गजल- कोरोना शैतान क्यो है |
काफिया – आन ,रदीफ़ – क्यो है
खौफ मे कोरोना से इंसान क्यो है |
घर अपने आदमी परेशान क्यो है |
हुआ लॉक डाउन लॉक घर मे रहो |
तोड़कर कायदा कानून नादान क्यो है |
बाजार बंद उसको मौका मिल गया |
बढ़ाकर कीमत बनता बेईमान क्यो है |
चूल्हा नहीं जला घर उसके रासन नहीं |
कांपता ही नहीं उसका ईमान क्यो है |
लगी जितनी बंदीसे वो मानता नहीं |
फिर बीमार सारा अब खानदान क्यो है|
कायम रहेगी और भी लंबी पाबन्दिया |
संभालो खुद को हर कोई हैरान क्यो है |
जबतक रहोगे घर मे महफूज रहोगे |
जाता जल्दी नहीं कोरोना शैतान क्यो है |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286
व्हात्सप्प्स -8210525557
Tag: संपादक की पसंद
संपादक की पसंद
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गजल- कोरोना शैतान क्यो है |
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भोजपुरी गीत- अब कोरोनवा ना |
भोजपुरी गीत- अब कोरोनवा ना |
मिले कईसे आई सजनी तोर भवनवा ना |
डर लागे हमके पड़ल पीछे अब कोरोनवा ना |
ढेर दिन बीतल तोहसे मिले नाही पवली |
तरस गईले नैना तोहके देखे नाही पवली |
धीरज धरा सजनी माना मोर कहनवा ना |
डर लागे हमके पड़ल पीछे अब कोरोनवा ना |
लॉक डाउन लागल सगरो गाड़ियो ना चलेला|
ताला लागल रेल अब तो बजरियो ना खुलेला |
तड़पेला मनवा हमरो बरसे अब नयनवा ना |
डर लागे हमके पड़ल पीछे अब कोरोनवा ना |
रहती हम चिरईया धनिया उडी चली अवती |
अंखिया जूड़वती तोहके गरवा हम लगवती |
जहर मिलावे मिली कोरोनवा अब पवनवा ना |
डर लागे हमके पड़ल पीछे अब कोरोनवा ना |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286
व्हात्सप्प्स -8210525557 -
शिखर
शिखर
धरा, गगन, मृदुल पवन हिले तेरी एक हूंक से,
जो तू चले बिना रुके मंजिलें दिखे तुझे।समुंद्र भी दे रास्ता जो तू कहे जब गूंज से,
चमकीला हो ये आसमान पसीने की तेरी बूंद से।संगीतमय सारा जहां स्वागत करें भीना पवन,
धरती भरे अभिमान की हुंकार तुझे देखकर।हिम्मत है गर आगे निकल तू जीत ले सारा जहां,
तेरी चमक से रोशन जहां पाले जो खुद से तू शिखर।निमिषा सिंघल
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युवा पीढ़ी
युवा पीढ़ी
रचो इतिहास लिखो शौर्य की अद्भुत कहानी देश को भय मुक्त करो।
भ्रष्टाचार, दुर्दभ्य दानवता के खिलाफ नए युग का सृजन करो।
आओ युवा पीढ़ी! नारियों को अत्याचारों से मुक्त करो।
हे राष्ट्र के कर्णधारों! देश को नई ऊर्जा उन्नति देकर नवराष्ट्र का सृजन करो ।
निमिषा सिंघल
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उम्मीद
उम्मीद की किरण जगमग आई है,
आज फिर याद मुझे तेरी ओर लाई है।जमाने की तपिश,
जिम्मेदारियों का बोझ..
सहते -सहते दबी राख सुगबुगाई है।तपती मनस्थली पर स्नेह की बूंदे छलकी,
सूखी धरती पर बदली छाई है।
फिर एक उम्मीद मुझे तेरी और लाई है।झंझावात तूफानों से घिरी थी जिंदगी,
प्रेम रस में नहाने आई है।
आज फिर उम्मीद मुझे तेरी ओर लाई है।दिखावटी, अनमनी, अजनबी सी थी कुछ,
जिंदगी फिर से मुस्कुराई है।
फिर एक उम्मीद मुझे तेरी ओर लाई है।इत्तेफाकन ही सही,रूह रूह से टकराई है,
नैनो को नैनो ने दिल की बोली समझाई है।
फिर एक उम्मीद मुझे तेरी और लाई है।निमिषा सिंघल
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रस्सी
फिक्र कहाँ उस रस्सी को
जान किसी के जाने को।
गले लगाया जिसने उसको
मरने को छोड़ दिया दीवाने को।। -
नारी
स्त्री ऐसी वाणी है हर भाग में पायी जाती है
ये तो ऐसा गीत है जो हर राग में गाई जाती हैपिता और भाई के संरक्षण में रहती है
संरक्षण में वह रहती है,शासन में सब सहती हैविवाहोपरान्त नारी ससुराल में आ जाती है
अपने कर्मों से दोनो कुल की लाज बचाती हैनारी का यौवन अंग-अंग बदले हैं पल-पल रंग-ढंग
कभी ज्वाला सी कभी भाला सी कभी नीर पाई जाती हैयह तो ऐसा गीत है जो हक से अपनाई जाती है
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इंसानियत के दुश्मन
जो इंसानियत की दुश्मन बन जाये, वो जमाअत कैसी।
खुदा ने भी लानत भेजी होगी, इबादत की ये बात कैसी।खुद की नहीं ना सही, अपनों की तो परवाह कर लेते,
जिन्हें अपनों की परवाह नहीं, दिलों में जज़्बात कैसी।जहाँ जंग छिड़ी मौत के खिलाफ, जिंदगी बचाने को,
वहाँ मौत के तांडव की, फिर से नई शुरुआत कैसी।मौत किसी का नाम पूछ कर तो, दस्तक नहीं देती,
ये कोई मजहबी खेल नहीं, फिर यह बिसात कैसी।जूझ रहे कई कर्मवीर, हमारी हिफाज़त के लिए,
मदद ना सही, फिर मुसीबत की ये हालात कैसी।घरों में महफ़ूज रहें, मिलने के मौके और भी मिलेंगे,
जहाँ मिलने से मौत मिलती हो, फिर मुलाक़ात कैसी।देवेश साखरे ‘देव’
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हिन्दी कविता- समय गिन रहा |
हिन्दी कविता- समय गिन रहा |
लोक डाउन हुआ है हर कोई
समय गिन रहा है |
खत्म कब होगा बाहर का बनवास |
हर कोई समय गिन रहा है |
खाये जा रहा डर कोरोना का |
कोई कोरोना योद्धा बन लड़ रहा |
जान की फिक्र नहीं अपनी
वाइरस खात्मे का दवा जड़ रहा |
हर कोई समय गिन रहा है |
जब रहते बाहर घर आने को
मन ललचता था कब जाए|
बीबी बच्चो माँ पिता जी खातिर
कुछ लेकर जाये उनसे मिल पाये|
अब घर मे रहना ही हमे खल रहा |
हर कोई समय गिन रहा है |
