औरत खिलौना नहीं उसमें भी जान होती है…. औरत होती है ममता की मूर्ति प्यार की उपमा हजारों फूलों की खुशबू विद्यमान होती है उसमें…. औरत पैरों की जूती नहीं सिर का ताज है… तपती […]

कोई तकलीफ नहीं है हमको उजालों से बस ज़िन्दगी के अँधेरे से डर लगता है रोज़ ही रूठना रहता था तुम्हारा भी बिछड़ने में गम ना होगा चलो अच्छा है तुम भी कहां रहे हो […]

मेरे दर्द सिर्फ मेरे हैं इन्हें अपनी आँखों का पता क्यों दूँ तरसे और बरसे इन्हें अपने दर्दों से वो लगाव क्यों दूँ मेरा अंधापन मेरी आँखों को चुभता है पर अपने लिए फैसलों पर […]

भोजपुरी देशभक्ति गीत-भारत देशवा हमार | जहा बहे गंगा निर्मल धार | उहे बाटे भारत देशवा हमार | उत्तर हिमालय गगनवा के चूमे | दखिन सगरवा लहरवा मे झूमे | लहकल खेतवा बहे पूरवा बयार […]

कविता- कौन जानता था | कर्मवीर होंगे बेचैन अपने घर कौन जानता था | राह निहारेंगे कब ताला खुलेगा कौन जानता था | आयेगा ऐसा भी एकदिन देखेगी दुनिया दुर्दिन | इसान खुली हवा को […]

वो बैठते हैं आजकल मेरे रकीबों के साथ जिनके हाथों में रहता था मेरा हाँथ बुरा नहीं लगता है मुझे पर अच्छा भी नहीं प्रतीत होता है क्या करूँ दिल दिल ही दिल में रोता […]

उनके मस्त अदाओं के जाल में,हम गिरफ्तार हो गए। जुस्तजू के मेले में हमारी मुकद्दर, हम से ही खफ़ा हो गए।। वफा से बे -वफा बनेंगे वो , हमने ऐसा सोचा ही कब था । […]

तीन मित्र थे अपने वफादारी के परम मिसाल। मरणासन्न होकर मैं तीनों से पूछा एक सवाल।। कौन चलोगे मेरे साथ किसको पास सदा मैं पाऊँगा? बहुत दिया मैं साथ नहीं अब तेरा साथ निभाऊँगा। बोला […]

ये जो लोग मेरी मौत पर आज चर्चा फरमा रहे हैं ऊपर से अफ़सोस जदा हैं पर अन्दर से सिर्फ एक रस्म निभा रहे हैं मैं क्यों मरा कैसे मरा क्या रहा कारन मरने का […]

गलतफहमियों के बीज अविश्वास से पनपते हैं अधसुनी बातों को लोग पूरा सच समझते हैं बड़े तो हो चले हैं हम अपनी नजरों में प्रज्ञा ! ना जाने लोग क्यों मुझे अभी छोटा ही समझते […]

बेकद्रों की महफ़िल मे कद्रदान ढूंढ रहा हूँ अनजान लोगो मे अपनी पहचान ढूंढ रहा हूँ अंधेरा करने वालों से रौशनी की मांग कर रहा हूँ काली हुई रात मे रोशन जहान ढूढ रहा हूँ […]

आदाब मुफ़लिसों को क्यों मिली है जिंदगी बारहा ये सोचती है जिंदगी ज़िंदगी जैसे मिली ख़ैरात में ऐसे उनको देखती है जिंदगी इस जहाँ में बुज़दिलों के वास्ते बस क़ज़ा है, तीरगी है ज़िन्दगी ख़ुदकुशी […]

ग़ज़ल दौलत नहीं, ये अपना संसार माँगती हैं ये बेटियाँ तो हमसे, बस प्यार माँगती हैं दरबार में ख़ुदा के जब भी की हैं दुआएँ, माँ बाप की ही खुशियाँ हर बार माँगती हैं माँ […]

कानून के रक्षक भी अब भक्षक हो गए , करें भरोसा आखिर किस पर? खाकी वर्दी भी गुलाम बन हुक्म बजाती सफेदपोश की। काले कोट के जेब बड़े हो गए, करें भरोसा आखिर किस पर? […]

