उम्मीद

उम्मीद की किरण जगमग आई है,
आज फिर याद मुझे तेरी ओर लाई है।

जमाने की तपिश,
जिम्मेदारियों का बोझ..
सहते -सहते दबी राख सुगबुगाई है।

तपती मनस्थली पर स्नेह की बूंदे छलकी,
सूखी धरती पर बदली छाई है।
फिर एक उम्मीद मुझे तेरी और लाई है।

झंझावात तूफानों से घिरी थी जिंदगी,
प्रेम रस में नहाने आई है।
आज फिर उम्मीद मुझे तेरी ओर लाई है।

दिखावटी, अनमनी, अजनबी सी थी कुछ,
जिंदगी फिर से मुस्कुराई है।
फिर एक उम्मीद मुझे तेरी ओर लाई है।

इत्तेफाकन ही सही,रूह रूह से टकराई है,
नैनो को नैनो ने दिल की बोली समझाई है।
फिर एक उम्मीद मुझे तेरी और लाई है।

निमिषा सिंघल


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

मुस्कुराना

वह बेटी बन कर आई है

चिंता से चिता तक

उदास खिलौना : बाल कबिता

9 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - April 9, 2020, 6:59 am

    Nice

  2. Dhruv kumar - April 9, 2020, 10:02 am

    Nyc

  3. Priya Choudhary - April 9, 2020, 11:45 am

    Nice

  4. Pragya Shukla - April 9, 2020, 11:49 am

    Good

  5. Abhishek kumar - May 10, 2020, 10:48 pm

    गुड

Leave a Reply