इतना हो कि

इतना हो कि

🌹इतना हो कि 🌹

इतना हो कि
मेरी यादें तुम मिटा दोगे
ये बात खुद को मै समझा सकूँ ||

इतना हो कि
तुम बिन मैं जीवन को अपने
पूरी तरह से कभी पा न सकूँ ||

पत्थर की दीवार जैसा
मन-जिगर बनाए तुम्हारी आरजू से
तुमने ही सौंपी फूलमाला तहसनहस कर सकूँ

इतना हो कि
सुख के बदले दुःख भुला न सकूँ
बेवफाई से और बड़ा कोई दुःख न पाऊँ

इतना हो कि
किसी का किसी के लिए रुकता नहीं
ये अपने आप को मैं समझा सकूँ

—–चारुशील माने (चारागर)
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17 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 16, 2019, 5:42 pm

    उत्तम

  2. nitu kandera - November 16, 2019, 5:44 pm

    Nice

  3. राही अंजाना - November 16, 2019, 5:48 pm

    वाह

  4. देवेश साखरे 'देव' - November 16, 2019, 8:52 pm

    सुन्दर

  5. NIMISHA SINGHAL - November 17, 2019, 12:51 am

    Wah

  6. Poonam singh - November 17, 2019, 5:40 pm

    Good

  7. Charusheel Mane @ Charushil @ Charagar - November 17, 2019, 8:16 pm

    Thanks

  8. Abhishek kumar - November 23, 2019, 10:31 pm

    अतिउत्तम

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