चौसर खेलने वाले भी जग में पूजे जाते हैं राज़-काज,अनुज,पत्नी और प्रजा सर्वस्व दांव पर रखकर भी एक भी बाजी ना जीते सर्वस्व हार ही जाते हैं समय की विडम्बना देखो ऐसे लोग भी धर्मराज […]

रिश्तों की डोर मे मजबूरियों का यह क्या सिला है, अपनों के बीच यह कैसा नफ़रत का फूल खिला है गुलिस्तां महकता था कभी जिनकी किलकारियों से, खुश्बू बिखरती थी कभी बागीचे की फुलवारियों से […]

नाकाम मोहब्बत की निशानी ताज महल ज़रूरी है जो लोगो को ये बतलाये के मोहब्बत का कीमती होना नहीं बल्कि दिलों का वाबस्ता होना ज़रूरी है दे कर संगमरमर की कब्रगाह कोई दुनिया को ये […]

जिसे सर झुकाने की आदत नहीं है उसे हर बशर से मोहब्बत नहीं है दुःखा दिल किसी का ख़ुशी मैं मनाऊँ मेरे दिल की ऐसी तो फ़ितरत नहीं है वो अपने किए पर पशेमां बहुत […]

कागज का टुकड़ा बना पतंग उड़ना चाहे नील गगन में। हम पंछी का जीवन क्योंकर डाल रहे हो पिंजर बन्ध में।। पतंड उड़ाने के शौकीनों मुझको भी तो उड़ने दो। मेरे भी हैं कुछ अरमान […]

उनकी बगिया की बहार देखती ही रह गई कली जो खिली थी धूप की तपन में मुरझा गई …… अंजुमन में कितने मशरूफ थे तेरी स्मृतियों के अवशेष बातें बहुत-सी हुईं रह गए बस वचन […]

प्रेम, जिसमें मैं ही मैं हो हम न हो डूब गए हो इतने के उबरने का साहस न हो वो प्रेम नहीं एक आदत है उसकी जो एक दिन छूट जाएगी फिर से जीने की […]

लॉक डाउन २.० चौदह अप्रैल दो हज़ार बीस, माननीय प्रधान मंत्री जी की स्पीच । देश के नाम संबोधन, पहुंचा हर जन तक । कई बड़ी और अहम बातें, क्या क्या कहा, हम हैं बताते […]

लिये छः ऋतुयें आये नया साल, हर ऋतु गुजरे मेरी संग मां के, त्यौहार मेरे न तुमसे, संग मां के, मेहनत मेरी ,उगले सोना मेरी माँ, समझता मैं खिलखिलाना मां का, सिसकता मैं देख सुखी […]

कभी मायूस होती हूँ कभी बेचैन होती हूँ मगर तेरी मोहब्बत में डूबी दिन-रैन होती हूँ, कभी बातें कभी यादें कभी तन्हाई में तुझको भुलाकर सब ओ मेरी जान सिर्फ तुझमें ही खोती हूँ । […]

कुछ अल्फाज बचा रखे थे उनके लिए वह आए और बिना बोले चले गए। कुछ नजरें बचा रखी थी उनके लिए वह आए और बिना देखे चले गए। कुछ गीत सजा रखे थे उनके लिए […]

मेरे बच्चे साथ निभाओगे गर गुस्सा हो जाऊं किसी बात पर आकर मुझे मनाओगे ? इन सिकुड़न वाले हाथों को क्या प्यार से तुम सहलाओगे? बूढ़ा हूं कुछ , सुनने की शक्ति भी क्षीण हुई […]

ओ मेरे शिव, मैं सच में तुमसे प्यार कर बैठी सबने कहा , क्या मिलेगा मुझे उस योगी के संग जिसका कोई आवास नहीं वो फिरता रहता है बंजारों सा जिसका कोई एक स्थान नहीं […]

कभी कभी सोचती हूँ अगर इस पल मेरी साँसें थम जाये और इश्वर मुझसे ये कहने आये मांगो जो माँगना हो कोई एक अधूरी इच्छा जो अभी इस पल पूरी हो जाये मैं सोच में […]

