Author: Charusheel Mane @ Charushil @ Charagar

  • इतना हो कि

    इतना हो कि

    🌹इतना हो कि 🌹

    इतना हो कि
    मेरी यादें तुम मिटा दोगे
    ये बात खुद को मै समझा सकूँ ||

    इतना हो कि
    तुम बिन मैं जीवन को अपने
    पूरी तरह से कभी पा न सकूँ ||

    पत्थर की दीवार जैसा
    मन-जिगर बनाए तुम्हारी आरजू से
    तुमने ही सौंपी फूलमाला तहसनहस कर सकूँ

    इतना हो कि
    सुख के बदले दुःख भुला न सकूँ
    बेवफाई से और बड़ा कोई दुःख न पाऊँ

    इतना हो कि
    किसी का किसी के लिए रुकता नहीं
    ये अपने आप को मैं समझा सकूँ

    —–चारुशील माने (चारागर)
    🌹

  • Gulam ग़ुलाम

    Gulam ग़ुलाम

    ©©ग़ुलाम ©©
    15 अगस्त को हर साल आज़ाद हो जाता हूँ
    फ़िर दिमाख से सोचना भी मेरे हाथ नहीं

    हर पल हर तरफ़ ग़ुलामी में मर जाता हूँ
    खाने का अनाज और दवा भी मेरे हाथ नहीं

    जश्न ग़ैरों के ख़ुद ही मनाता आया हूँ
    खुद के जश्न भी मुझे बरबाद करें सहीं

    षडयंत्र में पाबन्द आज़ाद कहलाता आया हूँ
    मुँह कान आँखें पर संवेदना मेरी नहीं

    ग़ुलाम हूँ पथ्थर और पशु को पूजता हूँ
    हर चीज़ का भक्त हूँ बस् विद्या का भक्त नहीं

    ग़ुलाम हूँ इसीलिए इंसान होने से डरता हूँ
    ग़ुलामी में समाधान, है ग़ुलामों के हाथ सही

    योजनाएं मेरी नहीं, कार्यालय मंत्रालय मेरे नहीं
    मेरी आरज़ू मेरी तरक्की भी मेरे हाथ नहीं

    अनाज और मिट्टी में घौला है ज़हर इसतरह
    बिना अस्पताल की सेहती कोई शाम नहीं

    तेरी हड्डियाँ भी कहीं और बहा दी जायेगी
    ऐ “चारागर” तेरी लाश भी यहाँ आज़ाद नहीं
    – चारुशील माने (चारागर)

  • जो भी मिली

    जो भी मिली

    जो भी मिली रातें ग़ज़ब रोशन
    वो बेहया सब बेनक़ाब निकली

    उजलें इमलों में है ख़ुशी मतलबी
    ख़ामोश वफ़ाई बेचिराग निकली

    कोई जुदा हुई तोडा दम किसीने
    हर आरज़ू कमनसीब निकली

    लगी मेहंदी वो हाथों की लकीरों को
    आँखों से ख़ुशी बेहिसाब निकली

    बन के आशिक़ भरी ज़ेबों को मिले
    बाजारेग़म की अर्थी तन्हा निकली

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