भोजपुरी चइता लोक गीत 2- काला तिलवा ये रामा| (श्रिंगार रस) गोरी-2 गलिया मे काला -2 तिलवा ये रामा| हथवा मे शोभेला सोना के कगनवा ये रामा | गोरी-2 गलिया मे काला -2 तिलवा ये […]
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भोजपुरी चइता लोक गीत 2- काला तिलवा ये रामा| (श्रिंगार रस) गोरी-2 गलिया मे काला -2 तिलवा ये रामा| हथवा मे शोभेला सोना के कगनवा ये रामा | गोरी-2 गलिया मे काला -2 तिलवा ये […]
भोजपुरी चइता लोक गीत 1-बितले फगुनवा ये सइया बितले फगुनवा ये सइया , गऊआ लागल कटनिया के ज़ोर | कईसे होइहे गेंहू के कटनिया मोर | गऊआ लागल कटनिया के ज़ोर | सुना-2 मोर परदेशी […]
आहिस्ता-आहिस्ता रखना कदम इन नाजुक पगडंडियों में वक्त सो रहा है रात के सन्नाटे में चांदनी रात के आँचल तले खोया है कांच के सपनों की दुनिया में तुम्हारे क़दमों की इक आहट से कहीं […]
कभी बनकर कोई ख़्वाब मेरी निंदिया तू चुरा लेता कभी बनकर हवा का झोंका आँचल को तू खींच लेता बता तो सही तू है कौन कभी बारिश की बूँद बनकर कोमल बदन को भिगो देता […]
हिमालय के उतुंग शिखर से सिंह ने भरी ऊँची दहाड़ है तूफान क्या टकराएगा उससे जो स्वयं फौलादी पहाड़ है सारे जहाँ में अब भगवा ही लहराएगा माटी का लाल अब तिरंगा फहराएगा सौगंध इस […]
ढो रही हूं एक बोझ सिर से लेकर पांव तक खोज रही हूं एक दिशा धूप से मैं छांव तक मीलों सा लंबा सफर जिंदगी का है मेरी फिर भी रुकी है वहीं जहां शुरू […]
ऊर्जा पुंज ————- तुम ऊर्जा पुंज …..और तुम से बहता अविरल तेज! बन जाता है मेरे लिए प्रेरणा .. सृजन की। मेरे हृदय में बहने लगती है धारा….. जो जा मिलती है तुमसे….. और उपजने […]
आहुति ————— तुम्हारे साथ रागात्मक संबंध…. और वीणा के तार सा झंकृत मेरा हृदय….. तुम्हारा मेरा अद्भुत अनुराग …. और अंखियों की लुकाछिपी….. सुकून देती है। एक तारतम्य हमारे बीच….. और प्रेम की पंखुड़ियों से […]
इतना भी आसान नहीं होता पुरुष होना। जिम्मेदारियों का बोझ उठाकर हरदम मुस्कुराना होता है। एक पुरुष को सशक्त होना पड़ता है अपने परिवार के लिए। वह समस्याओं बाधाओं की शिकायत नहीं करता बल्कि खुद […]
मौन संवाद ईश्वर से ———————– हे ईश्वर! मूर्त रूप में विद्यमान प्रेम हो तुम। अस्पृश्य शब्द है ही नहीं शब्द कोष में तुम्हारे ! बेहद आलोकिक अनुभूति है तुम्हारे संसर्ग में, इस रंग बदलते आसमान […]
होली खेले रघुवीर बरसाने में ______________________ होली खेले मोसे रघुवीर बरसाने में, जाऊँ मैं जाऊँ कित ओर बरसाने में। रंग, अबीर हवा में उड़ायो, रंग मल मल के मुझे सतायो, हाथ पकड़ दिया मोड़ बरसाने […]