आज पिघली-पिघली है देखो पथ्थर की दीवार बन्धु,सखा,माँ-बाप सभी छूट रहे हैं विडम्बना देखो समय की कुछ बिछड़ रहे तो कुछ रिश्ते जुड़ रहे हैं जिस आँगन में खेली- कूदी वही छोड़ कर जाती है […]

गजल -जीत लेंगे कोरोना | जीत लेंगे कोरोना तेरा नाम मिटा देंगे | मुरझाए चेहरों पर मुस्कान खिला देंगे | पहले न जान पाये अब जान चुके तुझे | तू पहचान हमे तुझको पानी पीला […]

कविता -सुरक्षित वही है होता | कोरोना देखे ना जात जान सभी लेता | रहता ज़ो घर मे सुरक्षित वही है होता | पहने न मुख बाहर मास्क खतरा बहुत | बचके रहना सभी आदमी […]

भोजपूरी गीत – लुका जाला केहु | कोरोना से जेतना जब डरा जाला केहु | बच जाला जब घरवा लुका जाला केहु | एकरा ज़ोर देखवला मे भलाई नईखे | जान आपन बचवला जग हँसाई […]

अंबेडकर जयंती कि हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाये कविता – भीम हमारा अभिमान | किया निर्माण जो भारत का सविंधान | सत सत नमन भीम हमारा अभिमान | दिलाया अधिकार सबको जिसने समान| बाबा भीम को […]

कविता – तो बच जाने दो | बढ़ गया लोक डाउन तो बढ जाने दो | जान है जरूरी माल से तो बच जाने दो | इतने दिन बीते कुछ दिन और गुजारेंगे | घर […]

यह समय फिर ना मिले —————————- “दौड़ भाग की जिंदगी सुकून छीन ले गई, हम दौड़ते ही रह गए जिंदगी पीछे रह गई।” वक्त फिर भी ना रुका, सबको ठहरा सा दिया। भागी दौड़ी सी […]

आज कुछ बदला- बदला मिज़ाज है दिल भी बेताब है ——————– सिसकियाँ भी खामोश हैं लफ्जों में मिठास है ———————- गूंजती जा रही है गलियों में शहनाई ——‐‐‐————– बींद के इन्तज़ार में बीती जा रही […]

हिंदी कविता व्यंग्य शीर्षक-: हाय रे चीन (कोरोना और चाइना ) हाय रे चीन चैन लिया तूने सबका छीन कुछ भी न बचा तुझसे ऐसा जो न खाया तूने बीन बीन हाय तू कैसा शौक़ीन […]

दो मित्रों का जोड़ा भैया अमर इतिहास बनाया था। एक थे ब्राह्मण एक मुस्लिम थे रिश्ता खास बनाया था।। जंग- ए-आजादी में कूद गए थे राम -लखन की जोड़ी बनकर। “सरफरोशी की तमन्ना “गाए फिरते […]

एहसास की पावन चौकी पर भाव की मूरत बैठी है ———————- शब्द अलंकार से सुसज्जित हैं और कल्पना की आराधना होती है ———————— इसी को कहते हैं काव्य सौन्दर्य जो हर कवि की आत्मा कहलाती […]

आँचल में अपने छुपाकर वो, दुनियाँ की बुराइयों से बचाती है सारे जहान की खुशियाँ अपने दामन में लिपटाकर हमपर लुटाती है वही आँचल लाज़ बचाता है, और उसी से पसीना सुखाती है स्त्री की […]

महामारी से मुक्ति प्रार्थना —————————— हे दुख भंजन दयानिधे कृपासिंधु . .. भव पार करें। करो कृपा हम दीनजनों पर, दूर करो सब कष्ट धरा पर। करे तपस्या सब जन घर पर, बंद पड़े प्रभु […]

मापदंड ———- कुंठित हृदय से उपजती विषाक्त बेल, लील जाती है कितनी ही हरी कोपले। उनको कुचलती कोपलों से निकली, दर्दनाक चीखों का शोर दब जाता है फाइलों तले। उस हत्या के साथ पूरे परिवार […]

ग़ज़ल ——- दूरियां ,नज़दीकियां, खुशफहमियां तेरे साथ में, हम मिले ना थे कभी पर बह गए जज्बात में। 1. मौसमै अंदाज था कुछ खास था उस रात में, थे गिरफ्त में इश्क के उस बेवजह […]