आओ इस कल्पना की दुनिया में खो जाये हम सब एक हो जाये ये जात पात सब मिट जाये आओ सब अपने दुःख सुख में एक हो जाये आओ इस कल्पना की दुनिया में खो […]

धृतराष्ट्र की महत्वाकांक्षाओं ने ही बीज बोया महाभारत का धृतराष्ट्र आंखों से अंधे थे उन्होंने दुर्योधन के व्यक्तित्व को अंधा बना दिया इतिहास धृतराष्ट्र को ही महाभारत का जिम्मेदार ठहराता है गलत नहीं है क्योंकि […]

मैं आज जो निकली राहों पर यह राह मुझे बात सुनाती है कहे शर्म तो आती ना होगी मेरा घ्रणा से नाम बुलाती है कहे घूम रही चौराहों पे कोई वजह है या आवारा है […]

जब तुझसे मेरी पहली मुलाकात होगी बिना बोले ही आंखों से सब बात होगी बिताकर कुछ पल जिंदगी के साथ तेरे फिर से हमारे प्यार की शुरुआत होगी तेरे चेहरे की मुस्कुराहट से दिल को […]

खुदा के फरिश्ते के रूप में तुम आती हो होठों पर मीठी सी मुस्कान लाती हो अपनी जिजीविषा और कर्मनिष्ठा से टूटी आशा को जगा जाती हो रोगियों में रोगों से लड़ने की क्षमता बता […]

जब भी देखता हूँ मैं इस रोटी के खुरचन को तो माँ आ जाती है यादों में। तवे पे रोटियाँ बनाती जब जला -जला के रोटियाँ की सौंधी सुगन्ध फैल जाती वातों में।। तोड़ -तोड़ […]

सफलता सफलता नहीं है कोई वस्तु सफलता है दृढ संकल्प की अग्नि सफलता को अगर पाना है तो सफलता के पीछे दौड़ लगाओ कमर कसकर समय के संग बढ़ना होगा आगे ही आगे बस आगे […]

माँ से बोली एक बेबस बेटी:- अविस्मरणीय है कोख तेरी माँ जिसमें स्फुटित हुई हूँ मैं । तुझे किसने बता दिया है माँ बेटा नहीं बेटी हूँ मैं । तभी से तू बेसुध है तेरे […]

अक्सर कहा करता था मैं माँ जाऊँगा परदेश को। “”ना ना वश कर”कहती माँ को मत कलेश दो।। दृढ़ संकल्प होकर ऐसा एक दिन निश्चय कर डाला। आजिज होकर मान गई और कहने तू सुन […]

सुनो ना मां! मत घबरा मेरे आने से मुकम्मल हो जाएंगे दोनों एक नए बहाने से तेरे पंख मेरी उड़ान होगी जमाने में अपनी नई पहचान होगी तेरी परछाई बन तेरे ख्वाबों को चुन लूंगी […]

गूंगी लड़की ————— रात्रि के अंधकार में, नहा जाती वह दूधिया प्रकाश से। जब उसकी कहानी के पसंदीदा किरदार उसको घेरे खड़े होते। बेबाकी से वो दिखा देती अपने दिल में उठे ज्वारभाटो के निशान […]

किन्नर ——– व्यंगात्मक हंसी में भी प्रेम तलाशते, अभिशप्त जीवन जीने को मजबूर यह संवेदनाओ से भरे हृदय अपनी दो जून की रोटी के लिए आपके घर खुशियों के मौकों पर भर भर झोली दुआएं […]

किन्नर ——– व्यंगात्मक हंसी में भी प्रेम तलाशते, अभिशप्त जीवन जीने को मजबूर यह संवेदनाओ से भरे हृदय अपनी दो जून की रोटी के लिए आपके घर खुशियों के मौकों पर भर भर झोली दुआएं […]

♥️♥️mother’s day special♥️♥️ जो नज़रो से परख ले वो माँ होती है । दर्द को दिल में जो रख ले वो माँ होती है । कर कोई काम तू बुरा खुदा से चाहे हो छुपा […]

मोर मनके परेवना ★★★★★★★ कोयली कस कुहकत जीवरा के मैना न | महकत अमरैय्या गोंदा तय फूले जोहि || मोर मन म बसे हिरदे के परेवना ओ | संगी घलो हर झूमत नजरे नजर म […]

“माँ तू माँ है” योगेश ध्रुव”भीम” ************************ माँ तू जननी है, तूने मुझे, कोख में, पाला, नौ माह तक, जन्म दी, इस वसुंधरा का, दर्शन कराई, जननी हो न, खुद दुख सहकर, सुख का भोग […]