बाहर तो खतरा है कोरोना का |
कोई आ ना जाए पोजिटिब कोरोना का |
हर घड़ी भय उसका पल रहा है |
हर कोई समय गिन रहा है |
लगे है सारे चिकित्सक प्रसासन शाषन |
लड़ने की जंग कोरोना को भगाएँगे |
प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री राज्यमंत्री सभी |
भुजाए अपनी कोरोना तौल रहा है |
हर कोई समय गिन रहा है |
लड़ी लड़ाइया कितनी ये भी जीत लेंगे|
आता जो दुशमन सामने कबका मैदान
मार लिए होते हम सब |
अदृश्य दुश्मन खून सबका खौल रहा है |
हर कोई समय गिन रहा है |
हुआ लोक डाउन सबको साथ निभाना है |
घर मे ही रहना सबको बाहर नहीं जाना है |
खत्म होगी कहानी कोरोना एक दिन |
होगी रौनक बाजार माल मुहल्ले मसिन |
दिल सबका अब ये बोल रहा है |
हर कोई समय गिन रहा है |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286
व्हात्सप्प्स -8210525557 -
भोजपुरी गीत – तनी कोरोनवा से बचके |
भोजपुरी गीत – तनी कोरोनवा से बचके |
चला गोरी तनी कोरोनावा से बचके |
जइहा बजरिया रईहा लोगवा से हट के |
चला गोरी तनी कोरोनावा से बचके |
जइबु जे बज़रिआ कोरोनवा लगी जाई |
केतनो भगइबु हरदम लगवे उ आई |
मुंहवा पे मास्क लगईहा तू डटके|
चला गोरी तनी कोरोनावा से बचके |
हर एक घंटवा हथवा तू धोइहा |
अपने संगवा तू आपन घरवा बचइहा|
संका होखे बीमारी जांच करईहा तू फटके |
चला गोरी तनी कोरोनावा से बचके |
बैरो कोरोनवा केहु के ना छोड़ेला |
राजा हो रंक सबही के उ धरेला |
रही जिनिगिया खूब बज़रिया मे घूमिहा |
जेवन करी तेवन खूब चदरिया मे किन्हिया |
किन लिहा सड़िया जेवन मनवा मे जँचके |
चला गोरी तनी कोरोनावा से बचके |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286
व्हात्सप्प्स -8210525557 -
भोजपुरी गीत -उनके नजरवा से |
भोजपुरी गीत -उनके नजरवा से |
जान मारेली उ हमसे अँखिया लड़ाइके |
जियरा जुड़ावेली हमसे दिलवा लगाइके |
होसवा उड़ल बा हमार देखी उनके कजरवा से |
बरछी धंसल बा हमरे दिलवा उनके नजरवा से |
हमसे कहेली उ तू हमार बाड़ा राजा |
आके हमरे दिलवा मे राजा समाजा |
अँखिया उठावे त हो जाला बिहान |
नजरिया मे बसल बा उनकर मुस्कान |
हमके लुकाला गोरी तू अपने अब अंचरवा से |
बरछी धंसल बा हमरे दिलवा उनके नजरवा से |
सालन के पालल तोहके दिलवा हम दिहली |
तोहरे बिना गोरी भइल पगलवा हम रहली |
दिलवा लगाई भइलू हमार जान |
तू ही हमार रानी तू ही हमार चान |
जइहा मत कबहु गोरी तू कबों हमरे पजरवा से |
बरछी धंसल बा हमरे दिलवा उनके नजरवा से |
राखब हम तोहरा बनाके आपन रानी |
तोड़ी हमार दिलवा कबो करिहा जनी नादानी |
गउआ के मनई हई हम किसान |
बड़ा निक लागे गलिया करिया नीसान |
निकलल बा चान निकले जईसे कारे बदरवा से |
बरछी धंसल बा हमरे दिलवा उनके नजरवा से |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286
व्हात्सप्प्स -8210525557 -
हिन्दी कविता – दिये जलाए |
हिन्दी कविता – दिये जलाए |
आज भारत ने खूब दिये जलाए |
अपनी एकता का परिचय दिखाये|
जल कोरोना भस्म हुआ या नही|
है संकट मे फिर भी जस्न मनाए |
घरो बंद जिंदगी उम्मीद तलासती|
हर दिल चाह कोरोना मार भगाये |
लौट आई हंसी थोड़ी देर ही सही |
जोश मे कुछ ने बम पड़ाके उड़ाए |
हिन्द की आवाम हार नहीं मानेगी |
हर गम मे खुशी हम तलाश लाये |
आज या कल कोरोना मीट जाएगा |
रखे सावधानी एक दूजे दूरी बनाए |
वो देखो जगमग अंबर है लौ दिया |
मान ले ताप कोरोना आप मिटाये |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286
व्हात्सप्प्स -8210525557 -
कोरोना वायरस
धर्म-जाति से परे हिंदी कविता एक भयावह महामारी पर
लिखना नहीं चाहती थी
पर लिखना पड़ा
कहना नहीं चाहती थी
पर कहना पढ़ा
आज कल जो माहौल है
उसे देख ये ख़ामोशी
तोडना पड़ा
जब हम जैसे पढ़े लिखे ही
चुप हो जायेंगे
तो इस देश को कैसे
बचा पाएंगे
जो फंसे हुए हैं हिन्दू -मुस्लिम
के आपसी मुद्दों में
उन्हें खींच कर बाहर कैसे ला पाएंगे
भारत घर है हमारा
जो एक बीमारी से ग्रस्त है
कोरोना तो अभी आया है
पर इस मुद्दे से लोग १९४७
से त्रस्त है
हम कब आपसी झगड़ें भूल
इस बीमारी से निकल पाएंगे ??
अभी जो भारत मिसाल बन
लोगो की नज़रों में आया है
उसे social distancing ने
ही बचाया है
वरना तुम्हारे सामने ही है
अमेरिका इटली और स्पेन
का अंजाम
जो super power हो के भी
लाचार नज़र आया है …
मौत का पैगाम लिए जो
हमारे दरवाज़े खड़ा है
वो किसी धर्म का मोहताज़ नहीं
वो खून पीने चला है
दूर रखें इस नियम को
अपनी आस्था से
और घर से ही अपने
देवों को याद करें
कण कण में उसको देखने वालो
अभी घर पर ही उसका ध्यान करें
जो है उस इश्वर का ही दूसरा स्वरुप
उन पर यूं थूक कर पत्थर बरसा कर
न उनका अपमान करें
तुम्हारे घर चल वो ऊपर वाला खुद आया है
क्यों न उसका इस्तिक्बाल करें…
जो वाकई पढ़े लिखे हैं ,उनसे ये
अनुरोध है कि
वे अब अपनी चुप्पी तोड़
इस मुहीम का भाग बने
जो भटके हुए हैं अपनी मंजिलों से
उनका सही मार्ग दर्शन करें
उन्हें डांटे भी पुचकारे भी
और ज़रूरत लगे तो
चार लगाये भी
अब समय आ गया है
अपनी टीवी खामोश करें
न जोड़ कर इसे विपदा को
किसी राजनीति से
सिर्फ अपना और अपने घर
का बचाव करें
अपने दिल की आवाज़ सुने
कोई कहता है कहने दो
भडकता है भड़काने दो
हम क्यों उनके हाथों की कटपुतली बने??