पलाश के फूल ——————- लाल बिछौना बनी बनस्थली जब अग्निदेव उतर आए। अपना अदभुत रूप दिखाने, पलाश के वृक्ष में आ समाए। झड़े जहां शीतल अंगारे, बाल चंद्रमा से छाए। धरती को सिंदूर दिया, बसंत […]
बेरंग सी गोली को रंगीन बनाना है रूठे हुए अपनों को दोबारा मनाना है डेविड अकरम और गुरमीत लेकर सबको साथ सुजीत होगी पिचकारी से बौछार आज मनाएंगे त्योहार। गुजिया पापड़ और मठरी से स्वाद […]
बीती रात मैं तेरी यादों के आगोश में जाने लगी विरह की वेदना से मन को तड़पाने लगी आँसुओ से भीगा लतपत तन मेरा ओर मन मेरा सेज की सिलवट और नर्मी रूह को जलाने […]
नवगीत आजकल है खुब चलन में झूठ का ये क्रेज़ कैसा ? रंग सच का हो अगर तो रंग से परहेज़ कैसा ? धर्म की पिचकारियों में द्वेष का भर रंग ताने । जाति की […]
नारी तेरे मान को आखिर जग क्या लिखेगा? कलम भी तू है काॅपी भी तू है। सरस शब्द कविता भी तू है।। तू वाणी विद्या बद्धि की सरिता सम किताब है तू। तू हीं शारदे […]
वक्त कटता जा रहा है दीये की लौ भी धीमी हो गई आंखों में नींद नहीं चैन नहीं हम क्या करें यही सोंचते रहे ओर सुबह हो गई
भोजपुरी होली 13 -करे ले ठिठोली रे कान्हा | करेले ठीठोली रे कान्हा कदमिया पर चढ़ी के | रंगवा नहवावे रे सखिया गगरिया मे भरी के | बड़ा रे ई बाउर लागे जमुना के पनिया […]
भोजपुरी होली 12- बड़ा डर लागे केरोनवा से | रंगवा लगाइब न अबिरवा लगाइब | बड़ा डर लागे केरोनवा से | अबकी फगुनवा खेलब ना होली ये भौजी | बड़ा डर लागे केरोनवा से | […]
गुमनाम सा हो गया है मेरा आशियां इन दिनों क्यूँ कि मैं तो बैठी थी तेरा घर बनाने में
चलो होली मनाते हैं सड़कों से पत्थर हटा कुछ गुलाल उड़ाते हैं चलो होली मनाते हैं। महरूम है बरसों से कोई बस्ती होली में वहां जाकर गुझिया पापड़ बांट आते हैं चलो होली मनाते हैं […]
प्रीत की डोरी बांधें चली आई, तुझसे श्याम होली खेलन चली आई। बांसुरी तुम्हारी मुझको है प्यारी, दीवानी राधे गोपियां सारी। बांसुरी के स्वर लहरी में छुपा लो, कान्हा मुझे होठों से लगा लो। पिया […]
देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।। कण-कण में नया उल्लास है। आज धरती बनी रे खास है।। लाओ रंगों की भर-भर झोली। सब मिलकर हम खलेंगे होली।। देखो आई सुहानी होली। कैसी […]
जवानों ने खाई है, सीने पर अपने गोली ना भागे दिखाकर पीठ , प्राणों की लगा दी बोली आये दिन खेलते रहते, वो खून के रंग संग होली तब जाकर देश में बन पाती, रंगो […]
आहट पाकर फागुन की, पेड़ों ने ओढ़नी बासंती ओढ़ी धमाल फाग संग चंग बजाने, निकली मस्तानों की टोली हल्की फुल्की ठंड के साथ, मौसम करे आंख मिचौली धूम मचाओ, रंग उड़ाओ, क्यों कि आ गया […]
हिन्दी गजल- निभाते चले गए | हम अपनी वफा निभाते चले गए | वो मुझसे दूरिया बढ़ाते चले गए | शामिल था उनकी खुशी ओ गम | मेरे वक्त वो मुंह चिढ़ाते चले गए | […]