“इम्तिहा” योगेश ध्रुव “भीम” “जिंदगी की डोर खिंचते चल पड़े हम, मंजिल की तलाश पैरो पर छाले पड़े” “बिलखते हुए सवाल लिए पापी पेट का, दर-दर भटकते लेकिन हल ढूढ़ते ढूढ़ते” “चिराग जलाते हुए जीने […]

मधुशाला खोल के भारत ने हरिवंश राय बच्चन की रचना को चरितार्थ किया मंदिर-मस्जिद बैर कराते मेल कराती मधुशाला फैली है चारों ओर महामारी फिर भी खुली हुई है मधुशाला पूरा भारत है लाक डाउन […]

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा बहुत प्यारा है नाक के नीचे बेटी मरती ऐंसा हिन्दुस्तान हमारा है जोर शोर में लगे है नेता जी बेटी को बचाने में नेता जी के कार्यक्षेत्र में दम […]

आज उनकी गली में उजाले होंगे जमीं पर पर बिखरे अनगिनत सितारे होंगे पैरों तले होंगे आसमां कितने? नजरों में जन्नत के नजारे होंगे कितनी मसरूफ है जिंदगी अपनी उनके जहां में सुकून के आलम […]

चलो साथी फिर से गांव चलते है कुछ बचें होंगे पेड़ गर वहां छांव ढूंढते हैं आम भी तो आए होंगे,जामुन भी इतराए होंगे बचपन के फिर से वो पल ढूंढते हैं चलो साथी फिर […]

मैं आज की नारी हूँ न अबला न बेचारी हूँ कोई विशिष्ठ स्थान न मिले चलता है फिर भी आत्म सम्मान बना रहा ये कामना दिल रखता है न ही खेला कभी women कार्ड मुश्किलें […]

भीष्म पितामह श्रेष्ठ योद्धा भारत का मान बढ़ाते हैं अपनी प्रतिज्ञा नहीं तोड़ते रण में लड़ने जाते हैं हस्तिनापुर की सीमाएं सुरक्षित करने का प्रण ह्रदय में लेकर वह प्रिय पाण्डवों के सामने उपस्थित हो […]

तेरे हाथ की हथेली पर मैं क्या उपहार की भेंट करूँ काबिल नहीं हूं इतना मैं आज जो तुझको कुछ भेंट करूँ। देने को बस मेरे पास में तुझको प्यार और सम्मान है प्रार्थना है […]

वायरस ——– वायरस हो क्या! जो लहू में संक्रमण की तरह फैलते ही जा रहे हो। या फिर परिमल जिस की सुगंध खींच लेती है अपनी ओर। या व्योम में अंतर्ध्यान शिव जो जग को […]

दर्द ए दिल कि दवा चाहिए तु बस आ,कुछ ना चाहिए खामियाजा महोब्बत का भुगत रहा हूँ तुझसे दुर होने का हौसला चाहिए तुम बीन जिना,अब मुश्किल सा हो गया है अब तु ही बता,और […]

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हुए जब। भक्त शिरोमणि हनुमान हुए तब ।। बन मातु पिता के आज्ञाकारी श्रीराम अयोध्या छोड़ गए। श्री राम के सेवा ख़ातिर हनुमत निज मातु पिता भी छोड़ गए।। ऐसे स्वामी सेवक […]

धन्य हो अन्नदाता इस वैश्विक कोरोना महामारी में लड़ते किसान सुबह शाम खेत में बन्द पड़े सब कमा काज दबे देखो कोरोना का राज देश के मेहनती किसान है देखो बहुत ही परेशान नहीं है […]

एक सैनिक की यही दास्तां है वैसे तो सदा वह गुमनाम होता है हो जाए शहीद बस तभी नाम होता है देश की रक्षा कर चिर ख़ामोशी में सो जाता है फिर कौन याद करता […]

चंद मुक्तके – विजय हमारी है | प्रभु की माया होगा कोरोना का सफाया | इसी मंसा मोदी ने लोक डाउन लगाया | चहुं ओर मचाया हाहाकार छुपा दुशमन | धीरे धीरे सबने मिलकर है […]

कविता- जीत लेंगे | अबतक तो जीते है हम आगे भी जीत लेंगे| विजय भारत नाम इतिहास पन्नो लिख लेंगे | लड़ी है लड़ाइया कितनी हार ना मानी हमने | छुपे दुश्मन कोरोना को हम […]