हम साथ रह रहे हैं कब से एक घर में
थोड़े मन मुटाव होंगे ही
पर एक दुसरे को तकलीफ में
देख कर आँख होगी नम भी
तो आओ खाए ये कसम
हम हिन्दू मुस्लिम भूल
पहले इंसान बनें
और कोरोना वायरस
को हराने की लड़ाई का
एक साथ आगाज़ करें
एक साथ आगाज़ करें ……
अर्चना की रचना “सिर्फ लफ्ज़ नहीं एहसास”
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गूंज
हमारा आशियाना एक वादी बन
गया है फिलहाल
अब घर के सामान हमारे
मित्र हो गए
एक सुंदर वादियों सी गूंज रही
आवाज थी
पुन्ह हमसे जो टकराई तो
हम चित हो गए
हमसे किसी ने पूछा तुम्हें जमीन
क्यों भाई है
क्या कहें इन दीवारों ने तारीयां
दिखलाई है
शर्म से गिरने की बात को
छुपा गए
खोई जेब की आमदनी का
बहाना लगा गए
जिसको टालना चाहा जनाब
वह भी बहुत चतुर थे
हमारे मायूस मुंह को वो देखें
टुकुर-टुकुर थे
उन्हें पता है सब वो हंसी से
बता गए
होशियारी के हथियार डाल
हम भी मुस्कुरा गए -
भोजपुरी गीत- तोहरे प्यार बिना |
भोजपुरी गीत- तोहरे प्यार बिना |
गोरी तोहरे प्यार बिना दुनिया अन्हार बा |
मिलबु ना जबले तबले जियल बेकार बा |
प्यार सबके बांटेलु खाली हमरे के डांटेलु |
चिट्ठिया हमार गोरी हंसी हंसी बान्चेलु |
हमहू से बोला हंसी के येही के दरकार बा |
गोरी तोहरे प्यार बिना दुनिया अन्हार बा |
हम नाही जनली प्यार मे दुख बड़ा होला |
ताकेलू ना हमरी ओरिया मुख से त बोला |
प्यार मे डुबल गोरी देखा सारा संसार बा |
गोरी तोहरे प्यार बिना दुनिया अन्हार बा |
केतनों मनाई तोहके हमसे ना मानेलु |
जब देखा तब हमके मोबाइले से डांटेलु |
एक बेरी कही दा तोहके हमसे प्यार बा |
दिलवा के हाल का अब हम कही के बताई |
मनवा मे बसल बाड़ू कहा फाड़ी के देखाई |
मिल जईबु गरवा जहिया हमरो बेड़ा पार बा |
गोरी तोहरे प्यार बिना दुनिया अन्हार बा |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286 -
भोजपुरी गीत- नींदिया भईल फरार |
भोजपुरी गीत- नींदिया भईल फरार |
नींदिया भईल फरार जान जबसे तोहसे प्यार हो गईल|
जियल भईल मुहाल नैना जबसे चार हो गईल |
जईसन बा हाल हमरो तोहरो भईल का |
रात दिन खयाल हमरो तोहरो भईल का |
चैना भईल बेहाल परान हमरो जबसे यार हो गईल |
नींदिया भईल फरार जान जबसे तोहसे प्यार हो गईल|
गोरे गोरे मुंहवा आगे चनवा लजाला |
अँखिया के कोर जईसन बरछी भाला |
कैसे होई हमार गुजार जान तोहरो दरकार हो गईल |
नींदिया भईल फरार जान जबसे तोहसे प्यार हो गईल|
गोरी तोहरो चाल हीरिनिया जस डोलेले |
मंद मुस्कान जान करेजवे मे धंसेले |
बदनवा भईल गुलनार हमरो सरकार हो गईल |
नींदिया भईल फरार जान जबसे तोहसे प्यार हो गईल|
फरके जनी रहा हमारे लगवा तू आवा |
हंसी के तू बोला हमसे मोतिया झरावा |
भारती लाचार जान जबसे तोहरो दिलदार हो गईल |
नींदिया भईल फरार जान जबसे तोहसे प्यार हो गईल|
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286 -
हिन्दी गीत- मेरा दिलदार ना मिला |
हिन्दी गीत- मेरा दिलदार ना मिला |
मेरा प्यार ना मिला
मेरा दिलदार ना मिला |
करे मुझपर दिल निसार |
वो मेरा यार ना मिला |
ढूँढता हूँ मै उसे गली गली |
पर कही वो मुझे मिली नहीं |
मेरा तलबगार ना मिला |
मेरा दिलदार ना मिला |
चाँद सा मुखड़ा हो उसका |
मेरे दिल का टुकड़ा हो वैसा |
मेरी नाव का पतवार ना मिला |
मेरा दिलदार ना मिला |
गुलाब की कली मुस्कान हो |
चम्पा चमेली गंध उफान हो |
बहे पुरवा बयार ना मिला |
मेरा दिलदार ना मिला |
हो तितलियों सी शोख अदाए |
देख मुझे वो शर्मा जाये |
घाटा सावन की बहार ना मिला |
मेरा दिलदार ना मिला |
काली घनेरी जुल्फों की छांव मे |
पाल छमकाये छन छन पाँव मे |
शर्माए परिया वो हुशनेयार ना मिला |
मेरा दिलदार ना मिला |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286
व्हात्सप्प्स -8210525557 -
हिन्दी कविता- जीवन ज्योत जलेगी |
हिन्दी कविता- जीवन ज्योत जलेगी |
आज जीवन ज्योत जलेगी मानव प्राण भरेगी |
छाई दुविधा कोरोना भारत तिल तिल मरेगी |
वतन की एकता आज दुनिया सारी देखेगी |
आई जो विपदा वायरस जगत पल पल गलेगी |
कौन कहता है कोरोना के कहर हम डर गए |
हराकर कोरोना सभी आवाम जय हिन्द कहेगी |
कर लो सलाम सभी कोरोना युद्ध जवानो को |
डॉक्टर नर्स कर्मी पुलिस सरकार सत्कार करेगी |
बच्चे जवान बूढ़े नारिया लड़ रहे घर मे रहकर |
जलेगे जगमग जब दिये द्वार विपदा कहा रहेगी |
एकमत एकजुट हर घर हर प्रहर सरकार दे रहा |
मिटाकर नाम कोरोना आवाम अब हुंकार गूँजेगी |
जलाकर दिये भूल ना जाना मुंह मास्क लगाना |
बनाना दूरिया लोगो देखना खुशियो की हवा बहेगी|
मिल हर घर की ज्योति दियो बन जाएगी ज्वाला |
भस्म कर कोरोना किटाणु जनता अब ना मरेगी |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286 -
हे कान्हा! मैं तेरी जोगन
हे कान्हा ! मैं तेरी जोगन
जोग ना छूटत मेरो
………………..