हिन्दी गीत- देख लेना | कीमत मेरी मोहब्बत तुम समझ न पाओगे | याद मे मेरी तड़पते रह जाओगे देख लेना | जिंदगी मुझसा दोस्त शामिल न कर पाओगे| तन्हाइयों ढूंढते रह जाओगे मुझे देख […]
हिन्दी गीत- तेरे रूप का सिंगार करूँ | तेरे रूप का सिंगार करूँ | तुझपे दिल निसार करूँ | आंखो मे काजल लगा दूँ | पांवो मे पायल पहना दूँ | तेरी बांहों दिल बहार […]
बजे ढोलक,बजे नगमे मचे हुड़दंग होली में रंगी धरती, रंगा अंबर उड़े है रंग होली में । कोई गुब्बारे से खेले तो कोई मारे पिचकारी पड़ी है पान की छीटें चढ़े हैं भंग होली में। […]
गम के आँसू सदा हीं बरसता रहा। मेरा जीवन खुशी को तरसता रहा।। मैंने मांगा था कोई ना सोने का घर प्यार की झोपड़ी को तरसता रहा। ना तुम्हारा रहा ना हमारा रहा गेन्द-सा दिल […]
1. कदम छोटा हे या बड़ा हर मोड़ पर इंतज़ार है ज़िंदगी को – चुन लिए जाने का 2. राम लिखा सुनहरा इतिहास ने तुम्हारा नाम ; तुमने – गढ़ ली सीता सोने की ! […]
1. पहली ही सीढ़ी पर एहसास हुआ, सर पर खुला आसमां हो भले ही अब – पैर तले ज़मीन नहीं 2. चाहे-अनचाहे उग आए हैं संबंधों में अपरिचय के विंध्याचल ; हम भी जो पा […]
आप सब की नज़र को आख़िर , क्या हुआ है शहर को आख़िर . नफरतों की लिए चिंगारी , लोग दौड़े कहर को आख़िर . चाँदनी चौक की वह दिल्ली , आज भूखी गदर को […]
फिर आज गुलालों के खातिर बदरंग बनेगे होली में । अंग अंग पर रंग सजा हुड़दंग करेगे होली में ।। न जानेगे कितने रंग नये चेहरों पर खिल जायेगे । न जाने कितने टूटेंगे कितने […]
मिले हैं विरासत में आंसू मुझे पता न चला कि दोस्त कैसे बने उनका सैलाब है आशियां मेरा हंसी से नाता न मेरा रहा। जब पहुंचे मंज़िल से आगे कभी रहे याद दोस्ती सहारा बनी […]
सुनते आए हैं – अपनों का पर्व है होली मेरे आंगन जली होलिका मैं ही पंडित, मैं ही पूजा मैं ही कुंकुम, अक्षत औ” रॊली; सूनी गलियां, सूने गलियारे, सूने हैं आंगन सारे कौन संग […]
भोजपुरी होली 11 – सईया अईले ना भवनवा | होली खेले तरसे मोर मनवा ना | सइयाँ अइले ना भवनवा | सबकर लऊटी अइले सजनवा ना | उड़ेला गुलाल अब गगनवा | छोड़ा नोकरिया सइया […]
“सारे जहाँ से अच्छा “जो कह दे वो इकबाल कहाँ से लाऊँ? “हिन्दोस्तां हमारा ” कह दे वो इकबाल कहाँ से लाऊँ? अपने देश को अपना कहो तो आखिर क्या घट जाएगा? ध्वजा तिरंगा के […]
क्यों एक बेटी की विदाई तक ही एक पिता उसका जवाबदार है ? क्यों किस्मत के सहारे छोड़ कर उसको कोई न ज़िम्मेदार है? क्यों घर बैठे एक निकम्मे लड़के पर वंश का दामोदर है […]
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