एक दौर वो भी गुजरा है

एक दौर वो भी गुजरा है!
जब हम कागज और कलम
लेकर सोते थे।

यादों में पल-पल भीगा
करती थीं पलकें ,
अभिव्यक्ति के शब्द
सुनहरे होते थे।

ना दूर कभी जाने की
कसमें खाई थीं
मिलने के अक्सर वादे
होते रहते थे।

कोई यूं ही कवि
नहीं बनता है यह सच है
हम भी तो पहले
कितना हंसते रहते थे।


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15 Comments

  1. Master sahab - March 25, 2020, 9:21 am

    Nice

  2. Abhishek kumar - March 25, 2020, 9:22 am

    सुन्दर स्वाभविक

  3. Anita Mishra - March 25, 2020, 10:44 am

    Good

  4. Kanchan Dwivedi - March 25, 2020, 1:33 pm

    Nice

  5. Antariksha Saha - March 25, 2020, 11:27 pm

    Es pathar dil samaj main achi kavita.padh hasna kabhi na sochna

  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - March 26, 2020, 6:47 am

    Nice

  7. Dhruv kumar - March 26, 2020, 10:35 am

    Nyv

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