अनोखा रिश्ता

दो मित्रों का जोड़ा भैया
अमर इतिहास बनाया था।
एक थे ब्राह्मण एक मुस्लिम थे
रिश्ता खास बनाया था।।
जंग- ए-आजादी में कूद गए थे
राम -लखन की जोड़ी बनकर।
“सरफरोशी की तमन्ना “गाए फिरते
गली-गली और घर-घर चलकर।।
क्रांति का पथ प्रशस्त किया
और मातृभूमि को वास बनाया था।। दो मित्रों ़़़़़़।।
हृदय एक थे दोनों के
बेशक़ तन थे अलग- अलग।
राम लखन संबोधन करते
जब भी होते अलग- अलग।
एक साथ हीं झूल गए थे
बली रज्जु खास बनाया था।। दो मित्रों ़़़।।
अमर अनोखा ऐतिहासिक रिश्ता
आखिर जग क्यों भूल रहा।
“सह न ववतु़़”का भाव सदा
भारतभूमि पे मूल रहा।।
‘विनयचंद ‘ जयचंद बनो ना
देश को दास बनाया था।। दो मित्रों ़़़़़।।

Related Articles

जंगे आज़ादी (आजादी की ७०वी वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर राष्ट्र को समर्पित)

वर्ष सैकड़ों बीत गये, आज़ादी हमको मिली नहीं लाखों शहीद कुर्बान हुए, आज़ादी हमको मिली नहीं भारत जननी स्वर्ण भूमि पर, बर्बर अत्याचार हुये माता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

New Report

Close