गजल- कोरोना कहर माना की कोरोना कहर बड़ा मगर आया नहीं | सारा जहाँ दहसत मे हिन्द मगर छाया नही | फानूस बनके करता हिफाजत वजीरे आलम | ठहर गया वो लोकडाउन से कुछ कर […]

भोजपुरी देबी गीत 4 – डरावेला कोरोनवा | डरावेला कोरोनवा डोले सारा जग संसार हो | भगावा मारी त्रिशूलवा इहे माई विनती हमार हो | चिनवा से आइल माई वाइरस कोरोनवा | नमवा से काँपे […]

भोजपुरी धोबी गीत – भगा देता बैरी केरौना | नाक करे सुकुर पुकुर बुखार ना उतरौना | बलम हो भगा देता बैरी केरौना | धीरज धरा धनिया बहरी पाँव ना उठौना | मोर सुनरो हो […]

कविता – भारत जानता है | कोरोना हो या सेना दुशमन लड़ना भारत जनता है | एटम हो वाइरस दुशमन लड़ना भारत जानता है | प्रधान मंत्री मोदी जी ने जो कहा वो करेंगे हम […]

कोरोना बुरा है पास बुलाये कोई पास जाना बुरा है | बुलाकर दे दे तुमको कोरोना बुरा है | पास जाना अगर हाथ न मिलाना मगर गले मिल गये लग जाये कोरोना बुरा है| मिलना […]

आज स्कूल नही जाना माँ आज तो छुट्टी मना लेने दो कल सर दर्द का बहाना काम न आया आज पेट दर्द आजमा लेने दो घर के जैसे मस्ती कहाँ स्कूलों में बसती इसकी सच्चाई […]

पतझर के मौसम उस पे बसंत बहार आसमान से बरसे सावन के फुहार। कहीं मन जले कहीं ख्वाबो के आशियाना जले यही मौसम में होता है अपनो से अपनो का प्यार।। बिन पायल के पग […]

इश्क की गोद में जा बैठी जो कातिल था उसी को मीत बना बैठी। बुझ गई थी बहुत पहले ही क्यूँ आज दिल की आग जला बैठी। वो ख्व़ाब था किसी की नींदों का क्यूँ […]

एक पन्ना और जुड़ गया जीवन के अध्याय में चिरंजीव चिरस्थायी का जो आशीर्वाद दिया था माँ ने आज धुंधला प्रतीत हो रहा है अकस्मात एक प्रारब्ध बेला पर विचलित कर देने वाली घटना स्मरण […]

एक दौर वो भी गुजरा है! जब हम कागज और कलम लेकर सोते थे। यादों में पल-पल भीगा करती थीं पलकें , अभिव्यक्ति के शब्द सुनहरे होते थे। ना दूर कभी जाने की कसमें खाई […]

वो आते तो हैं मेरे आशियाने में.. मुझी से मिलने मगर जताते नहीं हैं बस हम समझ जाते हैं.. नज़रे झुकाए रहते हैं और दिल लगाने की बात करते हैं.. कितने नादान हैं चुपके से […]

तुमने कह तो दिया मगर दिल को तसल्ली ना हुई शब तो हो गई पर मैं ना सोई गुजार दी ज़िन्दगी तेरी आरज़ू करने के बाद किसी और को क्यूँ देखूँ तुम्हें देखने के बाद […]

आज की सच्ची घटना पर आधारित हिंदी कविता शीर्षक :- भरोसा आज मेरी क्यारी में बैठा परिंदा मुझे देख छुप गया मैं रोज़ उसको दाना डालता हूँ फिर भी वो डरा सहमा अपने पंखो के […]

तुम उस दिन जो हाँ कर देते तो किसी को नया जीवन देते पर तुम्हारी ज्यादा सतर्क रहने की आदत ने देखो किसी का मनोबल दबा दिया कोई पढना चाहता था तुम्हारी मदत से आगे […]