रोम-रोम में बसत है तेरो
प्रेम अनमोल रतन
………………….
हे कान्हा ! मैं तेरी जोगन
जोग ना छूटत मेरो
………………….
माखनचोर चोर तू है चीतचोर
बंसी मधुर बजायो
………………….
प्रीत में तेरी राधा नाचत
ये कैसो रोग लगायो
…………………..
मोहे रिझा कर गोपिन के संग
काहे रास रचायो
……………………….
कित मेरी गई चूनर धानी
कित नथुनी हेरायो
………………………
सुध-बुध खोकर नाचत
ब्रजवासी कैसो जोग लगायो????? -
मुझमें अभी तक तू ज़िंदा है
मुझमें अभी तक तू ज़िंदा है
मेरी तन्हाई में,मेरे एहसास मेंमेरी हर सांस में अभी तक ज़िंदा है तू
——————-‐—
दिल की ज़मी में आज भी
उगते हैं तेरी तमन्ना के दरख्ते
———————–
रोशन हैं उम्मीदें और
ख्व़ाब सजाए हैं पलकों पर
————————
बेशक तुझसे प्यार बहुत है
तू है नहीं नसीबों में
———‐————–
फिर भी तुझको देख के
मेरे रुखसार की रौनक बढ़ जाती है
————————-
मुझमें अभी तक तू ज़िंदा है
ये मेरी बेकरारी और आईना बताता है। -
एहे बरस के सावन मे (भोजपुरी गीत)
सावन में सावन में, एहे बरस के सावन मे
आवऽ न गोलकी झूला झूलाईं एहे बरस के सावन मे
सावन में सावन में , एहे……………………………………..
आवऽ न गोलकी झूला झूलाईं…………………………..
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साजन बऽनऽब हम सजनी तोहार
कोरस — सजनी तोहार गोलकी सजनी तोहार
झूला के लागल बा उहां कतार
कोरस —- उहां कतार गोलकी उहां कतार
सावन के चऽलऽता रंगीन ब्यार
कोरस —रंगीन ब्यार गोलकी रंगीन ब्यार
चारो ओरिया के देखऽ नजारा(२) एहे बरस के सावन मे
आवऽ न गोलकी झूला झूलाईं, एहे बरस के सावन में
सावन में सावन में, एहे _————————
आवऽ न गोलकी झूला झूलाईं…………………………
+±+++++++±++++++++++±±++++++++++++
धरती पे गिरल रिमझिम फुहार
कोरस — रिमझिम फुहार गोलकी रिमझिम फुहार
प्यार के चऽढऽल बा नयेका बुखार
कोरस —-नयेका बुखार गोलकी नयेका बुखार
रुस बू तऽ हो जाई मौसम बेकार
कोरस —मौसम बेकार गोलकी मौसम बेकार
साल भर पे आईल बसंत बहार (२ ) एहे बरस के सावन में
आवऽ न गोलकी झूला झूलाईं, एहे बरस के सावन मे
सावन में सावन में एहे,……………………………………..
आवऽ न गोलकी झूला झूलाईं…………. . ……….. -
दिया
सुनो!
तुम सागर की तरह क्यों लगते हो?
शब्दों में गहराई बहुत है
मानसिक द्वंद छिपाने में
चतुराई बहुत है।
बाहर से एक शांत सतह
भीतर गहरे तूफ़ान से लगते हो।प्रेम में हारे हुए लडको की तरह
विरह और लौट आने की उम्मीद की शायरी लिखते लिखते
ना जाने कब जिंदगी से कुछ मांगना भी छोड
बस बहते जा रहे हो
बहाव के संग।
जिंदगी से आक्रोश पुराना लगता है
कहीं बहुत दूर रोशन दिए की तपिश
और ऑक्सीजन
डालती रहती है जान एक बेजान बुत में।
वैसे दिया काफी है
एक उम्र प्रेम में डूबे रहने के लिए।
देवदास।निमिषा सिंघल
-
बहन
एक एक चीज का गिन गिन कर हिसाब लेने वाली
वो लड़ाकी
बन जाती है ढाल अपने भाई की।
मां और पापा ने भाई को किस बात पर बिना वजह डांटा
यह बताने वाली भी एक बहन ही होती है
आंसू भर भर के लड़ जाती है अपने भाई के लिए
भाई की चीजो पर हक जमाने वाली भी तो वही होती है।
कब वो छोटी बहन अचानक बड़ी हो जाती हैं और दे जाती है झोली भर भर दुआये।
अपने भाई से गिन गिन कर हिसाब लेने वाली लड़की जो जीवन पर्यन्त भेजती रहती है
बेहिसाब शुभकामनाएं अपने भाई को।
भगवान का दिया हुआ एक खूबसूरत तोहफा हैं एक अदद लड़ा की बहन।निमिषा सिंघल
-
आज कल सोंचता बहुत है दिल ये मेरा
पेश है आपकी खिदमत में:-
गज़ल
आज कल सोंचता बहुत है दिल ये मेरा
तुझे भूलूँ या कैद दिल में करूँ
————————
दिल लगा लूँ या जान छुड़ा लूँ तुमसे
आज कल सोंचता बहुत है दिल ये मेरा
————————–
गज़ल सुना के सुलाये हैं मैनें जो एहसास
उन्हें जगा लूँ या सुला दूँ है बड़ी उलझन
—————————-
भूल जाना भी तूझे है ना आसान इतना
दिल में बसता है तू अर्से से तुझे नहीं है खबर
——————————
तुझे भी इल्म है इस बात का नहीं मालूम
कितनी बेबस हूँ तेरे बिन तुझे नहीं है फ़िकर
———————————
तुझे छुपा लूँ आँखों में,लिपट जाऊँ मैं
आज कल सोंचता बहुत है दिल ये मेरा। -
चलो सब मिलकर जीत दिलाएं
चलो सब मिलकर जीत दिलाएं
कोरोना को हरायें
पाँच अप्रैल को सब देशवासी घर में दीप जलाएं
दीप की ज्योति से अपना घर सँसार सजाएं
चलो सब मिलकर जीत दिलाएँ
थू है उनपर जो जमाती
अश्लीलता के खंजर भोकें
थूँकते हैं जो मानवता पर
प्रभु उनपर कोप की अग्नि परोसें
देश बड़ा है सब धर्मों से प्रज्ञा शुक्ला है कहती
जो कोरोना से पीड़ित लोगों की
सेवा में तत्पर हैं उनको देशभक्त है कहती
ना मरता हिंदू ना मुस्लिम
मरता है सिर्फ़ इन्सान
जो नहीं समझते इस बात को
वो हैं मानवता के शत्रु
है आप से विनती घर में रहकर
करो आप देश की भक्ति
जय हिंद जय भारत कहिये
अपनी मानवता को मत शर्मशार करिये। -
बीती रात, टूटी आश
आश लगाई , दूर मेघालय में
कर्जा लाया, बीज लगाया
खेतो खलियानो में………
बीता सावन ,भादो आया
न आया बादल,
खेतो खलियानो में……..
