
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आखिर एक अरसे से उसको अपना, नसीब कहता रहा हूँ मैं !!….#अक्स
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“ताबीज़” #2Liner-40
ღღ___कोई ताबीज़ आता हो, तो पहना दो मुझको “साहब”;
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तुम्हारे इश्क़ का जूनून, अब सर से उतर रहा है !!…….#अक्स.

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“लम्हा” #2Liner-39
ღღ___मैं हँस रहा था जिस लम्हे में, बस अभी-2 तो गुज़रा है;
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और लोगों से सुना है, गुज़रा हुआ वापस नहीं आता !!……#अक्स.
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“ख्याल” #2Liner-38
ღღ__तुमने रोका है इनको “साहब”, या हम भूलने लगे हैं अब;
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कि अब ख्याल भी तेरे, हमसे मिलने नहीं आते !!………#अक्स -
“गम” #2Liner-37
ღღ___कुछ इस तरह से आकर, गम लिपट रहे हैं मुझसे;
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कि जैसे हर एक दरिया, समन्दर से जाके मिलता है!!……#अक्स -
“गुमराह ” #2Liner-36
ღღ__ज़रा देखो तो निकल के “साहब”, अब तक वो आए क्यूँ नहीं;
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कहीं ऐसा तो नहीं रस्तों नें, उन्हें गुमराह कर दिया !!……..#अक्स -
“निगाह-ए-इश्क़” #2Liner-35
ღღ__अक्सर भीग उठती हैं “साहब”, पलकें तेरी नज़र-अन्दाज़ी से;
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निगाह-ए-इश्क़ पे कोई फ़र्क, ज़माने का नहीं पड़ता !!………#अक्स -
“हद” #2Liner-34
ღღ__ना जाने कैसे तुझको, “बे-हद” चाह बैठा “साहब”;.ये दिल जो अक्सर मुझको, मेरी “हद” बताता था !!………#अक्स -
“इन्तजार” #2Liner-33
ღღ__नज़रों को इंतज़ार की, सजाएँ इतनी भी ना दो “साहब”;.ये बारिशें बिन मौसम की, हमसे अब देखी नहीं जाती !!…….#अक्स -
“आगाज़” #2Liner-32
ღღ__आगाज़ तो इस बरस का, लाजवाब हुआ है “साहब”;.बस यही अन्दाज़, मेरे अन्जाम तक बनाये रखना !!……#अक्स.समस्त मित्रों एवं शुभचिंतकों को नूतन वर्ष २९१६ की हार्दिक शुभकामनाएँ !! -
“देखा नहीं जाता” @2Liner-31
ღღ__दूर आप जा रहे हो ‘साहब’, या फिर ये दिसम्बर;
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कोई भी दूर जाये हमसे, ये देखा नहीं जाता !!…….
#अक्स -
#2Liner-30
कुछ तो खता तुम्हारी, बेशुमार यादों की है ‘साहब’;.ღღ___यूँ ही बे-सबब कोई, आवारा नहीं होता !!…….#अक्स -
“आवारगी” #2Liner-29
ღღ__इक उम्र गुज़ारी है आशिक़ी में, तो जाना है;
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कुछ नहीं मिलता, इसमें इक आवारगी के सिवा !!……..#अक्स -
“साँसें”
ღღ__बाकी हैं चन्द साँसें अब, बेज़ार से दिसम्बर की;.एक नए दिन की तलाश में, पूरा साल ही जा रहा है !!…….#अक्स -
“ठंड” #2Liner-28
ღღ__माफ़ करना पर आज, कोई शायरी नहीं है “साहब”;.कि रिश्तों की ठंड में, लफ्ज़ भी जम गये मेरे !!……..#अक्स -
” फैसला” #2Liner-27
ღღ__मेरे गुनाह-ए-इश्क़ का, कोई फैसला तो सुना दो “साहब”.इस दिल को समझाने में, कुछ वक़्त भी तो लगता है!!…..#अक्स -
“सितम” #2Liner-26
ღღ__जो तुम कर रहे हो “साहब”, सितम की इन्तहा नहीं तो क्या है;.कि दूर भी जा रहे हो मुझसे, वो भी ज़रा-ज़रा कर के !!………#अक्स -
“वफ़ा” #2Liner-25
ღღ__भला और क्या दूँ तुझको, सुबूत अपनी वफ़ा का मैं;.कि ख़ुद का भी ना हुआ हूँ, जबसे तेरा हुआ हूँ मैं !!…….#अक्स -
“ख्वाहिशें” #2Liner-24
ღღ__शायद ये आँखें मूँद लेने का, सही वक़्त है “साहब”;.कि रोज़ ख्वाहिशों का मरना, हमसे अब देखा नहीं जाता !!……#अक्स.www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/ -
“बेबसी” #2Liner-23
ये सर्दियों का मौसम, और ये तन्हाईयों का आलम;.कहीं जान ही ना ले-ले, इनसे मिलके बेबसी मेरी !!……#अक्स.www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/ -
“याद” #2Liner-22
ღღ__इस कदर भी याद, ना आया करो “साहब”;.मेरी खुशियों की नींद में, खलल पड़ता है !!…….#अक्स.www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/ -
“गुनाह” #2Liner-22
ღღ___तुझको पाने की कोशिश भी, तू जो कह दे तो ना करूँ;.पर पाने की आरजू रखना, तो कोई गुनाह नहीं !!………#अक्स -
कोई मेरा नहीं होगा !!#2Liner-21
ღღ__कुछ इस तरह से लिक्खा है, उस ख़ुदा ने मेरा नसीब;
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कि मैं तो सबका हो जाऊंगा “साहब”, कोई मेरा नहीं होगा !!…….#अक्स -
“लालच” #2Liner-19
ღღ__वो तो लालच है उनके ख्वाबों का, जो हमें सुला देता है “साहब”;
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वरना नींदें तो उनकी यादों ने, एक अरसे से उड़ा रक्खी हैं !!…….#अक्स -
“अजनबी” #2Liner-18
ღღ__हमको सताने के मौके, वो छोड़ते नहीं हैं “साहब”;.कल ख़्वाब में भी आए, तो अजनबी बनकर !!…….#अक्स.www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/ -
“इन्तजार” #2Liner-17
ღღ___ज़िन्दगी तो कटती जा रही है “साहब”, इन्तजार की कैंची से;.और सिलसिला-ए-इन्तजार है, कि कटता ही नहीं कभी !!…….#अक्स -
“आसमाँ” #2Liner-16
ღღ__इक परिन्दा हो के भी, अब उड़ नहीं सकता;
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कि मेरे साये ने ही मेरा, मेरा आसमाँ चुरा लिया !!……..#अक्स -
“क़ैद” #2Liner-15
कुछ इस तरह ख्याल उसका, मेरी डायरी में क़ैद रहता है;
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ღღ___जैसे मेरा वजूद, मेरी शायरी में क़ैद रहता है !!…….#अक्स