आज फिर गूँज उठा कश्मीर सुन कर ये खबर दिल सहम गया और घबरा कर हाथ रिमोट पर गया खबर ऐसी थी की दिल गया चीर हैडलाइन थी आज फिर गूँज उठा कश्मीर फ़ोन उठा […]

अब से मैं प्यार लिखूंगी तो तुमको लिखा करूंगी वो शामें मेरी ,जो तुम पर उधार हैं , उन पर ख्वाब लिखूंगी तो तुमको लिखा करूंगी वो गलियाँ जिन पर तेरे वापस आने के निशान […]

सावन के एक एक बूंद जो गिरा मेरे होंठो पे। कैसे बयां करू अपनी दास्तां इन सुर्ख होंठो से।। उन्हें क्या पता कब चढी सोलहवां सावन मुझ पे। आ कर एक मर्तबा देख तो ले […]

दायरे ____ **** दायरे थे ही नहीं मानव की लालसा के! हर तरफ फैलाव था पैर पसारे। जीव सीमट रहे थे दायरो में…. लुप्त और लुप्तप्राय होते जीव सिर्फ किताबो में छपी तस्वीर बनते जा […]

मुझे अच्छा नहीं लगता यूँ मलिन वस्त्रों में लिपटे रहना। यूँ अपनी स्मृति खोकर बेसुध पड़े रहना मुझे अच्छा नहीं लगता। गीतमाला सजाकर चंद्र को ताकते रहना मुझे अच्छा नहीं लगता। अब बिन वजह गगन […]

एक दोपहर ऐसी भी:’ मैं कुछ उधड़-बुन में थी अपनी आकांक्षाओं की निर्मम हत्या करके अपने दंश भरे पलंग पर लेटी… कुछ आराम पाने की अभिलाषा हृदय में लेकर… तभी तुम्हारी स्मृतियों के चक्रव्यू ने […]

=राही पथ से न भटक=योगेश ध्रुव”भीम” ××××××××××××××× अडिग मन राह शांत हो, निश्छल जीवन लेकर चल, चाहे भटके मन: चंचल, जीवन नाथ के तू चल, पथ के राही न भटक ऐसे पथ में तू चल […]

मजदूर हूँ मैं मजबूर नहीं। नहीं कभी चिंता अपन रोटी की सबका घर मैं भरना चाहूँ। चिलचिलाती धूपों ने जलाया, कभी बारिश के पानी ने भींगाया। कपकपाती ठंढी से भी लड़ना चाहूँ।। क्योंकि मजदूर हूँ […]

“नारी” प्रकृति सा कोमल तुम, मेरु समान दृढ़ता लिए, नीर सा निर्मल हो तुम, नारी तुम न हारी हो || अन्धकार की दीपक, निश्च्छलता की मूरत, सोये मन की आशा हो, नारी तुम न हारी […]

“हमन परबुधिया नोएन गा” ************************** जांगर पेरत पसीना चुचवावत, भुइय्या के छाती म अन उगावत, चटनी बासी के खवैय्या आवन न, येहर धान के कटोरा हावे गा, हमन परबुधिया नोएन रे, सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा […]

भोजपुरी गीत = बलमुआ ना अईले | धक धक धड़के मोर छतिया | हे सखी मोर बलमुआ ना अईले | नींदिया ना आवे सारी रतिया | हे सखी मोर बलमुआ ना अईले | लोगवा कहेला […]

इन तीखी नजरो से देखा ना करो दिल बहक जाएगा उम्र तो अठारह के पार है जवानी में फिसल जाएगा फिर न कहना ये तुमने क्या कर दिया दिल के बहक जाने में हूइ खता […]

मुझे ताउम्र ये मलाल रहेगा तुम क्यों आये थे मेरी ज़िन्दगी में ये सवाल रहेगा जो सबक सिखा गए तुम वो बहुत गहरा है चलो प्यार गहरा न सही पर उसका हासिल सुनहरा है गैरों […]

भोजपुरी देवी:- कवन मैया गोर बाड़ी गीत कवन मैया गोर बाड़ी हमका पता ना कवन मैया गोर बाड़ी। निमिया के डाल पर झूला पर बा हमार मैया झूललबाड़ी हमका पता बा। सोने की थाली में […]

कोरोना योद्धा सभी वंदनीय हैं। पर ना जाने क्यों कुछ अराजकता तो इन पर पत्थर फेंकते हैं, जिन पर फूलों की वर्षा करनी चाहिए । हर पल तत्पर होकर इस महामारी में अपनी देशभक्ति निभा […]