कहर ढा रही प्रकृति हर पल, कितनी आहें समेटे भीतर, हर दरिंदगी, हर हत्या का चुकता आज हिसाब यही है, एक तरफ पलड़े में आहें, एक तरफ संपूर्ण विश्व है, इतनी बड़ी कायनात पर एक […]

उस रात का फ़ितूर अब भी है तेरे होठों से पिया था जी भरकर, जाम-ए-उल्फ़त का नशा अब भी है । बहुत खलतीं हैं तुमसे ये अब दूरियाँ क़रीब आने की वजह अब भी है […]

तूफानों को आने दो मज़बूत दरख्तों की औकात पता चल जाती है पेड़ जितना बड़ा और पुराना हो उसके गिरने की आवाज़ दूर तलक़ आती है सींचा हो जिन्हें प्यार से उन्हें यूं बेजान देख […]

सोचती हूँ, क्या इस बार तुम्हारे आने पर पहले सा आलिंगन कर पाऊँगी या तुम्हें इतने दिनों बाद देख ख़ुशी से झूम जाउंगी चेहरे पे मुस्कान तो होगी पर क्या वो सामान्य होगी तुम्हें चाय […]

भोजपुरी चइता गीत 4 – आज केरोनवा भगाइब ये रामा | आज केरोनवा हम भगाइब ये रामा | भारत देशवा | सबकर जनवा हम बचाइब ये रामा| भारत देशवा | चिनवा से आइल ई पापी […]

मैने बहुत सोचा अब नहीं मिलूंगी तुमसे, नहीं कहूंगी कुछ भी। कोई फरमाइश नहीं करूंगी कन अंखियों से देखूंगी भी नहीं। पर इस दिल का क्या करू, तुम्हारी आहट, पदचाप महसूस करते ही, धड़कने बहकने […]

चिरायु,चिरकाल तक रहने वाला चिरंतन है प्रेम, निष्काम, निः संदेह निश्चल है प्रेम। पुनरागमन, पुनर्जन्म ,पुनर्मिलन है प्रेम। संस्कार, संभव संयोग है प्रेम, लावण्य, माधुर्य, कोमार्य सा प्रेम। निर्वाक,निर्बोध,निर्विकल्प है प्रेम, यामिनी,मंदाकिनी, ज्योत्सना सा प्रेम। […]

मै और तुम ————- अतीत के फफोले, मरहम तुम। अध्याय दुख के सहारा तुम। तपस्या उम्रभर की, वरदान तुम। बैचेनिया इस दिल की, राहत तुम। दिल में फैली स्याही, लेखनी तुम। अक्षुष्ण मौन इस दिल […]

सोचता हूँ अक्सर कि तुमको देखे बिना पता नहीं कितनी सदियाँ गुजर गयीं हों जैसे और तुम अभी भी बुन रहे होगे मेरी दुनिया से परे मेरे लिए कुछ और इल्ज़ाम कि जब अचानक किसी […]

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मैं जानती हूँ कि तुम भी मुझे ही गलत ठहराओगे कुछ कहने से कोई फायदा नहीं—- मैं कह भी दूँ मैं सही थी पर तुम कहाँ मानोगे— तुमने जो जिम्मेदारी दी थी उसी को पूरा […]

हर दर्द का इलाज है जहान में पर अपनो के दिए ज़ख्म कहाँ भरते हैं टूट जाते हैं जो रिश्ते तो फिर कहाँ जुड़ते हैं कैसी कश्मकश है जिंदगी में जो प्रिय होते वही बिछड़ते […]

तुम्हारी चादर में लिपटे कुछ शक के दाग थे। तुम मेरी मंज़िल और तुम्ही हमराज थे। क्या थे दिन और क्या लम्हात थे। कुछ अंजाम और कुछ आगाज़ थे। इल्जाम लगा किस्मत और हालात पर […]

जरा देखूं तो सही तुम्हारे दिल में उतर कर दिल है अभी या दिल है ही नहीं दिल है तो उसमें पत्थर हैं या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं एहसास है या है ही […]