बीती रात, टूटी आश,
बैठा किसान,
खेतो खलियानो में…….
कुऐ सुखे, धरती प्यासी,
न आया पानी ,नल कूपों में……
चेहरा मुरझाया,
पानीआया ,ऑखो में…….
उदर दहक उठा,
धुऑ ना उठा चूल्हो में……
कोहराम मचा घरानो में….
फन्दो पर झूला,
लटक रहा किसान
खेतों खलियानों में……। -
मजहब का पहरी
वाह भाई मजहब के ठेकेदारों
क्या खूबी फर्ज निभाया है
दुश्मन लगी है मानव जाति
और काल को मित्र बनाया है
कभी उनकी फिक्र भी कर लेता
जिसे तेरी फिक्र सताती है
कहीं कोई खड़ा चौराहों पर
कहीं जान किसी की जाती है
ऐसे ना बच पाएगा तू
कोरोना कि इस बाढ़ में
कब तक पाखंड रच आएगा तू
यू मजहब की आड़ में
इस पूरे देश की कोशिश को
कुछ पल में यूं ना काम किया
सच बोल यह तेरी गलती थी
या गद्दारी का काम किया
तूने भारत को दर्द दिया
तेरे सारे राज उजागर हैं
सच बोल तेरी नादानी थी
या भारत का सौदागर है -
एक अखंड प्रतिज्ञा
कर ले अखंड प्रतिज्ञा तू
कर खंड खंड उस दहशत को
जिससे यह विश्व है कांप रहा
हौसलो से कर तू परस्त उसको
तू दूर भ्रम का भूत भगा
दहशत की नहीं जरूरत है
असंयम का तू चित्र ना गङ
भारत संयम की मूरत है
छिन्न-भिन्न से विचार हुए
क्यों काल खुद अपना बुलाता है
जो रक्षा को तेरी खड़े हुए
क्यों उन्हीं को आंख दिखाता है
तू गौर फरमा उस मंजर पर
एक जिंदा देश वह मर गया
वह विजय रेखा है दूर बहुत
तू अभी हौसला हार गया
रणनीति धरी की धरी रही
वह करके अपना वार गया
वो ढूंढ रहे उसे राहों में
वो लाश पर चल के पार गया
दोहराना नहीं उस गलती को
बड़े देश जो कर के बैठे हैं
अब मौत भोज को आई है
अभी यम भी गर्दन ऐठे हैं
अंदाजा लगा ले खतरे का
वह प्रलय जो विनाशकारी है
नियम का पालन मत छोड़ो
यह बड़ी बहुत महामारी है
इस विनाश लीला के मंजर को
यू मजा कुछ समझना ठीक नहीं
यह मौत बड़ी बेदर्दी है
जीवन की देगी भीख नहीं -
आस्था के कमल
आस्था के कमल
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प्रेम और विश्वास के दरिया में ही खिलते हैं आस्था के कमल।तुम खरे उतरना इस विश्वास पर
ना मुरझा पाए यह कमल स्मरण रहे।जीवन, यौवन सौंप दिया है तुम्हे
तुम्हारी संगिनी ने,
तुम भवरे ना बन जाना,
ना मंडराना फूल फूल पर
सहेज रखना खुद को।जीवन में राह नई मिलेंगी तुम्हें,
उन गुमशुदा राहों पर कहीं गुम ना हो जाना!यौवन की उमंग में तितलियां भटकाएंगी तुम्हे,
तुम भटकना नहीं।हर पल स्मरण रखना
किसी को तुम्हारा हर पल इंतजार है
और जब पार कर लोगे उम्र का यह पड़ाव
तब सिर्फ संगिनी की संग होगी तुम्हारे।दिल ना दुखाना उसका,
वही है मानसिक संबल तुम्हारा।
जब सभी सहारे छूट जाएंगे,
तब हाथों में हाथ दिए
वही होगी संग तुम्हारे।कठिन से कठिन समय में भी जो संबल बन जाएगी।
ढाल है जीवनसंगिनी
तलवार ना दिखानातुम पर आए हर एक वार को
खुद ही झेल जाएगी।बस तुम बने रहना …..
उसके आस्था के कमल।निमिषा सिंघल
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भोजपुरी देबी गीत 3 – शक्ति बड़ा भारी |
भोजपुरी देबी गीत 3 – शक्ति बड़ा भारी |
काली मईया तोहार शक्ति बड़ा भारी |
हरला हर दुखवा हमरो सुना विनती हमारी |
सगरो जगत मे चर्चा तोहरो खाली होखेला |
बिना मरजी तोहरे केवनों पतवो ना डोलेला |
बिना तोहरे महिमा लउके जग मे अनहारी |
काली मईया तोहार शक्ति बड़ा भारी |
सबके दिहलु माई अन्न धन सोनवा |
अंधरन के आँख दिहलु बाझन के ललनवा |
भरिदा हमरो झोली मईया मांगी हथवा पसारी |
काली मईया तोहार शक्ति बड़ा भारी |
लाली लाली अँखिया काली काली केसिया |
लाल अड़हुलवा गरवा लाली लाली जीभिया |
हमके ना उबरबू माई औरी के उबारी |
काली मईया तोहार शक्ति बड़ा भारी |
करवा मे खप्पर शोभे मथवा बिंदिया लाली |
चमके तलवरिया हथवा काली कलकतावाली |
गाई भजनिया भारती नाचे तोहरो दुआरी |
काली मईया तोहार शक्ति बड़ा भारी |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286 -
भोजपुरी देबी गीत 2 – दे दा चरनिया शरनिया |
भोजपुरी देबी गीत 2 – दे दा चरनिया शरनिया |
दे दा चरनिया शरनिया माई बिनती करजोरिया |
शेरवा चढ़ी आवा माई ओढ़ी लाली चुनरिया |
गरवा मे हार फुलवा निमिया पड़ल झुलवा |
हथवा मे चूड़ी कंगना रूपवा चमके केतना |
हम हई भिखरीया माई फेरीदा नजरिया |
शेरवा चढ़ी आवा माई ओढ़ी लाली चुनरिया |
गईया के गोबरा से दुअरा लिपवली |
सोनवा के दिअवा मंदिरवा जरवली |
काटा मोर संकट माई मारी तलवरिया |
शेरवा चढ़ी आवा माई ओढ़ी लाली चुनरिया |
फूल अड़हुलवा के मलवा हम बनाइब |
नारियल सुपारी माई तोहे हम चढ़ाइब |
अबोध बलकवा माई हम हई तोहरो पुजरिया |
शेरवा चढ़ी आवा माई ओढ़ी लाली चुनरिया |
हो जाई उंजियार माई आवा मोर अंगनवा |
करी दा किरीपा माई भारती बा अरमनवा |
मिटावा अनहरिया मोर छाँटी दा बदरिया |
शेरवा चढ़ी आवा माई ओढ़ी लाली चुनरिया |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286 -
भोजपुरी देबी गीत 1 – बिना दरसन जाइब ना |
भोजपुरी देबी गीत 1 – बिना दरसन जाइब ना |
केवन करनवा भुलइली माई बेटवा करे पुकार हो |
बिना दरस जाइब ना माई छोडब ना तोर दुयार हो |
अबोध बलकावा माई पूजा पाठ नाही जानीला |
जगदंबा जगजननी माई तोहके हम मानीला |
देई डा दर्शनवा माई दे दा आफ्ना दुलार हो |
केवन करनवा भुलइली माई बेटवा करे पुकार हो |
सोनवा के थारी हम उतारी आरती माई के |
फूल अड़हुलवा चरनवा चढ़ावे भारती माई के |
सिरवा चरनिया झुकाई माई के पूजे सब संसार हो |
केवन करनवा भुलइली माई बेटवा करे पुकार हो |
तुही हउ लक्षमी काली शारदा भवानी |
किरीपा करा हमपर भूली हमरो नादानी |
सबके तू कईलु माई करा हामरो विचार हो |
केवन करनवा भुलइली माई बेटवा करे पुकार हो |
बरम्हा विष्णु महेश माई तोहरे के पूजेले |
दुनिया चलाई कईसे तोहरे से पुछेले |
भारती डुबत नईया मईया लगा दा तानी पार हो |
केवन करनवा भुलइली माई बेटवा करे पुकार हो |
केवन करनवा भुलइली माई बेटवा करे पुकार हो |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286 -
भोजपुरी देबी गीत 7 –जय हो माई दुर्गा भवानी |
भोजपुरी देबी गीत 7 –जय हो माई दुर्गा भवानी |
जय हो माई दुर्गा भवानी |
तोहरे बा दिहल माई हमरो जवानी |
जय हो माई दुर्गा भवानी |
ऊंचे रे पहड़वा माई सच्चा दरबार बा |
बैशनों देवी पूजे माई सारा संसार बा |
महिमा तोहार का केतना बखानी |
जय हो माई दुर्गा भवानी |
बिंध्याचल मे माई मोर बिंधवासिनी कहाली |
दखिनेश्वर मे काली माई सबसे पुजाली |
कामख्या मे माई के अजबे कहानी |
जय हो माई दुर्गा भवानी |
शक्तिधाम सीतला कासी अन्नपूर्णा सब जानेला |
शारदा भवानी मैहर तोहरो सीढ़िया सब चढ़ेला|
दुनिया मे सबसे बाड़ू माई महाग्यानी |
जय हो माई दुर्गा भवानी |
मुंबादेवी मुम्बई काली घाट काली माई |
पूजी जे तोहके माई मनचाहा फल पाई |
माफ करा भारती माई सगरो नादानी |
जय हो माई दुर्गा भवानी |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286 -
भोजपुरी देबी गीत 6 – माई के मंदिरवा हो |
भोजपुरी देबी गीत 6 – माई के मंदिरवा हो |
भागत परात अइली माई के मंदिरवा हो |
बड़ा डर लागे कोरोनवा मन के अंदरवा हो |
खनक खनक बाजे माई काँच चूड़िया |
चमक चमक साजे माथे सिनुर बढ़िया |
डमक डमक बाजे ढ़ोल झाल मंदरवा हो |
भागत परात अइली माई के मंदिरवा हो |
बनी दुलहिनिया माई कईली सोरहो सिंगार |
रूपवा निरखी तोहार होई गईले उंजियार |
दम दम दमके माइके ललका ओहरवा हो |
भागत परात अइली माई के मंदिरवा हो |
बड़ी बड़ी अँखिया दुईगो कमल फुलवा |
कारी कारी केसिया लामी झूले झुलवा |
सोना के मुकुटवा माथे ललका चदरवा हो |
भागत परात अइली माई के मंदिरवा हो |
मह मह महके चम्पा चमेली गजरा मे |
छन छन छनके किरीपा तोहरे अँचरा मे |
मुंहवा के तेज जईसे चमके बिजरी बदरवा हो |
भागत परात अइली माई के मंदिरवा हो |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286 -
भोजपुरी देबी गीत 5 – चुनी रे चुनी ना |
भोजपुरी देबी गीत 5 – चुनी रे चुनी ना |
भगता के भाव बुझिला मनवा सोची रे सोची ना |
मईया मनावे भगता गावेले पचरा नाची रे नाची ना |
सोनवा के रथवा साजल लाल अड़हुलवा |
हाँकी दिहली ना चले लागल शेरवा झूमी रे झूमी ना |
ऊंचे रे पहड़वा लागल मइया के आसनवा |
करे शेरवा गरजनवा घुमी रे घुमी ना |
सोने के कलशवा साजल पुजल सारा जमनवा |
झूमी रे झूमी ना करे लोगवा माई दरशनवा|
घुमी रे घुमी ना |
निमिया के डार मईया लागल हरियर पतइया |
झूमी रे झूमी ना
करे मईया के वनदनवा झूमी रे झूमी ना |
केवन फुलवा लोभइलू माई केवन फुलवा ना |
चूमी रे चूमी ना
चढ़े माई के चरनिया चूमी रे चूमी ना |
लाल अड़हुलवा भावे मईया के बेला फुलवा ना |
चूमी रे चूमी ना
चढ़े मईया के चरनिया चूमी रे चूमी ना |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286 -
हिन्दी राम भजन 9 – श्रीराम कहाते है |
चैत्र नव रात्र के अवसर पर रामनवमी मे श्रीराम भजन
हिन्दी राम भजन 9 – श्रीराम कहाते है |
श्रीराम तुम्हारे चरणों मे हम भाव चढ़ाते है |
प्रभु आप मर्यादा पुर्षोतम श्रीराम कहाते है |
मानव जन जग मे मानव रूप अवतार लिया |
बनके धनुषधारी दानव दैत्य संघार किया |
अवतार दिवस को हम राम नवमी मनाते है |
श्रीराम तुम्हारे चरणों मे हम भाव चढ़ाते है |
जग का हो कल्याण तुमने वन प्रस्थान किया |
धर रूप सन्यासी सबरी केवट उत्थान किया |
जिन चरणों ने तारा अहिल्या चरन पुजाते है |
श्रीराम तुम्हारे चरणों मे हम भाव चढ़ाते है |
महिमा तेरी अपरम्पार पभू बरनी ना जाये |
जग का किया उद्धार लेखनी ना लिखाये |
भारती कहे जय श्रीराम अब हम सिर नवाते है |
श्रीराम तुम्हारे चरणों मे हम भाव चढ़ाते है |
रावण को मार स्वर्ग पहुंचाया माँ सीता छुड़ाया |
फिर आओ भारत मे राम भक्तो ने तुमको बुलाया |
अयोध्या मे हम सब अब तेरा दरबार सजाते है |
श्रीराम तुम्हारे चरणों मे हम भाव चढ़ाते है |श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286
व्हात्सप्प्स -8210525557 -
हिन्दी देबी गीत 8 – शरण तुम्हारे |
चैत्र नव रात्र के अवसर पर देवी भजन
हिन्दी देबी गीत 8 – शरण तुम्हारे |
लाया हूँ माता धार आँसुओ शरण तुम्हारे |
भक्त पड़ा है आज माता चरन तुम्हारे |
निर्मल भाव माता निर्मल है काया |
चरणों मे तेरे मैंने सिर को झुकाया |
तेरे सिवा माता रहु मै किसके सहारे |
लाया हूँ माता धार आँसुओ शरण तुम्हारे |
जग ने ठुकराया मुझको किसी ने न पुकारा |
तेरे शरण मे मिला मुझको आज है सहारा |
बीच भवर मे नईया मेरी लगाओ अब तो किनारे |