आज फिर से खिल जाने दो रात महकती हुई साँसों से भीगी तेरी हँसी की ख़नक उतर जाने दो एक बार फिर से रूह तक जैसे गूँज उठती हैं वादियाँ पर्वत से उतरती किसी अलबेली […]

बादल गरज़ यूं रहे थे के बरस ही जायेंगे बिज़ली कड़क के हमको तेरी याद दिला रही कुछ बर्फ के टुकड़े पड़े है सड़क पर—– बूँद तो बरस रही हैं स्नेहिल झीसियाँ थी पड़ रही […]

अब जीवन का अवकाश रहेगा कल से मेरे पास रहेगा __________क्षुब्ध होकर अपंग से तेरे बोल के टेसू अब ना सूखेगे मेरे आँगन में ______कुसुम का बंदन ना महकेगा प्राणवायु के दामन में गलियारों की […]

हम मुर्दा हैं या जीवित तुम्हें कोई फर्क नहीं तुम्हें इस बात का कोई इल्म नहीं के हम किस हाल में रहते हैं सब दिल का खेल है तुम्हें मेरे जीवन की भी खबर नहीं […]

वह छोटी सी मुलाक़ात विचरती रहती है अक्सर स्मृतियों में मेरी । जब सिमट आए थे तुम मेरी पलकों के दायरे में, सकुचाते हुए, छोटे-छोटे कदमों से… मुस्कुराती हुई कोई बहार उतर आई हो किसी […]

प्रारब्ध ——— सदियों से ठंडी, बुझी, चूल्हे की राख में कुछ सुगबुगाहट है। राख़ में दबी चिंगारियों से चिंतित हूं मैं! अपने गीले- सूखे मन की अस्थियों का पिंजर… दबा आयी थी मैं उस गिरदाब […]

भोजपुरी गजल- ठीक नईखे | दिल लगाके दिल तोड़ल केहु के ठीक नईखे | प्रीत लगाके मुंह मोड़ल केहु से ठीक नईखे | कईली केतना प्यार तोहसे का काही हम | छोड़ हमरा दिल दुशमन […]

भोजपुरी चइता लोक गीत -3- बयार पुरवा ये रामा लगे लागल आम के टिकोरवा ये रामा | चइत मासे | बहे लागल बयार पुरवा ये रामा | चइत मासे | मसूरी मटर खूब गदराई गइली […]

देखो रितुराज ने अपने हाथों कैसे प्रकृति का सिंगार किया। रंग बिरंगे फूलों से कुदरत का रूप सँवार दिया।। हार गले में गेन्दा के और कर कंगन कचनार दिया। बेली चमेली जूही के बालों में […]

मैं कुछ भूलता नहीं ,मुझे सब याद रहता है अजी, अपनों से मिला गम, कहाँ भरता है सुना है, वख्त हर ज़ख़्म का इलाज है पर कभी-२ कम्बख्त वख्त भी कहाँ गुज़रता है मैं अब […]

तुम्हारे घर आने की बड़ी बेसब्री थी मगर जब वापस आ रही थी तो कोई मेरे कदम पीछे को खींच रहा था वो मेरा दिल था कदम भारी थे रास्ता बहुत कठिन और दिल में […]

जो भी मेरी कविता पढ़ता था पूछता था एक मुस्कान- सी आती थी चेहरे पर आज उन्होंने भी पढ़ा:- और पूछा:-‘ किसके लिये लिखती हो? मेरा ज़िस्म ऊपर से नीचे तक कांप उठा… ज़ज्बात जागे […]

जो भी मेरी कविता पढ़ता था पूछता था एक मुस्कान- सी आती थी चेहरे पर आज उन्होंने भी पढ़ा:- और पूछा:-‘ किसके लिये लिखती हो? मेरा ज़िस्म ऊपर से नीचे तक कांप उठा… ज़ज्बात जागे […]

कोमल मन और आत्मा से आवाज़ दे रही है आहटे कुछ पन्ने किताबों के पलट कर वक़्त आया है मिलने…… सिसकियां खामोश होकर गुनगुना रही हैं कल के किस्से और तन्हाइयां बटोर लाई हैं तमाम […]