लाया हूँ माता धार आँसुओ शरण तुम्हारे |
करू कितनी गलती आखिर बेटा माँ मै तेरा |
कर दो माफ गलती मेरी बेटा माँ मै तेरा |
छोदूंगा कभी ना माँ मै कभी पाँव तुम्हारे |
लाया हूँ माता धार आँसुओ शरण तुम्हारे |
जब भी पुकारा तुमको माता गले है लगाया |
रोता आया जब भी माता तूने है मुझे हँसाया |
भारती है बेटा माता हरदम है तुझको पुकारे |
लाया हूँ माता धार आँसुओ शरण तुम्हारे |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286
व्हात्सप्प्स -8210525557 -
ममतामई प्रकृति
यह प्रकृति तू रोष दिखाती है
पर क्या करेगी उस ममता का
जो तुझसे खुद लड़ जाती है
तूने सोचा दुख दूं उन सबको
जो दिन-प्रतिदिन तेरा नाश करें
पर हे ममता की मूरत तू तो
खुद से हारी जाती है
तूने सोचा कोरोना फैला करके
इस मानव जाति का नाश करूं
जब सारा प्रदूषण बंद हुआ
अब तू ही सुगंध फैलाती है
तू देख भले नादान हूं मैं
भले नीति से अनजान हूं मैं
मां बुरा नहीं कर सकती है
इस बात का भी प्रमाण हूं मैं
तो है प्रकृति तू क्यों घबराती है
देख झूठ ना कहना जानू मैं
मेरी चोट पे तू डर जाती है
मैं कैसे कठोर कहूं तुझको
तू प्रेम अमृत बरसाती है
जो तपती धूप से बिलख पड़ी
तो शीतल जल बरसाती है
यह मेरी ही नादानी है
जो दया ना तेरी देख रही
तेरी हर जड़ एक संजीवनी है
मैं कूड़ा समझ कर फेंक रही
पर हे प्रकृति तू राह दिखाती है
कोई दर्द अगर दे देती है
तो मलहम भी तू लगाती है
तू बिल्कुल मेरी मां जैसी है
कभी कान मरोड़ कर क्रोध करें
तो कभी गोद में ले समझ आती है -
सुख अनुभव
रोज-रोज के झंझट में
पिस्ता था तो क्या खुश था तू
दो घड़ी अपनों का साथ मिला
अब कर अनुभव सुख किसने है
यह रोज कि भागा दौड़ी में
या कुछ पल की उस जोड़ी में
उस जग की द्वेष चिंगारी में
या बच्चों की किलकारी में
जीवन जीता तू लाचारी में
अब सोच तेरा मन किसमें है
जब झंझट तेरे पल्ले थी
तब अपनों से चिढ़ जाता था
कभी कोप करता था माता पर
कभी पिता को आंख दिखाता था
तू बैठ प्रेम की छाया में
फिर से सुख प्रेम का अनुभव कर
वह स्नेह आंचल में लेंगे तुझे
बन बालक यौवन को खोकर -
पुत्र मोह
पुत्र मोह में लिपटे प्राण-पखेरू भी उड़ चले आज
बलि वेदी पर राजा दशरथ भी चढ़ गए आजकैसी विपदा आन पड़ी अवध नगरी पर
जो फली- फूली थी उपवन सी अकस्मात ही उजड़ गई
प्रेम की फूली डाल अचानक ही लद कर टूट गईहाय कैकेई! तेरी कैसी मति गई थी मारी
कोमल हृदय वाले राम की जो तूने
ऐसी स्थिति कर डालीक्यूँ ना फटा ह्रदय तेरा जब तूने ऐसे वरदान लिये
राम चले वनवास और राजा दशरथ के प्राण गएआँख खुली जब भरत ने कैकेई को त्याग दिया
राम की चरण पादुका लेकर खुद भी वनवास कियाजय हो भरत लाल की ऐसा भाई सबको मिले सदा
राज्य से परम भ्रात भक्ति संसार में जीवित रहे सदा -
सुबह मेरी
बेहया रात से गले मिल कर
आई है सुबह मेरी
कि धूप छांव का आलम
लाई है सुबह मेरी
मेरी गज़ल भी थी जो लिखी थी एक दिन मैने
उसकी इबादत में
उस गज़ल के कुछ पन्ने समेट लाई है सुबह मेरी
किसे पुकार रहा है ये मेरा जिगर
बस एक फ़िक्र और भी लाई है सुबह मेरी
अदावतें निभा कर था जो खो ही गया
उसे ढूँढ कर लाई है सुबह मेरी
राहे सुखन में मिट गया तगाफुल उसका
हमनवाई का बहाना लाई है सुबह मेरी -
कुछ तो खेल है
कुछ तो खेल है
हाथ की लकीरों का
हाथ ना आया
लगाया हाथ जिसमेंन पाने की तमन्ना थी
मिला हरदम वही मुझको
जुस्तजू जिसकी थी हमने
उसी से हाथ धो बैठेजिंदगी बन गई वीरान
और पथरा गई आंखें
अरमां पड़ गए ठंडे
सपने हो गए सपनेकिसी ने था कहा हमसे
सब है खेल किस्मत का
हमें भी आ गया ऐतबार
लड़े जब हम मुक़द्दर सेमंजिल है नहीं आसान
बहुत मशरूफ है राहें
कोसते कुछ है किस्मत को
कुछ बनाते हैं खुद राहेंना हारेंगे कभी हिम्मत
मुश्किलें कैसी भी आएं
जीत जाएंगे हम दुनिया
दो कदम रोज चल करकेदिखा देंगे सभी को हम
आख़िर क्या थे क्या हैं हम
बुलंद है हौसले अपने
मुकद्दर भी बदल देंगेलोग जो हंसते हैं हम पे
नजर झुक जाएगी उनकी
कुछ तो बात है हममें
वो भी मान जाएंगे -
पलायन करते बेचारे लोग 😢😢😢
बेबस होकर वो लौटे हैं
श्रमवीर कहलाने वाले हैं
जिस घर में आराम से लेटे हो
उसकी नींव बनाने वाले हैं😢
घर मंदिर और कुआं पोखर
निज श्रम से उसने सींचे हैं
उसकी मेहनत का फल देखो
उपवन और बाग बगीचे हैं
अश्रु सहित नयन देखो 😢😢
उम्मीद से तुम्हें निहार रहे
मदद करो कुछ मदद करो 🙏
बेबस होकर पुकार रहे
भूखे पेटों के मंजर ने
शहर उसे भिजवाया था
आज वही मंजर देखो
वापस गांव ले आया है… -
ख्वाहिशें
ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे
मौसम के बदलते मिजाज़
से फसलें जैसे
क्या बोया और क्या पाया
सपनों और हक़ीकत में
कोई वास्ता न हो जैसे
ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे
कल तक जो हरी भरी
मुस्कुरा रही थी
आज खुद अपनी नज़र
लग गई हो जैसे
ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे
ये मंज़र देख के हाथ खड़े
कर लिए थे हमने ,
पर ये दिल, फिर उन्ही ख्वाहिशों
को मुकम्मल करने की
तहरीक दे रहा हो जैसे ……
तहरीक- प्रेरणा/Motivation
अर्चना की रचना “सिर्फ लफ्ज़ नहीं एहसास”
-
मेरे जाने के बाद
मेरे जाने के बाद
——————–
बिखेर दिया है खुद को
इस कदर मैंने …..
कि ….
मैं ना मिल पाऊं गर तुम्हे …तो ढूंढ लेना मुझे ….
मेरे गीतों और रचनाओं में।
तुम पर प्रेम छलकाती….
कभी नाराज़गी दिखाती….
किसी ना किसी रूप में मिल ही जाऊंगी।कभी उदासी घेर ले
तो शायद मै गुदगुदा दू रचनाओं में छुप कर हंसा दू तुम्हे!बेशक तुम गढ़ लेना कुछ किस्से मनचाहे…..
पर पढ़ लेना मेरा प्रेम जिससे तुम खुद को सरोबोर पाओगे।
भीग जाना चाहो गर…
अचानक हुई प्रेम वर्षा से
तो ढूंढ लेना मुझे फिर
मेरी रचनाओं में।कभी अधूरी सी कोई कहानी सी मै…. कभी पूर्ण पाओगे,
रचनाएं पढ़ कर जब गले लगाओगे।मै हमेशा काव्य सुगंध बन महकती रहूंगी
तुम्हारे आसपास..
अपनी रचनाओं में
रजनीगंधा के पुष्प की तरह
तुम जब भी मेरी महक से मदहोश होना चाहो…
तो फिर ढूंढ लेना मुझे!मै तुम्हे फिर वहीं मिलूंगी..
अपने गीतों और रचनाओं मै
गाती गुनगुनाती
तुम पर प्यार लुटाती।निमिषा सिंघल
-
केवट
समुंदर पार कर दो ए केवट प्रिय मेरे
पार कर दो गंगा
प्रिय लक्ष्मण भ्रात है साथ
और है जनक दुलारी साथ
जाना है चित्रकूट मुझको
करा दो गंगा पार
हे केवट करा दो गंगा पार
ना पार कराऊँ मैं गंगा
हे प्रभु! जी मुझको छमा करो
आपके चरणों की कथा सुनी है
मैनें कई-कई बार
इन चरणों की रज से
पाषण बनी सुन्दर नारी
यदि मेरी यह नैय्या भी
बन गई सुन्दर नारी
तो मैं कित जाऊंगा क्या खाऊँगा
हे रघुनाथ!
इस कारण से हे रघुनंदन
आपके चरण पखार
उस चरणामृत को पीकर मैं
कराऊँगा गंगा पार
सुन रघुनंदन केवट के वचन
मन्द मन्द मुस्काये
केवट कितना बड़ भागी
सबको तारन वाले को नदिया पार कराये
अपनी मुद्रिका उतार के सीता केवट को देंतीं हैं
केवट कहता है श्री राम से:-
क्या कोई नाई किसी नाई से कुछ है लेता
तुम भी केवट मैं भी केवट
भला कैसे लूँ खेवाई
जब आऊँ मैं तेरे घाट तो भव सागर पार करा देना मुझको
जैसे मैनें गंगा पार करायी मैं ना लूँगा खेवाई। -
ग़ज़ल। सभी को मौत के डर ने ही..
आदाब
सभी को मौत के डर ने ही ज़िंदा रक्खा है
ख़ुदाया फिर भी ये इंसाँ इसी से डरता हैहमारी साँस भी चलती उसी की मर्ज़ी से ही
जहाँ में पत्ता भी उसकी रज़ा से हिलता हैहमेशा आस का दीपक जला के रखना तुम
अँधेरे रास्ते है, तू सफ़र पे निकला हैवो सारे चल पड़े थे, तिश्नगी लिये अपनी
किसी ने कह दिया सहरा में कोई दरिया हैज़मी पे अजनबी भी अजनबी नहीं होता
बुलंदी पे जो है अक्सर अकेला होता हैये ज़िंदगी है, इसे नासमझ सा बन के जी
जहाँ में कौन है जो ज़िंदगी को समझा हैरहे न एक भी शिकवा न ‘आरज़ू’ कोई
बता दे ज़िंदगी को ये कि ज़िंदगी क्या हैआरज़ू
-
हर सदी इश्क की
हर सदी इश्क की
———————
समुद्र पार रेतीले मैदान में उगते गुलाब,
नन्ही कोपलों से निकलते हरे पत्र, और नमकीन हवा में घुलती मिठास अनुराग की।
मानसिक विरोधाभास के बीच पनपता स्नेह
उम्र की सीमा से परे दो प्रेमी युगल।
अपना ही आसमां ढूंढते हैं।
स्वर्ण आभा युक्त,
सूरत से दमकते तेज पुंज
और स्वर लहरी का अनूठा संगम
जन्म देता है नेह के बंधन को।
शायद
पूर्वजन्म की अपूर्णता खींच लाई हो इस ओर।
रसीली मिठास,दूरियों से अनजान
अनूठे अंदाज से परिपूर्ण,
ये लाल इश्क।
निमिषा सिंघल -
विनती
कहर कोरोना का छाया है
देखो आज संसार में।
त्राहि त्राहि कर रही है दुनिया
आओ प्रभु अवतार में।।
रक्तबीज का रक्त धरा पर
टपक दैत्य बन उत्पात किया।
कतरा कतरा पीकर काली
दुष्ट दैत्य का घात किया।।
वही वक्त है आया माता
जग की रक्षा फिर आज करो।
‘विनयचंद ‘की विनती माता
सुनो जगत में फिर फिर राज करो।। -
चितचोर सावन
ए साजन आम के बाग में,
झूला लगा दे।
अब की बरस
सावन के मधुर गीत सुना दे।
रिमझिम बारिश में
भीगे है मेरा तन बदन
मोरनी की भाँति
मै बलखाउँ
ऐसा एक धून बजा दे।
चारो तरफ के रुत है
प्रेम – ए- इकरार के
सतरंगी रंग मन को लूभाए
इन्ही रंगो से मुझे सजा दे।
जब से सावन आए
आए दिन बहार के
प्रेम रस की मै प्यासी
बस एक घूँट पिला दे।
नींद चुराए
चितचोर सावन के महीना
इन झूलो की कतारो में
मेरा भी झूला लगा दे।